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विटामिन बी12 की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के तरीके: शाकाहारी लोगों के लिए ज़रूरी बात

SuperLiving Expert Team·

विटामिन बी12 की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के तरीके: शाकाहारी लोगों के लिए ज़रूरी बात

छोटा जवाब

अगर आपको बिना वजह लगातार थकान रहती है, हाथों या पैरों में हल्की झुनझुनी महसूस होती है, याददाश्त पहले जैसी नहीं लगती, और आप शाकाहारी या लगभग शाकाहारी खाना खाते हैं, तो विटामिन बी12 की कमी उन वजहों में से है जिन्हें जांचना ज़रूरी है, क्योंकि यह विटामिन लगभग पूरी तरह पशु स्रोतों से आता है.

यह कमी सिर्फ खराब खानपान की निशानी नहीं, बल्कि भारत जैसे देश में शाकाहारी थाली की एक आम सीमा है. उपाय में थाली में डेयरी और अंडा जोड़ना, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ देखना, और लक्षण साफ हों तो एक सीधी खून की जांच कराना शामिल है. जांच के बिना सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी सही तरीका नहीं है.

विटामिन बी12 असल में करता क्या है

विटामिन बी12, जिसे कोबालामिन भी कहा जाता है, शरीर के तीन ज़रूरी कामों में शामिल है.

पहला, नई लाल रक्त कोशिकाएं बनाना. बी12 के बिना शरीर ऐसी कोशिकाएं बनाता है जो आकार में बड़ी लेकिन काम में कमज़ोर होती हैं, और ऑक्सीजन ठीक से हर हिस्से तक नहीं पहुंचा पातीं, इसलिए गहरी कमी अक्सर एक खास तरह के एनीमिया तक पहुंच जाती है.

दूसरा, नसों और मस्तिष्क से जुड़ा काम. बी12 नसों के ऊपर की सुरक्षा परत बनाने में मदद करता है, जो संकेतों को तेज़ और सही तरीके से पहुंचाती है. कमी लंबे समय तक बनी रहे तो यह परत कमज़ोर पड़ने लगती है, जिसका असर हाथ पैर की सनसनी, संतुलन और याददाश्त पर दिखता है.

तीसरा, शरीर की ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया, इसलिए कमी की स्थिति में थकान और सुस्ती सबसे पहले महसूस होने वाले लक्षणों में गिनी जाती है.

कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं

बी12 की कमी की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसके लक्षण बहुत आम चीज़ों जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें उम्र, काम का बोझ या मौसम मान लेते हैं.

लगातार थकान और कमज़ोरी. पूरी नींद के बाद भी शरीर भारी लगना और दिन के दूसरे हिस्से में ऊर्जा जल्दी खत्म हो जाना.

हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्नपन. खास तौर पर उंगलियों और पंजों में, जो शुरुआत में हल्का लगता है लेकिन धीरे-धीरे बढ़ सकता है.

जीभ में जलन या लाली, और मुंह के छाले. जीभ चिकनी और लाल दिखने लगती है, कई बार खाना निगलने में हल्की तकलीफ भी महसूस होती है.

याददाश्त कमज़ोर होना और ध्यान न लगना. छोटी बातें भूलना, काम पर ध्यान लगाने में मुश्किल, और सोचने की रफ्तार धीमी लगना.

मूड में बदलाव. चिड़चिड़ापन बढ़ना और बिना किसी साफ वजह के उदासी महसूस होना.

चेहरे का पीला पड़ना और सांस फूलना. यह एनीमिया की तरफ इशारा करता है और थकान की तस्वीर को पूरा करता है.

चलने में संतुलन बिगड़ना. गंभीर मामलों में पैरों में स्थिरता कम महसूस होती है, खास तौर पर अंधेरे में चलते समय.

ध्यान रखिए कि यह सूची जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से कई लक्षण थायराइड, खून की कमी, नींद पूरी न होने या तनाव में भी दिखते हैं, इसलिए सिर्फ लक्षण देखकर बी12 को ही वजह मान लेना जल्दबाज़ी होगी. खून की कमी का दूसरा बड़ा कारण समझने के लिए आयरन की कमी के लक्षण और डाइट पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि दोनों की जांच अक्सर साथ होती है.

किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है

सख्त शाकाहारी और वीगन खाना खाने वाले लोग सबसे ऊपर आते हैं, क्योंकि बी12 का लगभग पूरा प्राकृतिक स्रोत पशु आधारित है. इसके बाद बुज़ुर्ग आते हैं, क्योंकि उम्र के साथ पेट का एसिड कम होता है जो बी12 को खाने से अलग करने में मदद करता है.

जिन लोगों की पेट या आंत की सर्जरी हुई हो, या जिन्हें पेट से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी हो, उनमें भी सोखने की क्षमता घट जाती है. लंबे समय से डायबिटीज़ की कुछ आम दवाएं लेने वाले लोगों में भी बी12 का स्तर धीरे-धीरे गिर सकता है. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की ज़रूरत भी सामान्य से ज़्यादा होती है.

खाने से कितना मिल सकता है

यहां ईमानदार बात यह है कि विटामिन डी के उलट, जहां मशरूम जैसे कुछ शाकाहारी विकल्प मिल जाते हैं, बी12 के मामले में शाकाहारी थाली की सीमा साफ है. इस मिलती जुलती पहचान को विटामिन डी की कमी के लक्षण और उपाय में विस्तार से समझा गया है.

अंडा. शाकाहारी थाली में सबसे आसान और भरोसेमंद स्रोत, अगर कोई अंडा खाता है.

दूध, दही और पनीर. डेयरी बी12 का एक अच्छा नियमित स्रोत है, और यही वजह है कि शुद्ध शाकाहारी थाली में डेयरी की मौजूदगी बहुत मायने रखती है.

मांस और मछली. मांसाहारी लोगों के लिए यह सबसे भरपूर स्रोत हैं, हालांकि उनमें कमी का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता.

फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ. कुछ अनाज, दूध और खाने के तेल में अब बी12 मिलाया जाता है. पैकेट पर लिखा ध्यान से देखिए, यह वीगन लोगों के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्पों में से एक है.

दाल, सोया और पनीर जैसे शाकाहारी प्रोटीन स्रोत बी12 की जगह नहीं लेते, लेकिन थाली का पूरा पोषण संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिन्हें विस्तार से शाकाहारी प्रोटीन स्रोत में समझाया गया है. जो लोग पूरी तरह वीगन हैं, यानी डेयरी और अंडा भी नहीं खाते, उनके लिए भोजन से पूरी ज़रूरत भरना लगभग असंभव है, और उन्हें लगभग हमेशा किसी न किसी रूप में सप्लीमेंट की सलाह दी जाती है.

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सप्लीमेंट का सवाल, और वजह क्यों मायने रखती है

बी12 पानी में घुलने वाला विटामिन है, इसलिए ज़्यादा मात्रा का जोखिम विटामिन डी जितना नहीं माना जाता, फिर भी बिना सोचे शुरू करना सही तरीका नहीं है.

असली सवाल कमी की वजह है. अगर वजह सिर्फ खानपान है, तो गोली या सिरप के रूप में सप्लीमेंट आमतौर पर काफी होता है. लेकिन अगर वजह पेट में मौजूद एक खास प्रोटीन की कमी है जो बी12 को आंत में सोखने में मदद करता है, तो मुंह से ली गई गोली का असर सीमित रह जाता है, और वहां इंजेक्शन जैसे तरीके की ज़रूरत पड़ सकती है.

यह फर्क सिर्फ जांच रिपोर्ट देखकर डॉक्टर तय कर सकते हैं. सही क्रम यही है: पहले लक्षण पहचानिए, फिर जांच कराइए, फिर रिपोर्ट लेकर डॉक्टर से मिलिए.

जांच कब और कैसे कराएं

जांच तब समझ आती है जब ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन कई हफ्तों से बने हों, या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में आते हों. यह एक सीधी खून की जांच है जिसमें सीरम बी12 का स्तर देखा जाता है, भूखे रहने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती.

अगर रिपोर्ट सीमा रेखा पर हो, तो डॉक्टर होमोसिस्टीन या एमएमए नाम की अतिरिक्त जांच सुझा सकते हैं. दोबारा जांच का समय डॉक्टर तय करते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि इलाज किस रूप में शुरू हुआ.

जो काम नहीं करता

पहला, सिर्फ हरी सब्ज़ियां और फल बढ़ा देना. ये सेहत के लिए अच्छे हैं, लेकिन बी12 की कमी को अकेले पूरा नहीं करते, क्योंकि पौधों में यह विटामिन प्राकृतिक रूप से नहीं होता.

दूसरा, थकान को हमेशा नींद की कमी मान लेना. नींद पूरी करने के बाद भी थकान बनी रहे तो यह सिर्फ रूटीन का मामला नहीं, जांच का संकेत है.

तीसरा, झुनझुनी को बैठने के तरीके की गलती समझना. कभी कभार पैर सुन्न होना आम है, लेकिन बार बार और बढ़ता हुआ सुन्नपन नज़रअंदाज़ करने लायक नहीं है.

चौथा, बिना जांच के सप्लीमेंट लेकर भूल जाना. अगर असली वजह सोखने की क्षमता से जुड़ी है, तो गोली लेते रहने के बावजूद कमी बनी रह सकती है.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. अगर आप डेयरी और अंडा खाते हैं, तो रोज़ की थाली में एक तय हिस्सा जोड़िए, जैसे रोज़ एक कटोरी दही या एक अंडा. फोर्टिफाइड दूध या अनाज मिलता हो तो उसे भी आज़माइए.

दूसरा हफ्ता. रोज़ एक लाइन में लिखिए, दिन भर की थकान दस में से कितनी रही और झुनझुनी जैसा कुछ महसूस हुआ या नहीं. अगर लक्षण साफ और बार-बार दिख रहे हैं, तो इसी हफ्ते जांच का समय तय कर लीजिए.

दो हफ्ते बाद अपनी लाइनें एक साथ पढ़िए. हल्की कमी में थोड़ा फर्क जल्दी दिख सकता है, लेकिन नसों से जुड़े लक्षणों में सुधार धीमा और महीनों में आता है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर हाथ पैर में झुनझुनी बढ़ती जा रही है, अगर चलने में संतुलन बिगड़ रहा है, अगर याददाश्त में साफ गिरावट महसूस हो रही है, अगर सांस फूलना और चेहरे का पीलापन साथ में दिख रहे हैं, या अगर आप गर्भवती हैं और शाकाहारी हैं, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और तुरंत डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है.

मिलाकर बात यह है

विटामिन बी12 की कमी शाकाहारी भारत की एक बहुत आम लेकिन कम चर्चित समस्या है. यह किसी की गलती नहीं, थाली की एक सच्ची सीमा है, और इसे पहचानना ही सबसे बड़ा कदम है.

आपको कोई नाटकीय बदलाव नहीं चाहिए. थाली में डेयरी और अंडा जोड़िए, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों पर ध्यान दीजिए, और लक्षण साफ हों तो एक सीधी खून की जांच कराइए. बाकी फैसले रिपोर्ट देखकर डॉक्टर करेंगे.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, इसे हफ्ते दर हफ्ते निभाना है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली और आपकी दिनचर्या के हिसाब से इसे छोटे कदमों में बांटते हैं, ताकि पोषण की कमी सिर्फ एक बार पढ़ी गई जानकारी न रहकर रोज़ की आदत बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विटामिन बी12 की कमी के शुरुआती लक्षण कौन से हैं? शुरुआत में सबसे आम शिकायत लगातार थकान और कमज़ोरी होती है, जो आराम करने के बाद भी पूरी तरह नहीं जाती. इसके साथ अक्सर हाथों और पैरों में हल्की झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है, जीभ में हल्की जलन या लाली रहती है, याददाश्त कमज़ोर होने लगती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और चेहरा सामान्य से ज़्यादा पीला दिखने लगता है. दिक्कत यह है कि ये लक्षण बहुत धीरे-धीरे आते हैं और लोग इन्हें थकान, उम्र या तनाव मान लेते हैं.

शाकाहारी लोगों में बी12 की कमी इतनी आम क्यों है? विटामिन बी12 लगभग पूरी तरह पशु स्रोतों से मिलता है, जैसे मांस, मछली, अंडे और डेयरी. पौधों में यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता, चाहे कितनी भी हरी सब्ज़ी या दाल खाई जाए. भारत में बड़ी आबादी शाकाहारी है, इसलिए जिनकी थाली में अंडा और डेयरी भी सीमित है, उनमें कमी का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. बी12 में शाकाहारी विकल्प असल में डेयरी, अंडे और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों तक ही सीमित हैं.

क्या बी12 की कमी से एनीमिया हो सकता है? हां, यह एक जाना पहचाना असर है. बी12 शरीर में नई और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है. जब कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर बड़ी लेकिन कमज़ोर लाल रक्त कोशिकाएं बनाने लगता है जो ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंचा पातीं. इसके लक्षण खून की सामान्य कमी जैसे ही दिखते हैं, इसलिए सिर्फ आयरन की जांच काफी नहीं होती, बी12 की जांच भी ज़रूरी हो जाती है.

विटामिन बी12 की जांच कब और कैसे करानी चाहिए? जांच तब समझ आती है जब ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन कई हफ्तों से बने हों, या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में हों, जैसे सख्त शाकाहारी या वीगन, बुज़ुर्ग, या पेट की सर्जरी करा चुके लोग. यह एक साधारण खून की जांच है जिसमें सीरम बी12 का स्तर देखा जाता है, और कई बार डॉक्टर होमोसिस्टीन या एमएमए नाम की अतिरिक्त जांच भी सुझा सकते हैं. भूखे रहने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती.

क्या बी12 सप्लीमेंट अपने मन से शुरू किया जा सकता है? बी12 पानी में घुलने वाला विटामिन है, इसलिए ज़्यादा मात्रा का सीधा खतरा उतना बड़ा नहीं माना जाता, लेकिन इसे बिना सोचे शुरू नहीं करना चाहिए. असली सवाल यह है कि कमी की वजह क्या है. अगर वजह सिर्फ खाना है तो गोली काफी हो सकती है, लेकिन अगर वजह पेट में सोखने की क्षमता से जुड़ी है, तो गोली का असर सीमित रहता है और इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ सकती है. यह फैसला डॉक्टर जांच रिपोर्ट देखकर करते हैं.

कमी ठीक होने में कितना समय लगता है? यह कमी की गहराई और वजह पर निर्भर करता है. हल्की कमी में कुछ हफ्तों में सुधार दिखना शुरू हो सकता है, जबकि गहरी कमी में, खास तौर पर जब झुनझुनी या सुन्नपन जैसे लक्षण मौजूद हों, सुधार में कई महीने लग सकते हैं. यही वजह है कि नसों से जुड़े लक्षण दिखते ही जल्दी जांच और इलाज शुरू करना ज़्यादा फायदेमंद होता है, इंतज़ार करने से स्थिति बिगड़ सकती है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. लगातार थकान, हाथ पैर में झुनझुनी या सुन्नपन, याददाश्त में गिरावट, या चलने में संतुलन बिगड़ने जैसी स्थिति में कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. विटामिन बी12 या किसी भी सप्लीमेंट को जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से शुरू न करें, खास तौर पर गर्भावस्था में या किसी पुरानी बीमारी की स्थिति में.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विटामिन बी12 की कमी के शुरुआती लक्षण कौन से हैं?+

शुरुआत में सबसे आम शिकायत लगातार थकान और कमज़ोरी होती है, जो आराम करने के बाद भी पूरी तरह नहीं जाती. इसके साथ अक्सर हाथों और पैरों में हल्की झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है, जीभ में हल्की जलन या लाली रहती है, याददाश्त कमज़ोर होने लगती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और चेहरा सामान्य से ज़्यादा पीला दिखने लगता है. दिक्कत यह है कि ये लक्षण बहुत धीरे-धीरे आते हैं और लोग इन्हें थकान, उम्र या तनाव मान लेते हैं, जिससे कमी सालों तक पकड़ में नहीं आती.

शाकाहारी लोगों में बी12 की कमी इतनी आम क्यों है?+

विटामिन बी12 लगभग पूरी तरह पशु स्रोतों से मिलता है, जैसे मांस, मछली, अंडे और डेयरी. पौधों में यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता, चाहे कितनी भी हरी सब्ज़ी या दाल खाई जाए. भारत में बड़ी आबादी शाकाहारी है, इसलिए जिनकी थाली में अंडा और डेयरी भी सीमित है, उनमें कमी का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है. यह विटामिन डी से अलग स्थिति है, जहां मशरूम जैसे कुछ शाकाहारी विकल्प मौजूद हैं. बी12 में शाकाहारी विकल्प असल में डेयरी, अंडे और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों तक ही सीमित हैं.

क्या बी12 की कमी से एनीमिया हो सकता है?+

हां, यह एक जाना पहचाना असर है. बी12 शरीर में नई लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है. जब कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर बड़ी लेकिन कमज़ोर लाल रक्त कोशिकाएं बनाने लगता है जो ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंचा पातीं, जिसे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है. इसके लक्षण खून की सामान्य कमी जैसे ही दिखते हैं, इसलिए सिर्फ आयरन की जांच काफी नहीं होती, बी12 की जांच भी ज़रूरी हो जाती है.

विटामिन बी12 की जांच कब और कैसे करानी चाहिए?+

जांच तब समझ आती है जब ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन कई हफ्तों से बने हों, या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में हों, जैसे सख्त शाकाहारी या वीगन, बुज़ुर्ग, पेट की सर्जरी करा चुके लोग, या लंबे समय से कुछ खास दवाएं लेने वाले लोग. यह एक साधारण खून की जांच है जिसमें सीरम बी12 का स्तर देखा जाता है, और कई बार डॉक्टर होमोसिस्टीन या एमएमए नाम की अतिरिक्त जांच भी सुझा सकते हैं. भूखे रहने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती.

क्या बी12 सप्लीमेंट अपने मन से शुरू किया जा सकता है?+

बी12 पानी में घुलने वाला विटामिन है, इसलिए ज़्यादा मात्रा का सीधा खतरा उतना बड़ा नहीं माना जाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे बिना सोचे शुरू कर देना चाहिए. असली सवाल यह है कि कमी की वजह क्या है. अगर वजह सिर्फ खाना है तो गोली या सिरप काफी हो सकता है, लेकिन अगर वजह पेट में सोखने की क्षमता से जुड़ी है, तो गोली का असर सीमित रहता है और इंजेक्शन की ज़रूरत पड़ सकती है. यह फैसला जांच रिपोर्ट देखकर डॉक्टर करते हैं.

कमी ठीक होने में कितना समय लगता है?+

यह कमी की गहराई और वजह पर निर्भर करता है. हल्की कमी में कुछ हफ्तों में सुधार दिखना शुरू हो सकता है, जबकि गहरी कमी में, खास तौर पर जब झुनझुनी या सुन्नपन जैसे नसों से जुड़े लक्षण मौजूद हों, सुधार में कई महीने लग सकते हैं. यही वजह है कि नसों से जुड़े लक्षण दिखते ही जल्दी जांच और इलाज शुरू करना ज़्यादा फायदेमंद होता है, इंतज़ार करने से स्थिति बिगड़ सकती है.

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