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फटी एड़ियों का घरेलू इलाज: कारण, सही देखभाल और मुलायम एड़ियों के आसान तरीके

SuperLiving Expert Team·

फटी एड़ियों का घरेलू इलाज: कारण, सही देखभाल और मुलायम एड़ियों के आसान तरीके

छोटा जवाब

अगर सर्दी आते ही एड़ियों के किनारे सफेद और सख्त होने लगते हैं, चलते समय हल्का दर्द या खिंचाव महसूस होता है, और मोज़े पर एड़ी की त्वचा उलझने लगती है, तो यह ज़्यादातर मामलों में रूखेपन और दबाव का साधारण नतीजा है, कोई बड़ी बीमारी नहीं.

सबसे बड़ा उपाय किसी महंगी क्रीम में नहीं, रोज़ रात की एक छोटी आदत में है. पैर धोकर हल्का पोंछिए, नमी बाकी रहते ही गाढ़ा मॉइस्चराइज़र या नारियल तेल लगाइए, और सूती मोज़े पहनकर सो जाइए. घर के अंदर भी चप्पल पहनने की आदत डालिए और सख्त त्वचा को कभी ब्लेड से खुद न काटें. अगर दरारों से खून आ रहा है, दर्द तेज़ है, या आपको डायबिटीज़ है, तो घरेलू उपायों में देर न करें और डॉक्टर से मिलें.

एड़ियां फटती क्यों हैं

एड़ी की त्वचा शरीर के बाकी हिस्सों से अलग बनी है. यह सबसे मोटी त्वचा है, लेकिन वहां तेल ग्रंथियां लगभग होती ही नहीं. मतलब यह है कि जहां शरीर को सबसे ज़्यादा सुरक्षा चाहिए, वहीं प्राकृतिक नमी बनाए रखने का तंत्र सबसे कमज़ोर है.

अब इसमें रोज़ का दबाव जोड़िए. हर कदम पर पूरे शरीर का वज़न एड़ी पर पड़ता है. जब यह सूखी त्वचा बार बार दबाव सहती है, तो शरीर उसे मोटा और सख्त बनाकर बचाने की कोशिश करता है. यही सख्त परत, जिसे कैलस भी कहा जाता है, लचीली नहीं होती. जब त्वचा और सूखती है, यह सख्त परत फैल नहीं पाती और किनारों से चटकने लगती है, ठीक वैसे ही जैसे सूखी मिट्टी पर दरारें पड़ती हैं.

यही वजह है कि फटी एड़ी सिर्फ रूखेपन की समस्या नहीं, बल्कि रूखेपन और लगातार दबाव के मेल की समस्या है. इसे समझना ज़रूरी है, क्योंकि सिर्फ क्रीम लगाने से दबाव वाला हिस्सा अनदेखा रह जाता है, और सिर्फ जूते बदलने से रूखेपन वाला हिस्सा.

फटी एड़ियों के सबसे आम कारण

सर्दी और सूखी हवा. ठंड के मौसम में हवा में नमी कम होती है, और यह त्वचा से पानी खींचती है. यही वजह है कि ज़्यादातर लोगों की एड़ियां सर्दियों में सबसे ज़्यादा फटती हैं, हालांकि गर्म और सूखे इलाकों में यह पूरे साल हो सकता है.

बहुत गर्म पानी से नहाना. गर्म पानी अच्छा लगता है, पर यह त्वचा का प्राकृतिक तेल तेज़ी से घोल देता है. इसका पूरा असर रूखी त्वचा के घरेलू उपाय वाली गाइड में विस्तार से समझाया गया है, क्योंकि एड़ी की फटन असल में शरीर की रूखी त्वचा की समस्या का ही एक हिस्सा है.

नंगे पैर सख्त फर्श पर चलना. टाइल, मार्बल या पक्की ज़मीन पर लगातार नंगे पैर चलने से एड़ी पर सीधा दबाव पड़ता है और सख्त त्वचा तेज़ी से बनती है.

खुली एड़ी वाली चप्पल. पीछे से खुले सैंडल या चप्पल एड़ी को किसी सहारे के बिना छोड़ देते हैं, जिससे वह फैलती और सिकुड़ती रहती है, और यही हरकत दरारों को बढ़ाती है.

उम्र बढ़ना. उम्र के साथ त्वचा में प्राकृतिक तेल और लचीलापन दोनों कम होते हैं, इसलिए वही देखभाल जो जवानी में काफी थी, चालीस के बाद कम पड़ सकती है.

ज़्यादा देर खड़े रहने वाला काम. जो लोग दिनभर खड़े होकर काम करते हैं, जैसे रसोई, दुकान या फैक्ट्री में, उनकी एड़ियों पर दबाव सामान्य से कहीं ज़्यादा पड़ता है.

शरीर में पानी और पोषण की कमी. कम पानी पीना त्वचा को भीतर से कमज़ोर सहारा देता है. इस पूरे रिश्ते को समझने के लिए पानी पीने के फायदे वाली गाइड पढ़ना उपयोगी रहेगा.

कुछ अंदरूनी वजहें. थायरॉइड की गड़बड़ी, डायबिटीज़ और शरीर में कुछ विटामिन की कमी में भी एड़ियां सामान्य से ज़्यादा और जल्दी फटती हैं. अगर घरेलू देखभाल के बावजूद फर्क नहीं पड़ रहा, तो यह पहलू जांचना ज़रूरी है.

गलत नाप के जूते. बहुत टाइट या बहुत ढीले जूते चलते समय एड़ी को बार बार जूते के किनारे से रगड़ते हैं. यह घर्षण भी सख्त त्वचा और दरारों को बढ़ावा देता है, खास तौर पर उन लोगों में जो दिनभर बाहर काम करते हैं या बहुत चलते हैं.

रोज़ रात की देखभाल का सही तरीका

अगर इस पूरे लेख से एक ही आदत अपनानी हो, तो यह होनी चाहिए, क्योंकि यही सबसे बड़ा फर्क लाती है.

पैर को गुनगुने पानी से धोइए, ज़्यादा गर्म पानी से नहीं और दस मिनट से ज़्यादा भिगोकर नहीं रखना है, क्योंकि लंबी देर पानी में रखने से त्वचा का तेल और उड़ जाता है. इसके बाद तौलिये से हल्के से थपथपाकर पानी सोखिए, पूरी तरह सुखाना नहीं है, हल्की नमी बाकी रहनी चाहिए.

इसी नम त्वचा पर तुरंत गाढ़ा मॉइस्चराइज़र, वैसलीन या नारियल तेल लगाइए. यहां मात्रा में संकोच मत कीजिए, चेहरे के मुकाबले एड़ी को कहीं ज़्यादा गाढ़ी और भारी चीज़ चाहिए होती है. इसके बाद सूती मोज़े पहन लीजिए और उसी में सो जाइए. मोज़े दो काम करते हैं, क्रीम को पूरी रात त्वचा में सोखने देना, और उसे बिस्तर पर लगने से बचाना.

अगर सख्त त्वचा ज़्यादा मोटी है, तो हफ्ते में दो से तीन बार नहाने के बाद हल्के हाथ से प्यूमिस स्टोन या फुट फाइल का इस्तेमाल कीजिए. एक ही दिशा में हल्के हाथ से रगड़ें, ज़ोर से रगड़ने या रोज़ रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा और छिल सकती है और दरारें गहरी हो सकती हैं.

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घरेलू उपाय जो सच में काम करते हैं

नारियल तेल. सबसे सस्ता और सौम्य विकल्प. नम त्वचा पर लगाकर हल्के से मालिश करें, यह त्वचा में नमी बनाकर नहीं देता, बल्कि जो नमी है उसे बाहर उड़ने से रोकता है.

वैसलीन या पेट्रोलियम जेली. एड़ी जैसी बहुत मोटी और सख्त त्वचा के लिए यह अक्सर हल्के लोशन से ज़्यादा असरदार साबित होती है, क्योंकि यह लंबे समय तक त्वचा के ऊपर एक परत बनाकर नमी रोके रखती है.

शहद. एक पतली परत लगाकर पंद्रह बीस मिनट बाद गुनगुने पानी से धोना, कई लोगों को त्वचा नरम करता महसूस होता है. खुली दरार या घाव पर लगाने से पहले सावधानी बरतें.

पके केले का पेस्ट. एक पका हुआ केला मसलकर एड़ियों पर बीस मिनट लगाकर धो लेना, एक पुराना पर आसान घरेलू नुस्खा है और ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है.

चावल के आटे का हल्का स्क्रब. थोड़े से शहद या तेल में चावल का आटा मिलाकर बहुत हल्के हाथ से रगड़ना, सख्त त्वचा को धीरे धीरे नरम करने में मदद करता है. इसे हफ्ते में एक या दो बार से ज़्यादा न करें.

रात भर की मोज़े वाली विधि. ऊपर बताई गई मॉइस्चराइज़र और सूती मोज़े की आदत अकेले भी असर करती है, और बाकी उपायों के साथ मिलाकर सबसे तेज़ नतीजा देती है.

एलोवेरा जेल. ताज़ा ग्वारपाठे का गूदा एड़ियों पर लगाकर बीस मिनट बाद धो लेना, हल्की जलन या खुजली में आराम पहुंचा सकता है. गहरी और सख्त सूखी त्वचा में अकेला एलोवेरा कम पड़ता है, इसलिए इसके ऊपर तेल या मॉइस्चराइज़र की एक परत लगाना बेहतर काम करता है.

इन सब में एक बात समान है, कोई भी चीज़ रातों-रात दरारें नहीं भरती. उम्मीद दो से तीन हफ्ते की रखिए, रातों-रात की नहीं.

ये गलतियां एड़ियों को और बिगाड़ती हैं

ब्लेड या तेज़ चीज़ से खुद सख्त त्वचा काटना. गहराई का अंदाज़ा घर पर नहीं लगता, और गलती से ज़्यादा गहरा कट लगने पर घाव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

बहुत गर्म पानी में देर तक पैर भिगोना. इससे तुरंत आराम लगता है, पर यह त्वचा का बचा हुआ तेल भी निकाल देता है और लंबे समय में रूखापन बढ़ाता है.

सूखी त्वचा पर स्क्रब करना. बिना नमी के रगड़ने से त्वचा और छिलती है. स्क्रब हमेशा नम त्वचा पर ही करें.

सिर्फ दिन में क्रीम लगाना और रात को कुछ न करना. दिन में जूते और मोज़े जल्दी क्रीम सोख लेते हैं. असली काम रात की देखभाल से होता है, जब त्वचा को घंटों नमी सोखने का समय मिलता है.

पीछे से खुली चप्पल में महीनों चलते रहना. अगर एड़ी पहले से फटी है, तो कम से कम देखभाल के दौरान बंद या एड़ी को सहारा देने वाला फुटवियर पहनना बेहतर रहता है.

कब यह सिर्फ रूखेपन से ज़्यादा हो सकता है

ज़्यादातर फटी एड़ियां रूखेपन और दबाव की साधारण कहानी हैं, पर कुछ मामलों में इसके पीछे कोई अंदरूनी वजह भी होती है.

अगर एड़ियां हमेशा से नहीं बल्कि अचानक बहुत ज़्यादा फटने लगी हैं, अगर इसके साथ लगातार थकान, वजन में बिना वजह बदलाव या ठंड ज़्यादा लगना भी है, तो थायरॉइड की जांच कराना समझदारी है. अगर आपको डायबिटीज़ है, तो एड़ियों की देखभाल को हल्के में लेना ठीक नहीं, क्योंकि नसों और खून के बहाव पर असर होने से छोटी सी दरार भी ठीक होने में ज़्यादा समय ले सकती है, और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, कई बार बिना दर्द महसूस हुए भी.

ऐसे मामलों में रोज़ एड़ियों को ध्यान से देखना, किसी भी लालपन, सूजन या रिसाव को हल्के में न लेना, और घर पर सख्त त्वचा खुद न काटना विशेष रूप से ज़रूरी हो जाता है.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता, सिर्फ एक आदत. हर रात नहाने या पैर धोने के बाद नम त्वचा पर गाढ़ा मॉइस्चराइज़र या नारियल तेल लगाइए और सूती मोज़े पहनकर सोइए. इस हफ्ते और कुछ मत बदलिए, बस इसे लगातार निभाइए.

दूसरा हफ्ता, एक आदत और जोड़िए. हफ्ते में दो बार नहाने के बाद हल्के हाथ से प्यूमिस स्टोन का इस्तेमाल शुरू कीजिए, और घर के अंदर भी चप्पल पहनने की आदत डालिए.

नापने का तरीका. हर तीसरे दिन एड़ी को गौर से देखिए और दस में से कितना सुधार लगा, यह एक लाइन में लिख लीजिए. दो हफ्ते बाद इन लाइनों को साथ पढ़ने पर फर्क साफ दिखता है, भले ही रोज़ के हिसाब से बहुत धीमा लगे.

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

घरेलू देखभाल हल्की और सामान्य फटन के लिए है. कुछ स्थितियां ऐसी हैं जहां देर करना ठीक नहीं.

अगर दरारों से खून आ रहा है, दर्द चलने में दिक्कत करने लगा है, त्वचा में लालपन, सूजन या रिसाव दिख रहा है, या दो से तीन हफ्ते की सही देखभाल के बाद भी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ रही है, तो किसी योग्य पोडियाट्रिस्ट या त्वचा विशेषज्ञ से मिलें. डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए यह सलाह और भी ज़रूरी है, क्योंकि उनके लिए पैर की छोटी सी समस्या भी बड़ी बन सकती है, इसलिए दरार दिखते ही जल्दी जांच कराना बेहतर है, इंतज़ार करना नहीं.

मिलाकर बात यह है

फटी एड़ियां किसी बड़ी बीमारी की निशानी कम, और रोज़ की भूली हुई देखभाल का नतीजा ज़्यादा होती हैं. आपको महंगी क्रीम या पार्लर के चक्कर नहीं चाहिए, आपको रोज़ रात नम त्वचा पर गाढ़ा मॉइस्चराइज़र, सूती मोज़े, हफ्ते में दो बार हल्की फाइलिंग, और घर के अंदर भी चप्पल पहनने की आदत चाहिए.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, यह सब हफ्ते दर हफ्ते लगातार निभाना है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या और मौसम के हिसाब से इसे छोटे और आसान कदमों में बांटते हैं, ताकि यह एक और भूली हुई आदत नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक रूटीन बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एड़ियां फटने का सबसे बड़ा कारण क्या है? एड़ी की त्वचा शरीर में सबसे मोटी होती है और वहां तेल ग्रंथियां लगभग न के बराबर होती हैं, इसलिए वह बाकी त्वचा से पहले रूखी पड़ जाती है. जब इस पर शरीर का पूरा वज़न बार बार पड़ता है, खास तौर पर नंगे पैर सख्त फर्श पर चलने से, तो ऊपर की परत मोटी और सख्त होने लगती है. सूखी हवा, ठंड का मौसम, बहुत गर्म पानी से नहाना और खुली चप्पल में घंटों चलना, ये सब मिलकर उस सख्त परत को गहरी दरारों में बदल देते हैं.

रात में एड़ियों पर क्या लगाना चाहिए? सबसे भरोसेमंद तरीका है पैर धोकर हल्का सा पोंछना, ताकि त्वचा में हल्की नमी बनी रहे, और उसी नम त्वचा पर तुरंत गाढ़ा मॉइस्चराइज़र, वैसलीन या नारियल तेल लगाना. इसके बाद सूती मोज़े पहन लें, ताकि क्रीम पूरी रात त्वचा में सोखती रहे. यह आदत रोज़ रात दोहराने पर ज़्यादातर लोगों को दो से तीन हफ्ते में साफ फर्क दिखने लगता है.

क्या फटी एड़ियों की सख्त त्वचा घर पर ब्लेड से काटना ठीक है? यह एक ऐसी आदत है जिससे बचना चाहिए. ब्लेड या तेज़ चीज़ से खुद त्वचा काटने पर गहराई का अंदाज़ा नहीं लगता, और गलती से ज़्यादा गहरा कट लगने पर घाव और उसमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खास तौर पर डायबिटीज़ वाले लोगों में. सख्त त्वचा को धीरे धीरे प्यूमिस स्टोन या फुट फाइल से हल्के हाथ से रगड़ना ज़्यादा सुरक्षित रास्ता है.

क्या डायबिटीज़ में फटी एड़ियां ज़्यादा खतरनाक होती हैं? हां, और यह एक ज़रूरी अंतर है. डायबिटीज़ में पैरों की नसों और खून के बहाव पर असर पड़ सकता है, जिससे छोटी सी दरार भी ठीक होने में ज़्यादा समय लेती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, कई बार बिना दर्द महसूस हुए भी. इसलिए डायबिटीज़ वाले लोगों को एड़ियों की रोज़ जांच करनी चाहिए और घर पर सख्त त्वचा खुद काटने से बचना चाहिए.

फटी एड़ियां ठीक होने में कितना समय लगता है? हल्की और शुरुआती फटन आमतौर पर रोज़ की सही देखभाल से दो से तीन हफ्तों में काफी हद तक ठीक हो जाती है. जिन एड़ियों में गहरी और पुरानी दरारें हैं, वहां सुधार धीमा होता है और चार से छह हफ्ते तक लग सकते हैं. सबसे ज़रूरी बात यह है कि देखभाल हर रात लगातार चले.

क्या नंगे पैर घर में चलना एड़ियों के लिए नुकसानदेह है? लगातार नंगे पैर सख्त और सपाट फर्श पर चलना एड़ी पर दबाव बढ़ाता है और सख्त त्वचा जल्दी बनने लगती है, खास तौर पर टाइल या मार्बल वाले घरों में. घर के अंदर भी नरम तले वाली चप्पल पहनना एड़ी को इस रोज़ के दबाव से काफी हद तक बचाता है.


यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर दरारों से खून आ रहा है, तेज़ दर्द है, संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं, या आपको डायबिटीज़ जैसी कोई स्थिति है, तो कृपया किसी योग्य डॉक्टर या पोडियाट्रिस्ट से सलाह लें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एड़ियां फटने का सबसे बड़ा कारण क्या है?+

एड़ी की त्वचा शरीर में सबसे मोटी होती है और वहां तेल ग्रंथियां लगभग न के बराबर होती हैं, इसलिए वह बाकी त्वचा से पहले रूखी पड़ जाती है. जब इस पर शरीर का पूरा वज़न बार बार पड़ता है, खास तौर पर नंगे पैर सख्त फर्श पर चलने से, तो ऊपर की परत मोटी और सख्त होने लगती है. सूखी हवा, ठंड का मौसम, बहुत गर्म पानी से नहाना और खुली चप्पल में घंटों चलना, ये सब मिलकर उस सख्त परत को गहरी दरारों में बदल देते हैं. ज़्यादातर मामलों में यह सिर्फ रूखेपन और दबाव का नतीजा होता है, किसी बड़ी बीमारी का नहीं.

रात में एड़ियों पर क्या लगाना चाहिए?+

सबसे भरोसेमंद तरीका है पैर धोकर हल्का सा पोंछना, ताकि त्वचा में हल्की नमी बनी रहे, और उसी नम त्वचा पर तुरंत गाढ़ा मॉइस्चराइज़र, वैसलीन या नारियल तेल लगाना. इसके बाद सूती मोज़े पहन लें, ताकि क्रीम पूरी रात त्वचा में सोखती रहे और चादर पर न लगे. यह आदत रोज़ रात दोहराने पर ज़्यादातर लोगों को दो से तीन हफ्ते में साफ फर्क दिखने लगता है.

क्या फटी एड़ियों की सख्त त्वचा घर पर ब्लेड से काटना ठीक है?+

यह एक ऐसी आदत है जिससे बचना चाहिए. ब्लेड या तेज़ चीज़ से खुद त्वचा काटने पर गहराई का अंदाज़ा नहीं लगता, और गलती से ज़्यादा गहरा कट लगने पर घाव और उसमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खास तौर पर डायबिटीज़ वाले लोगों में. सख्त त्वचा को धीरे धीरे प्यूमिस स्टोन या फुट फाइल से हल्के हाथ से रगड़ना ज़्यादा सुरक्षित रास्ता है, और गहरी या दर्द वाली सख्त त्वचा के लिए किसी योग्य पोडियाट्रिस्ट या त्वचा विशेषज्ञ से मिलना बेहतर है.

क्या डायबिटीज़ में फटी एड़ियां ज़्यादा खतरनाक होती हैं?+

हां, और यह एक ज़रूरी अंतर है. डायबिटीज़ में पैरों की नसों और खून के बहाव पर असर पड़ सकता है, जिससे छोटी सी दरार भी ठीक होने में ज़्यादा समय लेती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, कई बार बिना दर्द महसूस हुए भी. इसलिए डायबिटीज़ वाले लोगों को एड़ियों की रोज़ जांच करनी चाहिए, घर पर सख्त त्वचा खुद काटने से बचना चाहिए, और किसी भी दरार, लालपन या सूजन को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

फटी एड़ियां ठीक होने में कितना समय लगता है?+

हल्की और शुरुआती फटन आमतौर पर रोज़ की सही देखभाल से दो से तीन हफ्तों में काफी हद तक ठीक हो जाती है. जिन एड़ियों में गहरी और पुरानी दरारें हैं, वहां सुधार धीमा होता है और चार से छह हफ्ते तक लग सकते हैं. सबसे ज़रूरी बात यह है कि देखभाल हर रात लगातार चले, क्योंकि बीच में कुछ दिन छोड़ने पर सख्त त्वचा फिर से बनने लगती है.

क्या नंगे पैर घर में चलना एड़ियों के लिए नुकसानदेह है?+

लगातार नंगे पैर सख्त और सपाट फर्श पर चलना एड़ी पर दबाव बढ़ाता है और सख्त त्वचा जल्दी बनने लगती है, खास तौर पर टाइल या मार्बल वाले घरों में. घर के अंदर भी नरम तले वाली चप्पल पहनना एड़ी को इस रोज़ के दबाव से काफी हद तक बचाता है. जिन लोगों की एड़ियां पहले से फटी हैं, उनके लिए यह एक छोटी लेकिन असरदार आदत है.

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