कैलोरी काउंटर ऐप कैसे इस्तेमाल करें: रोटी, दाल और सब्ज़ी का हिसाब आसान भाषा में
छोटा जवाब
कैलोरी काउंटर ऐप का मकसद गणित सिखाना नहीं है. उसका असली काम एक ही है: आपको दिखाना कि आपका दिन असल में कैसा दिखता है, न कि कैसा आपको लगता है.
शुरुआत तीन कदम से होती है. पहला, एक हफ्ते तक जो खा रहे हैं वही लिखिए और कुछ मत बदलिए. दूसरा, अपने घर की रोटी और अपनी कटोरी का एक बार माप देख लीजिए, ताकि एंट्री हर दिन एक जैसी रहे. तीसरा, तेल और चीनी कभी मत छोड़िए, क्योंकि यही दो सबसे ज़्यादा छूटती हैं और सबसे ज़्यादा फर्क डालती हैं.
कैलोरी काउंटर ऐप असल में करता क्या है
लोग सोचते हैं कि ऐप कैलोरी घटाता है. ऐसा नहीं होता. ऐप सिर्फ एक शीशा है.
इसका पहला काम है अंदाज़े को आंकड़े में बदलना. बिना लिखे ज़्यादातर लोग अपने दिन का हिसाब काफी कम आंकते हैं. एक चम्मच तेल दिखा नहीं, चाय की डेढ़ चम्मच चीनी गिनी नहीं, दफ्तर में किसी ने समोसा खिलाया और वह याद ही नहीं रहा.
दूसरा काम है पैटर्न दिखाना. दिन के किस समय आप सबसे ज़्यादा खाते हैं, हफ्ते के किस दिन हिसाब बिगड़ता है, प्रोटीन रोज़ कम क्यों रह जाता है. ये सवाल याददाश्त से हल नहीं होते, लिखे रिकॉर्ड से एक हफ्ते में हो जाते हैं.
तीसरा काम है फैसला आसान बनाना. जब आप देखते हैं कि शाम के तीन बिस्किट आपके दिन का उतना हिस्सा ले रहे हैं जितना एक कटोरी दाल, तो आगे का फैसला अपने आप बदल जाता है.
अगर यह साफ नहीं है कि आपके शरीर को दिन में कितनी कैलोरी चाहिए, तो पहले दिन में कितनी कैलोरी चाहिए पढ़ लीजिए.
शुरू करने से पहले तीन चीज़ें तय कर लीजिए
पहली, आपका लक्ष्य क्या है. वजन घटाना, बनाए रखना या बढ़ाना. तीनों में तरीका एक जैसा है, नंबर अलग. इसके पीछे का सिद्धांत कैलोरी डेफिसिट क्या होता है में है.
दूसरी, कितने दिन लिखेंगे. शुरुआत में हर दिन, दो से तीन हफ्ते. उसके बाद रोज़ लिखने की ज़रूरत नहीं रहती.
तीसरी, आप क्या नहीं छोड़ेंगे. तेल, घी, चीनी, चटनी और चखने के दौरान खाया गया खाना, चाहे कितने भी छोटे लगें.
पहला हफ्ता: सिर्फ लिखिए, बदलिए मत
यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है और सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाता है.
पहले हफ्ते में लोग दो गलतियां साथ करते हैं. वे लिखना भी शुरू करते हैं और खाना भी बदल देते हैं. नतीजा यह होता है कि उन्हें कभी पता ही नहीं चलता कि उनका असली दिन कैसा था.
इसलिए पहले सात दिन एक ही काम कीजिए: जो हमेशा खाते हैं वही खाइए, बस लिखिए. सातवें दिन बैठकर पूरा हफ्ता एक साथ देखिए. ज़्यादातर लोगों को उसी एक बैठक में तीन चार चीज़ें ऐसी दिख जाती हैं जिनका उन्हें अंदाज़ा नहीं था.
भारतीय खाने का हिसाब कैसे लगाएं
यहीं ज़्यादातर लोग अटकते हैं, क्योंकि हमारी थाली में पैकेट वाली चीज़ें कम और घर की बनी चीज़ें ज़्यादा हैं.
रोटी. आटे का वजन देखिए, बनी हुई रोटी का नहीं. एक बार तराजू पर देख लीजिए कि आपके घर की एक रोटी में कितना आटा जाता है. आमतौर पर यह 25 से 40 ग्राम के बीच होता है. ऊपर लगने वाला घी अलग से जुड़ता है.
चावल. कच्चे और पके चावल का वजन बहुत अलग होता है, क्योंकि पकने पर पानी सोखा जाता है. हमेशा एक ही चीज़ नापिए, कच्चा या पका, और ऐप में वही विकल्प चुनिए.
दाल. दाल का हिसाब दो हिस्सों में है, दाल खुद और उसका तड़का. पतली और गाढ़ी दाल में काफी फर्क होता है, इसलिए तेल या घी अलग से जोड़िए.
सब्ज़ी. सब्ज़ी में सबसे भारी हिस्सा सब्ज़ी नहीं, तेल होता है. यही वजह है कि दो लोग एक ही सब्ज़ी खाकर बहुत अलग हिसाब बना सकते हैं.
दही, पनीर और दूध. ये आसान हैं क्योंकि इनका वजन सीधे नापा जा सकता है. बस पूरा दूध और टोन्ड दूध का फर्क ध्यान रखिए.
पूरे दिन की थाली का तैयार ढांचा चाहिए तो वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट एक अच्छी शुरुआत है.
तेल: सबसे बड़ा छूटने वाला हिस्सा
अगर इस पूरे लेख से आप सिर्फ एक बात याद रखें, तो यह होनी चाहिए.
तेल और घी में उतनी ही मात्रा में बाकी खाने से कई गुना ज़्यादा ऊर्जा होती है, और दिक्कत यह है कि तेल दिखता नहीं. वह सब्ज़ी में घुला होता है, दाल में तैरता है, पराठे में समाया होता है.
हल आसान है. देखिए कि घर में कितने लोग हैं और तेल का डिब्बा कितने दिन में खत्म होता है. इससे प्रति व्यक्ति प्रति दिन का मोटा अंदाज़ा मिल जाता है.
दूसरा तरीका यह है कि खाना बनाते समय तेल सीधे कड़ाही में उड़ेलने के बजाय चम्मच से डालिए. यह छोटी सी आदत हिसाब को एकदम साफ कर देती है.
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नापने का सबसे आसान तरीका
तराजू सबसे सही तरीका है, लेकिन हर किसी के पास नहीं होता. इसलिए दो व्यावहारिक विकल्प हैं.
अपनी कटोरी को अपना पैमाना बनाइए. एक बार रोज़ वाली कटोरी में पानी भरकर देख लीजिए कि उसमें कितना आता है. उसके बाद आप हमेशा कह सकते हैं कि एक कटोरी दाल यानी इतनी मात्रा.
हाथ का पैमाना. मुट्ठी भर चावल, हथेली जितना पनीर या दही, अंगूठे जितना घी. यह सही तो नहीं है, लेकिन बाहर होने पर या जल्दी में किसी भी अंदाज़े से बेहतर काम करता है.
एक बात याद रखिए. एकदम सही होने से ज़्यादा ज़रूरी है एक जैसा रहना. अगर आप हर दिन उसी तरीके से नापते हैं, तो गलती भी हर दिन एक जैसी रहेगी और हफ्तों की तुलना सही निकलेगी.