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कैलोरी डेफिसिट क्या होता है? आसान भाषा में पूरी समझ, भारतीय थाली के उदाहरण के साथ

SuperLiving Expert Team·

कैलोरी डेफिसिट क्या होता है? आसान भाषा में पूरी समझ

सबसे पहले सीधा जवाब

कैलोरी डेफिसिट का मतलब बहुत आसान है। आपका शरीर एक दिन में सांस लेने, सोचने, चलने-फिरने और काम करने में जितनी ऊर्जा खर्च करता है, अगर खाने से आप उससे थोड़ी कम ऊर्जा ले रहे हैं, तो आप कैलोरी डेफिसिट में हैं। यह कमी पूरी करने के लिए शरीर अपनी जमा चर्बी इस्तेमाल करता है, और यही वजन कम होने का असली तरीका है। इसके अलावा वजन घटाने का कोई और रास्ता नहीं है, न कोई खास चाय, न कोई खास पाउडर, न कोई एक चमत्कारी खाना।

अच्छी बात यह है कि डेफिसिट बनाने के लिए न भूखा रहना पड़ता है, न रोटी-चावल छोड़ना पड़ता है, और न ही महंगी चीज़ें खरीदनी पड़ती हैं। ज़रूरत सिर्फ़ यह समझने की है कि आपका अपना नंबर क्या है, उससे कितना कम खाना ठीक रहेगा, और भारतीय थाली में वह कमी असल में कैसी दिखती है। यही पूरी गाइड में समझाया गया है।

ज़रूरी बात: यह लेख स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य जानकारी है। अगर आपको डायबिटीज़, थायरॉइड, PCOS, दिल या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, आप कोई नियमित दवा लेते हैं, या आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो कैलोरी कम करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें।

शरीर कैलोरी खर्च कहां करता है

लोग अक्सर सोचते हैं कि कैलोरी सिर्फ़ जिम या वॉक में खर्च होती है। सच इसके उलट है। दिन भर में आप जितनी ऊर्जा खर्च करते हैं, उसका सबसे बड़ा हिस्सा, आमतौर पर साठ से सत्तर प्रतिशत, तब खर्च होता है जब आप कुछ कर ही नहीं रहे होते। दिल की धड़कन, सांस, दिमाग का काम, शरीर का तापमान बनाए रखना और कोशिकाओं की मरम्मत, यह सब चौबीस घंटे चलता है और इसी को बेसल मेटाबॉलिक रेट कहते हैं।

दूसरा हिस्सा रोज़मर्रा की हलचल का होता है। घर का काम, सीढ़ियां, बाज़ार तक चलना, ऑफिस में उठना-बैठना, बच्चों के पीछे भागना। यह हिस्सा ज़्यादातर लोगों में जिम से बड़ा होता है और इसी में सबसे आसानी से बढ़ोतरी की जा सकती है। तीसरा हिस्सा असली एक्सरसाइज़ का है, और चौथा छोटा सा हिस्सा खाना पचाने में ही खर्च हो जाता है, जो प्रोटीन के मामले में सबसे ज़्यादा होता है।

यह समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे एक बड़ा भ्रम टूटता है। एक घंटे की तेज़ वॉक से आमतौर पर दो सौ से तीन सौ कैलोरी ही खर्च होती है, जो एक समोसे और एक मीठी चाय से भी कम है। इसका मतलब यह नहीं कि एक्सरसाइज़ बेकार है, बल्कि यह कि सिर्फ़ एक्सरसाइज़ के भरोसे डेफिसिट बनाना बहुत मुश्किल है। थाली और हलचल, दोनों साथ चलें तभी बात बनती है।

अपना मेंटेनेंस नंबर कैसे पता करें

डेफिसिट तय करने से पहले यह जानना होगा कि आपका मेंटेनेंस लेवल क्या है, यानी वह कैलोरी जिस पर आपका वजन न बढ़ता है न घटता है। इसका सबसे भरोसेमंद तरीका कोई फॉर्मूला नहीं, आपका अपना डेटा है।

दो से तीन हफ्ते तक वैसे ही खाइए जैसे आप सामान्य दिनों में खाते हैं। कुछ बदलिए मत, बस ईमानदारी से लिखते जाइए, तेल और चाय की चीनी समेत। साथ ही हफ्ते में एक बार, हमेशा एक ही दिन, सुबह उठकर, बाथरूम जाने के बाद और कुछ खाने-पीने से पहले वजन नोट कीजिए। अगर तीन हफ्ते में वजन लगभग वहीं है, तो उन दिनों की औसत कैलोरी ही आपका मेंटेनेंस नंबर है। यह किसी भी कैलकुलेटर से ज़्यादा सटीक होगा क्योंकि यह आपके शरीर का जवाब है, किसी औसत आदमी का नहीं।

अगर आपको तुरंत एक शुरुआती अनुमान चाहिए, तो अपने वजन को किलो में लेकर लगभग तीस से पैंतीस से गुणा कर लीजिए। सत्तर किलो के व्यक्ति के लिए यह लगभग इक्कीस सौ से पच्चीस सौ कैलोरी बैठता है। इसे पत्थर की लकीर मत मानिए, यह सिर्फ़ शुरुआत का बिंदु है। उम्र, लिंग और गतिविधि के हिसाब से यह नंबर कैसे बदलता है, यह हमने रोज़ कितनी कैलोरी चाहिए वाली गाइड में विस्तार से समझाया है।

रोज़ कितनी कैलोरी कम करना सही रहता है

मेंटेनेंस पता चलने के बाद अगला सवाल यही आता है कि कितनी कम करें। ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए चार सौ से पांच सौ कैलोरी की कमी सबसे संतुलित विकल्प है। इससे आमतौर पर हफ्ते में करीब आधा किलो वजन घटता है, महीने में दो किलो के आसपास। सुनने में यह धीमा लगता है, पर छह महीने में यही बारह किलो बन जाता है, और सबसे बड़ी बात यह कि यह वजन वापस आने की संभावना बहुत कम होती है।

अब उलटा पहलू। रोज़ हज़ार कैलोरी की कमी शुरू में तेज़ नतीजे देती है, पर उसकी कीमत भी दिखती है। थकान, चिड़चिड़ापन, नींद खराब होना, बाल झड़ना, मांसपेशियों का घटना और सबसे बड़ी बात, ऐसी डाइट को दो-तीन हफ्ते से ज़्यादा निभा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। जब आप उससे बाहर आते हैं तो भूख कई गुना बढ़ी हुई होती है और वजन तेज़ी से लौट आता है। इसलिए तेज़ी का लालच लगभग हमेशा महंगा पड़ता है।

एक सुरक्षा रेखा भी याद रखिए। महिलाओं के लिए लगभग बारह सौ और पुरुषों के लिए लगभग पंद्रह सौ कैलोरी से नीचे बिना किसी योग्य डॉक्टर या डाइटीशियन की निगरानी के नहीं जाना चाहिए। इतनी कम कैलोरी में शरीर की ज़रूरी विटामिन और प्रोटीन की ज़रूरत पूरी करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है।

अकेले हिसाब लगाना भारी लगता है? नंबर तभी काम आते हैं जब वे रोज़ की थाली में उतरें। SuperLiving पर आपको खाने का आसान लॉग और स्कैनर मिलता है, साथ में 20 से ज़्यादा coaches की गाइडेंस हिंदी और हिंग्लिश में, भारतीय घर के खाने के हिसाब से। SuperLiving को मुफ़्त में शुरू करें और अपना डेफिसिट अंदाज़े से नहीं, एक साफ़ प्लान से चलाइए।

भारतीय थाली में डेफिसिट असल में कैसा दिखता है

अब सबसे काम की बात। पांच सौ कैलोरी कम करना कागज़ पर बड़ा लगता है, पर असल थाली में यह अक्सर बहुत छोटे बदलावों से बन जाता है। नीचे कुछ ईमानदार अंदाज़े हैं। ये मोटे नंबर हैं, बनाने के तरीके से थोड़ा ऊपर-नीचे होते हैं, पर तस्वीर साफ़ कर देते हैं।

तेल और घी। एक बड़ा चम्मच तेल लगभग सवा सौ कैलोरी का होता है और थाली में दिखता तक नहीं है। एक भारतीय रसोई में सब्ज़ी, तड़का और रोटी पर लगने वाला घी मिलाकर अक्सर दिन में तीन से चार चम्मच निकल आते हैं। इसे दो चम्मच पर लाना ही लगभग दो सौ से ढाई सौ कैलोरी की कमी है, बिना एक भी रोटी छोड़े।

मीठे पेय और चाय की चीनी। दो चम्मच चीनी वाली चाय दिन में तीन बार का मतलब लगभग डेढ़ सौ कैलोरी सिर्फ़ चीनी से। एक गिलास कोल्ड ड्रिंक या पैकेट वाला जूस डेढ़ सौ के आसपास और होता है, और पेट भरने में इसका योगदान लगभग शून्य है। यहीं से बहुत से लोगों का आधा डेफिसिट अपने आप बन जाता है।

हिस्से का आकार। एक मध्यम रोटी लगभग सत्तर से अस्सी कैलोरी की और एक कटोरी पकाया चावल लगभग दो सौ कैलोरी का होता है। चार रोटी से तीन पर आना या डेढ़ कटोरी चावल से एक कटोरी पर आना, इतने भर से सौ से दो सौ कैलोरी कम हो जाती हैं। साथ में सब्ज़ी और सलाद की मात्रा बढ़ा दीजिए, तो थाली उतनी ही भरी दिखेगी और पेट भी उतना ही भरेगा।

बाहर का नाश्ता। एक समोसा लगभग ढाई सौ, दो पूरी सब्ज़ी के साथ चार सौ से ऊपर, और शाम की एक प्लेट नमकीन या बिस्किट का पैकेट डेढ़ से दो सौ। हफ्ते में इन्हें रोज़ से घटाकर दो-तीन बार कर देना पूरे हफ्ते के औसत को काफ़ी नीचे ले आता है।

देखिए, इनमें से किसी भी बिंदु पर भूखा रहने की बात नहीं है। असली डेफिसिट कुछ छोटे और दोहराए जाने वाले बदलावों से बनता है, नाटकीय त्याग से नहीं। एक तैयार ढांचा चाहिए जिसमें हिस्से और खाने का समय पहले से तय हो, तो वजन घटाने का डाइट चार्ट आपके लिए अच्छी शुरुआत है, और दिन की पहली थाली सही बैठाने के लिए वजन घटाने के लिए नाश्ता वाली गाइड देख लीजिए।

वो गलतियां जिनसे डेफिसिट बनते-बनते रह जाता है

छिपी हुई कैलोरी। ज़्यादातर लोग जो खाते हैं उसका अंदाज़ा लगाने में औसतन बीस से तीस प्रतिशत कम बताते हैं, और यह जानबूझकर नहीं होता। सब्ज़ी का तेल, चाय की चीनी, खाना बनाते समय का चखना, बच्चे की प्लेट से उठाया गया टुकड़ा, ऑफिस की मिठाई। दो हफ्ते ईमानदारी से हर चीज़ लिखना इस भ्रम को सबसे तेज़ी से तोड़ता है।

वीकेंड का गणित। सोमवार से शुक्रवार पांच सौ कैलोरी कम खाना यानी हफ्ते में पच्चीस सौ की बचत। अगर शनिवार और रविवार को बाहर का खाना और मीठा मिलाकर बारह सौ अतिरिक्त चला जाए, तो आधी मेहनत वहीं खत्म। वजन हफ्ते के औसत पर चलता है, दिनों पर नहीं।

एक्सरसाइज़ का इनाम। जिम में चार सौ कैलोरी जलाकर उसी शाम आठ सौ कैलोरी का इनाम खा लेना बहुत आम है। एक्सरसाइज़ को सेहत, ताकत और मूड के लिए कीजिए, खाने के लाइसेंस के तौर पर नहीं।

बहुत तेज़ शुरुआत। पहले ही दिन सब कुछ एक साथ बदल देना उत्साह में सही लगता है, पर तीसरे हफ्ते तक अक्सर सब छूट जाता है। बेहतर है कि पहले दो हफ्ते सिर्फ़ मीठे पेय और तेल पर काम कीजिए, फिर हिस्सों पर।

रोज़ वजन देखकर घबराना। शरीर का वजन एक ही दिन में एक-दो किलो तक ऊपर-नीचे हो सकता है, सिर्फ़ पानी, नमक और पेट की स्थिति की वजह से। हफ्ते में एक बार, एक ही हालत में तौलिए और तीन हफ्ते का ट्रेंड देखिए।

डेफिसिट को टिकाऊ बनाने वाली तीन चीज़ें

प्रोटीन। डेफिसिट में सबसे बड़ा डर यह होता है कि चर्बी के साथ मांसपेशियां भी चली जाएं। इससे बचाव का सबसे असरदार तरीका पर्याप्त प्रोटीन है। दाल, राजमा, चना, दही, पनीर, सोया, अंडा या दुबला मांस, हर थाली में इनमें से कुछ होना चाहिए। प्रोटीन पेट भी सबसे लंबे समय तक भरा रखता है, इसलिए यही चीज़ भूख को सबसे ज़्यादा काबू में रखती है। शाकाहारी विकल्पों की पूरी सूची शाकाहारी प्रोटीन के स्रोत वाली गाइड में दी गई है।

नींद। अधूरी नींद वाले दिनों में भूख बढ़ाने वाले संकेत तेज़ हो जाते हैं और मीठे और तले हुए की तलब साफ़ बढ़ जाती है। छह घंटे से कम सोने वाले लोगों के लिए वही डेफिसिट कहीं ज़्यादा कठिन लगने लगता है। अगर रात को नींद आने में दिक्कत होती है, तो रात को नींद नहीं आती तो क्या करें वाली गाइड में आसान और व्यावहारिक कदम दिए गए हैं।

रोज़ की हलचल। जिम से भी ज़्यादा फर्क दिन भर के कदमों से पड़ता है। खाने के बाद दस मिनट की वॉक, लिफ्ट की जगह सीढ़ी, फोन पर बात करते हुए टहलना। यह सब मिलाकर बिना अलग समय निकाले दो सौ से तीन सौ कैलोरी रोज़ जोड़ देता है, और इसे निभाना किसी भी कड़ी डाइट से आसान है।

डेफिसिट कब रोक देना चाहिए

डेफिसिट कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे साल भर बिना रुके चलाया जाए। शरीर लगातार कमी में रहने पर धीरे-धीरे खर्च घटाने लगता है और भूख के संकेत बढ़ाने लगता है। इसलिए हर आठ से बारह हफ्ते के बाद एक या दो हफ्ते मेंटेनेंस पर लौट आना समझदारी भरा तरीका माना जाता है। इससे वजन वापस नहीं आता, बस शरीर और मन दोनों को राहत मिलती है।

कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर तुरंत रुकना चाहिए। लगातार थकान और कमज़ोरी, चक्कर आना, बहुत ठंड लगना, बाल तेज़ी से झड़ना, नींद टूटना, महिलाओं में पीरियड अनियमित हो जाना या रुक जाना, बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन, और खाने के बारे में लगातार सोचते रहना। ये इशारे हैं कि कमी बहुत बड़ी है या बहुत लंबी खिंच गई है। ऐसे में कैलोरी बढ़ाइए और ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से मिलिए।

इसी तरह अगर सब कुछ ठीक करने के बाद भी कई हफ्तों तक वजन बिल्कुल नहीं हिल रहा और साथ में थकान, सूजन या ठंड लगने जैसी बातें हैं, तो वजह थाली के बाहर भी हो सकती है। थायरॉइड इसका एक आम कारण है, और उस स्थिति में क्या बदलता है यह थायरॉइड में वजन कैसे कम करें वाली गाइड में समझाया गया है। जांच कराने में देर मत कीजिए।

निचोड़

कैलोरी डेफिसिट कोई डाइट नहीं है, यह बस एक हिसाब है। आप जितना खर्च करते हैं उससे थोड़ा कम खाइए, और शरीर बाकी काम खुद कर लेगा। इसे सही ढंग से चलाने का तरीका यही है कि पहले दो-तीन हफ्ते अपना मेंटेनेंस नंबर पता कीजिए, फिर उससे लगभग चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम कीजिए, प्रोटीन और सब्ज़ी बढ़ाइए, तेल और मीठे पेय पर लगाम लगाइए, नींद पूरी कीजिए और दिन भर थोड़ा ज़्यादा चलिए। तेज़ी का पीछा मत कीजिए, हफ्ते में आधा किलो ही असली जीत है।

और सबसे ज़रूरी बात, वही डेफिसिट काम करता है जिसे आप महीनों निभा सकें। जो प्लान आपको भूखा, थका और उदास कर दे, वह गलत प्लान है, चाहे नंबर कितने भी सही क्यों न हों।

अगर ये आदतें अकेले जोड़-जोड़कर निभाना मुश्किल लगता है, तो यहीं SuperLiving काम आता है। App पर खाने का आसान लॉग और स्कैनर मिलता है, और साथ में पोषण, वजन, नींद और अच्छी आदतों में मदद के लिए 20 से ज़्यादा coaches की गाइडेंस एक ही जगह, रोज़ के छोटे कदमों के साथ। आप SuperLiving को मुफ़्त में शुरू कर के खुद देख सकते हैं कि यह आपके रोज़ के हिसाब में फिट बैठता है या नहीं, बिना किसी दबाव के।


यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर, डाइटीशियन या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति की ज़रूरत, बीमारी और दवाइयां अलग होती हैं। अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, आप कोई दवा लेते हैं, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो कैलोरी घटाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। यहां दिए गए कैलोरी के आंकड़े मोटे अनुमान हैं और बनाने के तरीके व मात्रा के हिसाब से बदल सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैलोरी डेफिसिट का सीधा-सीधा मतलब क्या है?+

कैलोरी डेफिसिट का मतलब है कि आप एक दिन में जितनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं, खाने से उससे थोड़ी कम ऊर्जा ले रहे हैं। जब यह फर्क लगातार कई दिनों तक बना रहता है, तो शरीर बची हुई ज़रूरत पूरी करने के लिए अपनी जमा चर्बी इस्तेमाल करने लगता है और वजन धीरे-धीरे कम होता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि डेफिसिट कोई खास डाइट या कोई खास खाना नहीं है। रोटी छोड़ने, चावल छोड़ने या किसी एक चीज़ को दुश्मन मान लेने से डेफिसिट नहीं बनता, सिर्फ़ कुल मात्रा कम होने से बनता है।

रोज़ कितनी कैलोरी कम करनी चाहिए?+

ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए अपने मेंटेनेंस लेवल से लगभग चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम करना एक समझदारी भरा शुरुआती बिंदु होता है। इससे आमतौर पर हफ्ते में करीब आधा किलो वजन कम होता है, जो टिकाऊ भी है और शरीर पर भारी भी नहीं पड़ता। बहुत बड़ा डेफिसिट, जैसे रोज़ हज़ार कैलोरी कम करना, शुरू में तेज़ नतीजे दिखाता है पर उससे थकान, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों का नुकसान और बाद में तेज़ी से वजन वापस आना ज़्यादा आम है। महिलाओं के लिए लगभग बारह सौ और पुरुषों के लिए लगभग पंद्रह सौ कैलोरी से नीचे बिना डॉक्टर की निगरानी के नहीं जाना चाहिए।

अपना मेंटेनेंस नंबर कैसे पता करें?+

सबसे भरोसेमंद तरीका किसी फॉर्मूले से ज़्यादा आपका अपना ट्रेंड है। दो से तीन हफ्ते तक जैसा आप सामान्य रूप से खाते हैं वैसा ही खाइए, बस ईमानदारी से लिखते जाइए, और हफ्ते में एक ही दिन, एक ही समय पर वजन देखिए। अगर वजन लगभग स्थिर है, तो उन दिनों की औसत कैलोरी ही आपका मेंटेनेंस लेवल है। अनुमान के तौर पर शुरुआत करनी हो तो अपने वजन को किलो में लेकर उसे लगभग तीस से पैंतीस से गुणा कर लें, यह एक मोटा शुरुआती नंबर देता है जिसे आप अपने नतीजों के हिसाब से ठीक कर सकते हैं।

कैलोरी डेफिसिट में होने के बाद भी वजन क्यों नहीं घट रहा?+

सबसे आम वजह यह होती है कि डेफिसिट उतना है ही नहीं जितना लग रहा है। तेल, घी, चाय की चीनी, बाहर का एक-आध स्नैक और वीकेंड का खाना अक्सर हिसाब से बाहर रह जाते हैं और पूरे हफ्ते की कमी को भर देते हैं। दूसरी वजह पानी का जमाव है, जो नमक, तनाव, अधूरी नींद या महिलाओं में पीरियड चक्र की वजह से कुछ दिनों तक असली कमी को छिपा देता है। दो से तीन हफ्ते का ट्रेंड देखिए, एक दिन का नंबर नहीं। अगर सब ईमानदारी से करने के बाद भी कई हफ्तों तक कुछ नहीं बदल रहा, तो थायरॉइड या किसी और वजह की जांच के लिए डॉक्टर से मिलना बेहतर है।

क्या कैलोरी डेफिसिट में भूखा रहना ज़रूरी है?+

नहीं, और अगर आपको लगातार भूख लग रही है तो यह इशारा है कि डेफिसिट सही तरीके से नहीं बना है। भूख का सीधा रिश्ता कैलोरी से कम और खाने के चुनाव से ज़्यादा है। दाल, दही, पनीर, अंडा, चना और सब्ज़ियों जैसी प्रोटीन और फाइबर वाली चीज़ें कम कैलोरी में भी लंबे समय तक पेट भरा रखती हैं, जबकि मीठे पेय, तली चीज़ें और बिस्किट ज़्यादा कैलोरी देकर भी जल्दी भूख लौटा देते हैं। सही डेफिसिट वह है जिसमें आप थोड़ा कम खा रहे हैं पर दिन भर कमज़ोरी और तड़प महसूस नहीं कर रहे।

क्या हर किसी को कैलोरी गिननी चाहिए?+

ज़रूरी नहीं। गिनती का असली फायदा यह है कि दो से तीन हफ्ते में आपको पता चल जाता है कि किस चीज़ की कितनी कैलोरी है और आपकी थाली में छिपी हुई कैलोरी कहां से आ रही है। इतना सीख लेने के बाद ज़्यादातर लोग बिना गिने भी सही हिस्से पर टिक जाते हैं। जिन लोगों को नंबरों से तनाव होता है या जिनका खाने के साथ रिश्ता पहले से उलझा हुआ है, उनके लिए गिनने के बजाय आदतें बदलना बेहतर रहता है, जैसे थाली में सब्ज़ी और प्रोटीन बढ़ाना, मीठे पेय बंद करना और रात का खाना जल्दी करना।

कैलोरी डेफिसिट कब नुकसानदायक हो जाता है?+

जब डेफिसिट बहुत बड़ा हो या बहुत लंबे समय तक बिना ब्रेक के चले, तब। इसके संकेत साफ़ होते हैं, जैसे लगातार थकान, चक्कर, बाल झड़ना, बहुत ठंड लगना, नींद खराब होना, महिलाओं में पीरियड अनियमित हो जाना, चिड़चिड़ापन और खाने के बारे में लगातार सोचते रहना। ऐसा दिखे तो कैलोरी बढ़ाकर कुछ हफ्ते मेंटेनेंस पर आना समझदारी है। गर्भावस्था, स्तनपान, किशोरावस्था या किसी बीमारी और दवा के दौरान डेफिसिट खुद से तय नहीं करना चाहिए, इसमें डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।

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