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मुंह के छाले होने के कारण और घरेलू उपाय: पोषण की कमी से जुड़ा रिश्ता जानिए

SuperLiving Expert Team·

मुंह के छाले होने के कारण और घरेलू उपाय: पोषण की कमी से जुड़ा रिश्ता जानिए

छोटा जवाब

अगर मुंह में छाला कभी कभार होता है, तो अक्सर वजह सीधी होती है, दांतों तले गाल कट जाना, बहुत गरम खाना या कुछ दिनों का तनाव. लेकिन अगर छाले बार-बार, महीने में एक से ज़्यादा बार लौट आते हैं, तो सिर्फ मुंह की सफाई या मसालेदार खाने को दोष देना पूरी तस्वीर नहीं है. विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी बार-बार होने वाले छालों की एक जानी पहचानी वजह है, जिसे ज़्यादातर लोग कभी जोड़कर नहीं देखते.

राहत के लिए नमक के पानी से कुल्ला, शहद और नारियल तेल जैसे घरेलू उपाय काम करते हैं, लेकिन अगर छाले बार-बार लौट रहे हैं तो थाली में बदलाव और ज़रूरत पड़ने पर जांच कराना असली समाधान है.

मुंह के छाले होते क्यों हैं

मुंह के छाले, जिन्हें आम भाषा में अक्सर सिर्फ मुंह में जलन या घाव कहा जाता है, गाल, जीभ, होंठ के अंदरूनी हिस्से या मसूड़ों के पास बनने वाले छोटे, गोल या अंडाकार, दर्द भरे घाव होते हैं. इनका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का पीला होता है और किनारे पर हल्की लालिमा दिखती है. ज़्यादातर छाले खतरनाक नहीं होते और अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन खाना खाते, बात करते या ब्रश करते समय तेज़ चुभन देते हैं, और कई बार दो-तीन दिन तक रोज़मर्रा के काम में परेशानी बनी रहती है.

सबसे आम वजह छोटी चोट है, जैसे दांतों तले गाल कट जाना, ब्रश करते समय मसूड़े छिल जाना, या ब्रेसेस जैसी किसी चीज़ का लगातार रगड़ना. इसके अलावा बहुत गरम खाना, तनाव, नींद की कमी, बहुत मसालेदार या खट्टा खाना, और कुछ टूथपेस्ट में मौजूद एक तत्व भी छाले बढ़ाने वाले कारणों में गिना जाता है. ज़्यादातर लोग एक-दो छाले को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और अक्सर यह सही भी है, क्योंकि कभी-कभार का छाला जीवन का एक आम हिस्सा है और इसमें घबराने की बात नहीं होती.

छाले और पोषण की कमी का रिश्ता, जिसे ज़्यादातर लिस्ट नज़रअंदाज़ कर देती हैं

यहीं पर बात एक आम मुंह की सफाई वाली लिस्ट से अलग हो जाती है. अगर छाले कभी कभार आते हैं तो ऊपर बताए कारण काफी हैं, लेकिन अगर वे बार-बार लौट रहे हैं, तो एक गहरी वजह देखनी ज़रूरी है.

विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड, ये तीनों मुंह के अंदर की नाज़ुक परत को तेज़ी से बनाने और ठीक करने का काम करते हैं. मुंह के अंदर की कोशिकाएं शरीर की सबसे तेज़ी से बदलने वाली कोशिकाओं में गिनी जाती हैं, और इस तेज़ प्रक्रिया के लिए यही पोषक तत्व सबसे ज़्यादा चाहिए होते हैं. जब इनमें से किसी की भी कमी हो, तो यह परत कमज़ोर पड़ जाती है, नई कोशिकाएं उतनी तेज़ी से नहीं बन पातीं, और एक छोटी सी चोट भी बड़ा और देर तक टिकने वाला छाला बन जाती है. यही वजह है कि बार-बार छाले होना अक्सर सिर्फ मुंह की समस्या नहीं, बल्कि थाली की एक सीमा की तरफ इशारा होता है.

यह समझना ज़रूरी है कि हर छाला किसी कमी का सबूत नहीं है. सवाल पैटर्न का है, अगर छाला साल में एक-दो बार, किसी साफ वजह से आता है, तो चिंता की बात नहीं. लेकिन अगर छाले लगभग हर महीने लौटते हैं, कई जगह एक साथ दिखते हैं, या भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लेते हैं, तो यह पैटर्न पोषण की तरफ इशारा कर सकता है. इस रिश्ते को समझने के लिए विटामिन बी12 की कमी के लक्षण पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि वहां बताया गया है कि जीभ में जलन और मुंह के छाले बी12 की कमी के शुरुआती लक्षणों में गिने जाते हैं, फिर भी ज़्यादातर लोग इन्हें थकान या तनाव मान लेते हैं.

किन कारणों से छाले बार-बार लौटते हैं

पोषण की कमी. विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी, खास तौर पर शाकाहारी थाली में, बार-बार छाले होने की सबसे कम पहचानी जाने वाली वजह है. यह वजह इसलिए भी छूट जाती है क्योंकि इसका कोई नाटकीय लक्षण नहीं होता, बस छाले धीरे-धीरे ज़्यादा बार आने लगते हैं.

लगातार तनाव और नींद की कमी. शरीर पर तनाव जितना ज़्यादा रहता है, मुंह के अंदर की परत उतनी ही कमज़ोर पड़ती है और छोटी चोट भी छाले में बदल जाती है. परीक्षा, काम का दबाव या नींद पूरी न होने वाले हफ्तों में छाले बढ़ना कई लोगों ने खुद महसूस किया होगा.

हार्मोन में बदलाव. कुछ महिलाओं में पीरियड के आसपास छाले बढ़ जाते हैं, यह एक जाना पहचाना पैटर्न है और शरीर के प्राकृतिक हार्मोन बदलाव से जुड़ा माना जाता है.

पेट और आंत से जुड़ी स्थितियां. कुछ स्थितियां जिनमें पोषक तत्व ठीक से सोखे नहीं जाते, वहां बार-बार छाले एक जुड़ा हुआ लक्षण हो सकते हैं, क्योंकि खाने से मिलने वाला पोषण शरीर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता.

बार-बार एक ही जगह चोट लगना. टूटा हुआ दांत, ठीक से न फिट होने वाला ब्रेसेस या डेंचर, ये सब एक ही जगह को बार-बार छील सकते हैं, और उस जगह छाला लगभग स्थायी मेहमान बन जाता है जब तक दांत या डेंचर ठीक न कराया जाए.

अगर आप इनमें से किसी वजह में खुद को पहचानते हैं और छाले महीने में एक से ज़्यादा बार लौट रहे हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय वजह ढूंढना ज़्यादा काम आता है. अक्सर एक से ज़्यादा वजहें साथ मिलकर काम कर रही होती हैं, जैसे तनाव भरा महीना और साथ में कमज़ोर थाली, इसलिए एक ही उपाय पर उम्मीद टिकाना सही नहीं.

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घरेलू उपाय जो असल में राहत देते हैं

राहत के लिए ये उपाय सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं, और इनमें से कोई भी महंगा या मुश्किल नहीं है.

नमक के गुनगुने पानी से कुल्ला. दिन में दो तीन बार गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर कुल्ला करना सबसे सरल और असरदार उपाय है. यह जगह को साफ रखता है, बैक्टीरिया कम करता है और सूजन घटाता है. खाना खाने के बाद यह कुल्ला करना खास तौर पर फायदेमंद रहता है, ताकि खाने के कण छाले पर जमा न हों.

शहद. छाले पर सीधे थोड़ा सा शहद लगाना, इसमें मौजूद गुण जलन कम करने और घाव जल्दी भरने में मदद करते हैं. दिन में दो-तीन बार लगाया जाए तो कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है.

नारियल तेल. एक बूंद नारियल तेल सीधे छाले पर लगाना, यह जगह को नमी देता है और चुभन कुछ कम करता है, खास तौर पर रात को सोने से पहले लगाना आरामदायक रहता है.

बर्फ का टुकड़ा. छाले पर कुछ सेकंड के लिए बर्फ का टुकड़ा रखना, तुरंत की जलन और सूजन में राहत देता है, खास तौर पर खाना खाने से ठीक पहले यह छोटी तरकीब चुभन को हल्का बना देती है.

एलोवेरा जेल. ताज़ा एलोवेरा जेल की थोड़ी मात्रा छाले पर लगाना भी जलन शांत करने में मदद करता है, और यह त्वचा को अतिरिक्त नमी भी देता है.

हल्दी वाला पानी. गुनगुने पानी में चुटकी भर हल्दी मिलाकर कुल्ला करना भी कुछ लोगों को राहत देता है, हल्दी के गुण जलन कम करने में मददगार माने जाते हैं.

कोई भी एक उपाय जादुई नहीं है, इन्हें साथ में और नियमित रूप से अपनाना असली फर्क डालता है. आमतौर पर दो-तीन दिन में जलन कम होने लगती है, भले ही छाला पूरी तरह भरने में हफ्ता भर लगे.

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थाली में क्या बदलाव करें

अगर छाले बार-बार लौट रहे हैं, तो सबसे असरदार बदलाव थाली से शुरू होता है, सिर्फ छाला होने पर परहेज करने से नहीं.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और दालें. पालक, मेथी और मूंग, चना जैसी दालें फोलिक एसिड और आयरन का अच्छा स्रोत हैं.

डेयरी और अंडा. दूध, दही, पनीर और अंडा विटामिन बी12 का सबसे आसान शाकाहारी स्रोत हैं.

विटामिन सी वाले फल. आंवला, संतरा और नींबू शरीर को आयरन बेहतर तरीके से सोखने में मदद करते हैं.

पानी की पर्याप्त मात्रा. शरीर में पानी की कमी भी मुंह के अंदर की परत को कमज़ोर बना सकती है, इसलिए दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना एक आसान लेकिन असरदार आदत है.

यह ज़रूरी नहीं कि यह बदलाव एक ही दिन में दिखे. शरीर की कोशिकाएं नए पोषण के हिसाब से खुद को ढालने में कुछ हफ्ते लेती हैं, इसलिए दो-तीन हफ्ते लगातार थाली में यह बदलाव बनाए रखना ज़्यादा मायने रखता है, बीच में एक-दो दिन अच्छा खाकर उम्मीद करना नहीं. अगर खून की कमी की तरफ भी शक है, थकान या कमज़ोरी साथ में दिख रही है, तो आयरन की कमी के लक्षण और डाइट पढ़ना अगला अच्छा कदम है, क्योंकि वहां आयरन बढ़ाने वाली थाली का पूरा तरीका बताया गया है.

जब तक छाला ठीक न हो, क्या परहेज करें

बहुत मसालेदार और खट्टा खाना. मिर्च और खट्टे फल जलन को सीधे बढ़ा देते हैं, जब तक छाला ठीक न हो जाए इन्हें कम रखना समझदारी है.

बहुत गरम खाना या पेय. गरम चाय या सूप छाले पर सीधे चुभन देता है.

बहुत सख्त या करारा खाना. चिप्स या टोस्ट जैसी चीज़ें छाले को बार-बार छील सकती हैं.

तेज़ केमिकल वाला माउथवॉश. कुछ माउथवॉश छाले पर तेज़ जलन पैदा करते हैं, नमक पानी ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है.

इस दौरान दही, दलिया, खिचड़ी और नरम उबली सब्ज़ियां आसान और सुरक्षित रहती हैं, क्योंकि ये न तो चुभन देती हैं और न ही जलन बढ़ाती हैं.

सामान्य छाला और गंभीर संकेत में फर्क कैसे पहचानें

ज़्यादातर छाले पूरी तरह सामान्य होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें पहचानना ज़रूरी है ताकि वक्त पर सही कदम उठाया जा सके.

सामान्य छाला छोटा, गोल या अंडाकार, सफेद या हल्के पीले रंग का होता है और दस दिन के अंदर अपने आप भर जाता है. इसके उलट, अगर घाव बहुत बड़ा हो, बहुत ज़्यादा दर्द दे, ठीक होने में महीना भर से ज़्यादा लगे, बार-बार एक ही जगह बने, या साथ में बुखार, गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां या वज़न कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह सामान्य छाले के दायरे से बाहर है. ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों पर भरोसा करने के बजाय जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना सही रास्ता है.

जो काम नहीं करता

हर छाले को सिर्फ मसालेदार खाने की गलती मान लेना. बार-बार लौटने वाले छाले अक्सर सिर्फ खाने की गलती नहीं, पोषण की कमी की तरफ इशारा होते हैं, और सिर्फ खाना बदल देने से बार-बार आने वाला पैटर्न नहीं रुकता.

छाले पर नमक या फिटकरी सीधे रगड़ना. यह उल्टा जलन और दर्द बढ़ा सकता है, गुनगुने पानी का कुल्ला ज़्यादा सुरक्षित और असरदार तरीका है.

बिना जांच के सप्लीमेंट शुरू करके भूल जाना. अगर वजह पोषण की कमी है, तो सही जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी सप्लीमेंट लेना सही रास्ता नहीं है, क्योंकि सही मात्रा और सही तत्व की पहचान जांच रिपोर्ट के बिना संभव नहीं.

दो हफ्ते से ज़्यादा इंतज़ार करते रहना. साधारण छाला दस दिन में ठीक हो जाता है, इससे ज़्यादा समय लगना जांच कराने का संकेत है, न कि एक और घरेलू उपाय आज़माने का.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. रोज़ नमक के गुनगुने पानी से दो बार कुल्ला कीजिए, और मसालेदार व खट्टा खाना कम कर दीजिए. साथ ही थाली में एक हरी सब्ज़ी या दाल रोज़ जोड़िए.

दूसरा हफ्ता. थाली में डेयरी या अंडा और एक विटामिन सी वाला फल नियमित रूप से जोड़िए. अगर छाले अब भी बार-बार लौट रहे हों, तो इसी हफ्ते डॉक्टर से जांच की बात तय कर लीजिए.

नापने का तरीका. रोज़ एक लाइन लिखिए, आज मुंह में कोई नया छाला आया या नहीं, और दर्द कितना रहा. अगर महीने भर में यह संख्या साफ कम होती दिखे, तो बदलाव सही दिशा में है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर छाला दो हफ्ते से ज़्यादा समय तक ठीक न हो, अगर महीने में एक से ज़्यादा बार छाले लौट कर आएं, अगर साथ में तेज़ बुखार या निगलने में तकलीफ हो, अगर छाला असामान्य रूप से बड़ा या बहुत दर्द भरा हो, या अगर साथ में लगातार थकान और कमज़ोरी भी बनी रहे, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी हो जाता है.

मिलाकर बात यह है

कभी कभार होने वाला मुंह का छाला आमतौर पर चिंता की बात नहीं, नमक पानी का कुल्ला और थोड़ा परहेज काफी होता है. लेकिन बार-बार लौटने वाला छाला एक अलग संकेत हो सकता है, विटामिन बी12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी की तरफ इशारा, जिसे ज़्यादातर लोग कभी जोड़कर नहीं देखते.

आपको कोई नाटकीय बदलाव नहीं चाहिए, थाली में हरी सब्ज़ी, दाल, डेयरी और विटामिन सी वाला फल जोड़िए, तनाव और नींद का ध्यान रखिए, और अगर छाले फिर भी लौटते रहें तो जांच कराइए. बाकी फैसले रिपोर्ट देखकर डॉक्टर करेंगे.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, इसे हफ्ते दर हफ्ते निभाना है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली और आपके तनाव के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि बार-बार होने वाला छाला सिर्फ एक और नज़रअंदाज़ किया गया लक्षण न रहे.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुंह के छाले होने के मुख्य कारण क्या हैं? सबसे आम कारण छोटी चोट है, जैसे दांतों तले गाल या जीभ का कट जाना, बहुत गर्म खाना खा लेना, या ब्रश करते समय मसूड़े छिल जाना. इसके अलावा तनाव, नींद पूरी न होना, बहुत मसालेदार या खट्टा खाना, और कुछ खास टूथपेस्ट में मौजूद तत्व भी छाले बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को बार-बार, महीने में एक से ज़्यादा बार छाले होते हैं, उनमें अक्सर विटामिन बी12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी भी एक वजह होती है.

बार-बार छाले होना किस कमी का संकेत हो सकता है? बार-बार आने वाले छालों का एक जाना पहचाना रिश्ता विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी से है. ये तीनों मुंह के अंदर की परत को जल्दी बनने और ठीक होने में मदद करते हैं, और इनकी कमी में यह परत कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे छोटी सी चोट भी बड़ा छाला बन जाती है. अगर छाले के साथ थकान, कमज़ोरी या जीभ में जलन जैसे लक्षण भी दिख रहे हों, तो यह जांच कराने का संकेत है.

मुंह के छाले के लिए घर पर सबसे असरदार उपाय कौन सा है? नमक के गुनगुने पानी से दिन में दो तीन बार कुल्ला करना सबसे सरल और असरदार घरेलू उपाय माना जाता है, क्योंकि यह जगह को साफ रखता है और सूजन कम करता है. इसके अलावा छाले पर सीधे शहद लगाना, नारियल तेल की एक बूंद लगाना और बर्फ का टुकड़ा कुछ देर रखना भी राहत देता है. कोई भी एक उपाय जादुई असर नहीं करता, इन्हें साथ में और लगातार अपनाना ज़्यादा फायदा देता है.

छालों में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जब तक छाला ठीक न हो, बहुत मसालेदार, बहुत खट्टा और बहुत गरम खाना कम कीजिए, क्योंकि ये जलन बढ़ा देते हैं. इसकी जगह दही, दलिया, खिचड़ी और नरम सब्ज़ियां आसान रहती हैं. लंबे समय में बार-बार छाले रोकने के लिए थाली में हरी पत्तेदार सब्ज़ी, दाल, अंडा या डेयरी जैसे बी12 और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ बढ़ाना ज़्यादा असरदार रास्ता है.

छाले कितने दिन में ठीक हो जाते हैं? साधारण छाला आमतौर पर सात से दस दिन में अपने आप ठीक हो जाता है, घरेलू उपाय सिर्फ दर्द और जलन कम करने में मदद करते हैं. अगर दो हफ्ते से ज़्यादा समय बीत जाए और छाला ठीक न हो, या वह असामान्य रूप से बड़ा हो, तो यह इंतज़ार करने का समय नहीं, डॉक्टर को दिखाने का समय है.

कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है? अगर छाला दो हफ्ते से ज़्यादा समय तक ठीक न हो, अगर महीने में एक से ज़्यादा बार छाले लौट कर आएं, अगर उनके साथ तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा दर्द या निगलने में तकलीफ हो, या अगर साथ में थकान और कमज़ोरी जैसे लक्षण भी बने रहें, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी हो जाता है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. बार-बार लौटने वाले छाले, दो हफ्ते से ज़्यादा न भरने वाला घाव, तेज़ बुखार या निगलने में तकलीफ की स्थिति में कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. विटामिन बी12, आयरन या किसी भी सप्लीमेंट को जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से शुरू न करें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुंह के छाले होने के मुख्य कारण क्या हैं?+

सबसे आम कारण छोटी चोट है, जैसे दांतों तले गाल या जीभ का कट जाना, बहुत गर्म खाना खा लेना, या ब्रश करते समय मसूड़े छिल जाना. इसके अलावा तनाव, नींद पूरी न होना, बहुत मसालेदार या खट्टा खाना, और कुछ खास टूथपेस्ट में मौजूद तत्व भी छाले बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को बार-बार, महीने में एक से ज़्यादा बार छाले होते हैं, उनमें अक्सर विटामिन बी12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी भी एक वजह होती है, जिसे ज़्यादातर लोग कभी जोड़कर नहीं देखते.

बार-बार छाले होना किस कमी का संकेत हो सकता है?+

बार-बार आने वाले छालों का एक जाना पहचाना रिश्ता विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी से है. ये तीनों मुंह के अंदर की परत को जल्दी बनने और ठीक होने में मदद करते हैं, और इनकी कमी में यह परत कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे छोटी सी चोट भी बड़ा छाला बन जाती है. अगर छाले के साथ थकान, कमज़ोरी या जीभ में जलन जैसे लक्षण भी दिख रहे हों, तो यह सिर्फ मुंह की समस्या नहीं, जांच कराने का संकेत है.

मुंह के छाले के लिए घर पर सबसे असरदार उपाय कौन सा है?+

नमक के गुनगुने पानी से दिन में दो तीन बार कुल्ला करना सबसे सरल और असरदार घरेलू उपाय माना जाता है, क्योंकि यह जगह को साफ रखता है और सूजन कम करता है. इसके अलावा छाले पर सीधे शहद लगाना, नारियल तेल की एक बूंद लगाना और बर्फ का टुकड़ा कुछ देर रखना भी राहत देता है. कोई भी एक उपाय जादुई असर नहीं करता, इन्हें साथ में और लगातार अपनाना ज़्यादा फायदा देता है.

छालों में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?+

जब तक छाला ठीक न हो, बहुत मसालेदार, बहुत खट्टा और बहुत गरम खाना कम कीजिए, क्योंकि ये जलन बढ़ा देते हैं. इसकी जगह दही, दलिया, खिचड़ी और नरम सब्ज़ियां आसान रहती हैं. लंबे समय में बार-बार छाले रोकने के लिए थाली में हरी पत्तेदार सब्ज़ी, दाल, अंडा या डेयरी जैसे बी12 और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ बढ़ाना ज़्यादा असरदार रास्ता है, न कि सिर्फ छाला होने पर परहेज करना.

छाले कितने दिन में ठीक हो जाते हैं?+

साधारण छाला आमतौर पर सात से दस दिन में अपने आप ठीक हो जाता है, घरेलू उपाय सिर्फ दर्द और जलन कम करने में मदद करते हैं. अगर दो हफ्ते से ज़्यादा समय बीत जाए और छाला ठीक न हो, या वह असामान्य रूप से बड़ा हो, तो यह इंतज़ार करने का समय नहीं, डॉक्टर को दिखाने का समय है.

कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है?+

अगर छाला दो हफ्ते से ज़्यादा समय तक ठीक न हो, अगर महीने में एक से ज़्यादा बार छाले लौट कर आएं, अगर उनके साथ तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा दर्द या निगलने में तकलीफ हो, या अगर साथ में थकान और कमज़ोरी जैसे लक्षण भी बने रहें, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी हो जाता है.

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