डिलीवरी के बाद वजन: सबसे पहले खुद पर नरम रहें
अगर आप अभी नई माँ बनी हैं और आईने में अपना बदला हुआ शरीर देखकर परेशान हो रही हैं, तो एक बात दिल से समझ लीजिए: आपके शरीर ने अभी-अभी एक बहुत बड़ा काम किया है। नौ महीने तक एक नन्ही जान को पालना और फिर उसे जन्म देना कोई छोटी बात नहीं है। इसलिए डिलीवरी के बाद वजन का बढ़ा रहना कोई कमी नहीं, बल्कि एक सामान्य और स्वाभाविक बात है।
सोशल मीडिया पर आपको ऐसी तस्वीरें दिखती होंगी जहाँ कोई सेलिब्रिटी डिलीवरी के कुछ हफ्तों में ही पहले जैसी दिखने लगती है। असल ज़िंदगी ऐसी नहीं होती। असल में ज़्यादातर महिलाओं को अपने पुराने वजन तक लौटने में कई महीने, और कभी-कभी साल भर से ज़्यादा भी लग जाता है। यह देरी कोई हार नहीं है।
इस आर्टिकल में हम बिल्कुल शांति से समझेंगे कि डिलीवरी के बाद वजन कैसे घटाएं, वो भी इस तरह से जो आपकी सेहत और आपके बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित हो। कोई क्रैश डाइट नहीं, कोई भूखे रहने की सलाह नहीं, सिर्फ वो तरीके जो टिकते भी हैं और शरीर को नुकसान भी नहीं पहुँचाते।
ज़रूरी बात: यह गाइड सामान्य जानकारी के लिए है। हर डिलीवरी अलग होती है, खासकर सी-सेक्शन या किसी कॉम्प्लीकेशन के बाद। कोई भी डाइट या एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें, खासकर अगर आप ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं।
वजन इतनी जल्दी वापस क्यों नहीं जाता
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में सिर्फ बच्चे का ही वजन नहीं बढ़ता। इसमें बच्चेदानी का बढ़ा हुआ आकार, ज़्यादा खून, पानी की मात्रा, और शरीर में जमा वो अतिरिक्त फैट भी शामिल होता है जो कुदरत ने ब्रेस्टफीडिंग के लिए तैयार किया होता है। यह सब एक साथ जल्दी से नहीं जाता।
इसके ऊपर हार्मोन का पूरा तंत्र बदला हुआ होता है। नींद टुकड़ों में मिलती है, दिन-रात का फर्क मिट जाता है, और शरीर लगातार थकान में रहता है। ऐसी हालत में शरीर बचत मोड में रहता है और वजन धीरे-धीरे ही कम होता है। इसलिए अगर आपका वजन उतनी तेज़ी से नहीं घट रहा जितनी आप उम्मीद कर रही थीं, तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है।
इसलिए सबसे पहला कदम है अपनी उम्मीदों को असल ज़िंदगी के हिसाब से सेट करना। लक्ष्य महीने भर में पुराने कपड़ों में आना नहीं, बल्कि हर हफ्ते थोड़ा ज़्यादा ताकतवर और सेहतमंद महसूस करना होना चाहिए।
शुरुआत कब करें
सबसे ज़रूरी सवाल यही है, और इसका जवाब जल्दबाज़ी में नहीं देना चाहिए। ज़्यादातर मामलों में शरीर को पहले 6 हफ्ते सिर्फ ठीक होने के लिए चाहिए होते हैं। इस दौरान आपका काम वजन घटाना नहीं, बल्कि आराम करना, अच्छा खाना और अपने शरीर को संभलने देना है।
6 हफ्ते के बाद जब आपका पहला पूरा चेकअप हो जाए और डॉक्टर आपको सक्रिय होने की मंज़ूरी दे दें, तब आप धीरे-धीरे वजन घटाने की तरफ बढ़ सकती हैं। अगर आपका सी-सेक्शन हुआ है, तो यह समय अक्सर और लंबा होता है, क्योंकि वह एक बड़ी सर्जरी होती है और अंदरूनी टांकों को भरने में वक्त लगता है।
इस पूरे दौर में एक बात याद रखें: धीमी शुरुआत कमज़ोरी नहीं, समझदारी है। जो नींव मज़बूत बनती है, उसी पर टिकाऊ नतीजे खड़े होते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग और वजन का रिश्ता
अगर आप अपने बच्चे को दूध पिला रही हैं, तो आपके शरीर को हर दिन कुछ अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रूरत होती है। यही वजह है कि इस दौरान बहुत कम खाना या क्रैश डाइट करना ठीक नहीं माना जाता। बहुत कम कैलोरी लेने से आपकी अपनी ताकत घट सकती है, थकान बढ़ सकती है, और कुछ महिलाओं में दूध की मात्रा पर भी असर पड़ सकता है।
अच्छी खबर यह है कि ब्रेस्टफीडिंग खुद कुछ अतिरिक्त कैलोरी खर्च करती है। इसका मतलब है कि आपको भूखे रहने की ज़रूरत ही नहीं है। पेट भरकर सही चीज़ें खाना ही यहाँ सबसे अच्छी रणनीति है। शरीर को पर्याप्त पोषण दें, और वजन को अपनी गति से धीरे-धीरे कम होने दें।
तो अगर कोई आपको दूध पिलाने के दौरान सख्त डाइट या भूखे रहने की सलाह दे, तो एक बार रुककर सोचें। इस समय आपका और आपके बच्चे का पोषण सबसे पहले आता है।
खाने में किन चीज़ों पर ध्यान दें
डिलीवरी के बाद का खाना घटाने का नहीं, समझदारी से चुनने का खेल है। कुछ चीज़ें इस दौरान खास तौर पर मायने रखती हैं।
प्रोटीन: दाल, राजमा, छोले, अंडे, दूध, दही, पनीर और अगर आप खाती हैं तो चिकन या मछली, ये सब मांसपेशियों को दोबारा मज़बूत बनाने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। हर मुख्य भोजन में थोड़ा प्रोटीन रखने की कोशिश करें।
आयरन: डिलीवरी में खून की काफी मात्रा जाती है, इसलिए आयरन वाली चीज़ें जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गुड़, खजूर और दालें आपकी कमज़ोरी दूर करने में मदद करती हैं।
कैल्शियम: दूध, दही, तिल और हरी सब्ज़ियाँ हड्डियों के लिए ज़रूरी हैं, खासकर अगर आप ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं।
फाइबर: डिलीवरी के बाद कब्ज एक आम परेशानी है। साबुत अनाज, सब्ज़ियाँ, फल और भरपूर पानी इसमें राहत देते हैं।
पानी: दिनभर पानी पीती रहें, खासकर दूध पिलाते समय अक्सर प्यास ज़्यादा लगती है। हल्का डिहाइड्रेशन थकान और झूठी भूख दोनों बढ़ा देता है।
जिन चीज़ों को सीमित रखना बेहतर है, वे हैं तली हुई चीज़ें, बहुत ज़्यादा मीठा, पैकेट वाले स्नैक्स और मीठे पेय। इन्हें पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं, बस मात्रा पर नज़र रखें।