खांसी का घरेलू इलाज: सूखी और बलगम वाली खांसी में क्या करें, क्या नहीं
छोटा जवाब
अगर गले में खुजली महसूस होकर बार बार खांसी आ रही है, या छाती से बलगम निकल रहा है और रात में खांसी ज़्यादा परेशान करती है, तो ज़्यादातर मामलों में यह कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाने वाली मामूली खांसी है.
सबसे पहला काम यह पहचानना है कि खांसी सूखी है या बलगम वाली, क्योंकि दोनों में उपाय थोड़े अलग होते हैं. सूखी खांसी में शहद और गुनगुने तरल से गले को नमी दीजिए. बलगम वाली खांसी में भाप और गुनगुना पानी बलगम को ढीला करने में मदद करते हैं. दोनों में सोने की स्थिति ऊंची रखना, कमरे में हवा रूखी न रहने देना और भरपूर आराम करना फायदा करता है. अगर तीन हफ्ते में सुधार नहीं दिखता, या साथ में तेज़ बुखार, सांस लेने में तकलीफ या बलगम में खून जैसा कुछ दिखता है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं रह जाता.
खांसी क्यों होती है, और यह किस तरह की हो सकती है
खांसी खुद कोई बीमारी नहीं है, यह शरीर का एक सुरक्षा तरीका है जिससे वायुमार्ग से धूल, बलगम या जलन पैदा करने वाली चीज़ को बाहर निकाला जाता है. लेकिन इसके पीछे कई अलग अलग वजहें हो सकती हैं, और वजह पहचानना सही उपाय चुनने में मदद करता है.
सूखी खांसी. इसमें कुछ बाहर नहीं निकलता, बस गले या वायुमार्ग में खुजली, जलन या गुदगुदी का अहसास होता है जो बार बार खांसने पर मजबूर करता है. यह अक्सर किसी वायरल संक्रमण के शुरुआती या आखिरी दिनों में, ठंडी हवा लगने पर, या बहुत रूखे कमरे में सोने के बाद होती है.
बलगम वाली खांसी. इसमें छाती या गले से बलगम बाहर निकालने की कोशिश होती है, और खांसने के बाद कुछ देर के लिए आराम मिलता है. यह अक्सर सर्दी जुकाम या छाती में हल्के संक्रमण के साथ आती है, और इसके लिए सर्दी और फ्लू के घरेलू उपाय जो असल में काम करते हैं अलग से पढ़ना काम का रहेगा, क्योंकि वहां पूरे शरीर के लक्षणों को साथ में संभालने की बात है.
गले की जलन से जुड़ी खांसी. कई बार खांसी गले की खराश के साथ जुड़ी होती है, बार बार गला सूखने और खुजली करने की वजह से हल्की खांसी बनी रहती है. इस स्थिति में गले में खराश के घरेलू उपाय साथ में देखना फायदेमंद रहता है, क्योंकि दोनों की वजहें और उपाय काफी हद तक एक जैसे होते हैं.
एलर्जी और प्रदूषण से जुड़ी खांसी. धूल, धुआं, पालतू जानवरों के बाल या मौसमी बदलाव से भी सूखी खांसी शुरू हो सकती है, खास तौर पर उन लोगों में जो बड़े शहरों में या ज़्यादा ट्रैफिक वाली जगहों पर रहते हैं. साथ में आंखों में खुजली या बार बार छींक आना भी दिख सकता है, जो एलर्जी की तरफ इशारा करता है.
मुंह से सांस लेने की आदत, खास तौर पर सोते समय. जो लोग रात में मुंह खोलकर सोते हैं, उनका गला और वायुमार्ग सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा सूखा और संवेदनशील महसूस होता है, क्योंकि रातभर सीधी हवा लगती रहती है. यह आदत सर्दी में बंद नाक की वजह से भी बन जाती है और फिर मौसम ठीक होने के बाद भी बनी रह जाती है.
एसिड का गले तक वापस आना. खाने के तुरंत बाद लेट जाने की आदत, या रात को देर से भारी और मसालेदार खाना खाने वालों में, पेट का एसिड गले तक पहुंचकर खांसी की वजह बन जाता है, और यह अक्सर लेटने के बाद या सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा महसूस होता है.
धूम्रपान और लगातार धुएं में रहना. यह वायुमार्ग की नाज़ुक परत को लगातार परेशान करता है, जिससे सुबह उठते ही खांसी और छाती में भारीपन बहुत आम शिकायत बन जाती है.
कम सोना और लगातार थकान. जब शरीर को पूरी नींद नहीं मिलती, तो उसकी रोज़मर्रा की सुरक्षा व्यवस्था थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है, और ऐसे में वायुमार्ग की मामूली जलन भी ज़्यादा महसूस होने लगती है. यही वजह है कि काम के दबाव वाले हफ्तों या लगातार यात्रा करने वाले दिनों में हल्की खांसी भी ज़्यादा परेशान करने लगती है, जबकि असली जड़ नींद और थकान में छिपी होती है.
ठंडी या बहुत एसी वाली हवा में लगातार रहना. अचानक ठंडी हवा में जाना, या देर तक एसी की सीधी हवा में बैठना, वायुमार्ग को संवेदनशील बना देता है और हल्की सूखी खांसी शुरू कर देता है, खास तौर पर मौसम बदलने के दिनों में.
यहां एक फर्क समझना ज़रूरी है. अगर खांसी के साथ तेज़ बुखार, बहती नाक और बदन दर्द भी है, तो यह सिर्फ खांसी नहीं, पूरा सर्दी जुकाम या फ्लू है, और वहां पूरे शरीर के लक्षणों को साथ में संभालना पड़ता है. वहीं अगर खांसी महीनों से बिना किसी साफ संक्रमण के बनी हुई है, तो उसकी जड़ अक्सर धूल, एसिड या धूम्रपान जैसी किसी रोज़मर्रा की वजह में छिपी होती है, न कि किसी नए बीमारी में.
इसका एक और पहलू है जिसे ज़्यादातर लोग नहीं जोड़ पाते, वह है खांसी का समय और माहौल. क्या यह हमेशा रात को लेटने के बाद बढ़ती है, जो बलगम या एसिड की तरफ इशारा कर सकता है. क्या यह हमेशा किसी खास कमरे या दफ्तर में बढ़ती है, जो धूल या एसी की तरफ इशारा कर सकता है. क्या यह मौसम बदलने के साथ साथ शुरू होती है, जो एलर्जी की तरफ इशारा कर सकता है. इन संकेतों पर ध्यान देना यह समझने में मदद करता है कि किस उपाय से सबसे ज़्यादा फायदा मिलेगा, बजाय हर बार नए सिरे से अंदाज़ा लगाने के.