गले में खराश के घरेलू उपाय: नमक पानी के गरारे से लेकर यह जानना कि कब सिर्फ घरेलू उपाय काफी नहीं हैं
छोटा जवाब
अगर गला खुजला रहा है, निगलते समय हल्की चुभन महसूस होती है, और आवाज़ थोड़ी भारी लग रही है, तो ज़्यादातर मामलों में यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाने वाली मामूली खराश है.
सबसे ज़्यादा फायदा देने वाले उपाय मुश्किल नहीं हैं. गुनगुने नमक पानी से दिन में तीन चार बार गरारा कीजिए, पूरे दिन गुनगुना पानी पीते रहिए, आवाज़ को आराम दीजिए यानी ज़्यादा बोलने या चिल्लाने से बचिए, और कमरे में हवा बहुत रूखी न रहने दीजिए. अगर पांच दिन में सुधार नहीं दिखता, या साथ में तेज़ बुखार, निगलने में भारी तकलीफ या सांस लेने में दिक्कत है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं रह जाता.
गले में खराश क्यों होती है, और यह बार बार क्यों लौटती है
गले की खराश का सबसे आम कारण एक हल्का वायरल संक्रमण है, वही जो आम सर्दी-जुकाम के पीछे भी होता है. लेकिन कई बार गला अकेले ही परेशान करता है, बिना बहती नाक, बुखार या बदन दर्द के साथ आए, और इसकी अपनी अलग वजहें होती हैं.
मौसम और हवा में बदलाव. एसी में लगातार रहना, पंखे की सीधी हवा में सोना, या सर्दी के मौसम में हवा का रूखा हो जाना, गले की नाज़ुक परत को सुखा देता है और वहां जलन शुरू हो जाती है.
धूल, धुआं और प्रदूषण. बड़े शहरों में हवा में मौजूद कण गले में हल्की लेकिन लगातार जलन पैदा कर सकते हैं, खास तौर पर उन लोगों में जो बाहर ज़्यादा समय बिताते हैं या ट्रैफिक में लंबा सफर करते हैं.
आवाज़ का ज़्यादा इस्तेमाल. शिक्षक, सेल्स का काम करने वाले लोग, और जो लोग फोन पर घंटों बात करते हैं, उनमें गले की मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से भी खराश होती है, यह किसी संक्रमण की वजह से नहीं होती.
एसिड का गले तक वापस आना. खाने के बाद लेट जाने की आदत, या रात को देर से भारी खाना खाने वालों में, पेट का एसिड गले तक पहुंचकर वहां जलन छोड़ जाता है, और यह अक्सर सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा महसूस होता है.
एलर्जी. धूल, पालतू जानवरों के बाल या मौसमी एलर्जी से भी गले में खुजली और हल्की खराश हो सकती है, साथ में आंखों में खुजली या बार बार छींक आना भी दिख सकता है.
कम सोना और लगातार थकान. जब शरीर को पूरी नींद नहीं मिलती, तो उसकी रोज़मर्रा की सुरक्षा व्यवस्था थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है, और ऐसे में गले जैसी नाज़ुक जगह पर मामूली जलन भी ज़्यादा महसूस होने लगती है. यही वजह है कि परीक्षा के दिनों, लगातार यात्रा करने वाले हफ्तों, या काम के दबाव वाले समय में गले की शिकायत ज़्यादा सुनाई देती है, जबकि असली जड़ नींद और थकान में छिपी होती है.
मुंह से सांस लेने की आदत, खास तौर पर सोते समय. जो लोग रात में मुंह खोलकर सोते हैं, उनका गला सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा सूखा और खराश भरा महसूस होता है, क्योंकि रातभर गले पर सीधी हवा लगती रहती है. यह आदत सर्दी में बंद नाक की वजह से भी बन जाती है और फिर मौसम ठीक होने के बाद भी बनी रह जाती है.
धूम्रपान और शराब. दोनों गले की नाज़ुक परत को सीधा रूखा और संवेदनशील बना देते हैं, और धूम्रपान करने वालों में सुबह उठते ही गले में खुजली और हल्की जलन बहुत आम शिकायत है. शराब पीने के बाद गला सूखना इसलिए भी होता है क्योंकि शरीर से पानी ज़्यादा तेज़ी से निकलता है, और इस वजह से रातभर गले को मिलने वाली नमी कम हो जाती है.
यहां एक फर्क समझना ज़रूरी है. अगर गले की खराश के साथ बुखार, बहती या बंद नाक, बदन दर्द और लगातार छींक भी है, तो यह सिर्फ गला नहीं, पूरा सर्दी-जुकाम या फ्लू है, और उसके लिए सर्दी और फ्लू के घरेलू उपाय जो असल में काम करते हैं अलग से पढ़ना ज़्यादा काम का रहेगा, क्योंकि वहां पूरे शरीर के लक्षणों को साथ में संभालने की बात है. वहीं अगर आपका गला रूखा रहता है और मुंह भी बार बार सूखता है, खास तौर पर रात में या एसी वाले कमरे में, तो मुंह सूखने की समस्या का घरेलू इलाज भी साथ में देखने लायक है, क्योंकि दोनों की वजहें अक्सर एक जैसी होती हैं, जैसे रूखी हवा और पानी की कमी.
इसका एक और पहलू है जिसे ज़्यादातर लोग नहीं जोड़ पाते, वह है बार बार लौटने वाली खराश का पैटर्न. अगर यह साल में एक दो बार आती है तो सोचने की ज़रूरत नहीं, लेकिन महीने में दो तीन बार लौट आए तो वजह अक्सर कोई तय आदत या माहौल ही होता है. ध्यान देने लायक संकेत हैं: क्या यह हमेशा सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा होती है, जो एसिड या रूखी हवा की तरफ इशारा कर सकता है. क्या यह हमेशा दफ्तर या किसी खास कमरे में बढ़ती है, जो धूल, एसी या एलर्जी की तरफ इशारा कर सकता है. क्या यह ज़्यादा बोलने वाले दिनों के बाद होती है, जो आवाज़ के ज़्यादा इस्तेमाल की तरफ इशारा करता है. इस पैटर्न को पहचान लेना ही आधा उपाय है, क्योंकि उसके बाद सही बदलाव करना आसान हो जाता है, न कि हर बार नए सिरे से अंदाज़ा लगाना.