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खाने की कैलोरी कैसे गिनें: रोटी, दाल और सब्ज़ी का आसान हिसाब

SuperLiving Expert Team·

खाने की कैलोरी कैसे गिनें: रोटी, दाल और सब्ज़ी का आसान हिसाब

छोटा जवाब

भारतीय खाने की कैलोरी गिनना मुश्किल इसलिए लगता है क्योंकि हमारा खाना पैकेट में नहीं आता। दाल, सब्ज़ी, खिचड़ी, पुलाव, सब कुछ मिला हुआ पकता है और हर घर में अलग तरीके से पकता है। इसका हल यह नहीं है कि आप हर चीज़ को अलग अलग तौलें। हल यह है कि आप पूरी पतीली का हिसाब लगाकर उसे कटोरियों में बांट दें, तेल को नापकर डालें, और वही आठ दस चीज़ें एक बार गिनकर लिख लें जो आपके घर में बार बार बनती हैं।

दो हफ़्ते में यह काम अपने आप आसान हो जाता है, क्योंकि घर का मेन्यू घूम फिरकर वही रहता है।

गिनने से पहले तीन दिन सिर्फ़ लिखिए

सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि जिस दिन से गिनना शुरू करते हैं, उसी दिन से खाना भी बदल देते हैं। इससे आपको कभी पता नहीं चलता कि आपकी असली आदत क्या थी।

तीन दिन कुछ मत बदलिए। जो रोज़ खाते हैं वही खाइए, बस लिखते जाइए। कितनी रोटी, कितनी कटोरी चावल, कितनी बार चाय, कितनी चीनी, बीच में क्या उठाकर खा लिया। ये तीन दिन आपकी असली शुरुआत हैं। इनके बिना आप जो भी हिसाब लगाएंगे वह उस इंसान का होगा जो आप बनना चाहते हैं, उस इंसान का नहीं जो आप आज हैं।

पूरी पतीली का तरीका

यह इस पूरे लेख की सबसे काम की बात है, इसलिए इसे धीरे से पढ़िए।

मान लीजिए आज घर में अरहर की दाल बनी। आपने डाला एक कटोरी कच्ची दाल, दो चम्मच तेल, और तड़के में जीरा, प्याज़, टमाटर। पकने के बाद कुल मिलाकर छह कटोरी दाल बनी।

अब हिसाब ऐसे लगाइए। एक कटोरी कच्ची अरहर लगभग 650 कैलोरी, दो चम्मच तेल लगभग 240 कैलोरी, प्याज़ टमाटर मसाला लगभग 60 कैलोरी। कुल हुआ लगभग 950 कैलोरी। इसे छह कटोरी में बांटिए तो एक कटोरी दाल लगभग 160 कैलोरी की पड़ी।

यही तरीका हर मिली जुली चीज़ पर चलता है। सब्ज़ी, राजमा, छोले, खिचड़ी, पुलाव, सांभर, सब पर। एक बार निकालकर मोबाइल के नोट्स में लिख लीजिए। अगली बार जब वही दाल बने, आपको दोबारा हिसाब लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

रोज़ के खानों का मोटा हिसाब

ये नंबर औसत हैं, आपके घर में थोड़े ऊपर नीचे हो सकते हैं। इन्हें शुरुआत का पैमाना मानिए, पत्थर की लकीर नहीं।

एक मीडियम रोटी बिना घी के लगभग 100 से 120 कैलोरी। घी लगाते ही उसमें 40 से 50 और जुड़ जाती हैं। एक कटोरी पकी हुई दाल लगभग 150 से 180। एक कटोरी पके चावल लगभग 200 से 220। हरी सब्ज़ी कम तेल में बनी हो तो एक कटोरी लगभग 80 से 120, आलू या पनीर वाली सब्ज़ी 200 से ऊपर चली जाती है। एक कटोरी दही लगभग 100, टोन्ड दूध का एक गिलास लगभग 120। एक उबला अंडा लगभग 78। पचास ग्राम पनीर लगभग 130। दो चम्मच चीनी वाली चाय लगभग 90 से 110।

अब इन्हें जोड़कर देखिए। दो रोटी, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्ज़ी और एक कटोरी दही वाला साधारण खाना लगभग 550 से 600 कैलोरी बैठता है। यही थाली अगर तीन परांठे, आलू की सब्ज़ी और मीठी लस्सी में बदल जाए, तो वही "घर का खाना" 1100 के पार चला जाता है। खाना दोनों बार घर का ही था।

कच्चा और पका, यह फ़र्क सबसे ज़्यादा गड़बड़ करता है

कैलोरी की टेबल में जो नंबर लिखे होते हैं, वे अक्सर कच्चे सामान के होते हैं। पकने के बाद चावल और दाल पानी सोख लेते हैं, वज़न दो से तीन गुना हो जाता है, पर कैलोरी उतनी ही रहती है जितनी कच्चे में थी।

इसका मतलब यह है कि सौ ग्राम कच्चे चावल और सौ ग्राम पके चावल दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। कच्चे में लगभग 350 कैलोरी हैं, पके में लगभग 130। अगर आप टेबल से कच्चे का नंबर उठाकर पकी हुई कटोरी पर लगा देंगे, तो आपका पूरा दिन का हिसाब असली से लगभग ढाई गुना ज़्यादा दिखेगा, और फिर आपको लगेगा कि आप बहुत कम खाकर भी वज़न नहीं घटा पा रहे।

आसान नियम यह है। जो चीज़ें पकने पर पानी सोखती हैं, यानी चावल, दाल, राजमा, छोले, पास्ता और सूजी, उन्हें कच्चा तौलिए। जो चीज़ें पकने पर पानी छोड़ती हैं या जिनका रूप ज़्यादा नहीं बदलता, यानी सब्ज़ी, अंडा, पनीर, चिकन और मछली, उन्हें आप कच्चा या पका, किसी भी तरह गिन सकते हैं, बस हर बार एक ही तरीका रखिए।

आटे के साथ भी यही बात है। एक मीडियम रोटी बनाने में लगभग तीस ग्राम आटा लगता है। अगर आपके घर की रोटी बड़ी बनती है, तो एक बार आटा तौलकर देख लीजिए कि उस लोई में कितने ग्राम गए। बहुत सारे घरों में एक रोटी असल में डेढ़ रोटी निकलती है, और दिन भर में यही फ़र्क तीन सौ कैलोरी बना देता है।

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तेल सबसे बड़ा छुपा हुआ नंबर है

एक चम्मच तेल में लगभग 120 कैलोरी होती है। घी में भी लगभग इतनी ही। और यह प्लेट में कहीं दिखाई नहीं देता, क्योंकि तेल सब्ज़ी में घुल जाता है।

चार लोगों के परिवार में अगर दिन भर में कुल आठ चम्मच तेल जाता है, तो वह लगभग 960 कैलोरी है जो पूरी थाली में फैली हुई है। ज़्यादातर लोग जब अपना दिन भर का हिसाब लिखते हैं, तो तेल का ज़िक्र ही नहीं करते।

एक आसान काम कीजिए। तीन दिन तक तेल की बोतल से सीधे कड़ाही में मत डालिए, चम्मच से नापकर डालिए। बहुत लोगों को पहली बार में पता चलता है कि वे जितना सोचते थे उससे दोगुना डाल रहे थे। इस एक बदलाव से अक्सर 200 से 300 कैलोरी रोज़ की बच जाती हैं, बिना कुछ छोड़े।

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नापने के तीन आसान पैमाने

तराज़ू। शुरू के एक दो हफ़्ते के लिए सबसे अच्छा। कच्चा चावल, कच्ची दाल और आटा तौलिए, पका हुआ नहीं, क्योंकि पानी सोखने के बाद वज़न बदल जाता है।

घर की कटोरी। तराज़ू नहीं है तो कोई बात नहीं। अपने घर की एक कटोरी चुन लीजिए और उसी को हमेशा का पैमाना बना लीजिए। एक बार उसमें भरकर देख लीजिए कि उसमें कितने ग्राम आते हैं, फिर हर दिन वही कटोरी।

हाथ। सबसे मोटा तरीका, लेकिन बाहर खाते वक़्त काम आता है। एक हथेली जितना प्रोटीन, एक मुट्ठी जितना अनाज, दो अंजुरी सब्ज़ी, एक अंगूठे जितना तेल। यह सटीक नहीं है, पर जो तरीका आप रोज़ इस्तेमाल करेंगे वह उस तरीके से बेहतर है जो आप चौथे दिन छोड़ देंगे।

पैकेट पर लिखे नंबर कैसे पढ़ें

पैकेट वाला खाना गिनना सबसे आसान होना चाहिए, पर यहीं सबसे साफ़ धोखा भी होता है, और वजह एक छोटी सी लाइन है जिसे कोई नहीं पढ़ता।

पीछे लिखे नंबर लगभग हमेशा सौ ग्राम के होते हैं, पूरे पैकेट के नहीं। नमकीन का सौ ग्राम वाला पैकेट अगर 550 कैलोरी दिखा रहा है, तो वह पूरा पैकेट खाने पर 550 है, दो सौ नहीं। कुछ पैकेट "प्रति सर्विंग" लिखते हैं और नीचे छोटे अक्षरों में बताते हैं कि एक पैकेट में दो या तीन सर्विंग हैं, यानी असली नंबर दो या तीन गुना है।

तीन आदतें बना लीजिए। पहला, हमेशा देखिए कि नंबर सौ ग्राम का है या एक सर्विंग का, और फिर उसे उस मात्रा से गुणा कीजिए जो आपने सच में खाई। दूसरा, सामग्री की लिस्ट देखिए, क्योंकि उसमें चीज़ें मात्रा के हिसाब से लिखी होती हैं, और अगर चीनी या पाम तेल पहले तीन में है तो वह चीज़ हल्की नहीं है चाहे सामने कुछ भी लिखा हो। तीसरा, सामने के दावों को हिसाब में मत गिनिए, क्योंकि "मल्टीग्रेन", "बेक्ड" या "सेहत से भरपूर" जैसे शब्दों का कैलोरी से कोई सीधा रिश्ता नहीं है।

दिन का नहीं, हफ़्ते का हिसाब देखिए

एक दिन ज़्यादा खा लेने से कुछ नहीं बिगड़ता, और एक दिन कम खा लेने से कुछ नहीं बनता। शरीर हफ़्तों में जवाब देता है।

इसलिए रोज़ के नंबर को लेकर परेशान मत होइए, सात दिन का औसत देखिए। शादी वाले दिन 2500 कैलोरी हो गईं तो अगले दिन भूखा रहने की ज़रूरत नहीं है, बस बाकी दिन अपने सामान्य हिसाब पर लौट आइए। यह पूरा गणित कैसे काम करता है, यह समझने के लिए कैलोरी डेफिसिट क्या होता है पढ़िए, और अपने शरीर के लिए सही नंबर निकालने के लिए एक दिन में कितनी कैलोरी चाहिए देखिए।

पांच जगह जहां हिसाब सबसे ज़्यादा फिसलता है

चाय के साथ वाली चीज़ें। चाय खुद 100 के आसपास है, पर उसके साथ आए दो बिस्किट, एक रस्क या मुट्ठी भर नमकीन अक्सर चाय से ज़्यादा जोड़ देते हैं। दिन में तीन बार यही होता है।

चखना। खाना बनाते वक़्त चख लेना, बच्चे की प्लेट से एक टुकड़ा उठा लेना, बर्तन में बची सब्ज़ी खड़े खड़े खा लेना। कोई इसे नहीं गिनता, और यह आराम से 150 से 250 कैलोरी रोज़ की हो जाती है।

पीने वाली कैलोरी। शरबत, कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाला जूस, मीठी लस्सी, फ्लेवर वाली कॉफ़ी। पेट इन्हें खाना नहीं मानता, इसलिए भूख कम नहीं होती, पर हिसाब में ये पूरे जुड़ते हैं।

"हेल्दी" चीज़ें जिनकी कैलोरी ज़्यादा है। ड्राई फ्रूट, नारियल, घी, गुड़, पीनट बटर, ये सब सेहतमंद हो सकते हैं पर कैलोरी में भारी हैं। मुट्ठी भर बादाम और काजू आराम से 250 कैलोरी हैं।

वीकेंड और बाहर का खाना। पांच दिन का अच्छा हिसाब दो दिन के बाहर के खाने से बराबर हो सकता है। रेस्टोरेंट का खाना तेल और मक्खन में घर से कहीं ज़्यादा होता है, इसलिए बाहर खाने वाले दिन को भी उतनी ही ईमानदारी से लिखिए।

एक नमूना दिन, हिसाब के साथ

सुबह का नाश्ता, दो इडली सांभर के साथ, लगभग 300। दस बजे चाय एक चम्मच चीनी के साथ, लगभग 70। दोपहर का खाना, दो रोटी, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्ज़ी, एक कटोरी दही, लगभग 570। शाम को चाय और मुट्ठी भर भुना चना, लगभग 170। रात का खाना, एक रोटी, एक कटोरी सब्ज़ी और सलाद, लगभग 300।

कुल लगभग 1410 कैलोरी। यही दिन अगर नाश्ते में दो परांठे हो जाएं, शाम को नमकीन आ जाए और रात को चावल जुड़ जाए, तो वही दिन 2000 के पार चला जाता है, और खाने की लिस्ट देखने में लगभग वैसी ही लगेगी। पूरे दिन का ढांचा कैसा दिखना चाहिए, यह वजन घटाने का डाइट चार्ट में खाने दर खाने लिखा है।

कब गिनना बंद कर दें

कैलोरी गिनना एक ट्रेनिंग है, ज़िंदगी भर की आदत नहीं। दो से चार हफ़्ते में आपकी आंख सध जाती है और आप बिना लिखे बता पाते हैं कि प्लेट में क्या ज़्यादा है।

उसके बाद हिसाब छोड़ दीजिए और सिर्फ़ तीन चीज़ें देखते रहिए, पोर्शन का आकार, हफ़्ते में एक बार वज़न, और कमर का नाप। अगर कई हफ़्ते तक कुछ नहीं बदले, या त्योहारों के बाद आदत बिगड़ जाए, तो कुछ दिन दोबारा गिन लीजिए। जिन लोगों को खाने को लेकर पहले से चिंता या जुनून की दिक्कत रही हो, उन्हें कैलोरी गिनने से पहले किसी जानकार से बात कर लेनी चाहिए, क्योंकि हर तरीका हर इंसान के लिए सही नहीं होता।

अकेले करने और साथ में करने का फ़र्क

हिसाब लगाना सीखना आसान है। मुश्किल तीसरे हफ़्ते आती है, जब उत्साह उतर जाता है और घर में वही खाना बन रहा होता है जो हमेशा बनता था।

यहीं पर ज़्यादातर लोग रुक जाते हैं, और यही वह जगह है जहां किसी का साथ फ़र्क डालता है। SuperLiving पर 20+ ट्रेंड कोच आपकी थाली को देखकर, आपके घर में जो पक रहा है उसी के हिसाब से, छोटे बदलाव सुझाते हैं। कोई अलग खाना, कोई महंगा सामान, कोई नामुमकिन नियम नहीं। SuperLiving डाउनलोड करें और आज से शुरू करें

एक ज़रूरी बात

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं लेता। अगर आपको थायराइड, डायबिटीज़, पीसीओएस, किडनी या दिल से जुड़ी कोई दिक्कत है, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, या कोई नियमित दवा चल रही है, तो अपनी कैलोरी या डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से ज़रूर बात कीजिए। हर शरीर अलग है और नतीजे हर इंसान में अलग होते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या भारतीय घर के खाने की कैलोरी सच में गिनी जा सकती है?+

हां, गिनी जा सकती है, बस उम्मीद सही रखनी होगी। पैकेट वाले खाने पर नंबर छपा होता है, इसलिए वहां हिसाब बिल्कुल सटीक निकलता है। घर के खाने में दाल कितनी गाढ़ी है, तेल कितना पड़ा है और रोटी कितनी बड़ी है, यह हर घर में अलग होता है, इसलिए आपका नंबर असली नंबर के आसपास रहेगा, ठीक ऊपर नहीं। और असल में इतना काफ़ी है। कैलोरी गिनने का मकसद परफेक्ट आंकड़ा निकालना नहीं है, मकसद यह देखना है कि आप जितना सोचते हैं उससे ज़्यादा खा रहे हैं या कम। दस से पंद्रह प्रतिशत की गड़बड़ी के साथ भी यह सवाल साफ़ हो जाता है, बशर्ते आप हर दिन एक ही तरीके से गिनें।

मिक्स सब्ज़ी या दाल की कैलोरी कैसे निकालें, जब सब कुछ मिला हुआ हो?+

पूरी पतीली का हिसाब लगाइए, फिर उसे बांट दीजिए। मान लीजिए दाल में एक कटोरी कच्ची अरहर, दो चम्मच तेल और तड़के का मसाला गया, और पकने के बाद कुल छह कटोरी दाल बनी। पूरी पतीली की कैलोरी जोड़िए और छह से भाग दे दीजिए, आपको एक कटोरी का नंबर मिल जाएगा। यही तरीका सब्ज़ी, राजमा, छोले, खिचड़ी और पुलाव पर चलता है। एक बार हिसाब लगाकर लिख लीजिए, क्योंकि घर में वही आठ दस चीज़ें बार बार बनती हैं। दूसरे हफ़्ते से आपको गिनना ही नहीं पड़ेगा, आप पहचानने लगेंगे।

सबसे ज़्यादा गलती कहां होती है?+

तेल और घी में, और इसमें कोई मुक़ाबला नहीं है। एक चम्मच तेल में लगभग 120 कैलोरी होती है और वह प्लेट में दिखाई नहीं देता। जो लोग कहते हैं कि वे बहुत कम खाते हैं फिर भी वज़न नहीं घटता, उनमें से ज़्यादातर के हिसाब में तेल छूट रहा होता है। दूसरे नंबर पर चाय की चीनी और साथ में खाया जाने वाला बिस्किट या नमकीन आता है, और तीसरे नंबर पर वह खाना जो खड़े खड़े चख लिया जाता है। तीन चार दिन तेल को नापकर डालिए, सिर्फ़ इतना करने से आपके अंदाज़े का फ़र्क साफ़ दिख जाएगा।

क्या हर चीज़ तराज़ू पर तौलनी ज़रूरी है?+

शुरू के एक या दो हफ़्ते तौलना बहुत मदद करता है, उसके बाद ज़रूरी नहीं रहता। शुरुआत में तराज़ू आपकी आंख को ट्रेनिंग देता है, क्योंकि ज़्यादातर लोग चावल और तेल की मात्रा का अंदाज़ा असल से काफ़ी कम लगाते हैं। एक बार आंख सध जाए तो घर की कटोरी, चम्मच और हाथ से काम चल जाता है। अगर तराज़ू नहीं है तो बिल्कुल भी रुकिए मत, अपने घर की एक कटोरी को पैमाना बना लीजिए और हर दिन उसी से नापिए। एक ही पैमाने से रोज़ नापना, अलग अलग दिन अलग तरीके से तौलने से बेहतर है।

रोज़ गिनना पड़ेगा या कुछ दिन बाद छोड़ सकते हैं?+

हमेशा के लिए गिनना न ज़रूरी है न व्यावहारिक। ज़्यादातर लोगों के लिए दो से चार हफ़्ते का ईमानदार हिसाब काफ़ी होता है, क्योंकि उतने में घर का पूरा मेन्यू एक बार सामने आ जाता है और अंदाज़ा सटीक होने लगता है। उसके बाद आप हिसाब छोड़ सकते हैं और सिर्फ़ पोर्शन और वज़न पर नज़र रख सकते हैं। अगर वज़न कई हफ़्ते तक रुक जाए, त्योहार या शादी का दौर निकल जाए, या खाने की आदत बदल जाए, तो कुछ दिन दोबारा गिन लीजिए। इसे तराज़ू की तरह देखिए, हर वक़्त पकड़कर रखने वाली चीज़ नहीं, बीच बीच में जांचने वाली चीज़।

अगर हिसाब लगाने के बाद भी वज़न नहीं घट रहा तो क्या करें?+

पहले हिसाब की ईमानदारी जांचिए, क्योंकि नब्बे प्रतिशत मामलों में जवाब वहीं मिल जाता है। चार चीज़ें आमतौर पर छूटती हैं, तेल की असली मात्रा, चाय कॉफ़ी और शरबत जैसी पीने वाली कैलोरी, बिना गिने खा लिए गए छोटे छोटे टुकड़े, और वीकेंड या बाहर का खाना जिसे लोग हिसाब में शामिल ही नहीं करते। एक हफ़्ते तक इन चारों को पकड़िए। इसके बाद भी अगर चार हफ़्ते में कोई हलचल नहीं है, तो पोर्शन थोड़ा कम कीजिए और चलना बढ़ाइए, और थायराइड या दूसरी किसी दिक्कत के लिए डॉक्टर से एक बार जांच करा लीजिए।

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