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मैग्नीशियम की कमी के लक्षण और शरीर में इसकी कमी पूरी करने के आसान उपाय

SuperLiving Expert Team·

मैग्नीशियम की कमी के लक्षण और शरीर में इसकी कमी पूरी करने के आसान उपाय

छोटा जवाब

अगर रात में सोते समय पिंडली में अचानक ऐंठन आकर नींद टूट जाती है, आंख की पलक बार बार फड़कती है, बेचैनी और चिड़चिड़ापन बना रहता है, और नींद पूरी करने के बाद भी थकान नहीं जाती, तो मैग्नीशियम की कमी उन वजहों में से एक है जिन्हें जांचना आसान है, लेकिन जिसे लोग सबसे कम गंभीरता से लेते हैं.

सबसे बड़ा उपाय थाली से शुरू होता है, महंगे सप्लीमेंट से नहीं. बादाम, कद्दू के बीज, हरी पत्तेदार सब्ज़ी, साबुत अनाज और केला को रोज़ की थाली में जगह दीजिए, और साथ में तनाव और नींद का भी ध्यान रखिए, क्योंकि दोनों मैग्नीशियम की खपत सीधे बढ़ाते हैं. अगर लक्षण साफ हैं या बार बार ऐंठन आती है, तो डॉक्टर से जांच की बात कीजिए, क्योंकि सिर्फ अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी सही रास्ता नहीं है.

मैग्नीशियम शरीर में करता क्या है

ज़्यादातर लोगों ने मैग्नीशियम के बारे में सुना ही नहीं है, या इसे सिर्फ एक और सप्लीमेंट के नाम की तरह जानते हैं. असल में यह शरीर के तीन सौ से ज़्यादा ज़रूरी कामों में शामिल रहता है.

यह मांसपेशियों को सिकुड़ने के बाद वापस ढीला होने में मदद करता है, यही वजह है कि इसकी कमी में सबसे पहले ऐंठन दिखती है. यह नर्वस सिस्टम को शांत रखने, नसों के बीच संदेश को संतुलित बनाए रखने और दिल की धड़कन को नियमित रखने में भी मदद करता है. इसके अलावा यह हड्डियों की मज़बूती और शरीर की ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया में भी ज़रूरी है.

शरीर का ज़्यादातर मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों के अंदर जमा रहता है, खून में बहुत छोटा हिस्सा दिखता है. इसलिए जब खाने से मैग्नीशियम कम मिलता है, तो शुरुआती दिनों में खून की सामान्य जांच भी सामान्य आ सकती है, जबकि मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम अंदर से असर महसूस करने लगते हैं.

कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं

मैग्नीशियम की कमी की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसके लक्षण किसी एक साफ बीमारी जैसे नहीं लगते. वे धीरे धीरे आते हैं और रोज़मर्रा की छोटी शिकायतों में घुल जाते हैं.

रात में पैरों में ऐंठन. सोते समय अचानक पिंडली या पंजे की मांसपेशी में तेज़ खिंचाव आना, यह सबसे आम और सबसे पहले पकड़ में आने वाला संकेत है.

आंख की पलक का फड़कना. हल्का सा बार बार फड़कना, जिसे ज़्यादातर लोग थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

बेचैन और अधूरी नींद. नींद आने में देर लगना, या बीच में बार बार आंख खुल जाना, बिना किसी साफ वजह के.

चिड़चिड़ापन और बेचैनी. मन का बिना वजह अशांत रहना, छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आना.

सिरदर्द और थकान. सिर में हल्का लेकिन लगातार दर्द, और सात आठ घंटे सोने के बाद भी शरीर का भारी लगना.

बहुत गंभीर मामलों में. दिल की धड़कन का असामान्य लगना या मांसपेशियों में बार बार ऐंठन का होना. ऐसी स्थिति में देर न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें.

ध्यान दीजिए कि यह सूची जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से कई लक्षण कैल्शियम की कमी, थायराइड की गड़बड़ी या लगातार तनाव में भी दिख सकते हैं.

भारत में मैग्नीशियम की कमी इतनी आम क्यों है

प्रोसेस्ड खाने का बढ़ता चलन. अनाज जितना ज़्यादा प्रोसेस या पॉलिश किया जाता है, उतना ही बड़ा हिस्सा मैग्नीशियम का निकल जाता है. सफेद चावल और मैदे में साबुत अनाज से बहुत कम मैग्नीशियम बचता है.

लगातार तनाव. तनाव के दौरान शरीर मैग्नीशियम की खपत तेज़ी से करता है, और यही मैग्नीशियम फिर तनाव संभालने के काम आता है, यानी जितना ज़्यादा तनाव उतनी ज़्यादा ज़रूरत.

ज़्यादा पसीना बहाना. गर्मी में ज़्यादा पसीना आना या रोज़ाना एक्सरसाइज़ करना, दोनों से पसीने के रास्ते मैग्नीशियम बाहर निकल जाता है.

चाय, कॉफी और शराब की आदत. ज़्यादा मात्रा में इनका सेवन पेशाब के रास्ते मैग्नीशियम निकलने की रफ्तार बढ़ा देता है.

पेट और आंत से जुड़ी स्थितियां. पाचन या आंत से जुड़ी दिक्कत जिसमें पोषक तत्व ठीक से सोखे नहीं जाते, वहां मैग्नीशियम की कमी का खतरा ज़्यादा रहता है.

किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है

डायबिटीज़ वाले लोग, ज़्यादा शराब पीने वाले, नियमित पसीना बहाने वाले खिलाड़ी, लगातार तनाव में रहने वाले लोग, बुज़ुर्ग जिनकी आंतें पोषक तत्व सोखने में कम सक्षम होती जाती हैं, और वे जो रोज़ाना बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना खाते हैं.

अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से बात कर लेना सबसे सीधा रास्ता है.

थाली से मैग्नीशियम कैसे बढ़ाएं

यह सबसे सस्ता और सबसे भरोसेमंद उपाय है.

बादाम और काजू. मुट्ठीभर बादाम रोज़ की थाली में जोड़ना आसान शुरुआत है. भीगे हुए बादाम पचने में भी आसान रहते हैं.

कद्दू के बीज. थोड़ी मात्रा में भी अच्छा मैग्नीशियम देते हैं. सलाद या सब्ज़ी में भूनकर डालना आसान तरीका है.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. पालक, मेथी और बथुआ, ये सब मैग्नीशियम के साथ साथ बाकी पोषक तत्व भी देते हैं.

साबुत अनाज. गेहूं, बाजरा और ज्वार को पॉलिश किए अनाज के बजाय चुनना मैग्नीशियम बचाए रखता है.

दालें और सोयाबीन. रोज़ की दाल भी मैग्नीशियम का एक स्थिर स्रोत है, इसे थाली से कभी गायब मत होने दीजिए.

केला और डार्क चॉकलेट. केला मैग्नीशियम के साथ पोटैशियम भी देता है, और थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट भी योगदान करती है.

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मैग्नीशियम और नींद का गहरा रिश्ता

यह वह हिस्सा है जिसे सबसे कम समझा जाता है.

मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करता है और शरीर की घड़ी से जुड़े हार्मोन को नियमित रखने में भी भूमिका निभाता है. जब इसकी कमी होती है, तो मांसपेशियां पूरी तरह ढीली नहीं हो पातीं और दिमाग भी जल्दी शांत नहीं होता, जिससे बिस्तर पर लेटने के बाद भी नींद आने में देर लगती है.

बहुत से लोग नींद की समस्या का पूरा दोष phone और stress को दे देते हैं, जो सही भी है, लेकिन मैग्नीशियम की कमी उसी तस्वीर का एक चुपचाप काम करने वाला हिस्सा हो सकती है. नींद से जुड़ी बाकी आम वजहें समझने के लिए रात को नींद नहीं आती तो क्या करें एक अच्छा अगला कदम है.

मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन डी का रिश्ता

मैग्नीशियम अकेले काम नहीं करता, यह शरीर के बाकी ज़रूरी तत्वों के साथ मिलकर काम करता है.

शरीर को विटामिन डी को उपयोगी रूप में बदलने के लिए मैग्नीशियम चाहिए होता है, यानी अगर मैग्नीशियम कम है तो विटामिन डी ठीक से काम नहीं करता. इसी तरह मैग्नीशियम और कैल्शियम मांसपेशियों के सिकुड़ने और ढीले होने की प्रक्रिया में साथ हिस्सा लेते हैं, इसलिए दोनों में संतुलन ज़रूरी है. यह रिश्ता समझने के लिए विटामिन डी की कमी के लक्षण पढ़ना उपयोगी रहेगा, खास तौर पर अगर रात की ऐंठन के साथ थकान भी बनी रहती हो.

जांच कब और कैसे कराएं

खून की सामान्य मैग्नीशियम जांच अकेले पूरी तस्वीर नहीं देती, क्योंकि शरीर का ज़्यादातर मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों के अंदर रहता है, खून में बहुत छोटा हिस्सा ही दिखता है. इसका मतलब है कि रिपोर्ट सामान्य आने पर भी अंदर की कमी बनी रह सकती है.

अगर लक्षण साफ हैं, बार बार ऐंठन आती है, दिल की धड़कन असामान्य लगती है, या कोई पेट-आंत से जुड़ी स्थिति है जिसमें पोषक तत्व सोखने में दिक्कत होती है, तो डॉक्टर से जांच की बात करना सही रहता है.

जो काम नहीं करता

सिर्फ केला खाकर संतुष्ट हो जाना. केला अच्छा है, लेकिन अकेला रास्ता नहीं. बादाम, कद्दू के बीज, हरी सब्ज़ी और साबुत अनाज को साथ जोड़ना ज़्यादा भरोसेमंद है.

तनाव को नज़रअंदाज़ करना. तनाव मैग्नीशियम की खपत बढ़ा देता है, इसलिए सिर्फ खाना बदलना काफी नहीं.

बिना जांच के सप्लीमेंट शुरू करना और भूल जाना. ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा से पेट खराब होना और दस्त जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

हर ऐंठन को मैग्नीशियम की कमी मान लेना. रात की ऐंठन के पीछे पानी की कमी या देर तक एक ही स्थिति में बैठना भी वजह हो सकती है, इसलिए बार बार आने वाली ऐंठन को डॉक्टर से जांचना बेहतर है.

दिनभर बहुत ज़्यादा चाय, कॉफी या शराब लेना. ये सब पेशाब के रास्ते मैग्नीशियम निकलने की रफ्तार बढ़ा देते हैं.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. रोज़ मुट्ठीभर बादाम या कद्दू के बीज थाली में जोड़िए, और हफ्ते में तीन से चार दिन साबुत अनाज की रोटी या दलिया शामिल कीजिए.

दूसरा हफ्ता. दाल या सब्ज़ी में हरी पत्तेदार सब्ज़ी बढ़ाइए, और सोने से पहले फोन दूर रखकर 20 मिनट का शांत routine तय कर लीजिए, ताकि नर्वस सिस्टम को आराम मिलने का पूरा मौका मिले.

नापने का तरीका: रोज़ एक लाइन लिखिए, रात में ऐंठन आई या नहीं, और नींद कैसी रही. नर्वस सिस्टम से जुड़ा सुधार दिखने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए धैर्य ज़रूरी है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर रात में पैरों का खिंचाव बहुत बार आने लगे, अगर दिल की धड़कन असामान्य लगे, अगर मांसपेशियों में बार बार ऐंठन हो, अगर बेचैनी और चिड़चिड़ापन हफ्तों से बना हुआ हो, या अगर आप डायबिटीज़ या पेट-आंत से जुड़ी किसी स्थिति के साथ ये लक्षण देख रहे हैं, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है.

मिलाकर बात यह है

मैग्नीशियम की कमी उन समस्याओं में से है जिनका सबसे बड़ा उपाय रसोई से शुरू होता है, फिर भी सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाता है. आपको कोई महंगा प्लान नहीं चाहिए, रोज़ थोड़े बादाम या कद्दू के बीज, हफ्ते में कई बार साबुत अनाज और हरी सब्ज़ी, तनाव कम करने की कोशिश, और नींद का ध्यान चाहिए. बाकी फैसले जांच के बाद डॉक्टर करेंगे.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैग्नीशियम की कमी के सबसे पहले लक्षण कौन से होते हैं? सबसे पहले जो चीज़ दिखती है वह अक्सर रात में पिंडलियों या पंजों की मांसपेशियों में अचानक ऐंठन है, जो नींद से उठा देती है. इसके साथ आंख की पलक का बार बार फड़कना, हल्की बेचैनी और चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, और नींद का बार बार टूटना भी दिख सकता है. कुछ लोगों को थकान इतनी लगती है कि पूरी रात सोने के बाद भी शरीर भारी लगता है.

मैग्नीशियम की कमी और नींद न आने में क्या रिश्ता है? यह रिश्ता काफी सीधा है. मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को शांत करने वाले एक तत्व की तरह काम करता है, और यह शरीर की घड़ी से जुड़े मेलाटोनिन को नियमित रखने में भी मदद करता है. जब मैग्नीशियम कम होता है तो मांसपेशियां पूरी तरह ढीली नहीं हो पातीं और दिमाग भी जल्दी शांत नहीं होता, जिससे नींद आने में देर लगती है या बीच में बार बार टूटती है.

क्या सिर्फ केला खाने से मैग्नीशियम की कमी पूरी हो जाती है? केला एक अच्छा स्रोत है, लेकिन अकेला रास्ता नहीं. रोज़ सिर्फ एक केले पर निर्भर रहना ज़्यादातर लोगों की पूरी ज़रूरत नहीं भरता. बादाम, कद्दू के बीज, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, साबुत अनाज और दालों को साथ जोड़ने से थाली ज़्यादा भरोसेमंद बनती है.

मैग्नीशियम की जांच कैसे होती है और कब करानी चाहिए? खून की सामान्य मैग्नीशियम जांच अकेले पूरी तस्वीर नहीं देती, क्योंकि शरीर का ज़्यादातर मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों के अंदर रहता है, खून में बहुत कम हिस्सा दिखता है. इसलिए रिपोर्ट सामान्य आने पर भी अंदर की कमी बनी रह सकती है. अगर लक्षण मौजूद हैं या बार बार ऐंठन आती है, तो डॉक्टर से जांच की बात करना सही रहता है.

क्या मैग्नीशियम की कमी सिर्फ बुज़ुर्गों को होती है? नहीं, यह एक आम गलतफहमी है. ज़्यादा शराब पीने वाले, डायबिटीज़ वाले, बहुत पसीना बहाने वाले खिलाड़ी और लगातार तनाव में रहने वाले युवाओं में भी कमी आम है, क्योंकि तनाव और पसीना दोनों मैग्नीशियम की खपत बढ़ा देते हैं. जो लोग बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड और पैकेट का खाना खाते हैं, उनमें भी खतरा बढ़ जाता है.

क्या मैग्नीशियम का सप्लीमेंट अपने मन से लिया जा सकता है? यह सलाह देना ठीक नहीं होगा. ज़रूरत से ज़्यादा मैग्नीशियम लेने से पेट खराब होना और दस्त जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, और गुर्दे से जुड़ी किसी स्थिति में यह और भी जोखिम वाला हो सकता है. सही मात्रा उम्र, मौजूदा सेहत और दूसरी दवाओं पर निर्भर करती है, इसलिए यह फैसला जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. लगातार मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन का असामान्य लगना, या हफ्तों से बनी बेचैनी और नींद की दिक्कत की स्थिति में कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. मैग्नीशियम का कोई भी सप्लीमेंट जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से शुरू न करें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैग्नीशियम की कमी के सबसे पहले लक्षण कौन से होते हैं?+

सबसे पहले जो चीज़ दिखती है वह अक्सर रात में पिंडलियों या पंजों की मांसपेशियों में अचानक ऐंठन है, जो नींद से उठा देती है. इसके साथ आंख की पलक का बार बार फड़कना, हल्की बेचैनी और चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, और नींद का बार बार टूटना भी दिख सकता है. कुछ लोगों को थकान इतनी लगती है कि पूरी रात सोने के बाद भी शरीर भारी लगता है. दिक्कत यह है कि ये सारे संकेत धीरे धीरे आते हैं और तनाव या काम के दबाव में घुल जाते हैं, इसलिए ज़्यादातर लोग इन्हें कभी मैग्नीशियम से नहीं जोड़ते.

मैग्नीशियम की कमी और नींद न आने में क्या रिश्ता है?+

यह रिश्ता काफी सीधा है. मैग्नीशियम नर्वस सिस्टम को शांत करने वाले एक तत्व की तरह काम करता है, और यह शरीर की घड़ी से जुड़े मेलाटोनिन को नियमित रखने में भी मदद करता है. जब मैग्नीशियम कम होता है तो मांसपेशियां पूरी तरह ढीली नहीं हो पातीं और दिमाग भी जल्दी शांत नहीं होता, जिससे नींद आने में देर लगती है या बीच में बार बार टूटती है. नींद से जुड़ी बाकी वजहें समझने के लिए [रात को नींद नहीं आती तो क्या करें](/blog/raat-ko-neend-nahi-aati-upay/) पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि वहां phone, caffeine और routine जैसे बाकी कारण भी बताए गए हैं.

क्या सिर्फ केला खाने से मैग्नीशियम की कमी पूरी हो जाती है?+

केला एक अच्छा स्रोत है, लेकिन अकेला रास्ता नहीं. रोज़ सिर्फ एक केले पर निर्भर रहना ज़्यादातर लोगों की पूरी ज़रूरत नहीं भरता. बादाम, कद्दू के बीज, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, साबुत अनाज और दालों को साथ जोड़ने से थाली ज़्यादा भरोसेमंद बनती है. जो लोग बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना खाते हैं, उनके लिए बाकी स्रोत और भी ज़रूरी हो जाते हैं.

मैग्नीशियम की जांच कैसे होती है और कब करानी चाहिए?+

खून की सामान्य मैग्नीशियम जांच अकेले पूरी तस्वीर नहीं देती, क्योंकि शरीर का ज़्यादातर मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों के अंदर रहता है, खून में बहुत कम हिस्सा दिखता है. इसलिए रिपोर्ट सामान्य आने पर भी अंदर की कमी बनी रह सकती है. अगर लक्षण मौजूद हैं, बार बार ऐंठन आती है, या कोई पेट-आंत से जुड़ी स्थिति है, तो डॉक्टर से जांच की बात करना सही रहता है.

क्या मैग्नीशियम की कमी सिर्फ बुज़ुर्गों को होती है?+

नहीं, यह एक आम गलतफहमी है. ज़्यादा शराब पीने वाले, डायबिटीज़ वाले, बहुत पसीना बहाने वाले खिलाड़ी और लगातार तनाव में रहने वाले युवाओं में भी कमी आम है, क्योंकि तनाव और पसीना दोनों मैग्नीशियम की खपत बढ़ा देते हैं. जो लोग बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड और पैकेट का खाना खाते हैं, उनमें भी खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि प्रोसेसिंग में मैग्नीशियम का बड़ा हिस्सा निकल जाता है.

क्या मैग्नीशियम का सप्लीमेंट अपने मन से लिया जा सकता है?+

यह सलाह देना ठीक नहीं होगा. ज़रूरत से ज़्यादा मैग्नीशियम लेने से पेट खराब होना और दस्त जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, और गुर्दे से जुड़ी किसी स्थिति में यह और भी जोखिम वाला हो सकता है. सही मात्रा उम्र, मौजूदा सेहत और दूसरी दवाओं पर निर्भर करती है, इसलिए यह फैसला जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए.

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