जोड़ों के दर्द के लिए डाइट: सूजन कम करने वाला खाना और पूरे दिन का चार्ट
छोटा जवाब
जोड़ों के दर्द में खाने का काम दर्द को सीधे मिटाना नहीं है. उसका काम तीन चीज़ें करना है: शरीर में बनी रहने वाली हल्की सूजन को कम करना, वजन को उस दिशा में ले जाना जिससे जोड़ पर दबाव घटे, और मांसपेशी को इतना मज़बूत रखना कि पूरा भार जोड़ पर न आए.
इसका मतलब व्यावहारिक भाषा में यह है: हर भोजन में एक साफ प्रोटीन वाला हिस्सा, रोज़ की थाली में हरी सब्ज़ी और रंगीन सब्ज़ियां, हफ्ते में तीन चार दिन ओमेगा वाली चीज़ें जैसे अलसी, अखरोट या मछली, हल्दी और अदरक को खाने का नियमित हिस्सा बनाना, और दूसरी तरफ मैदा, तली हुई चीज़ें, मीठे पेय और बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड नमकीन को कम करना.
आगे इसी को पूरे दिन के चार्ट में बांटा गया है, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों विकल्पों के साथ.
जोड़ों का दर्द और खाना, रिश्ता असल में क्या है
पहले यह साफ कर लेना ज़रूरी है कि जोड़ों का दर्द एक चीज़ नहीं है.
कुछ लोगों में यह उम्र और घिसाव की वजह से होता है, जहां जोड़ की गद्दी धीरे धीरे कमज़ोर होती है. कुछ में यह शरीर की अपनी प्रतिरोधक व्यवस्था की गड़बड़ी से आता है, जहां सूजन और जकड़न मुख्य शिकायत होती है. कुछ में यह यूरिक एसिड बढ़ने से आता है, जहां दर्द अचानक और बहुत तेज़ होता है. और बहुत बड़ी संख्या में लोगों में यह बस भार, कमज़ोर मांसपेशी और बैठे रहने की आदत का नतीजा होता है.
खाने का असर इन सब में एक जैसा नहीं होता. लेकिन एक चीज़ लगभग सब में साझा है, और वह है शरीर में लगातार बनी रहने वाली हल्की सूजन. यह वैसी सूजन नहीं जो चोट लगने पर दिखती है, यह धीमी और लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है, जिसे थाली रोज़ थोड़ा बढ़ा भी सकती है और थोड़ा घटा भी सकती है.
इसलिए इस लेख का पूरा ढांचा यही है: जो चीज़ें इस धीमी सूजन को बढ़ाती हैं उन्हें कम करना, और जो घटाती हैं उन्हें रोज़ की थाली का हिस्सा बनाना.
सबसे बड़ा लीवर जिस पर सबसे कम बात होती है
अगर आपके जोड़ों में दर्द है और आपका वजन ज़रूरत से ज़्यादा है, तो सबसे ताकतवर बदलाव कोई खास मसाला या कोई खास सब्ज़ी नहीं है. वह वजन है.
वजह सीधी है. चलते समय घुटने पर शरीर के वजन का कई गुना दबाव पड़ता है, और सीढ़ी उतरते समय यह और बढ़ जाता है. यानी थोड़ी सी भी कमी रोज़ के कुल दबाव को काफी घटा देती है, क्योंकि यह हर कदम पर गुणा होकर काम करता है.
लेकिन यहां एक शर्त है जिसे लोग अक्सर तोड़ देते हैं. वजन इस तरह नहीं घटना चाहिए कि मांसपेशी भी साथ चली जाए. बहुत कम खाकर तेज़ी से वजन घटाने में प्रोटीन कम पड़ता है और जोड़ को सहारा देने वाली व्यवस्था और कमज़ोर हो जाती है.
इसलिए यहां तरीका धीमा और प्रोटीन वाला होना चाहिए. पूरे दिन का संतुलित ढांचा कैसा दिखता है, यह समझने के लिए वजन घटाने का डाइट चार्ट एक अच्छा साथी लेख है, क्योंकि जोड़ों के लिए बनाई गई थाली और वजन के लिए बनाई गई थाली में अस्सी प्रतिशत हिस्सा एक जैसा होता है.
क्या खाना चाहिए, और क्यों
हरी और रंगीन सब्ज़ियां
पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, लौकी, तोरई, गाजर, चुकंदर, शिमला मिर्च. इनका काम सिर्फ विटामिन देना नहीं है. इनमें मौजूद तत्व शरीर में उस नुकसान को कम करते हैं जो लंबे समय तक चलने वाली सूजन के साथ चलता है. रोज़ की थाली में कम से कम दो अलग रंग की सब्ज़ी होनी चाहिए, और उनमें से एक हरी पत्तेदार.
ओमेगा वाली चिकनाई
यह वह हिस्सा है जो भारतीय थाली में सबसे ज़्यादा गायब रहता है. अलसी के भुने और पिसे बीज, अखरोट, चिया के बीज, और मांसाहारी लोगों के लिए तैलीय मछली जैसे बांगड़ा, सुरमई या रावस. इस तरह की चिकनाई सूजन के रास्ते पर सीधा असर डालती है, और यह उन गिने चुने खाने के बदलावों में है जिनका जोड़ों की तकलीफ से संबंध बार बार देखा गया है. रोज़ एक चम्मच पिसी अलसी दही या दलिये में मिलाना सबसे आसान शुरुआत है.
प्रोटीन, हर भोजन में
गाढ़ी दाल, राजमा, छोले, सोयाबीन की बड़ी, पनीर, दही, दूध, भुने चने, मूंगफली, और जो खाते हैं उनके लिए अंडा और मछली. जोड़ के आसपास की मांसपेशी जितनी मज़बूत होगी, जोड़ पर सीधा भार उतना कम पड़ेगा. उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशी अपने आप घटती है, और प्रोटीन कम होने पर यह और तेज़ी से घटती है.
कैल्शियम और विटामिन डी
दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. साथ में धूप, क्योंकि विटामिन डी के बिना कैल्शियम का बड़ा हिस्सा सोखा ही नहीं जाता. यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि हड्डी की मज़बूती और जोड़ की तकलीफ दो अलग चीज़ें हैं, लेकिन जिन लोगों में विटामिन डी बहुत कम होता है उनमें मांसपेशी की कमज़ोरी और फैला हुआ दर्द आम शिकायत है.
हल्दी, अदरक, लहसुन और दालचीनी
ये रोज़ के मसाले हैं और इनका काम धीमा लेकिन असली है. हल्दी को थोड़ी चिकनाई और चुटकी भर काली मिर्च के साथ लेने पर शरीर इसे बेहतर सोखता है. अदरक कई लोगों में सुबह की जकड़न में हल्का आराम देता है. इन्हें नुस्खा मानने के बजाय रोज़ की रसोई का हिस्सा मानना ज़्यादा काम आता है.
पानी
जोड़ की गद्दी और उसके आसपास का तरल, दोनों को पानी चाहिए. दिन भर सादा पानी ठीक मात्रा में पीना सबसे सस्ती और सबसे ज़्यादा टाली जाने वाली आदत है.
जानकारी काफी नहीं होती, रोज़ निभाना असली काम है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली, आपके काम के घंटे और आपके जोड़ों की मौजूदा हालत के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, प्रोटीन और हलचल का हिसाब आसान बनाते हैं, और उन हफ्तों में साथ रहते हैं जब दर्द की वजह से रूटीन टूटने लगता है. SuperLiving डाउनलोड करें
क्या कम करना समझदारी है
मैदा और बहुत ज़्यादा रिफाइंड चीज़ें. ब्रेड, बिस्किट, नमकीन, बेकरी का सामान. ये जल्दी पचकर खून में शक्कर का उछाल लाते हैं और उस धीमी सूजन को बनाए रखने में हिस्सा डालते हैं.
मीठे पेय और पैकेट का जूस. यह उन कुछ चीज़ों में है जिनका संबंध जोड़ों की तकलीफ बढ़ने से बार बार देखा गया है. इनसे मिलने वाली कैलोरी पेट भी नहीं भरती, इसलिए वजन पर असर दोहरा पड़ता है.
बार बार गरम किए गए तेल में तली चीज़ें. समोसा, पकौड़ा, पूरी, बाहर की तली हुई चीज़ें. यहां असली दिक्कत तेल का दोबारा गरम होना और मात्रा है, कभी कभार घर पर बनी तली चीज़ का मतलब यह नहीं कि सब बिगड़ गया.
बहुत ज़्यादा नमक और प्रोसेस्ड मांस. पैकेट का नमकीन, अचार की ज़्यादा मात्रा, और लंबे समय तक टिकने वाला प्रोसेस्ड मांस.
शराब. यह दो तरफ से नुकसान करती है. एक, यह खाली कैलोरी देकर वजन बढ़ाती है. दो, यह यूरिक एसिड बढ़ाने वाली चीज़ों में गिनी जाती है, और जिन लोगों का दर्द उससे जुड़ा है उनमें यह सीधा असर डालती है.
एक बात साफ कर देना ज़रूरी है. दही, टमाटर, बैंगन और आलू जैसी चीज़ों को जोड़ों के दर्द में पूरी तरह बंद कर देने की सलाह बहुत आम है, लेकिन इसके पीछे मज़बूत सबूत नहीं है. इन्हें बिना जांचे हटा देने से थाली कमज़ोर होती है और फायदा उल्टा घट जाता है.
अगर दर्द यूरिक एसिड से जुड़ा है
यह अलग से समझने वाली स्थिति है, क्योंकि इसमें थाली के नियम थोड़े बदल जाते हैं.
पहचान यह है कि दर्द अचानक शुरू होता है, बहुत तेज़ होता है, अक्सर एक ही जोड़ में होता है, और वह जोड़ लाल, गरम और छूने में बहुत दर्द वाला हो जाता है. पैर का अंगूठा सबसे आम जगह है.
ऐसी स्थिति में शराब, ज़्यादा मात्रा में लाल मांस और कुछ खास मछलियां, और मीठे पेय पर ध्यान देना सबसे ज़्यादा मायने रखता है, साथ में पानी की मात्रा बढ़ाना. दालें और सब्ज़ियां पूरी तरह बंद करने की सलाह पुरानी है. इस हिस्से के लिए यूरिक एसिड कैसे कम करें पढ़ना ज़्यादा उपयोगी रहेगा.