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थायराइड डाइट चार्ट: क्या खाएं, क्या न खाएं और पूरे दिन का प्लान

SuperLiving Expert Team·

थायराइड डाइट चार्ट: क्या खाएं, क्या न खाएं और पूरे दिन का प्लान

छोटा जवाब

थायराइड में कोई अलग रसोई नहीं बनानी पड़ती. घर का ही खाना चलता है, बस चार चीज़ें तय करनी होती हैं: दवा और खाने के बीच का अंतर, हर खाने में प्रोटीन, थाली में सब्ज़ी का बड़ा हिस्सा, और तेल, चीनी तथा पैकेट वाली चीज़ों की मात्रा.

खाना थायराइड का इलाज नहीं है, यह बात शुरू में ही साफ़ कर लेनी चाहिए. दवा का काम दवा करती है. लेकिन खाना यह तय करता है कि दवा ठीक से सोखी जा रही है या नहीं, आपकी थकान कैसी रहती है, पेट कैसा चलता है, और वजन धीरे धीरे घटता है या साल दर साल बढ़ता जाता है. यही वजह है कि दो लोग एक जैसी रिपोर्ट के साथ बिल्कुल अलग महसूस करते हैं.

ज़रूरी बात: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. थायराइड की दवा, उसकी मात्रा और जांच का फ़ैसला सिर्फ़ आपका डॉक्टर करेगा. अगर आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, या आपको दिल, शुगर या किडनी से जुड़ी कोई परेशानी है, तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर से बात ज़रूर कीजिए.


सबसे ज़रूरी नियम: दवा और खाने का समय

अगर आप इस पूरे लेख से सिर्फ़ एक बात याद रखें, तो यह रखिए.

थायराइड की दवा खाली पेट, सादे पानी के साथ ली जाती है, और उसके बाद कम से कम आधा घंटा कुछ भी नहीं खाया जाता. न चाय, न दूध, न बिस्किट. भारतीय घरों में सबसे आम गड़बड़ी यही है, क्योंकि सुबह की चाय दवा से पहले या साथ में ही चल जाती है.

तीन चीज़ें दवा के सोखने में सबसे ज़्यादा दखल देती हैं:

  • कैल्शियम वाली चीज़ें, यानी दूध, दही, पनीर और कैल्शियम की गोली. इन्हें दवा से कम से कम तीन से चार घंटे अलग रखना बेहतर माना जाता है.
  • आयरन की गोली, जो कई महिलाओं को अलग से लेनी पड़ती है. इसे भी दवा से कई घंटे दूर रखिए.
  • चाय और कॉफ़ी, जो दवा के तुरंत बाद ली जाएं तो सोखने की मात्रा घटा सकती हैं.

सबसे आसान तरीका यह है: दवा उठते ही लीजिए, फिर नहाना और तैयार होना निपटाइए, और उसके बाद नाश्ता तथा चाय. आधा घंटा अपने आप निकल जाता है और किसी अलग अनुशासन की ज़रूरत नहीं पड़ती.


पूरे दिन का थायराइड डाइट चार्ट

नीचे का चार्ट एक ढांचा है, पत्थर की लकीर नहीं. दिशा वही रहनी चाहिए, चीज़ें आपके घर के हिसाब से बदल सकती हैं.

उठते ही (सुबह 6:30 से 7:30)

दवा, सादे पानी के साथ. उसके बाद आधा घंटा कुछ नहीं. चाहें तो इस बीच सादा पानी और पी सकते हैं.

नाश्ता (सुबह 8:00 से 9:00)

नाश्ते में प्रोटीन होना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि थायराइड में दिन भर की थकान और दोपहर की भूख का बड़ा हिस्सा यहीं तय होता है.

  • दो अंडे और एक रोटी, या
  • मूंग दाल का चीला दही के साथ, या
  • पोहा या उपमा जिसमें मूंगफली और सब्ज़ी अच्छी मात्रा में हो, या
  • इडली सांभर, सांभर में दाल ठीक मात्रा में हो.

सिर्फ़ चाय और बिस्किट, या सिर्फ़ ब्रेड जैम वाला नाश्ता थायराइड में सबसे भारी पड़ता है, क्योंकि ग्यारह बजे तक भूख लौट आती है और दिन भर का हिसाब वहीं बिगड़ता है. नाश्ते के और विकल्प हमारे वजन घटाने के लिए नाश्ते वाले लेख में मिल जाएंगे.

मिड मॉर्निंग (सुबह 11:00 के आसपास)

एक फल, या भुना चना, या पांच छह भीगे हुए अखरोट और बादाम. मुट्ठी भर कद्दू के बीज भी अच्छे रहते हैं.

दोपहर का खाना (दोपहर 1:00 से 2:00)

थाली का हिसाब आधा सब्ज़ी, एक चौथाई प्रोटीन, एक चौथाई अनाज रखिए.

  • दो रोटी या एक कटोरी चावल
  • एक भरी कटोरी दाल, या राजमा, छोले, पनीर, चिकन या मछली
  • एक बड़ी कटोरी सब्ज़ी
  • सलाद और एक कटोरी दही

मछली हफ़्ते में दो बार रखी जा सके तो अच्छा है, क्योंकि उससे प्रोटीन और ज़रूरी वसा दोनों मिलते हैं.

शाम की चाय (शाम 4:30 से 5:30)

चाय बंद करने की ज़रूरत नहीं. साथ में क्या जा रहा है, यह तय कर लीजिए. भुना चना, मखाना, उबला अंडा, मूंगफली या एक फल. रोज़ का बिस्किट या नमकीन ही वह जगह है जहां सबसे ज़्यादा चुपचाप कैलोरी जुड़ती है.

रात का खाना (रात 7:30 से 8:30)

रात का खाना हल्का लेकिन प्रोटीन वाला रखिए. एक या दो रोटी, सब्ज़ी, दाल या पनीर, और दही. सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लीजिए, क्योंकि थायराइड में नींद पहले से ही गड़बड़ रहती है और देर से खाया भारी खाना उसे और बिगाड़ता है.

अगर आप पूरे दिन के अनुपात को और बारीकी से समझना चाहते हैं, तो हमारा वजन घटाने का डाइट चार्ट यही ढांचा और विस्तार से खोलता है.


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क्या खाना बढ़ाना चाहिए

प्रोटीन. दाल, राजमा, छोले, दही, पनीर, अंडा, चिकन और मछली. थायराइड में मांसपेशी घटने और थकान बढ़ने की शिकायत आम है, और प्रोटीन इसी पर सबसे सीधा असर करता है.

सेलेनियम वाली चीज़ें. अंडा, मछली, सूरजमुखी के बीज और साबुत अनाज. सेलेनियम थायराइड ग्रंथि के सामान्य काम में मदद करता है, लेकिन इसकी गोली अपने मन से मत लीजिए, क्योंकि ज़्यादा मात्रा नुकसान करती है.

ज़िंक वाली चीज़ें. कद्दू के बीज, काजू, चना और दालें.

फाइबर. थायराइड में कब्ज़ बहुत आम शिकायत है. सब्ज़ी, फल, साबुत दालें और पर्याप्त पानी इसका सबसे सीधा हल हैं. बस फाइबर की बड़ी मात्रा और दवा का समय एक साथ न पड़े.

आयोडीन वाला सामान्य नमक. जो घर में पहले से चल रहा है, वही काफ़ी है. इससे ज़्यादा की कोशिश करने की ज़रूरत नहीं.


क्या सीमित रखना चाहिए

पैकेट वाला और तला हुआ खाना. नमकीन, बिस्किट, चिप्स और बाहर का तला खाना. ये सूजन और भारीपन दोनों बढ़ाते हैं.

बहुत ज़्यादा चीनी. मीठी चाय, ठंडे पेय और रोज़ की मिठाई. थायराइड में ऊर्जा पहले से ऊपर नीचे होती रहती है और चीनी उस झूले को तेज़ करती है.

कच्ची गोभी और कच्चा साग बड़ी मात्रा में. पकाकर खाइए, यही असली नियम है. पकी हुई गोभी, पत्तागोभी या सरसों का साग सामान्य मात्रा में खाने से परेशानी नहीं होती.

सोया, दवा के आसपास. सोया चंक्स या सोया दूध को सुबह की दवा से कई घंटे दूर रखिए. दोपहर या रात में सामान्य मात्रा ठीक है.

शराब. नींद और लिवर दोनों पर असर डालती है, और थायराइड में दोनों पहले से नाज़ुक होते हैं.


जो गलतियां चार्ट को फेल करती हैं

दवा चाय के साथ लेना. यह अकेली गलती महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है, क्योंकि रिपोर्ट सुधरती नहीं और लोग समझते हैं कि दवा काम नहीं कर रही.

नाश्ता छोड़ देना. थकान थायराइड में पहले से है. खाली पेट दिन शुरू करने से दोपहर तक भूख इतनी बढ़ जाती है कि मात्रा काबू से बाहर चली जाती है.

गेहूं पूरी तरह बंद कर देना. जब तक डॉक्टर ने किसी खास वजह से मना न किया हो, रोटी बंद करने की ज़रूरत नहीं. इससे सिर्फ़ खाना उबाऊ बनता है और चार्ट जल्दी टूटता है.

रोज़ तौलना. थायराइड में पानी की वजह से वजन दिन प्रतिदिन ऊपर नीचे होता है. हफ़्ते में एक बार, एक ही दिन, सुबह खाली पेट तौलिए.

बहुत कम खाना. भूखे रहकर वजन घटाने की कोशिश थायराइड में उल्टी पड़ती है, क्योंकि थकान और बाल झड़ना दोनों बढ़ जाते हैं. वजन घटाने का तरीका थोड़ा कम और सही खाना है, बहुत कम खाना नहीं. यह हिस्सा हमने थायराइड में वजन कैसे कम करें में विस्तार से लिखा है.


कितने दिन में असर दिखेगा

थकान, कब्ज़ और भारीपन में फ़र्क अक्सर दो से चार हफ़्तों में महसूस होने लगता है. वजन में साफ़ बदलाव आमतौर पर छह से बारह हफ़्ते लेता है, और थायराइड में यह रफ़्तार आम लोगों से थोड़ी धीमी रहती है. यह धीमापन असफलता नहीं है, यही सामान्य है.

नापने का सही तरीका यह है: हफ़्ते में एक बार वजन, महीने में एक बार कमर का नाप, और साथ में यह भी देखिए कि दिन भर की ऊर्जा, नींद और पेट कैसा चल रहा है. कई बार तराजू रुका रहता है जबकि बाकी सब सुधर रहा होता है.


डॉक्टर को कब दिखाएं

अपनी जांच की रिपोर्ट के हिसाब से दवा और उसकी मात्रा हमेशा डॉक्टर तय करेगा. इसके अलावा इन स्थितियों में देर मत कीजिए: दिल की धड़कन का बहुत तेज़ या अनियमित लगना, गर्दन में सूजन या गांठ, निगलने या सांस लेने में दिक्कत, बिना वजह तेज़ी से वजन घटना या बढ़ना, बहुत ज़्यादा या बहुत कम माहवारी, और गर्भावस्था की योजना या शुरुआत, क्योंकि उस दौरान थायराइड की निगरानी अलग तरीके से की जाती है.


मिलाकर बात यह है

थायराइड की डाइट कोई अलग दुनिया नहीं है. दवा खाली पेट लीजिए और आधा घंटा रुकिए, नाश्ते में प्रोटीन रखिए, थाली में सब्ज़ी सबसे ज़्यादा रखिए, अनाज नापकर लीजिए, गोभी और साग पकाकर खाइए, और पैकेट वाली चीज़ों तथा चीनी को मौके तक सीमित रखिए. यही सब मिलकर वह फ़र्क बनाते हैं जो दवा अकेले नहीं बना पाती.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं है, निभाना है, खासकर तब जब वजन धीरे घटता है और मन जल्दी नतीजा मांगता है. SuperLiving पर 20+ कोच रोज़ के खाने पर नज़र रखते हैं, हिंदी और हिंग्लिश में बात करते हैं, और चार्ट को आपके घर की रसोई तथा आपकी दवा के समय के हिसाब से ढालते हैं, ताकि यह किसी और का प्लान न लगे.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

थायराइड में सुबह सबसे पहले क्या लेना चाहिए? सबसे पहले वह दवा जो आपके डॉक्टर ने लिखी है, खाली पेट, सादे पानी के साथ, और उसके बाद कम से कम आधा घंटा कुछ भी नहीं. न चाय, न दूध, न नाश्ता. दवा पेट से तब सबसे ठीक तरह सोखी जाती है जब पेट खाली हो. भारतीय घरों में सबसे आम गलती यही है कि दवा चाय के साथ ले ली जाती है, और फिर लगता है कि दवा काम नहीं कर रही.

क्या थायराइड में गोभी, पत्तागोभी और सरसों का साग बंद कर देना चाहिए? बंद करने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती, पकाकर खाने की ज़रूरत होती है. पकाने से वह असर काफ़ी घट जाता है जिसकी चर्चा होती है. दिक्कत तब बनती है जब कोई रोज़ बड़ी मात्रा में कच्ची पत्तागोभी का सलाद या कच्चे साग का जूस लेने लगे.

थायराइड में वजन क्यों नहीं घटता, जबकि डाइट सही चल रही है? तीन आम वजहें हैं: रिपोर्ट अभी पूरी तरह संतुलन में नहीं आई है, मात्रा का अंदाज़ा गलत है खासकर तेल और शाम के नाश्ते में, या पानी की वजह से आया भारीपन तराजू पर चर्बी जैसा दिख रहा है. थायराइड में वजन घटता ज़रूर है, बस रफ़्तार धीमी होती है.

क्या सोया, पनीर और दूध थायराइड में नुकसान करते हैं? नुकसान नहीं करते, बस इनका समय दवा से अलग रखना चाहिए, क्योंकि कैल्शियम दवा के सोखने में दखल दे सकता है. सोया को भी सुबह की दवा के आसपास रखने के बजाय दोपहर या रात के खाने में रखिए.

क्या थायराइड में आयोडीन वाला नमक ज़्यादा खाना चाहिए? नहीं. आयोडीन ज़रूरी है, लेकिन ज़्यादा आयोडीन उतना ही परेशान कर सकता है जितना कम. घर का सामान्य आयोडीन वाला नमक काफ़ी है. आयोडीन की गोलियां या समुद्री शैवाल अपने मन से शुरू मत कीजिए.

थायराइड डाइट का असर कितने दिन में दिखता है? थकान और भारीपन में फ़र्क अक्सर दो से चार हफ़्तों में महसूस होता है, वजन में साफ़ बदलाव छह से बारह हफ़्तों में. तीन महीने बाद भी कुछ न बदले तो दोबारा जांच करवाइए और डॉक्टर से बात कीजिए.

SuperLiving जीवनशैली और सेहत से जुड़ी मदद देता है और यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है. थायराइड की दवा, उसकी मात्रा और जांच के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर से सलाह लीजिए.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

थायराइड में सुबह सबसे पहले क्या लेना चाहिए?+

सबसे पहले वह दवा जो आपके डॉक्टर ने लिखी है, खाली पेट, सादे पानी के साथ, और उसके बाद कम से कम आधा घंटा कुछ भी नहीं. न चाय, न दूध, न नाश्ता. वजह यह है कि थायराइड की दवा पेट से तब सबसे ठीक तरह से सोखी जाती है जब पेट खाली हो, और चाय, कॉफ़ी, दूध या कैल्शियम वाली चीज़ें उसी समय पेट में हों तो सोखने की मात्रा घट सकती है. भारतीय घरों में सबसे आम गलती यही है कि दवा चाय के साथ या नाश्ते के तुरंत बाद ले ली जाती है. रिपोर्ट ठीक न आने की एक बड़ी वजह अक्सर दवा की मात्रा नहीं, दवा का समय होता है. अगर आधा घंटा रुकना मुश्किल लगता है तो दवा उठते ही सिरहाने रखे पानी से लीजिए और फिर नहाने या तैयार होने में समय निकल जाएगा.

क्या थायराइड में गोभी, पत्तागोभी और सरसों का साग बंद कर देना चाहिए?+

बंद करने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती, पकाकर खाने की ज़रूरत होती है. गोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, मूली और सरसों के साग में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो बहुत बड़ी मात्रा में और कच्चे रूप में लेने पर थायराइड ग्रंथि के काम में दखल दे सकते हैं. लेकिन भारतीय घरों में ये सब्ज़ियां लगभग हमेशा पकाकर खाई जाती हैं, और पकाने से यह असर काफ़ी घट जाता है. एक कटोरी पकी हुई गोभी की सब्ज़ी या सर्दियों में सरसों का साग किसी सामान्य व्यक्ति की रिपोर्ट नहीं बिगाड़ता. दिक्कत तब बनती है जब कोई रोज़ बड़ी मात्रा में कच्ची पत्तागोभी का सलाद या कच्चे साग का जूस पीने लगे. सादा नियम यह है: पकी हुई खाइए, रोज़ के बजाय हफ़्ते में कुछ बार खाइए, और कच्ची बड़ी मात्रा से बचिए.

थायराइड में वजन क्यों नहीं घटता, जबकि डाइट सही चल रही है?+

इसकी तीन आम वजहें होती हैं. पहली, दवा से रिपोर्ट अभी पूरी तरह संतुलन में नहीं आई है, और जब तक हार्मोन का स्तर ठीक जगह पर नहीं आता, शरीर की खर्च करने की रफ़्तार कुछ धीमी बनी रहती है. दूसरी, डाइट सही लगती है लेकिन मात्रा का अंदाज़ा गलत होता है, खासकर तेल, चाय की चीनी और शाम के छोटे छोटे नाश्ते में. तीसरी, पानी की वजह से आया भारीपन, जो थायराइड में आम है, तराजू पर चर्बी जैसा दिखता है. सबसे काम की बात यह है कि थायराइड में वजन घटता ज़रूर है, बस रफ़्तार अक्सर धीमी होती है, और धीमी रफ़्तार को असफलता समझकर लोग बीच में छोड़ देते हैं. चार हफ़्तों का औसत देखिए, और साथ में कमर का नाप भी लेते रहिए.

क्या सोया, पनीर और दूध थायराइड में नुकसान करते हैं?+

पनीर और दूध नुकसान नहीं करते, बस उनका समय दवा से अलग रखना चाहिए, क्योंकि कैल्शियम दवा के सोखने में दखल दे सकता है. दवा के बाद कम से कम आधा घंटा, और आराम से चलना हो तो एक घंटा, दूध वाली चीज़ों से दूरी रखिए. सोया के मामले में इतना ही ध्यान रखना काफ़ी है कि सोया चंक्स, सोया दूध या सोया की बड़ी मात्रा दवा के आसपास न पड़े, और दिन भर में मात्रा सामान्य रहे. हफ़्ते में दो बार सोया की सब्ज़ी खाना किसी परेशानी की वजह नहीं है. जो लोग शाकाहारी हैं और प्रोटीन के लिए सोया पर निर्भर हैं, वे उसे दोपहर या रात के खाने में रख सकते हैं, सुबह दवा के तुरंत बाद नहीं.

क्या थायराइड में आयोडीन वाला नमक ज़्यादा खाना चाहिए?+

नहीं, और यह एक आम गलतफ़हमी है. आयोडीन थायराइड के लिए ज़रूरी है, लेकिन ज़्यादा आयोडीन उतना ही परेशान कर सकता है जितना कम. भारत में आयोडीन वाला नमक आम तौर पर घर घर पहुंच चुका है, इसलिए ज़्यादातर लोगों में कमी की समस्या नहीं होती. रोज़ के खाने में सामान्य आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल कीजिए और उससे ज़्यादा की कोशिश मत कीजिए. आयोडीन की गोलियां या समुद्री शैवाल जैसे बहुत ज़्यादा आयोडीन वाले उत्पाद अपने मन से शुरू करना ठीक नहीं, क्योंकि इनसे मात्रा बहुत ऊपर चली जाती है. इस पर फैसला अपनी रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ही करे तो बेहतर है.

थायराइड डाइट का असर कितने दिन में दिखता है?+

थकान और भारीपन में फ़र्क अक्सर दो से चार हफ़्तों में महसूस होने लगता है, जबकि वजन का साफ़ बदलाव आमतौर पर छह से बारह हफ़्तों में दिखता है. यह इसलिए है कि खाने का असर पहले ऊर्जा, नींद, पाचन और सूजन पर पड़ता है, और तराजू सबसे आखिर में हिलता है. साथ में यह भी याद रखिए कि रिपोर्ट का संतुलन दवा से बनता है और उसकी अपनी रफ़्तार होती है, इसलिए डाइट और दवा दोनों को साथ चलने का समय देना पड़ता है. अगर तीन महीने ईमानदारी से चलने के बाद भी थकान वैसी ही है, वजन बिल्कुल नहीं हिला, या नए लक्षण जुड़ गए हैं, तो दोबारा जांच करवाइए और डॉक्टर से बात कीजिए.

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