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वजन घटाने के लिए Diet Chart: सुबह से रात तक का पूरा प्लान (Hindi)

SuperLiving Expert Team·

वजन घटाने के लिए Diet Chart: सुबह से रात तक का पूरा प्लान

छोटा जवाब

वजन घटाने वाला डाइट चार्ट कोई खास खाना नहीं होता. वह आपके घर में बनने वाला खाना ही होता है, बस उसकी मात्रा और थाली में उसका अनुपात तय होता है. एक ऐसा दिन जिसमें प्रोटीन हर खाने में मौजूद हो, सब्ज़ी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा हो, अनाज नापकर हो, और तला हुआ या मीठा तय दिनों तक सीमित हो, वजन घटाने के लिए काफी है.

नीचे पूरे दिन का चार्ट है, सुबह उठने से रात सोने तक, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्पों के साथ. लेकिन उससे पहले एक बात साफ कर लेते हैं, क्योंकि यही बात तय करती है कि चार्ट चलेगा या तीसरे दिन बंद हो जाएगा.

डाइट चार्ट काम क्यों करता है, और कब नहीं करता

चार्ट का असली काम फैसले कम करना है.

दिन में जितनी बार आपको यह सोचना पड़ता है कि अब क्या खाऊं, उतनी बार गलत चुनाव की संभावना बनती है. शाम को भूख लगी हो, थकान हो, और घर में कुछ तय न हो, तो हाथ बिस्किट या नमकीन तक ही जाता है. चार्ट उस पल को पहले से तय कर देता है, इसलिए काम करता है.

चार्ट तब फेल होता है जब वह आपकी रसोई से मेल नहीं खाता. इंटरनेट पर मिलने वाले ज़्यादातर चार्ट में क्विनोआ, ओट्स, बेरीज़ और सलाद के पत्ते होते हैं. भारतीय घर में यह चीज़ें रोज़ नहीं बनतीं, इसलिए चार दिन बाद वह चार्ट कागज़ पर रह जाता है और खाना फिर वही पुराना चलने लगता है. जो चार्ट रोटी, दाल, चावल, सब्ज़ी, दही और अंडे से बनता है, वह टिकता है.

और एक सच जो साफ कहना ज़रूरी है: वजन तभी घटता है जब दिन भर में शरीर को उससे कम ऊर्जा मिले जितनी वह खर्च करता है. चार्ट का पूरा ढांचा इसी को आसान बनाने के लिए है, न कि किसी जादुई खाने के लिए. यह हिस्सा विस्तार से समझने के लिए कैलोरी डेफिसिट क्या होता है पढ़ लीजिए, उसके बाद यह चार्ट कहीं ज़्यादा समझ आएगा.

चार्ट शुरू करने से पहले तीन चीज़ें तय कर लीजिए

पहली, प्रोटीन का लक्ष्य. ज़्यादातर भारतीय थाली में प्रोटीन सबसे कमज़ोर हिस्सा होता है, और यही वजह है कि लोग खाने के दो घंटे बाद फिर भूखे हो जाते हैं. मोटे तौर पर हर मुख्य खाने में एक हथेली जितना प्रोटीन रखने का लक्ष्य बनाइए, यानी दाल, पनीर, अंडा, सोया, चना, चिकन या मछली में से कुछ.

दूसरी, अनाज की मात्रा. रोटी और चावल दुश्मन नहीं हैं, बेहिसाब रोटी और चावल दिक्कत हैं. मात्रा तय कर देने भर से आधा काम हो जाता है.

तीसरी, तेल का हिसाब. एक चम्मच तेल में लगभग उतनी ऊर्जा होती है जितनी एक पूरी रोटी में. रसोई में तेल डालने का तरीका बदल देना, यानी सीधे बोतल से डालने की जगह चम्मच से नापकर डालना, अक्सर वह एक बदलाव होता है जिसका असर सबसे ज़्यादा दिखता है और मेहनत सबसे कम लगती है.

पूरे दिन का डाइट चार्ट

यह चार्ट एक आम कामकाजी दिन के हिसाब से बना है. समय आप अपने रूटीन के हिसाब से आगे पीछे कर सकते हैं, क्रम वही रहेगा.

उठते ही (सुबह 6:30 से 7:30)

एक से दो गिलास सादा पानी. चाहें तो गुनगुना कर लीजिए, चाहें तो उसमें नींबू निचोड़ लीजिए, दोनों ठीक हैं.

यहां साफ कर देना ज़रूरी है कि सुबह खाली पेट पिया गया कोई भी पानी अपने आप चर्बी नहीं घटाता. इसका असली फायदा यह है कि रात भर की कमी पूरी होती है और सुबह की झूठी भूख कम लगती है, जो अक्सर प्यास ही होती है. अगर आप चाय के बिना नहीं रह सकते तो चाय पीजिए, बस उसके साथ बिस्किट और रस्क का सिलसिला मत शुरू कीजिए, क्योंकि दिन का सबसे बेहिसाब हिस्सा वहीं से बनता है.

नाश्ता (सुबह 8:00 से 9:00)

यह दिन का सबसे ज़रूरी खाना है, इसलिए नहीं कि नाश्ता छोड़ने से वजन बढ़ता है, बल्कि इसलिए कि प्रोटीन वाला नाश्ता दोपहर तक की भूख को शांत रखता है.

शाकाहारी विकल्प:

  • 2 मूंग दाल का चीला और एक कटोरी दही
  • 1 कटोरी पोहा जिसमें मूंगफली और मटर डली हो, साथ में एक गिलास छाछ
  • 2 इडली और सांभर, ऊपर से नारियल की चटनी की जगह सांभर की मात्रा बढ़ा दीजिए
  • 1 कटोरी दलिया नमकीन सब्ज़ियों के साथ और साथ में पनीर के दो टुकड़े

मांसाहारी विकल्प:

  • 2 से 3 उबले अंडे और 1 रोटी
  • 2 अंडे का आमलेट कम तेल में, साथ में एक कटोरी दही

बचने वाली चीज़ें: सिर्फ पराठा और अचार, सिर्फ ब्रेड और जैम, सिर्फ चाय बिस्किट. इनमें प्रोटीन लगभग शून्य होता है और भूख ग्यारह बजे तक लौट आती है. नाश्ते के और विकल्प देखने हों तो वजन घटाने के लिए नाश्ता में पूरी सूची मिल जाएगी.

मिड मॉर्निंग (सुबह 11:00 के आसपास)

यह हिस्सा वैकल्पिक है. अगर नाश्ता ठीक से हुआ है तो अक्सर इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती.

अगर भूख लगती है तो: एक फल, या मुट्ठी भर भुना चना, या 5 से 6 बादाम, या एक गिलास छाछ. यहां सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग सूखे मेवे को हेल्दी मानकर बेहिसाब खाते हैं. मुट्ठी भर का मतलब मुट्ठी भर है, कटोरी भर नहीं.

दोपहर का खाना (दोपहर 1:00 से 2:00)

यहां थाली का अनुपात याद रखिए: आधी थाली सब्ज़ी और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन, एक चौथाई अनाज.

शाकाहारी थाली:

  • 2 रोटी या 1 कटोरी चावल
  • 1 कटोरी दाल या राजमा या छोले
  • 1 कटोरी हरी सब्ज़ी
  • 1 कटोरी दही
  • खीरा, टमाटर, प्याज़ का सलाद

मांसाहारी थाली:

  • 2 रोटी या 1 कटोरी चावल
  • 1 कटोरी चिकन या मछली की तरी वाली सब्ज़ी, कम तेल में
  • 1 कटोरी सब्ज़ी
  • सलाद

रोटी और चावल में से एक चुनिए, दोनों साथ में तभी लीजिए जब मात्रा आधी आधी कर दें. खाने की शुरुआत सलाद या सब्ज़ी से कीजिए, फिर प्रोटीन, अनाज सबसे बाद में. यह छोटा सा क्रम बदलने से थाली अक्सर अपने आप कम हो जाती है, क्योंकि पेट पहले फाइबर और प्रोटीन से भरता है.

जानकारी काफी नहीं होती, रोज़ निभाना असली काम है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी रसोई, आपके काम के घंटे और आपकी थाली के हिसाब से इस चार्ट को ढालते हैं, मात्रा तय करने में मदद करते हैं, और उन हफ्तों में साथ रहते हैं जब रूटीन टूटने लगता है. SuperLiving डाउनलोड करें

शाम की चाय (शाम 4:30 से 5:30)

दिन का यह हिस्सा सबसे ज़्यादा चार्ट तोड़ता है, इसलिए इसे पहले से तय करना सबसे ज़रूरी है.

चाय या कॉफी बिना चीनी या कम चीनी के साथ इनमें से कोई एक:

  • मुट्ठी भर भुना चना या मखाना
  • 1 उबला अंडा
  • 1 फल
  • भुनी हुई मूंगफली, थोड़ी सी
  • अंकुरित मूंग की चाट

अगर घर में शाम को हमेशा तला हुआ बनता है, तो सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि उसे बंद करने की कोशिश करने के बजाय हफ्ते में दो दिन तय कर दीजिए. जो चीज़ पूरी तरह बंद की जाती है, वह अक्सर तीसरे हफ्ते बदले के साथ लौटती है.

रात का खाना (रात 7:30 से 8:30)

रात का खाना हल्का होना चाहिए, इसका मतलब कम खाना नहीं, कम तला और कम भारी खाना है.

  • 1 से 2 रोटी, या एक छोटी कटोरी चावल
  • 1 कटोरी दाल या 1 कटोरी पनीर की सब्ज़ी या 1 कटोरी चिकन
  • 1 बड़ी कटोरी सब्ज़ी
  • सलाद

रात में मात्रा से ज़्यादा फर्क समय डालता है. सोने से कम से कम दो घंटे पहले खाना खत्म करने से नींद बेहतर होती है और अगली सुबह पेट हल्का रहता है. यह किस तरह काम करता है, इस पर वजन घटाने के लिए रात का खाना कब खाएं में विस्तार से लिखा है.

सोने से पहले (वैकल्पिक)

अगर रात को भूख लगती है तो एक गिलास गुनगुना दूध या एक कटोरी दही. अगर नहीं लगती तो कुछ भी ज़रूरी नहीं है. सोने से पहले दूध पीना न वजन बढ़ाता है न घटाता है, यह सिर्फ आपके दिन की कुल मात्रा का हिस्सा है.

बिना तराजू के मात्रा कैसे नापें

तराजू और ऐप सटीक होते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग उन्हें दो हफ्ते से आगे नहीं निभा पाते. हाथ का हिसाब जीवन भर चलता है:

  • प्रोटीन: एक हथेली जितना, हर मुख्य खाने में
  • अनाज: एक मुट्ठी जितना पका हुआ चावल, या 2 रोटी
  • सब्ज़ी: दोनों हाथों की अंजुली भर
  • तेल या घी: एक अंगूठे जितना, प्रति खाना
  • मेवा: एक अधूरी मुट्ठी, कटोरी नहीं

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अपने आप शरीर के आकार के हिसाब से ढल जाता है. एक लंबे चौड़े आदमी की हथेली बड़ी होती है, इसलिए उसका हिस्सा अपने आप बड़ा हो जाता है, और यही सही भी है.

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हफ्ते भर का रोटेशन

रोज़ एक ही चीज़ खाने से चार्ट बोरियत की वजह से टूटता है. एक आसान रोटेशन यह है:

  • सोमवार, गुरुवार: दाल आधारित दिन, नाश्ते में चीला
  • मंगलवार, शुक्रवार: राजमा या छोले वाला दिन, नाश्ते में पोहा या उपमा
  • बुधवार: पनीर या सोया वाला दिन, नाश्ते में दलिया
  • शनिवार: अंडा या चिकन वाला दिन, या शाकाहारी हों तो चना और दही
  • रविवार: एक खाना अपनी पसंद का, बाकी दिन सामान्य चार्ट

रविवार वाला हिस्सा जानबूझकर रखा गया है. जो चार्ट किसी भी दिन कोई छूट नहीं देता, वह लंबा नहीं चलता. कौन सी देसी चीज़ें इस रोटेशन में सबसे अच्छी बैठती हैं, यह वजन घटाने के लिए सबसे अच्छे भारतीय खाने में मिल जाएगा.

जो गलतियां इस चार्ट को फेल करती हैं

पहली, तरल कैलोरी को न गिनना. दिन की तीन चाय जिनमें दो चम्मच चीनी हो, एक कोल्ड ड्रिंक, या एक फलों का जूस, यह सब मिलकर अक्सर एक पूरे खाने जितनी ऊर्जा दे जाते हैं और पेट बिल्कुल नहीं भरता. जो चीज़ पी जाती है, वह याद भी नहीं रहती, इसलिए यह सबसे चुपचाप होने वाली गलती है.

दूसरी, चार्ट को सज़ा बना देना. उबली सब्ज़ी और बिना नमक की दाल वाला चार्ट दो हफ्ते चलता है, फिर पूरी तरह छूटता है. मसाला, तड़का और स्वाद रहने दीजिए, बस तेल की मात्रा नापिए.

तीसरी, दिन भर भूखे रहकर रात को हिसाब बिगाड़ना. पूरे दिन थोड़ा थोड़ा खाकर बचाई गई कैलोरी अक्सर रात नौ बजे एक बार में वापस चली जाती है. दिन का खाना ठीक से खाना ही रात की बेकाबू भूख का सबसे अच्छा इलाज है.

चौथी, हर दिन तराजू पर चढ़ना. शरीर का वजन दिन प्रतिदिन नमक, पानी, नींद और महिलाओं में महीने के चक्र से एक से दो किलो तक ऊपर नीचे होता है. रोज़ तौलने से सिर्फ मन खराब होता है. हफ्ते में एक बार, एक ही दिन, सुबह खाली पेट काफी है.

पांचवीं, कसरत को चार्ट का विकल्प मान लेना. आधे घंटे की तेज़ चाल से जितनी ऊर्जा खर्च होती है, वह एक समोसे से कम होती है. चलना बहुत ज़रूरी है, लेकिन वह खाने के हिसाब की जगह नहीं ले सकता.

बाहर का खाना, शादी और त्योहार

यह हिस्सा हर चार्ट में गायब रहता है, और असल ज़िंदगी में यही सबसे ज़्यादा होता है.

बाहर खाते समय तीन नियम काफी हैं. पहला, तरी वाली चीज़ के बजाय तंदूर या भुनी हुई चीज़ चुनिए. दूसरा, मीठा पीने वाला कुछ भी मत लीजिए, पानी या छाछ लीजिए. तीसरा, रोटी या नान में से एक ही लीजिए और उसके साथ सलाद ज़रूर मंगाइए.

शादी में जाने से पहले भूखे मत रहिए. यह सबसे आम और सबसे उल्टी पड़ने वाली तैयारी है. जाने से पहले दही या फल खाकर जाइए, वहां पहले सलाद और प्रोटीन वाली चीज़ें लीजिए, फिर जो खाना है खाइए. एक दिन से कुछ नहीं बिगड़ता, बिगड़ता तब है जब उस एक दिन के बाद तीन दिन का अपराधबोध शुरू होता है.

कितने दिन में असर दिखेगा

पहले हफ्ते में तराजू पर जो गिरावट दिखती है, उसका बड़ा हिस्सा पानी होता है, इसलिए उससे न ज़्यादा खुश होने की ज़रूरत है न दूसरे हफ्ते की धीमी रफ्तार से निराश.

असली, टिकने वाली रफ्तार आमतौर पर हफ्ते में आधा किलो से एक किलो के बीच होती है. लेकिन तराजू से पहले कुछ और चीज़ें बदलती हैं और उन्हें नोट करना ज़्यादा उपयोगी है: दोपहर के बाद नींद जैसा भारीपन कम होना, कपड़ों का कमर पर ढीला लगना, शाम की भूख का काबू में आना, और खाने के बाद पेट का फूला हुआ महसूस न होना. यह सब पहले दो से तीन हफ्तों में दिखने लगता है.

अगर चार से छह हफ्ते ईमानदारी से चलने के बाद भी कुछ नहीं बदलता, तो सबसे पहले मात्रा दोबारा जांचिए, फिर तेल और तरल कैलोरी. उसके बाद भी अगर तस्वीर वैसी ही है, तो थायराइड जैसी वजहों की जांच समझदारी है. उस दिशा में क्या बदलता है, यह थायराइड में वजन कैसे कम करें में समझाया गया है.

मिलाकर बात यह है

आपको कोई नया खाना नहीं सीखना है. आपको वही रोटी, दाल, सब्ज़ी, दही और चावल चाहिए, बस थाली का अनुपात तय करना है, प्रोटीन हर खाने में लाना है, तेल नापना है, और शाम का नाश्ता पहले से तय रखना है.

अगर आपको इस पूरे लेख से सिर्फ तीन चीज़ें याद रखनी हों तो यह हों: हर खाने में एक हथेली प्रोटीन, आधी थाली सब्ज़ी, और जो पिया जाता है उसे भी गिनना. यही तीन चीज़ें ज़्यादातर लोगों का काम कर देती हैं.

चार्ट का एक दूसरा रूप, जिसमें 7 दिन का दिन प्रतिदिन प्लान दिया गया है, वजन घटाने का डाइट चार्ट हिंदी में पर मौजूद है. दोनों को साथ पढ़िए तो अपनी रसोई के हिसाब से अपना चार्ट बनाना और आसान हो जाएगा.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं है, मुश्किल हिस्सा यह है कि यह सब हफ्ते दर हफ्ते चलता रहे. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में इसे आपकी रसोई और आपके दिन के हिसाब से छोटे कदमों में बांटते हैं, ताकि यह एक और लंबी सूची नहीं, बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वजन घटाने के लिए दिन में कितनी बार खाना चाहिए? जितनी बार आप ईमानदारी से निभा सकें. शोध में बार बार यह निकला है कि खाने की संख्या अपने आप वजन नहीं घटाती, दिन भर की कुल मात्रा घटाती है. दिन में तीन बार खाने वाले और छह बार खाने वाले, दोनों का वजन एक जैसा घटता है अगर कुल मात्रा एक जैसी हो. इसलिए सवाल यह है कि किस तरीके से आपको दो खानों के बीच इतनी भूख नहीं लगती कि आप कुछ भी उठाकर खा लें. ज़्यादातर भारतीय घरों में तीन मुख्य खाने और एक हल्का शाम का नाश्ता सबसे आसानी से चलता है, क्योंकि यह घर की रसोई के समय से मेल खाता है.

क्या रात को रोटी या चावल छोड़ देने से वजन तेज़ी से घटता है? रात को रोटी या चावल छोड़ना अपने आप वजन नहीं घटाता, लेकिन ज़्यादातर लोगों का वजन इससे घटता ज़रूर है, और वजह अलग है. रात का खाना वह समय है जब लोग सबसे ज़्यादा और सबसे बेध्यानी से खाते हैं, इसलिए मात्रा तय कर देने से उस एक खाने का हिसाब अपने आप छोटा हो जाता है. लेकिन पूरी तरह छोड़ देना अक्सर उल्टा पड़ता है, क्योंकि सुबह भूख दोगुनी लगती है और लोग नाश्ते में हिसाब बिगाड़ लेते हैं. ज़्यादा टिकाऊ तरीका यह है कि रात में एक या दो रोटी रखिए और सब्ज़ी, दाल या दही की मात्रा बढ़ा दीजिए.

अगर एक दिन चार्ट टूट जाए तो क्या करें? अगला खाना सामान्य तरीके से खाइए, यही पूरा जवाब है. सबसे बड़ा नुकसान चार्ट टूटने से नहीं होता, टूटने के बाद की प्रतिक्रिया से होता है. लोग शादी में ज़्यादा खा लेने के बाद अगले दिन भूखे रहते हैं, फिर शाम को भूख इतनी बढ़ जाती है कि वे दोबारा ज़्यादा खा लेते हैं, और यह चक्र हफ्तों चलता है. एक दिन की ज़्यादा मात्रा से महीने भर की मेहनत नहीं मिटती, क्योंकि वजन हफ्तों के औसत से बनता है. अगले दिन बस तीन काम कीजिए: नाश्ता प्रोटीन वाला रखिए, पानी सामान्य से थोड़ा ज़्यादा पीजिए, और 20 से 30 मिनट टहल लीजिए.

क्या यह चार्ट थायराइड, शुगर या PCOS वालों के लिए भी सही है? इसका ढांचा सबके लिए काम करता है, लेकिन बारीकियां बदलती हैं और वे बदलनी चाहिए. थायराइड में वजन घटने की रफ्तार अक्सर धीमी होती है और दवा का समय खाने से जुड़ा होता है, इसलिए सुबह का हिस्सा वैसे नहीं चल सकता जैसा यहां लिखा है. शुगर में सबसे बड़ा फर्क यह पड़ता है कि कार्ब किसके साथ खाया जा रहा है, अकेला चावल और दाल चावल दोनों का असर एक जैसा नहीं होता. PCOS में प्रोटीन और चलने फिरने का हिस्सा आमतौर पर बढ़ाना पड़ता है. इन तीनों स्थितियों में इसे शुरुआती ढांचा मानिए और अपनी रिपोर्ट के साथ डॉक्टर या डाइटीशियन से ढलवा लीजिए.

बिना तराजू और बिना ऐप के मात्रा कैसे नापें? अपने हाथ से. एक हथेली जितना प्रोटीन, एक मुट्ठी जितना अनाज, दोनों हाथों की अंजुली भरकर सब्ज़ी, और एक अंगूठे जितना तेल या घी. यह तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि हाथ का आकार शरीर के आकार के साथ बदलता है, यानी बड़े आदमी को अपने आप बड़ा हिस्सा मिलता है. यह हिसाब बिल्कुल सटीक नहीं होता, लेकिन इसे रोज़ निभाया जा सकता है, और निभाया जा सकने वाला मोटा हिसाब उस सटीक हिसाब से बेहतर काम करता है जो चार दिन बाद छूट जाता है.

इस चार्ट से हफ्ते में कितना वजन कम होना चाहिए? आमतौर पर आधा किलो से एक किलो के बीच, और यह रफ्तार जितनी धीमी लगती है उतनी ही टिकाऊ होती है. पहले हफ्ते में अक्सर इससे ज़्यादा दिखता है, लेकिन वह बड़ा हिस्सा पानी होता है, चर्बी नहीं. तराजू का कांटा दिन प्रतिदिन नमक, पानी, नींद और महिलाओं में महीने के चक्र से ऊपर नीचे होता है, इसलिए रोज़ तौलने का कोई मतलब नहीं. हफ्ते में एक बार, एक ही दिन, सुबह खाली पेट तौलिए और चार हफ्तों का औसत देखिए. साथ में कमर का नाप भी लेते रहिए, क्योंकि कई बार वजन रुका दिखता है जबकि इंच कम हो रहे होते हैं.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. यह चार्ट एक आम स्वस्थ वयस्क के लिए बनाया गया सामान्य ढांचा है. अगर आपको थायराइड, डायबिटीज़, PCOS, गुर्दे या दिल से जुड़ी कोई स्थिति है, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, या आप किसी नियमित इलाज पर हैं, तो कोई भी डाइट प्लान शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें. बहुत तेज़ी से वजन घटाने वाले या किसी पूरे खाद्य समूह को हटाने वाले प्लान से बचें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वजन घटाने के लिए दिन में कितनी बार खाना चाहिए?+

जितनी बार आप ईमानदारी से निभा सकें, उतनी बार. शोध में बार बार यह निकला है कि खाने की संख्या अपने आप वजन नहीं घटाती, दिन भर की कुल मात्रा घटाती है. दिन में तीन बार खाने वाले और छह बार खाने वाले, दोनों का वजन एक जैसा घटता है अगर कुल कैलोरी एक जैसी हो. इसलिए सवाल यह नहीं कि तीन बार सही है या पांच बार, सवाल यह है कि किस तरीके से आपको दो खानों के बीच इतनी भूख नहीं लगती कि आप कुछ भी उठाकर खा लें. ज़्यादातर भारतीय घरों में तीन मुख्य खाने और एक हल्का शाम का नाश्ता सबसे आसानी से चलता है, क्योंकि यह घर की रसोई के समय से मेल खाता है. अगर आपको दोपहर तीन बजे भूख से चक्कर जैसा लगता है, तो एक मिड मॉर्निंग स्नैक जोड़ दीजिए, यह चार्ट तोड़ना नहीं है.

क्या रात को रोटी या चावल छोड़ देने से वजन तेज़ी से घटता है?+

रात को रोटी या चावल छोड़ना अपने आप वजन नहीं घटाता, लेकिन ज़्यादातर लोगों का वजन इससे घटता ज़रूर है, और वजह अलग है. रात का खाना वह समय है जब लोग सबसे ज़्यादा और सबसे बेध्यानी से खाते हैं. रोटी या चावल की मात्रा तय कर देने से उस एक खाने की कुल मात्रा अपने आप कम हो जाती है, इसलिए फर्क दिखता है. लेकिन पूरी तरह छोड़ देना अक्सर उल्टा पड़ता है, क्योंकि रात को नींद खुलती है, सुबह भूख दोगुनी लगती है, और लोग नाश्ते में हिसाब बिगाड़ लेते हैं. ज़्यादा टिकाऊ तरीका यह है कि रात में एक या दो रोटी रखिए और उसके साथ सब्ज़ी, दाल या दही की मात्रा बढ़ा दीजिए. पेट भी भरता है और अगले दिन का चार्ट भी नहीं टूटता.

अगर एक दिन चार्ट टूट जाए तो क्या करें?+

अगला खाना सामान्य तरीके से खाइए, यही पूरा जवाब है. सबसे बड़ा नुकसान चार्ट टूटने से नहीं होता, टूटने के बाद की प्रतिक्रिया से होता है. लोग शादी में ज़्यादा खा लेने के बाद अगले दिन भूखे रहते हैं, फिर शाम को भूख इतनी बढ़ जाती है कि वे दोबारा ज़्यादा खा लेते हैं, और यह चक्र हफ्तों चलता है. एक दिन की ज़्यादा कैलोरी से महीने भर की मेहनत नहीं मिटती, क्योंकि वजन हफ्तों के औसत से बनता है, एक दिन से नहीं. अगले दिन बस तीन काम कीजिए: नाश्ता प्रोटीन वाला रखिए, पानी सामान्य से थोड़ा ज़्यादा पीजिए, और 20 से 30 मिनट टहल लीजिए. सज़ा वाला उपवास मत रखिए.

क्या यह चार्ट थायराइड, शुगर या PCOS वालों के लिए भी सही है?+

इसका ढांचा सबके लिए काम करता है, लेकिन बारीकियां बदलती हैं और वे बदलनी चाहिए. थायराइड में वजन घटने की रफ्तार अक्सर धीमी होती है और दवा का समय खाने से जुड़ा होता है, इसलिए सुबह का हिस्सा वैसे नहीं चल सकता जैसा यहां लिखा है. शुगर में सबसे बड़ा फर्क यह पड़ता है कि कार्ब कितने समय में और किसके साथ खाया जा रहा है, अकेला चावल और दाल चावल दोनों का असर एक जैसा नहीं होता. PCOS में प्रोटीन और चलने फिरने का हिस्सा आमतौर पर बढ़ाना पड़ता है. इसलिए इन तीनों स्थितियों में इस चार्ट को शुरुआती ढांचा मानिए, अंतिम फैसला नहीं, और अपनी रिपोर्ट के साथ डॉक्टर या डाइटीशियन से इसे ढलवा लीजिए.

बिना तराजू और बिना ऐप के मात्रा कैसे नापें?+

अपने हाथ से. यह तरीका इसलिए काम करता है क्योंकि हाथ का आकार शरीर के आकार के साथ बदलता है, यानी बड़े आदमी को अपने आप बड़ा हिस्सा मिलता है. एक हथेली जितना प्रोटीन, यानी दाल, पनीर, अंडा, चिकन या मछली. एक मुट्ठी जितना अनाज, यानी पका हुआ चावल या रोटी. दोनों हाथों की अंजुली भरकर सब्ज़ी. एक अंगूठे जितना घी या तेल. यह हिसाब बिल्कुल सटीक नहीं होता, लेकिन इसे रोज़ निभाया जा सकता है, और निभाया जा सकने वाला मोटा हिसाब उस सटीक हिसाब से बेहतर काम करता है जो चार दिन बाद छूट जाता है. अगर आप संख्याओं से समझना चाहते हैं तो एक हफ्ते तराजू इस्तेमाल करके देख लीजिए कि आपकी कटोरी और आपकी रोटी असल में कितनी बड़ी है, फिर तराजू रख दीजिए.

इस चार्ट से हफ्ते में कितना वजन कम होना चाहिए?+

आमतौर पर आधा किलो से एक किलो के बीच, और यह रफ्तार जितनी धीमी लगती है उतनी ही टिकाऊ होती है. शुरुआत के पहले हफ्ते में अक्सर इससे ज़्यादा दिखता है, लेकिन वह बड़ा हिस्सा पानी होता है, चर्बी नहीं, इसलिए दूसरे हफ्ते की धीमी रफ्तार देखकर निराश होना ठीक नहीं. यह भी याद रखिए कि तराजू का कांटा दिन प्रतिदिन नमक, पानी, नींद और महिलाओं में महीने के चक्र से ऊपर नीचे होता है, इसलिए रोज़ तौलने का कोई मतलब नहीं. हफ्ते में एक बार, एक ही दिन, सुबह खाली पेट तौलिए और चार हफ्तों का औसत देखिए. साथ में कमर का नाप भी लेते रहिए, क्योंकि कई बार वजन रुका दिखता है जबकि इंच कम हो रहे होते हैं.

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