ऑफिस जाने वालों के लिए डाइट चार्ट: टिफिन, चाय और देर रात के खाने का पूरा हल
छोटा जवाब
अगर आप नौ से छह की नौकरी करते हैं और आपका खाना दफ्तर के हिसाब से चलता है, तो दिक्कत जानकारी की कमी नहीं है. दिक्कत यह है कि दिन का ढांचा ही गलत खाने की तरफ धकेलता है.
पूरा चार्ट एक लाइन में यह है: सुबह दस मिनट का प्रोटीन वाला नाश्ता, टिफिन में रोटी या चावल में से एक और उसके बराबर हिस्सा दाल या दही या अंडे का, ग्यारह और पांच बजे के लिए दराज़ में एक तय स्नैक, और रात का खाना जितना जल्दी हो सके, हल्का.
दफ्तर वालों की थाली की असली दिक्कत
नौकरी करने वाले लोगों का दिन लगभग हमेशा एक ही तरह से बिगड़ता है, और वह तरीका पांच हिस्सों में बंटा होता है.
पहला, नाश्ता छूट जाता है. देर से उठना, तैयार होने की जल्दी, ट्रैफिक का डर, और नतीजा यह कि दिन की शुरुआत खाली पेट होती है.
दूसरा, ग्यारह बजे की भूख गलत हाथों में चली जाती है. उस वक्त सबसे पास जो होता है वह कैंटीन का समोसा, बिस्किट या नमकीन का पैकेट होता है.
तीसरा, दोपहर का खाना भारी हो जाता है. भूख ज़्यादा होने की वजह से मात्रा बढ़ती है, और खाने के चालीस मिनट बाद आंखें बंद होने लगती हैं.
चौथा, शाम पांच बजे की चाय. इसके साथ जो बिस्किट या नमकीन जाता है वह अक्सर पूरे दिन का हिसाब बिगाड़ देता है.
पांचवां, रात का खाना देर से और भारी. घर पहुंचते पहुंचते नौ बज जाते हैं, और उस हालत में हल्का खाना लगभग असंभव लगता है.
असली दिक्कत यह है कि ये पांचों एक दूसरे से जुड़े हैं. नाश्ता छूटने से ग्यारह बजे की भूख बनती है, वह भूख दोपहर के खाने को भारी बनाती है, भारी दोपहर शाम की सुस्ती लाती है, और सुस्ती चाय बिस्किट की तरफ ले जाती है. इसलिए सुधार भी पहले हिस्से से शुरू करना पड़ता है.
सुबह का नाश्ता: दस मिनट में बनने वाले असली विकल्प
नाश्ते के लिए सबसे बड़ा बहाना समय है, इसलिए यहां सिर्फ वही विकल्प हैं जो दस मिनट में बन जाते हैं.
दो अंडे और एक रोटी या ब्रेड का टुकड़ा. सबसे तेज़ और सबसे सस्ता प्रोटीन वाला नाश्ता.
दही के साथ पोहा या उपमा. पोहा अकेला ज़्यादातर कार्ब है, इसलिए साथ में एक कटोरी दही या मूंगफली जोड़िए.
बेसन या मूंग दाल का चीला. घोल रात में बना लीजिए, सुबह सिर्फ सेंकना है.
दूध के साथ भिगोया दलिया या ओट्स. रात में भिगोकर रख दीजिए.
इडली या डोसा के साथ सांभर. नारियल चटनी ठीक है, बस मात्रा पर नज़र रखिए.
सत्तू या दूध का गिलास और एक केला. जिन दिनों वाकई समय नहीं है, उनके लिए यह न्यूनतम विकल्प है.
सिर्फ चाय और दो बिस्किट को नाश्ता मानना सबसे आम गलती है, क्योंकि उसमें प्रोटीन लगभग शून्य होता है और भूख डेढ़ घंटे में लौट आती है. और विकल्प देखने हों तो वजन घटाने के लिए नाश्ता पर पूरी सूची मौजूद है.
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टिफिन में क्या पैक करें
टिफिन का पूरा खेल एक अनुपात पर टिका है. डिब्बे को मन में तीन हिस्सों में बांट लीजिए.
एक हिस्सा अनाज का. दो रोटी, या एक कटोरी चावल. दोनों एक साथ नहीं.
एक हिस्सा प्रोटीन का. दाल, राजमा, छोले, सोयाबीन, पनीर, अंडा, दही या चिकन. यह हिस्सा ज़्यादातर टिफिन में सबसे कम होता है और सबसे ज़्यादा फर्क डालता है.
एक हिस्सा सब्ज़ी और सलाद का. कोई भी मौसमी सब्ज़ी, और साथ में खीरा, गाजर या टमाटर जैसा कुछ कच्चा.
जिस दिन सिर्फ रोटी और आलू की सूखी सब्ज़ी जा रही है, उस दिन एक छोटा डिब्बा दही या दो उबले अंडे साथ रख लेना पूरे टिफिन का असर बदल देता है.
दफ्तर में पानी. मेज़ पर एक बड़ी बोतल रखिए और उसे दो बार खत्म कीजिए. एसी वाले कमरे में प्यास कम लगती है, और शरीर उस कमी को अक्सर भूख समझ लेता है.
दफ्तर की चाय और शाम की भूख
यह वह जगह है जहां सबसे ज़्यादा लोग फिसलते हैं, और वजह भूख से ज़्यादा आदत और थकान होती है. पांच बजे तक दोपहर के खाने को चार से पांच घंटे बीत चुके होते हैं, दिमाग थका होता है, और चाय एक ब्रेक का बहाना बन जाती है. चाय बंद करने की सलाह टिकती नहीं. करने लायक काम यह है कि चाय के साथ जाने वाली चीज़ बदल दी जाए.
दराज़ में यह रखिए: भुने चने, मखाना, मूंगफली, या कोई एक फल.
मेज़ से यह हटा दीजिए: बिस्किट का पैकेट, नमकीन, और मिठाई का वह डिब्बा जो किसी के जन्मदिन से बचा है. सामने रखी चीज़ आदत बनती है, दराज़ में रखी चीज़ फैसला बनती है.
दिन में चाय की गिनती: दो या तीन कप ठीक है. चीनी अगर दो चम्मच है तो उसे धीरे धीरे एक पर लाइए.
मीठे की तलब बार बार लौटती है तो उसकी अलग वजहें होती हैं, जिन्हें मीठा खाने की तलब कैसे रोकें में समझाया गया है.
रात का खाना, जो अक्सर सबसे बड़ी गलती होती है
देर से घर पहुंचना ज़्यादातर लोगों के हाथ में नहीं है, इसलिए इसे बदलने की कोशिश करने के बजाय इसके आसपास काम करना बेहतर है.
शाम सात बजे एक छोटा हिस्सा. एक कटोरी दही, एक फल, या मुट्ठी भर भुने चने. यह छोटी सी चीज़ रात नौ बजे की उस भूख को संभाल लेती है जिसकी वजह से लोग ज़रूरत से दोगुना खा जाते हैं.
रात का खाना हल्का. दाल और सब्ज़ी ज़्यादा, रोटी या चावल का हिस्सा थोड़ा छोटा, और तली हुई चीज़ें कम.
खाने और सोने के बीच अंतर. कम से कम एक घंटा, हो सके तो दो. खाना खाकर तुरंत लेट जाने से नींद और पाचन दोनों बिगड़ते हैं.
खाने के बाद दस मिनट टहलना. सबसे कम मेहनत वाला और सबसे उपेक्षित कदम.
रात के खाने का समय और वजन का रिश्ता गहराई से समझना हो तो रात का खाना किस समय खाएं इसी बात पर पूरा लेख है.