पेट की चर्बी कम करने का डाइट चार्ट: पूरे दिन का प्लान, शाकाहारी और नॉन वेज
छोटा जवाब
पेट की चर्बी किसी खास खाने से नहीं जाती, कुल कैलोरी थोड़ी कम रखने से जाती है. लेकिन कैलोरी कम करने का तरीका ही तय करता है कि आप यह काम दो हफ्ते चला पाएंगे या छह महीने.
इस लेख का चार्ट तीन चीज़ों पर टिका है. पहला, हर खाने में प्रोटीन का एक हिस्सा तय होगा, क्योंकि प्रोटीन पेट भरा रखता है और वजन घटते समय मांसपेशियों को बचाता है. दूसरा, अनाज बंद नहीं होगा, बस नापा जाएगा. तीसरा, पीने की चीज़ों से मिलने वाली छिपी कैलोरी हटेगी.
नीचे पूरे दिन का चार्ट है, शाकाहारी और नॉन वेज दोनों तरह से. इसे जैसा है वैसा अपनाने की ज़रूरत नहीं, अपनी रसोई के हिसाब से बदलिए, ढांचा वही रहने दीजिए.
पेट की चर्बी बाकी चर्बी से अलग क्यों लगती है
शरीर चर्बी को चुनकर नहीं घटाता. कैलोरी कम पड़ने पर वह पूरे शरीर से थोड़ी थोड़ी घटती है, और यह क्रम शरीर तय करता है, हम नहीं. ज़्यादातर भारतीयों में पेट और कमर उस क्रम में आखिर की तरफ आते हैं, इसीलिए चेहरा और हाथ पहले पतले दिखते हैं और पेट बाद में.
दूसरी बात, पेट पर दो तरह की चर्बी होती है. एक त्वचा के नीचे, जो पकड़ में आ जाती है. दूसरी अंगों के आसपास अंदर, और सेहत के लिहाज़ से यही ज़्यादा मायने रखती है. अंदर वाली चर्बी अक्सर पहले घटती है, इसलिए आइने में फर्क दिखने से पहले ही अंदर सुधार शुरू हो जाता है.
तीसरी बात, हर बढ़ा हुआ पेट चर्बी नहीं होता. कब्ज़, गैस और सूजन से भी पेट भारी और बाहर निकला दिखता है, और वह अलग समस्या है जो फाइबर और पानी बढ़ाने से कुछ दिनों में बदल जाती है. इसीलिए नीचे के चार्ट में सब्ज़ी और सलाद की मात्रा जान बूझकर ज़्यादा रखी गई है. नींद, तनाव और हलचल का हिस्सा समझने के लिए पेट की चर्बी कम कैसे करें पढ़ना उपयोगी रहेगा.
चार्ट लागू करने से पहले तीन चीज़ें तय कीजिए
पहली, कैलोरी की मोटी सीमा. ज़्यादातर भारतीय महिलाओं के लिए 1400 से 1600 और पुरुषों के लिए 1600 से 1900 कैलोरी का दायरा व्यावहारिक माना जाता है, बशर्ते काम बैठकर करने वाला हो. यह पत्थर की लकीर नहीं है, वजन, लंबाई, उम्र और हलचल से बदलता है. यह हिसाब कैसे बनता है, इसके लिए कैलोरी डेफिसिट क्या होता है ज़रूरी पढ़ाई है.
दूसरी, प्रोटीन का लक्ष्य. हर मुख्य खाने में एक प्रोटीन वाला हिस्सा हो, यानी दाल, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना या चिकन. भारतीय थाली की सबसे बड़ी कमी यही है: रोटी चावल भरपूर, प्रोटीन नाम मात्र. इसे ठीक करने से भूख अपने आप कम लगती है.
तीसरी, खाने के समय. चार तय समय रखिए: नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम का हल्का कुछ, और रात का खाना. जो लोग नाश्ता छोड़कर दोपहर तक चाय बिस्कुट पर चलते हैं, वे शाम को हिसाब से ज़्यादा खा लेते हैं.
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पूरे दिन का डाइट चार्ट, शाकाहारी
सुबह उठने पर. एक या दो गिलास सादा पानी. चाय या कॉफी लेनी है तो चीनी आधी कर दीजिए, और अगले दो हफ्तों में खत्म. यह एक बदलाव अकेला दिन की 100 से 150 कैलोरी बचा देता है.
नाश्ता, सुबह 8 से 9. तीन विकल्प, अपनी रसोई के हिसाब से चुनिए. एक, दो अंडे या एक कटोरी उबले चने के साथ एक रोटी. दो, मूंग दाल के दो चीले, साथ में दही की कटोरी. तीन, एक कटोरी दलिया या ओट्स दूध में, ऊपर से कुछ बादाम. पोहा और उपमा भी ठीक हैं, लेकिन उनमें प्रोटीन जोड़ना ज़रूरी है, इसलिए साथ में दही या मूंगफली रखिए. और विकल्प वजन घटाने के लिए नाश्ता में दिए गए हैं.
दोपहर का खाना, 1 से 2 बजे. थाली का ढांचा याद रखिए: आधी थाली सब्ज़ी और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन, एक चौथाई अनाज. यानी दो रोटी या एक कटोरी चावल, एक कटोरी दाल या राजमा या छोले, एक कटोरी दही, हरी सब्ज़ी, और कच्चा सलाद जितना खा सकें. घी या तेल एक चम्मच तक ठीक है, उसे दुश्मन मानने की ज़रूरत नहीं.
शाम, 5 से 6 बजे. यही समय है जब ज़्यादातर प्लान टूटते हैं, इसलिए यहां कुछ तय होना चाहिए वरना बिस्कुट और नमकीन अपने आप आ जाते हैं. विकल्प: एक कटोरी भुना चना, या मुरमुरे और मूंगफली, या एक फल के साथ कुछ बादाम, या दही का एक कप.
रात का खाना, 8 से 9 बजे. दोपहर से हल्का, लेकिन प्रोटीन कम नहीं. एक या दो रोटी, एक कटोरी दाल या पनीर या सोया की सब्ज़ी, भरपूर सब्ज़ी, और सलाद. रात में चावल पर पाबंदी की ज़रूरत नहीं, अगर मात्रा एक कटोरी रहे.
दिन भर पानी. आठ से दस गिलास एक ठीक लक्ष्य है. चीनी वाले पेय, पैकेट के जूस और कोल्ड ड्रिंक इस चार्ट से बाहर हैं, क्योंकि वे पेट भरे बिना कैलोरी देते हैं.
वही चार्ट, नॉन वेज खाने वालों के लिए
ढांचा नहीं बदलता, प्रोटीन का स्रोत बदलता है, और आमतौर पर यह आसान हो जाता है.
नाश्ते में दो उबले अंडे, साथ में एक रोटी. दोपहर में चिकन के दो तीन टुकड़े या मछली का एक टुकड़ा, ग्रेवी में तेल कम, साथ में दो रोटी, दही और सब्ज़ी. रात में हल्का रखिए, जैसे अंडे की सब्ज़ी के साथ एक रोटी और भरपूर सलाद.
दो बातें ध्यान में रखिए. पहली, तलने से बचिए, क्योंकि तला हुआ चिकन और भुनी ग्रेवी में कैलोरी दुगनी हो जाती है जबकि प्रोटीन उतना ही रहता है. भूनना या कम तेल की ग्रेवी बेहतर है. दूसरी, बाहर का चिकन ज़्यादातर तेल और मलाई वाली ग्रेवी में आता है, इसलिए उसे हफ्ते में एक बार तक सीमित रखना व्यावहारिक रहता है.