जिंक की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के आसान उपाय: नाखून, बाल और इम्यूनिटी का रिश्ता
छोटा जवाब
अगर आपके नाखूनों पर बार बार सफेद धब्बे या रेखाएं दिखती हैं, कोई छोटा घाव भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लगता है, सर्दी जुकाम महीने में एक से ज़्यादा बार हो जाता है, और साथ में खाने का स्वाद पहले जैसा नहीं लगता, तो जिंक की कमी उन वजहों में से है जिन्हें लोग सबसे कम पहचानते हैं, जबकि इसकी भरपाई सबसे आसान है.
सबसे बड़ा उपाय थाली में बदलाव है. कद्दू के बीज, चना, मूंगफली, दही, अंडे और अगर खाते हों तो मछली या मांस को नियमित हिस्सा बनाइए, दाल और अनाज को पहले भिगोकर या अंकुरित करके पकाइए ताकि जिंक ज़्यादा सोखा जा सके, और अगर लक्षण दो तीन हफ्तों से बने हुए हैं तो एक साधारण खून की जांच करा लीजिए. अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी उतना ही गलत है जितना किसी और विटामिन या खनिज में.
जिंक असल में करता क्या है
ज़्यादातर लोगों ने जिंक का नाम सुना है, लेकिन यह शरीर में क्या करता है, कम ही लोगों को पता है.
सबसे बड़ा काम इम्यून सिस्टम से जुड़ा है. जिंक उन कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है जो शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने में इस्तेमाल होती हैं, इसीलिए कमी में सर्दी जुकाम बार बार होता है और ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है.
दूसरा काम घाव भरने से जुड़ा है. त्वचा की नई कोशिकाएं बनाने के लिए जिंक ज़रूरी है, इसलिए कमी में छोटे कटे या घाव भी धीमी रफ्तार से भरते हैं.
तीसरा काम प्रोटीन बनाने से जुड़ा है. शरीर की हर कोशिका को बढ़ने और बंटने के लिए नए प्रोटीन चाहिए, और जिंक इस प्रक्रिया में सीधे शामिल होता है. नाखून, बाल और त्वचा जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले ऊतक इस पर खास तौर पर निर्भर रहते हैं, यही वजह है कि इनमें कमी का असर बाकी जगहों से पहले दिखता है.
चौथा हिस्सा स्वाद और खुशबू से जुड़ा है. जीभ पर स्वाद पहचानने वाली कोशिकाओं को भी नई कोशिकाओं की ज़रूरत होती है, और कमी में यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे खाने का स्वाद फीका या बदला हुआ महसूस हो सकता है.
कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं
जिंक की कमी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण अकेले देखने पर किसी और आम वजह जैसे लगते हैं.
नाखूनों पर सफेद धब्बे या रेखाएं. खास तौर पर जब ये एक साथ कई नाखूनों पर दिखें और बिना किसी चोट के बार बार लौटें.
बार बार सर्दी जुकाम और धीरे ठीक होना. महीने में एक से ज़्यादा बार बीमार पड़ना, और हर बार ठीक होने में सामान्य से ज़्यादा समय लगना.
घाव या कटे का देर से भरना. छोटी चोट, कटा हुआ निशान या मुंहासे का निशान भी सामान्य से धीमी रफ्तार से ठीक होना.
स्वाद और खुशबू में बदलाव. खाना पहले जितना स्वादिष्ट न लगना, या किसी चीज़ की खुशबू पहचानने में दिक्कत होना.
भूख का धीरे धीरे कम होना. खास तौर पर बच्चों में, जहां भूख कम होना बढ़ने की रफ्तार पर भी असर डाल सकता है.
बाल पतले होना और झड़ना. यह अकेले किसी एक कमी की तरफ इशारा नहीं करता, लेकिन बाकी लक्षणों के साथ मिलकर तस्वीर बनाता है. बालों के झड़ने की बाकी वजहें समझने के लिए बालों को घना कैसे करें पढ़ना उपयोगी रहेगा.
त्वचा का रूखा और खुरदरा होना. खास तौर पर हाथों और मुंह के आसपास.
ध्यान दीजिए कि यह सूची किसी भी तरह से जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से कई लक्षण आयरन, विटामिन बी12 या थायराइड की गड़बड़ी में भी दिखते हैं, इसलिए अकेले एक लक्षण के आधार पर कोई नतीजा निकालना जल्दबाज़ी होगी.
नाखून, बाल और सफेद धब्बों की सच्चाई
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है, इसलिए इसे अलग से समझना ज़रूरी है.
नाखूनों पर सफेद धब्बे या रेखाएं देखकर बहुत से लोग सीधे जिंक की कमी मान लेते हैं, लेकिन असल में ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह नाखून पर लगी कोई छोटी चोट होती है, जैसे दरवाज़े में उंगली दब जाना, नाखून काटते समय हल्की चोट लगना, या मैनीक्योर के दौरान नाखून पर दबाव पड़ना. ऐसे निशान आमतौर पर एक ही नाखून पर, एक बार दिखते हैं, और कुछ हफ्तों में नाखून के साथ आगे बढ़कर अपने आप गायब हो जाते हैं.
जिंक की कमी से जुड़ा पैटर्न इससे अलग है. यह आमतौर पर एक साथ कई नाखूनों पर दिखता है, बार बार लौटता है, और साथ में ऊपर बताए बाकी लक्षण भी मौजूद रहते हैं, जैसे बार बार बीमार पड़ना या घाव का देर से भरना. अगर सिर्फ एक नाखून पर एक बार निशान दिखा है, तो चोट सबसे संभावित वजह है, चिंता की ज़रूरत नहीं.
नाखून और बाल दोनों तेज़ी से बढ़ने वाले ऊतक हैं, इसलिए शरीर में किसी भी कमी का असर इन पर पहले और ज़्यादा साफ दिखता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर कमज़ोर नाखून या हर झड़ता बाल जिंक की वजह से है. आयरन, बायोटिन, प्रोटीन और थायराइड भी इन्हें कमज़ोर कर सकते हैं, और अक्सर एक से ज़्यादा वजहें साथ मिलकर काम करती हैं. नाखूनों से जुड़ी बाकी वजहें नाखून कमज़ोर होने के कारण में विस्तार से समझाई गई हैं.
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भारत में जिंक की कमी इतनी आम क्यों है
यह समझना ज़रूरी है, क्योंकि इसके बिना कोई भी उपाय अधूरा रहेगा.
पहली वजह, थाली में मांसाहारी स्रोत कम होना. मांस, अंडा और मछली में मौजूद जिंक शरीर आसानी से सोख लेता है, जबकि पूरी तरह शाकाहारी थाली में ऐसे स्रोत काफी कम रहते हैं.
दूसरी और सबसे बड़ी वजह, फाइटेट. यह एक प्राकृतिक तत्व है जो गेहूं, चावल, दाल और फलियों के छिलके में पाया जाता है और जिंक तथा आयरन जैसे खनिजों को आंतों में बांध देता है, जिससे शरीर उन्हें ठीक से सोख नहीं पाता.
तीसरी वजह, पकाने का तरीका. दाल और अनाज को बिना भिगोए सीधे पका लेना फाइटेट कम नहीं करता, जबकि भिगोना, अंकुरित करना और खमीर उठाना फाइटेट को काफी हद तक तोड़ देता है.
चौथी वजह, मिट्टी में जिंक की मात्रा. भारत के कई हिस्सों की खेती वाली ज़मीन में जिंक पहले से कम है, जिसका असर वहां उगने वाली फसलों में भी दिखता है.
पांचवीं वजह, बार बार होने वाले पेट के इन्फेक्शन और दस्त. ये शरीर से जिंक को तेज़ी से बाहर निकाल देते हैं, और साफ पानी की कमी वाले इलाकों में यह बच्चों में खास तौर पर असर डालती है.
किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है
पूरी तरह शाकाहारी या वीगन खाना खाने वाले लोग, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, बुज़ुर्ग जिनकी खाने की मात्रा और सोखने की क्षमता उम्र के साथ घटती है, पेट या आंत से जुड़ी पुरानी स्थिति वाले लोग, और जो बार बार दस्त या पेट के इन्फेक्शन से गुज़रते हैं.
अगर आप इनमें से किसी एक श्रेणी में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय जांच करा लेना सबसे सस्ता रास्ता है.