गर्भावस्था में सही पोषण और आहार: क्या खाएं, कितना खाएं और किन चीज़ों से बचें
छोटा जवाब
गर्भावस्था में सबसे ज़्यादा सुनी जाने वाली सलाह है कि अब दो लोगों के लिए खाओ. यह सलाह प्यार से दी जाती है, लेकिन आधी गलत है. आपको दोगुना खाना नहीं चाहिए, आपको दोगुना पोषण चाहिए. पहली तिमाही में अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत लगभग नहीं होती, दूसरी तिमाही में रोज़ करीब एक छोटे नाश्ते जितनी और तीसरी तिमाही में उससे थोड़ी ज़्यादा.
असली फर्क थाली की गुणवत्ता से आता है. हर भोजन में प्रोटीन का एक हिस्सा, रोज़ हरी पत्तेदार सब्ज़ी, दूध या दही, मौसमी फल, साबुत अनाज, आयोडीन वाला नमक और भरपूर पानी. साथ में कच्चे या अधपके खाने से दूरी, शराब पूरी तरह बंद, और चाय कॉफी सीमित. डॉक्टर जो जांच और सप्लीमेंट बताएं, उन्हें नियम से लेना. बस इतना ही, और इसे नौ महीने निभाना ही असली काम है.
गर्भावस्था में पोषण की ज़रूरत असल में कितनी बढ़ती है
गर्भावस्था में शरीर एक साथ कई काम कर रहा होता है. खून की मात्रा लगभग आधी बढ़ जाती है, गर्भाशय और प्लेसेंटा बनते और बढ़ते हैं, और बच्चे की हर हड्डी, हर अंग और दिमाग की हर कोशिका आपकी थाली से आने वाले कच्चे माल से बनती है.
इसीलिए कैलोरी से ज़्यादा कुछ खास पोषक तत्वों की ज़रूरत बढ़ती है. आयरन की ज़रूरत लगभग डेढ़ गुना हो जाती है, फोलेट की ज़रूरत काफी बढ़ जाती है, प्रोटीन की ज़रूरत भी दूसरी और तीसरी तिमाही में बढ़ती है, और आयोडीन बच्चे के दिमाग के विकास के लिए खास तौर पर ज़रूरी हो जाता है.
कैलोरी का हिसाब मोटे तौर पर कुछ ऐसा है:
पहली तिमाही (1 से 12 हफ्ते): अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत लगभग नहीं. इस समय ध्यान फोलेट और मतली को संभालने पर होना चाहिए.
दूसरी तिमाही (13 से 27 हफ्ते): रोज़ करीब 300 से 350 अतिरिक्त कैलोरी. यानी एक कटोरी दाल और एक रोटी, या एक गिलास दूध और मुट्ठी भर मेवे.
तीसरी तिमाही (28 हफ्ते के बाद): रोज़ करीब 450 अतिरिक्त कैलोरी. ऊपर वाले में एक कटोरी दही या एक फल और जोड़ दीजिए.
यह संख्याएं औसत हैं. अगर आपका वजन गर्भावस्था से पहले कम या ज़्यादा था, जुड़वां बच्चे हैं, या कोई और स्थिति है, तो ज़रूरत अलग होगी और वह आपके डॉक्टर बताएंगे.
वो पोषक तत्व जिन पर सबसे ज़्यादा ध्यान चाहिए
फोलेट. बच्चे के दिमाग और रीढ़ की हड्डी का शुरुआती ढांचा गर्भावस्था के पहले कुछ हफ्तों में बनता है, अक्सर तब जब कई महिलाओं को पता भी नहीं होता कि वे गर्भवती हैं. इस विकास के लिए फोलेट बहुत ज़रूरी है. पालक, मेथी, सरसों का साग, चना, राजमा, मूंग, संतरा और चुकंदर अच्छे स्रोत हैं. डॉक्टर आमतौर पर गर्भावस्था की योजना बनाते समय से ही इसका सप्लीमेंट शुरू करवाते हैं, इसलिए यह बात पहली मुलाकात में ही पूछ लीजिए.
आयरन. खून बढ़ता है तो उसे बनाने के लिए आयरन भी ज़्यादा चाहिए. भारत में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी बहुत आम है, और इसके लक्षण जैसे थकान, सांस फूलना और चक्कर अक्सर गर्भावस्था की सामान्य थकान मान लिए जाते हैं. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, गुड़, तिल, खजूर, दालें, अंडा और मांसाहार में कलेजी और मांस अच्छे स्रोत हैं. शाकाहारी आयरन को नींबू, टमाटर या आंवले के साथ खाइए और चाय को खाने से कम से कम एक घंटा दूर रखिए. खून की कमी के लक्षण और सही खाने को विस्तार से समझने के लिए आयरन की कमी और एनीमिया पर हमारा लेख पढ़ सकती हैं.
कैल्शियम और विटामिन डी. तीसरी तिमाही में बच्चे की हड्डियां सबसे तेज़ी से मज़बूत होती हैं. अगर मां की थाली में कैल्शियम कम है, तो शरीर उसे मां की अपनी हड्डियों से लेने लगता है. दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी सब्ज़ियां रोज़ की थाली में रखिए. कैल्शियम तभी काम आता है जब विटामिन डी पर्याप्त हो, और भारत में इसकी कमी बहुत आम है. धूप, खाने और जांच का सही तरीका विटामिन डी की कमी के लक्षण और उपाय में आसान भाषा में समझाया गया है.
प्रोटीन. बच्चे के अंग, मां का बढ़ता गर्भाशय और खून, सबके लिए प्रोटीन चाहिए. हर भोजन में एक प्रोटीन वाला हिस्सा रखने की आदत डालिए: दाल, छोले, राजमा, सोया, पनीर, दही, अंडा, चिकन या अच्छी तरह पकी मछली.
आयोडीन. बच्चे के दिमाग और थायराइड के विकास के लिए ज़रूरी. सबसे आसान रास्ता है घर में आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करना. सेंधा नमक या बिना आयोडीन वाले नमक पर पूरी तरह शिफ्ट होने से पहले डॉक्टर से बात कर लीजिए.
ओमेगा 3 फैट. बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास में भूमिका निभाता है. अखरोट, अलसी, चिया के बीज और कम पारे वाली मछली जैसे रोहू, बांगड़ा या सार्डिन इसके स्रोत हैं.
फाइबर और पानी. गर्भावस्था में कब्ज बहुत आम है, क्योंकि हार्मोन आंतों की रफ्तार धीमी कर देते हैं और बाद में बढ़ता गर्भाशय भी दबाव डालता है. साबुत अनाज, दलिया, फल, सब्ज़ियां और दिन भर में आठ से दस गिलास पानी इसमें सबसे बड़ी मदद करते हैं.
जानना आसान है, नौ महीने निभाना मुश्किल. मतली वाले हफ्ते, थकान वाले दिन और हर रिश्तेदार की अलग सलाह के बीच अपनी थाली को संभालना अकेले भारी लग सकता है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी पसंद, आपके घर के खाने और आपकी तिमाही के हिसाब से छोटे और रोज़ निभाने लायक कदम तय करते हैं. SuperLiving डाउनलोड करें