दिल की धड़कन तेज़ होना: आम कारण, घरेलू उपाय और डॉक्टर को कब दिखाएं
छोटा जवाब
अगर कभी कभी बिना किसी बड़ी वजह के दिल की धड़कन तेज़ महसूस होती है, कुछ मिनट में अपने आप शांत हो जाती है, और साथ में सीने में दर्द या सांस फूलने जैसी दिक्कत नहीं है, तो यह ज़्यादातर मामलों में तनाव, नींद की कमी, कैफीन या पानी की कमी जैसी आम वजहों से होता है, दिल की किसी गंभीर बीमारी से नहीं.
सबसे पहला कदम है बैठ जाना, धीमी और गहरी सांस लेना, और कुछ घूंट पानी पीना. दिन में चाय कॉफी की मात्रा पर ध्यान दीजिए, सोने का समय तय कीजिए और तनाव को हल्का करने के छोटे तरीके अपनाइए. लेकिन अगर धड़कन तेज़ होने के साथ सीने में दबाव, सांस फूलना, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस हो, या यह बार बार होने लगे, तो घरेलू उपाय की जगह डॉक्टर की जांच ज़रूरी हो जाती है.
दिल की धड़कन तेज़ होना असल में क्या है
धड़कन तेज़ होना, जिसे अक्सर लोग "दिल ज़ोर से धड़कना" या "दिल उछलना" कहते हैं, दरअसल शरीर के अपने ही अलार्म सिस्टम का काम है. जब दिमाग को लगता है कि शरीर को ज़्यादा खून और ऑक्सीजन की ज़रूरत है, चाहे वजह असली खतरा हो या सिर्फ मानसिक तनाव, वह एक हार्मोन छोड़ता है जो दिल को तेज़ और ज़ोर से धड़कने का इशारा देता है. यही वजह है कि डर लगने पर, गुस्सा आने पर या अचानक चौंकने पर भी धड़कन तेज़ हो जाती है.
ज़्यादातर लोगों को यह अनुभव कभी न कभी होता है, और आमतौर पर यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट में अपने आप शांत हो जाता है. दिक्कत तब शुरू होती है जब यह बार बार होने लगे, बिना किसी साफ वजह के आए, या इतनी देर तक बना रहे कि रोज़मर्रा के काम में रुकावट डाले.
यह समझना ज़रूरी है कि धड़कन तेज़ महसूस होना और धड़कन का असल में गड़बड़ होना, दोनों अलग बातें हैं. ज़्यादातर बार दिल पूरी तरह ठीक काम कर रहा होता है, बस शरीर का तनाव-तंत्र उसे सामान्य से ज़्यादा सक्रिय कर देता है. यही वजह है कि यह लेख घबराहट को शांत करने और आम वजहों को समझने पर ध्यान देता है, न कि किसी दवा या इलाज पर.
अब बात करते हैं उन आम वजहों की जिनसे यह अनुभव होता है.
तनाव और चिंता. यह सबसे आम वजह है. दिमाग जब लगातार किसी चिंता में उलझा रहता है, चाहे वह काम का दबाव हो या किसी रिश्ते की उलझन, शरीर उसी हार्मोन को बार बार छोड़ता रहता है जो धड़कन तेज़ करता है. चिंता और घबराहट को समझने और कम करने के तरीके चिंता और घबराहट कम करने के उपाय में विस्तार से बताए गए हैं.
कैफीन. चाय, कॉफी, कोला और एनर्जी ड्रिंक में मौजूद कैफीन दिल की धड़कन को सीधे तेज़ करता है. खाली पेट या दिन में बहुत ज़्यादा मात्रा में लिया गया कैफीन कई लोगों में साफ महसूस होने वाली धड़कन ला देता है.
नींद की कमी. एक दो रात की अधूरी नींद भी शरीर के तनाव-तंत्र को ज़्यादा संवेदनशील बना देती है, जिससे छोटी छोटी बातों पर भी धड़कन तेज़ महसूस होने लगती है.
पानी की कमी. शरीर में पानी कम होने पर खून का बहाव प्रभावित होता है, और दिल को उसी काम के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है.
खाली पेट रहना या बहुत ज़्यादा शक्कर वाला खाना. दोनों ही स्थितियां खून में शक्कर के स्तर को तेज़ी से बदलती हैं, जिसका सीधा असर धड़कन पर दिखता है.
हार्मोन में बदलाव. महिलाओं में मासिक धर्म के आसपास, गर्भावस्था में या रजोनिवृत्ति के दौरान धड़कन तेज़ होना एक आम अनुभव है, क्योंकि इस दौरान हार्मोन का स्तर लगातार बदलता रहता है.
निकोटीन और शराब. दोनों ही दिल की गति को सीधे प्रभावित करते हैं, और कई बार शराब पीने के कुछ घंटों बाद धड़कन तेज़ होना ज़्यादा साफ महसूस होता है.
बुखार या शरीर में सूजन जैसी सामान्य बीमारी. जब शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा होता है, तो दिल को सामान्य से ज़्यादा तेज़ काम करना पड़ता है.
अब सवाल यह है कि इनमें से कौन सी स्थिति घर पर संभल सकती है, और कब यह गंभीर हो सकता है. यहां ईमानदार रहना ज़रूरी है. ज़्यादातर धड़कन तेज़ होने के मामले घर पर संभल जाते हैं, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.
तुरंत मदद लीजिए अगर: धड़कन तेज़ होने के साथ सीने में दर्द या दबाव है, सांस लेने में तकलीफ है, चक्कर आ रहा है या बेहोशी जैसा महसूस हो रहा है, पसीना बहुत ज़्यादा आ रहा है, या दर्द बाएं हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैल रहा है. यह उन लक्षणों में से है जहां देर करना सही फैसला नहीं है.
जांच करानी चाहिए अगर: धड़कन तेज़ होना हफ्ते में कई बार हो रहा हो, बिना किसी साफ वजह के अचानक शुरू और बंद हो, नींद के बीच में आपको जगा दे, या इसके साथ लगातार थकान और सांस फूलना भी रहता हो. ऐसे में डॉक्टर एक साधारण ईसीजी या खून की जांच से यह पता लगा सकते हैं कि दिल की गति या थायराइड जैसी किसी चीज़ में असल गड़बड़ी तो नहीं.
घर पर संभाला जा सकता है अगर: धड़कन कभी कभार होती है, किसी तनाव भरी घटना या ज़्यादा कैफीन के बाद आती है, कुछ मिनट में अपने आप शांत हो जाती है, और साथ में कोई और चिंताजनक लक्षण नहीं है.
यह याद रखना ज़रूरी है कि उम्र के साथ, या अगर परिवार में पहले से दिल से जुड़ी कोई बीमारी रही हो, तो सावधानी की सीमा और नीचे आ जानी चाहिए. ऐसे मामलों में एक बार जांच करा लेना, अंदाज़े पर चलने से कहीं बेहतर है.
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