पसीना ज़्यादा आने और बॉडी ओडर का घरेलू इलाज: कारण, सफाई और खान-पान का पूरा तरीका
छोटा जवाब
अगर हल्की सी गर्मी में भी कपड़े पसीने से भीग जाते हैं, बगल या पैरों से बदबू जल्दी लौट आती है, और नहाने के कुछ घंटों बाद ही असहज महसूस होने लगता है, तो ज़्यादातर मामलों में वजह कोई बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि सफाई, कपड़ों और खान-पान की कुछ छोटी आदतें होती हैं जिन्हें ठीक करना आसान है.
सबसे बड़ा उपाय रोज़ की दिनचर्या से शुरू होता है. दिन में दो बार सही तरीके से नहाना, सूती और ढीले कपड़े पहनना, बगल के बालों को छोटा रखना, और खाने में लहसुन-प्याज़ और मसालेदार चीज़ों को थोड़ा कम करना, ये सब मिलकर बड़ा फर्क डालते हैं. अगर पसीना बहुत ज़्यादा आता है, रात में भी बिना वजह आता है, या शरीर के सिर्फ एक हिस्से में अचानक बदबू या पसीना बढ़ गया है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है, वहां डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है.
पसीना क्यों आता है, और बदबू कहां से आती है
यह समझना ज़रूरी है कि पसीना खुद बदबूदार नहीं होता. ताज़ा पसीना ज़्यादातर पानी, नमक और थोड़े से प्रोटीन का मिश्रण होता है, और शुरुआत में इसकी कोई तेज़ गंध नहीं होती.
बदबू तब बनती है जब यह पसीना त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आता है. हमारी त्वचा पर, खास तौर पर बगल, पैर के तलवों और कमर के आसपास, लाखों बैक्टीरिया पहले से रहते हैं. ये बैक्टीरिया पसीने को तोड़ना शुरू करते हैं, और इसी प्रक्रिया से वे तत्व बनते हैं जिनकी गंध हमें अच्छी नहीं लगती. जितनी देर पसीना त्वचा पर बना रहता है, बैक्टीरिया को उतना ही ज़्यादा समय मिलता है, और बदबू उतनी ही तेज़ होती जाती है.
शरीर में मुख्य रूप से दो तरह की पसीने की ग्रंथियां होती हैं. एक तरह पूरे शरीर में फैली होती है और शरीर का तापमान ठंडा रखने का काम करती है, इससे निकलने वाला पसीना लगभग गंधहीन होता है. दूसरी तरह बगल, कमर और कुछ और खास जगहों पर होती है, और यह जो पसीना निकालती है उसमें प्रोटीन और चिकनाई ज़्यादा होती है, यही बैक्टीरिया को सबसे ज़्यादा पसंद आता है. यही वजह है कि बदबू सबसे पहले और सबसे तेज़ इन्हीं जगहों से आती है.
ज़्यादा पसीना आने के कारण
गर्मी और नमी. भारत के ज़्यादातर हिस्सों में गर्मी और उमस लंबे समय तक रहती है, और शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज़्यादा पसीना निकालता है. यह पूरी तरह सामान्य है.
वज़न ज़्यादा होना. ज़्यादा वज़न होने पर शरीर को खुद को ठंडा रखने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इसलिए पसीना भी ज़्यादा आता है.
तनाव और घबराहट. तनाव वाली ग्रंथियां आम पसीने वाली ग्रंथियों से अलग तरह से काम करती हैं, यही वजह है कि घबराहट में हथेलियां, तलवे और बगल अचानक गीले होने लगते हैं.
मसालेदार और गर्म खाना. बहुत मसालेदार खाना, गरम चाय-कॉफी और शराब शरीर का तापमान बढ़ा देते हैं, जिससे पसीना तुरंत बढ़ जाता है.
हार्मोन में बदलाव. थायराइड की गड़बड़ी, माहवारी के आसपास का समय, और गर्भावस्था, इन सबमें पसीना सामान्य से ज़्यादा आ सकता है.
हाइपरहाइड्रोसिस. कुछ लोगों में पसीने की ग्रंथियां बिना किसी साफ वजह के ज़रूरत से कहीं ज़्यादा सक्रिय रहती हैं, चाहे मौसम या मेहनत कुछ भी हो. यह एक पहचानी हुई स्थिति है जिसमें डॉक्टर की मदद से बेहतर तरीके मिल सकते हैं.
बॉडी ओडर तेज़ होने के कारण
खान-पान. लहसुन, प्याज़, बहुत ज़्यादा मसाले, रेड मीट और शराब, ये सब शरीर से निकलने वाले पसीने की गंध को सीधे प्रभावित करते हैं, क्योंकि इनके कुछ तत्व पसीने के रास्ते भी बाहर निकलते हैं.
सिंथेटिक और टाइट कपड़े. नायलॉन और पॉलिएस्टर जैसे कपड़े हवा को त्वचा तक पहुंचने नहीं देते, जिससे पसीना और नमी देर तक बनी रहती है और बैक्टीरिया को पनपने का पूरा मौका मिलता है.
बगल के लंबे बाल. बालों की सतह पर पसीना और बैक्टीरिया ज़्यादा देर तक चिपके रहते हैं, जिससे बदबू तेज़ी से बढ़ती है.
पूरे दिन एक ही मोज़े या जूते पहनना. बंद जूतों के अंदर नमी और गर्मी दोनों बनी रहती है, यही वजह है कि पैरों की बदबू अक्सर सबसे ज़्यादा परेशान करती है.
अनियमित सफाई. दिन में सिर्फ एक बार, वह भी जल्दबाज़ी में नहाना, बगल और कमर जैसी जगहों की ठीक से सफाई न कर पाना, बदबू का सबसे सीधा कारण है.
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सफाई और नहाने का सही तरीका
दिन में दो बार नहाना. खास तौर पर गर्मी और उमस के मौसम में, सुबह और शाम दोनों समय नहाना बदबू को काबू में रखने का सबसे सीधा तरीका है.
बगल और कमर पर खास ध्यान दीजिए. सिर्फ पानी डाल लेना काफी नहीं, साबुन या बॉडी वॉश से इन जगहों को हल्के हाथों से अच्छी तरह साफ़ कीजिए, क्योंकि यहीं बैक्टीरिया सबसे ज़्यादा जमा होते हैं.
नहाने के बाद त्वचा को पूरी तरह सुखाइए. गीली त्वचा पर कपड़े पहनने से नमी अंदर ही बनी रहती है, इसलिए तौलिये से अच्छी तरह पोंछकर ही कपड़े पहनिए.
बगल के बाल छोटे रखिए. पूरी तरह हटाना ज़रूरी नहीं, पर बाल जितने छोटे होंगे, पसीना और बैक्टीरिया उतनी ही कम देर टिकेंगे.
पैरों को मत भूलिए. उंगलियों के बीच का हिस्सा अक्सर छूट जाता है, जबकि यही जगह सबसे ज़्यादा नमी रोकती है. तैलीय त्वचा भी पसीने और बैक्टीरिया के साथ मिलकर बदबू बढ़ा सकती है, उस देखभाल के बारे में तैलीय त्वचा के लिए घरेलू उपाय पढ़ना भी उपयोगी रहेगा.
घर में मौजूद चीज़ों से घरेलू उपाय
बेकिंग सोडा. थोड़ा सा बेकिंग सोडा पानी में घोलकर बगल पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है. यह त्वचा की एसिडिटी संतुलित करता है, जिससे बैक्टीरिया को पनपने में मुश्किल होती है. संवेदनशील त्वचा पर पहले हाथ के छोटे हिस्से पर आज़माइए.
नींबू. नींबू का हल्का अम्लीय गुण बैक्टीरिया को कुछ हद तक रोकता है. एक टुकड़ा काटकर बगल पर हल्के से रगड़ा जा सकता है, पर नहाने के तुरंत बाद या टूटी-कटी त्वचा पर इसका इस्तेमाल न करें, जलन हो सकती है.
फिटकरी. भारतीय घरों में फिटकरी सालों से इस्तेमाल होती आई है. नहाने के बाद गीली फिटकरी को बगल पर हल्के से रगड़ने से पसीना और बदबू, दोनों कुछ देर के लिए कम महसूस होते हैं.
नीम का पानी. नीम की पत्तियां पानी में उबालकर उस पानी से नहाना त्वचा को साफ़ रखने में मदद करता है, क्योंकि नीम में प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया रोकने का गुण होता है.
कॉर्नस्टार्च या मुल्तानी मिट्टी. ये त्वचा पर अतिरिक्त नमी सोखते हैं, जिससे दिन भर हल्कापन बना रहता है.
ध्यान दीजिए कि ये उपाय बदबू को कम करने में मदद करते हैं, पर अगर पसीना बहुत ज़्यादा आता है तो ये उसकी असली मात्रा को नहीं बदलते.