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जिंक की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के आसान उपाय: नाखून, बाल और इम्यूनिटी का रिश्ता

SuperLiving Expert Team·

जिंक की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के आसान उपाय: नाखून, बाल और इम्यूनिटी का रिश्ता

छोटा जवाब

अगर आपके नाखूनों पर बार बार सफेद धब्बे या रेखाएं दिखती हैं, कोई छोटा घाव भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लगता है, सर्दी जुकाम महीने में एक से ज़्यादा बार हो जाता है, और साथ में खाने का स्वाद पहले जैसा नहीं लगता, तो जिंक की कमी उन वजहों में से है जिन्हें लोग सबसे कम पहचानते हैं, जबकि इसकी भरपाई सबसे आसान है.

सबसे बड़ा उपाय थाली में बदलाव है. कद्दू के बीज, चना, मूंगफली, दही, अंडे और अगर खाते हों तो मछली या मांस को नियमित हिस्सा बनाइए, दाल और अनाज को पहले भिगोकर या अंकुरित करके पकाइए ताकि जिंक ज़्यादा सोखा जा सके, और अगर लक्षण दो तीन हफ्तों से बने हुए हैं तो एक साधारण खून की जांच करा लीजिए. अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी उतना ही गलत है जितना किसी और विटामिन या खनिज में.

जिंक असल में करता क्या है

ज़्यादातर लोगों ने जिंक का नाम सुना है, लेकिन यह शरीर में क्या करता है, कम ही लोगों को पता है.

सबसे बड़ा काम इम्यून सिस्टम से जुड़ा है. जिंक उन कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है जो शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने में इस्तेमाल होती हैं, इसीलिए कमी में सर्दी जुकाम बार बार होता है और ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है.

दूसरा काम घाव भरने से जुड़ा है. त्वचा की नई कोशिकाएं बनाने के लिए जिंक ज़रूरी है, इसलिए कमी में छोटे कटे या घाव भी धीमी रफ्तार से भरते हैं.

तीसरा काम प्रोटीन बनाने से जुड़ा है. शरीर की हर कोशिका को बढ़ने और बंटने के लिए नए प्रोटीन चाहिए, और जिंक इस प्रक्रिया में सीधे शामिल होता है. नाखून, बाल और त्वचा जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले ऊतक इस पर खास तौर पर निर्भर रहते हैं, यही वजह है कि इनमें कमी का असर बाकी जगहों से पहले दिखता है.

चौथा हिस्सा स्वाद और खुशबू से जुड़ा है. जीभ पर स्वाद पहचानने वाली कोशिकाओं को भी नई कोशिकाओं की ज़रूरत होती है, और कमी में यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे खाने का स्वाद फीका या बदला हुआ महसूस हो सकता है.

कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं

जिंक की कमी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण अकेले देखने पर किसी और आम वजह जैसे लगते हैं.

नाखूनों पर सफेद धब्बे या रेखाएं. खास तौर पर जब ये एक साथ कई नाखूनों पर दिखें और बिना किसी चोट के बार बार लौटें.

बार बार सर्दी जुकाम और धीरे ठीक होना. महीने में एक से ज़्यादा बार बीमार पड़ना, और हर बार ठीक होने में सामान्य से ज़्यादा समय लगना.

घाव या कटे का देर से भरना. छोटी चोट, कटा हुआ निशान या मुंहासे का निशान भी सामान्य से धीमी रफ्तार से ठीक होना.

स्वाद और खुशबू में बदलाव. खाना पहले जितना स्वादिष्ट न लगना, या किसी चीज़ की खुशबू पहचानने में दिक्कत होना.

भूख का धीरे धीरे कम होना. खास तौर पर बच्चों में, जहां भूख कम होना बढ़ने की रफ्तार पर भी असर डाल सकता है.

बाल पतले होना और झड़ना. यह अकेले किसी एक कमी की तरफ इशारा नहीं करता, लेकिन बाकी लक्षणों के साथ मिलकर तस्वीर बनाता है. बालों के झड़ने की बाकी वजहें समझने के लिए बालों को घना कैसे करें पढ़ना उपयोगी रहेगा.

त्वचा का रूखा और खुरदरा होना. खास तौर पर हाथों और मुंह के आसपास.

ध्यान दीजिए कि यह सूची किसी भी तरह से जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से कई लक्षण आयरन, विटामिन बी12 या थायराइड की गड़बड़ी में भी दिखते हैं, इसलिए अकेले एक लक्षण के आधार पर कोई नतीजा निकालना जल्दबाज़ी होगी.

नाखून, बाल और सफेद धब्बों की सच्चाई

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है, इसलिए इसे अलग से समझना ज़रूरी है.

नाखूनों पर सफेद धब्बे या रेखाएं देखकर बहुत से लोग सीधे जिंक की कमी मान लेते हैं, लेकिन असल में ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह नाखून पर लगी कोई छोटी चोट होती है, जैसे दरवाज़े में उंगली दब जाना, नाखून काटते समय हल्की चोट लगना, या मैनीक्योर के दौरान नाखून पर दबाव पड़ना. ऐसे निशान आमतौर पर एक ही नाखून पर, एक बार दिखते हैं, और कुछ हफ्तों में नाखून के साथ आगे बढ़कर अपने आप गायब हो जाते हैं.

जिंक की कमी से जुड़ा पैटर्न इससे अलग है. यह आमतौर पर एक साथ कई नाखूनों पर दिखता है, बार बार लौटता है, और साथ में ऊपर बताए बाकी लक्षण भी मौजूद रहते हैं, जैसे बार बार बीमार पड़ना या घाव का देर से भरना. अगर सिर्फ एक नाखून पर एक बार निशान दिखा है, तो चोट सबसे संभावित वजह है, चिंता की ज़रूरत नहीं.

नाखून और बाल दोनों तेज़ी से बढ़ने वाले ऊतक हैं, इसलिए शरीर में किसी भी कमी का असर इन पर पहले और ज़्यादा साफ दिखता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर कमज़ोर नाखून या हर झड़ता बाल जिंक की वजह से है. आयरन, बायोटिन, प्रोटीन और थायराइड भी इन्हें कमज़ोर कर सकते हैं, और अक्सर एक से ज़्यादा वजहें साथ मिलकर काम करती हैं. नाखूनों से जुड़ी बाकी वजहें नाखून कमज़ोर होने के कारण में विस्तार से समझाई गई हैं.

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भारत में जिंक की कमी इतनी आम क्यों है

यह समझना ज़रूरी है, क्योंकि इसके बिना कोई भी उपाय अधूरा रहेगा.

पहली वजह, थाली में मांसाहारी स्रोत कम होना. मांस, अंडा और मछली में मौजूद जिंक शरीर आसानी से सोख लेता है, जबकि पूरी तरह शाकाहारी थाली में ऐसे स्रोत काफी कम रहते हैं.

दूसरी और सबसे बड़ी वजह, फाइटेट. यह एक प्राकृतिक तत्व है जो गेहूं, चावल, दाल और फलियों के छिलके में पाया जाता है और जिंक तथा आयरन जैसे खनिजों को आंतों में बांध देता है, जिससे शरीर उन्हें ठीक से सोख नहीं पाता.

तीसरी वजह, पकाने का तरीका. दाल और अनाज को बिना भिगोए सीधे पका लेना फाइटेट कम नहीं करता, जबकि भिगोना, अंकुरित करना और खमीर उठाना फाइटेट को काफी हद तक तोड़ देता है.

चौथी वजह, मिट्टी में जिंक की मात्रा. भारत के कई हिस्सों की खेती वाली ज़मीन में जिंक पहले से कम है, जिसका असर वहां उगने वाली फसलों में भी दिखता है.

पांचवीं वजह, बार बार होने वाले पेट के इन्फेक्शन और दस्त. ये शरीर से जिंक को तेज़ी से बाहर निकाल देते हैं, और साफ पानी की कमी वाले इलाकों में यह बच्चों में खास तौर पर असर डालती है.

किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है

पूरी तरह शाकाहारी या वीगन खाना खाने वाले लोग, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, बुज़ुर्ग जिनकी खाने की मात्रा और सोखने की क्षमता उम्र के साथ घटती है, पेट या आंत से जुड़ी पुरानी स्थिति वाले लोग, और जो बार बार दस्त या पेट के इन्फेक्शन से गुज़रते हैं.

अगर आप इनमें से किसी एक श्रेणी में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय जांच करा लेना सबसे सस्ता रास्ता है.

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खाने से जिंक कैसे बढ़ाएं

ईमानदार जवाब यह है कि सही खाना और सही तरीका दोनों साथ चाहिए.

कद्दू के बीज, तिल और मूंगफली. जिंक के अच्छे शाकाहारी स्रोत, हल्का भूनकर रोज़ मुट्ठी भर खाना आसान है.

चना और राजमा, रात भर भिगोकर. भिगोना फाइटेट की मात्रा कम करता है और जिंक को सोखना आसान बनाता है.

दही, पनीर और अंडे. डेयरी और अंडे में मौजूद जिंक शरीर अनाज दाल के मुकाबले ज़्यादा आसानी से सोख लेता है.

मछली और मांस, अगर खाते हों. खास तौर पर लाल मांस और समुद्री भोजन जिंक के सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं.

अंकुरित और खमीर उठा हुआ खाना. मूंग चना अंकुरित करना, और इडली डोसा जैसा खमीर उठा खाना, दोनों फाइटेट तोड़ने के आसान घरेलू तरीके हैं.

चाय कॉफी खाने के तुरंत बाद न लें. ये खनिजों के सोखे जाने में रुकावट डालते हैं, खाने के एक घंटे बाद लेना बेहतर है.

सप्लीमेंट का सवाल, और यहां सावधानी क्यों ज़रूरी है

यह लेख किसी सप्लीमेंट या दवा का सुझाव नहीं देता, और इसकी ठोस वजह है.

ज़्यादा जिंक लेने के अपने नुकसान हैं. लंबे समय तक ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा लेने से शरीर में कॉपर नाम के एक और ज़रूरी खनिज की कमी हो सकती है, जिसके लक्षण खून की कमी और नसों से जुड़ी दिक्कतें हो सकते हैं. ज़्यादा मात्रा से जी मिचलाना, पेट खराब होना और स्वाद में उल्टा असर भी देखा गया है, यानी जिस समस्या को ठीक करने के लिए सप्लीमेंट लिया गया, वही और बिगड़ सकती है.

सही मात्रा हर व्यक्ति में अलग होती है और यह जांच में निकले स्तर, उम्र और किसी और स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए यह फैसला रिपोर्ट देखकर डॉक्टर करते हैं, पैकेट पर लिखी सामान्य मात्रा देखकर नहीं.

व्यावहारिक क्रम यह है, पहले लक्षण पहचानिए, फिर ज़रूरत महसूस हो तो जांच कराइए, फिर रिपोर्ट लेकर डॉक्टर से मिलिए. थाली में बदलाव इस पूरे समय चलता रह सकता है, क्योंकि खाने से ज़्यादा मात्रा मिलने का खतरा लगभग नहीं होता.

जांच कब और कैसे कराएं

जांच एक साधारण खून की जांच है जिसमें खून में मौजूद जिंक की मात्रा नापी जाती है.

जांच कब कराएं, जब ऊपर बताए लक्षणों में से दो या तीन कई हफ्तों से बने हुए हों, या जब आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में आते हों, जैसे पूरी तरह शाकाहारी खाना खाने वाले, गर्भवती महिलाएं या पाचन से जुड़ी पुरानी स्थिति वाले लोग.

खून में जिंक का स्तर शरीर के अंदर मौजूद कुल जिंक की हमेशा सटीक तस्वीर नहीं दिखाता, क्योंकि शरीर उसे एक हद तक बनाए रखने की कोशिश करता है, भले ही बाकी ऊतकों में कमी हो. इसीलिए डॉक्टर जांच के साथ साथ लक्षण और खाने की आदत को भी देखकर फैसला लेते हैं, सिर्फ एक नंबर देखकर नहीं.

जो काम नहीं करता

पहला, हर सफेद नाखून के निशान को जिंक की कमी मान लेना. ज़्यादातर मामलों में यह सिर्फ नाखून पर लगी चोट का निशान होता है.

दूसरा, बिना जांच के लंबे समय तक सप्लीमेंट लेते रहना. ज़्यादा मात्रा कॉपर की कमी और पेट की गड़बड़ी जैसी अपनी समस्याएं खड़ी कर सकती है.

तीसरा, दाल और अनाज को बिना भिगोए रोज़ खाते रहना. फाइटेट को तोड़े बिना जिंक की बड़ी मात्रा शरीर सोख ही नहीं पाता.

चौथा, चाय या कॉफी को खाने के तुरंत बाद पीना. यह आदत जिंक और आयरन दोनों के सोखे जाने में रुकावट डालती है.

पांचवां, बाल झड़ने या नाखून कमज़ोर होने की हर समस्या को जिंक की कमी मान लेना. आयरन, बायोटिन, प्रोटीन और थायराइड भी इन्हीं लक्षणों की वजह हो सकते हैं.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता, सिर्फ दो बदलाव. रोज़ एक मुट्ठी कद्दू के बीज या मूंगफली नाश्ते में जोड़िए, और दाल या चना पकाने से पहले कम से कम छह से आठ घंटे भिगोने की आदत डालिए.

दूसरा हफ्ता, दो बदलाव और. एक दिन में एक हिस्सा दही या अंडा तय कीजिए, और चाय कॉफी को खाने के तुरंत बाद पीने की आदत को खाने के एक घंटे बाद तक टालिए.

नापने का तरीका. रोज़ एक लाइन लिखिए, कितनी नई चीज़ें थाली में शामिल कीं और सर्दी जुकाम या घाव भरने में कोई फर्क महसूस हुआ या नहीं. नाखून और बाल में फर्क दिखने में ज़्यादा समय लगता है, इसलिए वहां धैर्य ज़रूरी है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर सर्दी जुकाम या इन्फेक्शन बहुत ज़्यादा बार और गंभीर रूप से हो रहे हैं, अगर कोई घाव या कटा हुआ निशान कई हफ्तों तक नहीं भर रहा, अगर बालों का झड़ना अचानक और तेज़ी से बढ़ा है, अगर बच्चों में भूख और बढ़ने की रफ्तार दोनों में गिरावट दिख रही है, या अगर आप गर्भवती हैं और ऊपर बताए लक्षण महसूस कर रही हैं, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है.

इसी तरह अगर नाखून या बालों की कमज़ोरी के साथ लगातार थकान, वजन में बिना वजह बदलाव या ठंड ज़्यादा लगना भी है, तो जांच का दायरा सिर्फ जिंक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, क्योंकि यह पैटर्न थायराइड या आयरन की कमी की तरफ भी इशारा कर सकता है.

मिलाकर बात यह है

जिंक की कमी उन कुछ समस्याओं में से है जिनके लक्षण छोटे और आम लगते हैं, लेकिन जिनकी वजह से नाखून, बाल, इम्यूनिटी और घाव भरने की रफ्तार तक प्रभावित हो सकती है, और जिन्हें फिर भी सबसे कम पहचाना जाता है.

आपको कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं चाहिए, बस थाली में कद्दू के बीज, चना, मूंगफली, दही या अंडे जैसा कोई हिस्सा नियमित रूप से चाहिए, दाल अनाज भिगोने की आदत चाहिए, और लक्षण बने रहने पर एक साधारण जांच चाहिए. बाकी फैसले रिपोर्ट देखकर डॉक्टर करेंगे.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, यह है कि बदलाव हफ्ते दर हफ्ते चलता रहे. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली और दिनचर्या के हिसाब से इसे छोटे कदमों में बांटते हैं, ताकि यह लंबी सूची नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जिंक की कमी के शुरुआती लक्षण कौन से हैं? सबसे पहले जो चीज़ें दिखती हैं वे अक्सर छोटी और नज़रअंदाज़ करने लायक लगती हैं. नाखूनों पर हल्के सफेद धब्बे या रेखाएं, बार बार सर्दी जुकाम होना और ठीक होने में सामान्य से ज़्यादा समय लगना, कोई छोटा घाव जो धीरे धीरे भरे, खाने का स्वाद पहले जैसा महसूस न होना, और भूख का धीरे धीरे कम होना. कुछ लोगों में बाल पतले होना और झड़ना भी साथ में दिखता है. दो तीन लक्षण एक साथ और हफ्तों तक बने रहना ही असली संकेत है.

क्या नाखूनों पर सफेद धब्बे हमेशा जिंक की कमी की वजह से होते हैं? नहीं, और यह एक आम गलतफहमी है. सफेद धब्बे ज़्यादातर मामलों में नाखून पर लगी छोटी चोट की वजह से होते हैं और अपने आप कुछ हफ्तों में गायब हो जाते हैं. जिंक की कमी से जुड़े निशान आमतौर पर एक साथ कई नाखूनों पर, बार बार और बिना किसी चोट के दिखते हैं. सिर्फ एक नाखून पर एक बार निशान दिखना चिंता की बात नहीं है.

शाकाहारी लोगों में जिंक की कमी ज़्यादा आम क्यों है? मांस, अंडा और मछली में मौजूद जिंक शरीर आसानी से सोख लेता है, जबकि दाल और अनाज में मौजूद जिंक की मात्रा कम होती है. बड़ी वजह फाइटेट है, यह अनाज और दाल के छिलके में पाया जाता है और जिंक को आंतों में बांध देता है, जिससे शरीर उसे ठीक से सोख नहीं पाता. इसलिए पूरी तरह शाकाहारी थाली में जिंक की ज़रूरत मांसाहारी थाली के मुकाबले ज़्यादा मानी जाती है.

क्या जिंक सप्लीमेंट अपने मन से शुरू किया जा सकता है? यहां सावधानी ज़रूरी है. लंबे समय तक ज़रूरत से ज़्यादा जिंक लेने से शरीर में कॉपर की कमी हो सकती है, जिसके लक्षण खून की कमी और नसों से जुड़ी दिक्कतें हो सकते हैं. इसके अलावा जी मिचलाना और पेट खराब होना भी हो सकता है. सही मात्रा उम्र, वजन और कमी की गहराई पर निर्भर करती है, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट शुरू करना ठीक नहीं है.

जिंक की कमी की जांच कैसे होती है? यह एक साधारण खून की जांच है जिसमें खून में मौजूद जिंक की मात्रा नापी जाती है. जांच तब समझ आती है जब लक्षण कई हफ्तों से बने हों, या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में आते हों. खून में जिंक का स्तर शरीर के अंदर कुल जिंक की हमेशा सटीक तस्वीर नहीं दिखाता, इसलिए डॉक्टर लक्षण और खाने की आदत को भी साथ में देखकर फैसला लेते हैं.

जिंक की कमी ठीक होने में कितना समय लगता है? यह इस पर निर्भर करता है कि कमी कितनी गहरी थी. घाव भरने और स्वाद में सुधार अक्सर तीन से चार हफ्तों में महसूस होने लगता है. नाखून और बालों में फर्क दिखने में ज़्यादा समय लगता है, आठ से बारह हफ्ते तक. अगर तीन महीने में कोई फर्क महसूस नहीं होता, तो जिंक को अकेली वजह मान लेना गलत हो सकता है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. लगातार बीमार पड़ना, घाव का देर से भरना, या बच्चों में भूख और बढ़ने की रफ्तार में गिरावट जैसी स्थिति में कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. जिंक या किसी भी खनिज का सप्लीमेंट जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से शुरू न करें, खास तौर पर गर्भावस्था में और बच्चों में.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जिंक की कमी के शुरुआती लक्षण कौन से हैं?+

सबसे पहले जो चीज़ें दिखती हैं वे अक्सर छोटी और नज़रअंदाज़ करने लायक लगती हैं. नाखूनों पर हल्के सफेद धब्बे या रेखाएं, बार बार सर्दी जुकाम होना और ठीक होने में सामान्य से ज़्यादा समय लगना, कोई छोटा घाव या कटा हुआ निशान जो धीरे धीरे भरे, खाने का स्वाद या खुशबू पहले जैसी महसूस न होना, और भूख का धीरे धीरे कम होना. कुछ लोगों में बाल पतले होना और झड़ना भी साथ में दिखता है. दिक्कत यह है कि इनमें से हर लक्षण अकेले किसी और वजह से भी हो सकता है, इसलिए दो तीन लक्षण एक साथ और हफ्तों तक बने रहना ही असली संकेत है.

क्या नाखूनों पर सफेद धब्बे हमेशा जिंक की कमी की वजह से होते हैं?+

नहीं, और यह एक आम गलतफहमी है. नाखूनों पर सफेद धब्बे या निशान ज़्यादातर मामलों में नाखून पर लगी छोटी चोट की वजह से होते हैं, जैसे दरवाज़े में उंगली दब जाना या नाखून काटते समय हल्की चोट, और ये अपने आप कुछ हफ्तों में नाखून के साथ आगे बढ़कर गायब हो जाते हैं. जिंक की कमी से जुड़े निशान आमतौर पर एक साथ कई नाखूनों पर, बार बार और बिना किसी चोट के दिखते हैं. अगर सिर्फ एक नाखून पर एक बार निशान दिखा है तो चिंता की बात नहीं, लेकिन कई नाखूनों पर बार बार दिखने वाला पैटर्न ध्यान देने लायक है.

शाकाहारी लोगों में जिंक की कमी ज़्यादा आम क्यों है?+

दो वजहें हैं. पहली, मांस, अंडा और मछली में मौजूद जिंक शरीर बहुत आसानी से सोख लेता है, जबकि दाल, अनाज और फलियों में मौजूद जिंक की मात्रा कम होती है और उसे सोखना मुश्किल होता है. दूसरी और बड़ी वजह फाइटेट है, यह एक प्राकृतिक तत्व है जो अनाज, दाल और फलियों के छिलके में पाया जाता है और जिंक तथा आयरन जैसे खनिजों को आंतों में बांध देता है, जिससे शरीर उन्हें ठीक से सोख नहीं पाता. यही वजह है कि पूरी तरह शाकाहारी थाली में जिंक की ज़रूरत मांसाहारी थाली के मुकाबले काफी ज़्यादा मानी जाती है, भले ही खाने में जिंक की कुल मात्रा बराबर क्यों न हो.

क्या जिंक सप्लीमेंट अपने मन से शुरू किया जा सकता है?+

यहां सावधानी ज़रूरी है, क्योंकि ज़्यादा जिंक लेने के अपने नुकसान हैं. लंबे समय तक ज़रूरत से ज़्यादा जिंक लेने से शरीर में कॉपर नाम के खनिज की कमी हो सकती है, जिसके लक्षण खून की कमी और नसों से जुड़ी दिक्कतें हो सकते हैं. इसके अलावा ज़्यादा मात्रा से जी मिचलाना, पेट खराब होना और स्वाद में गड़बड़ी भी हो सकती है. सही मात्रा उम्र, वजन, कमी की गहराई और किसी और दवा या स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट शुरू करना ठीक नहीं है.

जिंक की कमी की जांच कैसे होती है?+

यह एक साधारण खून की जांच है जिसमें खून में मौजूद जिंक की मात्रा नापी जाती है. जांच तब समझ आती है जब ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन कई हफ्तों से बने हों, या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में आते हों, जैसे पूरी तरह शाकाहारी खाना खाने वाले लोग, पाचन से जुड़ी कोई पुरानी स्थिति रखने वाले, या गर्भवती महिलाएं. ध्यान रखने वाली बात यह है कि खून में जिंक का स्तर शरीर के अंदर मौजूद कुल जिंक की सही तस्वीर हमेशा नहीं दिखाता, इसलिए डॉक्टर अक्सर जांच के साथ साथ लक्षणों और खाने की आदत को भी देखकर फैसला लेते हैं.

जिंक की कमी ठीक होने में कितना समय लगता है?+

यह इस पर निर्भर करता है कि कमी कितनी गहरी थी और सुधार किस रास्ते से हो रहा है, खाने से या डॉक्टर की सलाह पर किसी और तरीके से. घाव भरने की रफ्तार और स्वाद जैसी चीज़ों में सुधार अक्सर तीन से चार हफ्तों में महसूस होने लगता है. नाखून और बालों में फर्क दिखने में ज़्यादा समय लगता है, क्योंकि ये पहले से बढ़ चुके हिस्से होते हैं, इसलिए नया और सेहतमंद हिस्सा दिखने में आठ से बारह हफ्ते तक लग सकते हैं. अगर तीन महीने में कोई फर्क महसूस नहीं होता, तो यह मान लेना कि जिंक ही अकेली वजह थी, गलत हो सकता है.

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