कैल्शियम की कमी के लक्षण और इसे पूरा करने के आसान उपाय
छोटा जवाब
अगर रात में अचानक पिंडलियों में खिंचाव आकर नींद टूट जाती है, नाखून बहुत जल्दी टूटने लगे हैं, दांत या मसूड़े पहले से कमज़ोर लगने लगे हैं, और कमर में बिना किसी चोट के हल्का दर्द बना रहता है, तो कैल्शियम की कमी उन वजहों में से एक है जिन्हें जांचना आसान है, लेकिन जिसे लोग सबसे देर से गंभीरता से लेते हैं.
सबसे बड़ा उपाय थाली से शुरू होता है, महंगे सप्लीमेंट से नहीं. दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों को रोज़ की थाली में जगह दीजिए, और साथ में विटामिन डी का ध्यान रखिए, क्योंकि उसके बिना कैल्शियम ठीक से सोखा ही नहीं जाता. अगर लक्षण साफ हैं या आप ज़्यादा खतरे वाले समूह में आते हैं, तो डॉक्टर से जांच की बात कीजिए, क्योंकि सिर्फ अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी सही रास्ता नहीं है.
कैल्शियम शरीर में करता क्या है
ज़्यादातर लोग कैल्शियम को सिर्फ हड्डियों से जोड़ते हैं, और यह सच है, लेकिन पूरी बात नहीं.
शरीर का करीब 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और दांतों में जमा रहता है, जहां यह मज़बूती और ढांचा देता है. बाकी एक प्रतिशत खून और मांसपेशियों में रहता है, और यह मांसपेशियों को सिकुड़ने में, दिल की धड़कन को नियमित रखने में, और नसों के बीच संदेश पहुंचाने में मदद करता है.
जब खाने से कैल्शियम कम मिलता है, तो शरीर खून में उसका स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए हड्डियों से कैल्शियम निकालकर इस्तेमाल करने लगता है. यानी खून की जांच सामान्य आ सकती है, जबकि हड्डियां अंदर ही अंदर कमज़ोर होती रहती हैं.
कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं
कैल्शियम की कमी की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसके लक्षण किसी एक साफ बीमारी जैसे नहीं लगते. वे धीरे धीरे आते हैं और रोज़मर्रा की छोटी शिकायतों में घुल जाते हैं.
रात में पैरों में खिंचाव. सोते समय अचानक पिंडली या पंजे की मांसपेशी में तेज़ खिंचाव आना और उससे नींद टूट जाना, यह सबसे आम और सबसे पहले पकड़ में आने वाला संकेत है.
उंगलियों या होंठों के आसपास झनझनाहट. हल्की सुन्नता या चुभन जैसा एहसास, खास तौर पर हाथों की उंगलियों में.
नाखून और बाल कमज़ोर होना. नाखून जल्दी टूटने लगते हैं या उनमें लकीरें दिखने लगती हैं, और बालों का झड़ना बढ़ भी सकता है.
दांत और मसूड़ों की समस्या. दांत पहले से कमज़ोर या संवेदनशील लगना, मसूड़ों में बार बार सूजन या खून आना.
कमर और जोड़ों में हल्का दर्द. बिना किसी चोट के कमर या जोड़ों में लगातार बना रहने वाला दर्द, जिसे अक्सर उम्र या काम का दबाव समझ लिया जाता है.
बहुत गंभीर मामलों में. दिल की धड़कन का असामान्य लगना या मांसपेशियों में ऐंठन का बार बार होना. ऐसी स्थिति में देर न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें.
ध्यान दीजिए कि यह सूची जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से कई लक्षण मैग्नीशियम की कमी, थायराइड की गड़बड़ी या नींद की कमी में भी दिख सकते हैं.
भारत में कैल्शियम की कमी इतनी आम क्यों है
विटामिन डी की कमी. भारत में विटामिन डी की कमी बहुत आम है, और बिना विटामिन डी के आंतें कैल्शियम का बड़ा हिस्सा सोख ही नहीं पातीं, इसलिए सिर्फ कैल्शियम बढ़ा देना काफी नहीं.
डेयरी का सीमित इस्तेमाल. कई घरों में दूध, दही या पनीर की मात्रा बहुत कम रहती है, खास तौर पर उन लोगों में जिन्हें डेयरी पचाने में दिक्कत होती है.
चाय और कॉफी की आदत. ज़्यादा मात्रा में चाय या कॉफी पीना, खास तौर पर खाने के साथ, कैल्शियम के सोखे जाने में कुछ हद तक रुकावट डालता है.
बैठे रहने वाली दिनचर्या. हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए वज़न उठाने वाली एक्सरसाइज़ चाहिए, जैसे तेज़ चलना या सीढ़ियां चढ़ना, जो दिनभर बैठे रहने से नहीं मिलती.
उम्र और हार्मोन. महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजन गिरने से हड्डी का घनत्व तेज़ी से घटता है, जिससे कैल्शियम की ज़रूरत उसी उम्र में बढ़ जाती है जब खानपान अक्सर ढीला पड़ जाता है.
किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, मेनोपॉज़ के बाद की महिलाएं, बुज़ुर्ग जिनकी आंतें कैल्शियम सोखने में कम सक्षम होती जाती हैं, जो लोग दूध या डेयरी बहुत कम खाते हैं, जो लोग दिनभर घर या दफ्तर के अंदर रहते हैं और धूप कम लेते हैं, और वे लोग जिन्हें पेट या आंत से जुड़ी कोई ऐसी स्थिति है जिसमें पोषक तत्व सोखने में दिक्कत होती है.
अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से बात कर लेना सबसे सीधा रास्ता है.
थाली से कैल्शियम कैसे बढ़ाएं
यह सबसे सस्ता और सबसे भरोसेमंद उपाय है.
दूध, दही और पनीर. सबसे जाना पहचाना स्रोत. रोज़ एक गिलास दूध और एक कटोरी दही थाली में जोड़ना आसान शुरुआत है.
रागी. भारतीय अनाजों में कैल्शियम के सबसे अमीर स्रोतों में से एक. रागी की रोटी, दलिया या लड्डू, कोई भी तरीका चलेगा.
तिल के बीज. थोड़ी मात्रा में भी अच्छा कैल्शियम देते हैं. सब्ज़ी में भूनकर डालना या चटनी बनाना आसान तरीका है.
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. सरसों का साग, मेथी, पालक और बथुआ, ये सब कैल्शियम के साथ साथ बाकी पोषक तत्व भी देते हैं.
सोया और तिल के लड्डू जैसे देसी स्नैक. शाकाहारी और शुद्ध वीगन खानपान वालों के लिए यह अच्छे विकल्प हैं. शाकाहारी प्रोटीन के बाकी अच्छे स्रोत समझने के लिए शाकाहारी प्रोटीन स्रोत पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि इनमें से कई चीज़ें कैल्शियम और प्रोटीन दोनों साथ देती हैं.
बादाम और मूंगफली. नाश्ते के बीच का हल्का और भरने वाला विकल्प, साथ में कुछ कैल्शियम भी.
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