वजन घटाने के लिए Diet Chart: सुबह से रात तक का पूरा प्लान
छोटा जवाब
वजन घटाने वाला डाइट चार्ट कोई खास खाना नहीं होता. वह आपके घर में बनने वाला खाना ही होता है, बस उसकी मात्रा और थाली में उसका अनुपात तय होता है. एक ऐसा दिन जिसमें प्रोटीन हर खाने में मौजूद हो, सब्ज़ी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा हो, अनाज नापकर हो, और तला हुआ या मीठा तय दिनों तक सीमित हो, वजन घटाने के लिए काफी है.
नीचे पूरे दिन का चार्ट है, सुबह उठने से रात सोने तक, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्पों के साथ. लेकिन उससे पहले एक बात साफ कर लेते हैं, क्योंकि यही बात तय करती है कि चार्ट चलेगा या तीसरे दिन बंद हो जाएगा.
डाइट चार्ट काम क्यों करता है, और कब नहीं करता
चार्ट का असली काम फैसले कम करना है.
दिन में जितनी बार आपको यह सोचना पड़ता है कि अब क्या खाऊं, उतनी बार गलत चुनाव की संभावना बनती है. शाम को भूख लगी हो, थकान हो, और घर में कुछ तय न हो, तो हाथ बिस्किट या नमकीन तक ही जाता है. चार्ट उस पल को पहले से तय कर देता है, इसलिए काम करता है.
चार्ट तब फेल होता है जब वह आपकी रसोई से मेल नहीं खाता. इंटरनेट पर मिलने वाले ज़्यादातर चार्ट में क्विनोआ, ओट्स, बेरीज़ और सलाद के पत्ते होते हैं. भारतीय घर में यह चीज़ें रोज़ नहीं बनतीं, इसलिए चार दिन बाद वह चार्ट कागज़ पर रह जाता है और खाना फिर वही पुराना चलने लगता है. जो चार्ट रोटी, दाल, चावल, सब्ज़ी, दही और अंडे से बनता है, वह टिकता है.
और एक सच जो साफ कहना ज़रूरी है: वजन तभी घटता है जब दिन भर में शरीर को उससे कम ऊर्जा मिले जितनी वह खर्च करता है. चार्ट का पूरा ढांचा इसी को आसान बनाने के लिए है, न कि किसी जादुई खाने के लिए. यह हिस्सा विस्तार से समझने के लिए कैलोरी डेफिसिट क्या होता है पढ़ लीजिए, उसके बाद यह चार्ट कहीं ज़्यादा समझ आएगा.
चार्ट शुरू करने से पहले तीन चीज़ें तय कर लीजिए
पहली, प्रोटीन का लक्ष्य. ज़्यादातर भारतीय थाली में प्रोटीन सबसे कमज़ोर हिस्सा होता है, और यही वजह है कि लोग खाने के दो घंटे बाद फिर भूखे हो जाते हैं. मोटे तौर पर हर मुख्य खाने में एक हथेली जितना प्रोटीन रखने का लक्ष्य बनाइए, यानी दाल, पनीर, अंडा, सोया, चना, चिकन या मछली में से कुछ.
दूसरी, अनाज की मात्रा. रोटी और चावल दुश्मन नहीं हैं, बेहिसाब रोटी और चावल दिक्कत हैं. मात्रा तय कर देने भर से आधा काम हो जाता है.
तीसरी, तेल का हिसाब. एक चम्मच तेल में लगभग उतनी ऊर्जा होती है जितनी एक पूरी रोटी में. रसोई में तेल डालने का तरीका बदल देना, यानी सीधे बोतल से डालने की जगह चम्मच से नापकर डालना, अक्सर वह एक बदलाव होता है जिसका असर सबसे ज़्यादा दिखता है और मेहनत सबसे कम लगती है.
पूरे दिन का डाइट चार्ट
यह चार्ट एक आम कामकाजी दिन के हिसाब से बना है. समय आप अपने रूटीन के हिसाब से आगे पीछे कर सकते हैं, क्रम वही रहेगा.
उठते ही (सुबह 6:30 से 7:30)
एक से दो गिलास सादा पानी. चाहें तो गुनगुना कर लीजिए, चाहें तो उसमें नींबू निचोड़ लीजिए, दोनों ठीक हैं.
यहां साफ कर देना ज़रूरी है कि सुबह खाली पेट पिया गया कोई भी पानी अपने आप चर्बी नहीं घटाता. इसका असली फायदा यह है कि रात भर की कमी पूरी होती है और सुबह की झूठी भूख कम लगती है, जो अक्सर प्यास ही होती है. अगर आप चाय के बिना नहीं रह सकते तो चाय पीजिए, बस उसके साथ बिस्किट और रस्क का सिलसिला मत शुरू कीजिए, क्योंकि दिन का सबसे बेहिसाब हिस्सा वहीं से बनता है.
नाश्ता (सुबह 8:00 से 9:00)
यह दिन का सबसे ज़रूरी खाना है, इसलिए नहीं कि नाश्ता छोड़ने से वजन बढ़ता है, बल्कि इसलिए कि प्रोटीन वाला नाश्ता दोपहर तक की भूख को शांत रखता है.
शाकाहारी विकल्प:
- 2 मूंग दाल का चीला और एक कटोरी दही
- 1 कटोरी पोहा जिसमें मूंगफली और मटर डली हो, साथ में एक गिलास छाछ
- 2 इडली और सांभर, ऊपर से नारियल की चटनी की जगह सांभर की मात्रा बढ़ा दीजिए
- 1 कटोरी दलिया नमकीन सब्ज़ियों के साथ और साथ में पनीर के दो टुकड़े
मांसाहारी विकल्प:
- 2 से 3 उबले अंडे और 1 रोटी
- 2 अंडे का आमलेट कम तेल में, साथ में एक कटोरी दही
बचने वाली चीज़ें: सिर्फ पराठा और अचार, सिर्फ ब्रेड और जैम, सिर्फ चाय बिस्किट. इनमें प्रोटीन लगभग शून्य होता है और भूख ग्यारह बजे तक लौट आती है. नाश्ते के और विकल्प देखने हों तो वजन घटाने के लिए नाश्ता में पूरी सूची मिल जाएगी.
मिड मॉर्निंग (सुबह 11:00 के आसपास)
यह हिस्सा वैकल्पिक है. अगर नाश्ता ठीक से हुआ है तो अक्सर इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती.
अगर भूख लगती है तो: एक फल, या मुट्ठी भर भुना चना, या 5 से 6 बादाम, या एक गिलास छाछ. यहां सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग सूखे मेवे को हेल्दी मानकर बेहिसाब खाते हैं. मुट्ठी भर का मतलब मुट्ठी भर है, कटोरी भर नहीं.
दोपहर का खाना (दोपहर 1:00 से 2:00)
यहां थाली का अनुपात याद रखिए: आधी थाली सब्ज़ी और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन, एक चौथाई अनाज.
शाकाहारी थाली:
- 2 रोटी या 1 कटोरी चावल
- 1 कटोरी दाल या राजमा या छोले
- 1 कटोरी हरी सब्ज़ी
- 1 कटोरी दही
- खीरा, टमाटर, प्याज़ का सलाद
मांसाहारी थाली:
- 2 रोटी या 1 कटोरी चावल
- 1 कटोरी चिकन या मछली की तरी वाली सब्ज़ी, कम तेल में
- 1 कटोरी सब्ज़ी
- सलाद
रोटी और चावल में से एक चुनिए, दोनों साथ में तभी लीजिए जब मात्रा आधी आधी कर दें. खाने की शुरुआत सलाद या सब्ज़ी से कीजिए, फिर प्रोटीन, अनाज सबसे बाद में. यह छोटा सा क्रम बदलने से थाली अक्सर अपने आप कम हो जाती है, क्योंकि पेट पहले फाइबर और प्रोटीन से भरता है.
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शाम की चाय (शाम 4:30 से 5:30)
दिन का यह हिस्सा सबसे ज़्यादा चार्ट तोड़ता है, इसलिए इसे पहले से तय करना सबसे ज़रूरी है.
चाय या कॉफी बिना चीनी या कम चीनी के साथ इनमें से कोई एक:
- मुट्ठी भर भुना चना या मखाना
- 1 उबला अंडा
- 1 फल
- भुनी हुई मूंगफली, थोड़ी सी
- अंकुरित मूंग की चाट
अगर घर में शाम को हमेशा तला हुआ बनता है, तो सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि उसे बंद करने की कोशिश करने के बजाय हफ्ते में दो दिन तय कर दीजिए. जो चीज़ पूरी तरह बंद की जाती है, वह अक्सर तीसरे हफ्ते बदले के साथ लौटती है.
रात का खाना (रात 7:30 से 8:30)
रात का खाना हल्का होना चाहिए, इसका मतलब कम खाना नहीं, कम तला और कम भारी खाना है.
- 1 से 2 रोटी, या एक छोटी कटोरी चावल
- 1 कटोरी दाल या 1 कटोरी पनीर की सब्ज़ी या 1 कटोरी चिकन
- 1 बड़ी कटोरी सब्ज़ी
- सलाद
रात में मात्रा से ज़्यादा फर्क समय डालता है. सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खत्म करने से नींद बेहतर होती है और अगली सुबह पेट हल्का रहता है. यह किस तरह काम करता है, इस पर वजन घटाने के लिए रात का खाना कब खाएं में विस्तार से लिखा है.
सोने से पहले (वैकल्पिक)
अगर रात को भूख लगती है तो एक गिलास गुनगुना दूध या एक कटोरी दही. अगर नहीं लगती तो कुछ भी ज़रूरी नहीं है. सोने से पहले दूध पीना न वजन बढ़ाता है न घटाता है, यह सिर्फ आपके दिन की कुल मात्रा का हिस्सा है.
बिना तराजू के मात्रा कैसे नापें
तराजू और ऐप सटीक होते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग उन्हें दो हफ्ते से आगे नहीं निभा पाते. हाथ का हिसाब जीवन भर चलता है:
- प्रोटीन: एक हथेली जितना, हर मुख्य खाने में
- अनाज: एक मुट्ठी जितना पका हुआ चावल, या 2 रोटी
- सब्ज़ी: दोनों हाथों की अंजुली भर
- तेल या घी: एक अंगूठे जितना, प्रति खाना
- मेवा: एक अधूरी मुट्ठी, कटोरी नहीं
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अपने आप शरीर के आकार के हिसाब से ढल जाता है. एक लंबे चौड़े आदमी की हथेली बड़ी होती है, इसलिए उसका हिस्सा अपने आप बड़ा हो जाता है, और यही सही भी है.