मुंह के छाले होने के कारण और घरेलू उपाय: पोषण की कमी से जुड़ा रिश्ता जानिए
छोटा जवाब
अगर मुंह में छाला कभी कभार होता है, तो अक्सर वजह सीधी होती है, दांतों तले गाल कट जाना, बहुत गरम खाना या कुछ दिनों का तनाव. लेकिन अगर छाले बार-बार, महीने में एक से ज़्यादा बार लौट आते हैं, तो सिर्फ मुंह की सफाई या मसालेदार खाने को दोष देना पूरी तस्वीर नहीं है. विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी बार-बार होने वाले छालों की एक जानी पहचानी वजह है, जिसे ज़्यादातर लोग कभी जोड़कर नहीं देखते.
राहत के लिए नमक के पानी से कुल्ला, शहद और नारियल तेल जैसे घरेलू उपाय काम करते हैं, लेकिन अगर छाले बार-बार लौट रहे हैं तो थाली में बदलाव और ज़रूरत पड़ने पर जांच कराना असली समाधान है.
मुंह के छाले होते क्यों हैं
मुंह के छाले, जिन्हें आम भाषा में अक्सर सिर्फ मुंह में जलन या घाव कहा जाता है, गाल, जीभ, होंठ के अंदरूनी हिस्से या मसूड़ों के पास बनने वाले छोटे, गोल या अंडाकार, दर्द भरे घाव होते हैं. इनका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का पीला होता है और किनारे पर हल्की लालिमा दिखती है. ज़्यादातर छाले खतरनाक नहीं होते और अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन खाना खाते, बात करते या ब्रश करते समय तेज़ चुभन देते हैं, और कई बार दो-तीन दिन तक रोज़मर्रा के काम में परेशानी बनी रहती है.
सबसे आम वजह छोटी चोट है, जैसे दांतों तले गाल कट जाना, ब्रश करते समय मसूड़े छिल जाना, या ब्रेसेस जैसी किसी चीज़ का लगातार रगड़ना. इसके अलावा बहुत गरम खाना, तनाव, नींद की कमी, बहुत मसालेदार या खट्टा खाना, और कुछ टूथपेस्ट में मौजूद एक तत्व भी छाले बढ़ाने वाले कारणों में गिना जाता है. ज़्यादातर लोग एक-दो छाले को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और अक्सर यह सही भी है, क्योंकि कभी-कभार का छाला जीवन का एक आम हिस्सा है और इसमें घबराने की बात नहीं होती.
छाले और पोषण की कमी का रिश्ता, जिसे ज़्यादातर लिस्ट नज़रअंदाज़ कर देती हैं
यहीं पर बात एक आम मुंह की सफाई वाली लिस्ट से अलग हो जाती है. अगर छाले कभी कभार आते हैं तो ऊपर बताए कारण काफी हैं, लेकिन अगर वे बार-बार लौट रहे हैं, तो एक गहरी वजह देखनी ज़रूरी है.
विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड, ये तीनों मुंह के अंदर की नाज़ुक परत को तेज़ी से बनाने और ठीक करने का काम करते हैं. मुंह के अंदर की कोशिकाएं शरीर की सबसे तेज़ी से बदलने वाली कोशिकाओं में गिनी जाती हैं, और इस तेज़ प्रक्रिया के लिए यही पोषक तत्व सबसे ज़्यादा चाहिए होते हैं. जब इनमें से किसी की भी कमी हो, तो यह परत कमज़ोर पड़ जाती है, नई कोशिकाएं उतनी तेज़ी से नहीं बन पातीं, और एक छोटी सी चोट भी बड़ा और देर तक टिकने वाला छाला बन जाती है. यही वजह है कि बार-बार छाले होना अक्सर सिर्फ मुंह की समस्या नहीं, बल्कि थाली की एक सीमा की तरफ इशारा होता है.
यह समझना ज़रूरी है कि हर छाला किसी कमी का सबूत नहीं है. सवाल पैटर्न का है, अगर छाला साल में एक-दो बार, किसी साफ वजह से आता है, तो चिंता की बात नहीं. लेकिन अगर छाले लगभग हर महीने लौटते हैं, कई जगह एक साथ दिखते हैं, या भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लेते हैं, तो यह पैटर्न पोषण की तरफ इशारा कर सकता है. इस रिश्ते को समझने के लिए विटामिन बी12 की कमी के लक्षण पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि वहां बताया गया है कि जीभ में जलन और मुंह के छाले बी12 की कमी के शुरुआती लक्षणों में गिने जाते हैं, फिर भी ज़्यादातर लोग इन्हें थकान या तनाव मान लेते हैं.
किन कारणों से छाले बार-बार लौटते हैं
पोषण की कमी. विटामिन बी12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी, खास तौर पर शाकाहारी थाली में, बार-बार छाले होने की सबसे कम पहचानी जाने वाली वजह है. यह वजह इसलिए भी छूट जाती है क्योंकि इसका कोई नाटकीय लक्षण नहीं होता, बस छाले धीरे-धीरे ज़्यादा बार आने लगते हैं.
लगातार तनाव और नींद की कमी. शरीर पर तनाव जितना ज़्यादा रहता है, मुंह के अंदर की परत उतनी ही कमज़ोर पड़ती है और छोटी चोट भी छाले में बदल जाती है. परीक्षा, काम का दबाव या नींद पूरी न होने वाले हफ्तों में छाले बढ़ना कई लोगों ने खुद महसूस किया होगा.
हार्मोन में बदलाव. कुछ महिलाओं में पीरियड के आसपास छाले बढ़ जाते हैं, यह एक जाना पहचाना पैटर्न है और शरीर के प्राकृतिक हार्मोन बदलाव से जुड़ा माना जाता है.
पेट और आंत से जुड़ी स्थितियां. कुछ स्थितियां जिनमें पोषक तत्व ठीक से सोखे नहीं जाते, वहां बार-बार छाले एक जुड़ा हुआ लक्षण हो सकते हैं, क्योंकि खाने से मिलने वाला पोषण शरीर तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता.
बार-बार एक ही जगह चोट लगना. टूटा हुआ दांत, ठीक से न फिट होने वाला ब्रेसेस या डेंचर, ये सब एक ही जगह को बार-बार छील सकते हैं, और उस जगह छाला लगभग स्थायी मेहमान बन जाता है जब तक दांत या डेंचर ठीक न कराया जाए.
अगर आप इनमें से किसी वजह में खुद को पहचानते हैं और छाले महीने में एक से ज़्यादा बार लौट रहे हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय वजह ढूंढना ज़्यादा काम आता है. अक्सर एक से ज़्यादा वजहें साथ मिलकर काम कर रही होती हैं, जैसे तनाव भरा महीना और साथ में कमज़ोर थाली, इसलिए एक ही उपाय पर उम्मीद टिकाना सही नहीं.
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घरेलू उपाय जो असल में राहत देते हैं
राहत के लिए ये उपाय सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं, और इनमें से कोई भी महंगा या मुश्किल नहीं है.
नमक के गुनगुने पानी से कुल्ला. दिन में दो तीन बार गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर कुल्ला करना सबसे सरल और असरदार उपाय है. यह जगह को साफ रखता है, बैक्टीरिया कम करता है और सूजन घटाता है. खाना खाने के बाद यह कुल्ला करना खास तौर पर फायदेमंद रहता है, ताकि खाने के कण छाले पर जमा न हों.
शहद. छाले पर सीधे थोड़ा सा शहद लगाना, इसमें मौजूद गुण जलन कम करने और घाव जल्दी भरने में मदद करते हैं. दिन में दो-तीन बार लगाया जाए तो कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है.
नारियल तेल. एक बूंद नारियल तेल सीधे छाले पर लगाना, यह जगह को नमी देता है और चुभन कुछ कम करता है, खास तौर पर रात को सोने से पहले लगाना आरामदायक रहता है.
बर्फ का टुकड़ा. छाले पर कुछ सेकंड के लिए बर्फ का टुकड़ा रखना, तुरंत की जलन और सूजन में राहत देता है, खास तौर पर खाना खाने से ठीक पहले यह छोटी तरकीब चुभन को हल्का बना देती है.
एलोवेरा जेल. ताज़ा एलोवेरा जेल की थोड़ी मात्रा छाले पर लगाना भी जलन शांत करने में मदद करता है, और यह त्वचा को अतिरिक्त नमी भी देता है.
हल्दी वाला पानी. गुनगुने पानी में चुटकी भर हल्दी मिलाकर कुल्ला करना भी कुछ लोगों को राहत देता है, हल्दी के गुण जलन कम करने में मददगार माने जाते हैं.
कोई भी एक उपाय जादुई नहीं है, इन्हें साथ में और नियमित रूप से अपनाना असली फर्क डालता है. आमतौर पर दो-तीन दिन में जलन कम होने लगती है, भले ही छाला पूरी तरह भरने में हफ्ता भर लगे.