पीरियड के दर्द का घरेलू उपाय, जो सच में राहत देता है
महीने के वे दो तीन दिन बहुत सी महिलाओं और लड़कियों के लिए बस एक तारीख नहीं होते। पेट के निचले हिस्से में खिंचाव, कमर में भारी दर्द, टांगों में जकड़न, थकान, चिड़चिड़ापन, और इस सब के बीच भी ऑफिस जाना, पढ़ाई करना, घर संभालना। और सबसे बड़ी दिक्कत यह कि इस दर्द पर खुलकर बात कम होती है, तो कई लड़कियां यह भी नहीं जानतीं कि कितना दर्द सामान्य है और कितना नहीं।
यह गाइड आपके साथ सीधी रहेगी। हम समझेंगे कि पीरियड में दर्द असल में क्यों होता है, कौन से घरेलू उपाय वाकई राहत देते हैं और कैसे उन्हें सही तरीके से करना है, खाने पीने में क्या बदलाव मदद करते हैं, नींद और तनाव का इसमें क्या हाथ है, और सबसे ज़रूरी, कब यह दर्द सामान्य नहीं रहता और किसी विशेषज्ञ से मिलना ज़रूरी हो जाता है। यहां कोई जादुई नुस्खा नहीं मिलेगा जो दर्द को एक मिनट में गायब कर दे, क्योंकि शरीर ऐसे काम नहीं करता।
पहले समझें, यह दर्द क्यों होता है
पीरियड के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती और ढीली होती हैं ताकि अंदर की परत बाहर निकल सके। यह सिकुड़न ही वह ऐंठन है जिसे हम cramps कहते हैं। जब सिकुड़न ज़्यादा तेज़ होती है, तो उस हिस्से में खून का बहाव कुछ पल के लिए कम होता है और दर्द तेज़ महसूस होता है।
इसीलिए दर्द अक्सर पीरियड शुरू होने से कुछ घंटे पहले या पहले दिन सबसे ज़्यादा होता है और दो तीन दिन में धीरे धीरे कम हो जाता है। कमर, जांघों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द फैलना भी आम है, क्योंकि वहां की नसें आपस में जुड़ी हुई हैं।
कुछ बातें दर्द को और बढ़ा देती हैं और अच्छी ख़बर यह है कि इनमें से कई आपके हाथ में हैं। लगातार नींद की कमी, बहुत ज़्यादा तनाव, दिन भर एक ही जगह बैठे रहना, पानी कम पीना, कब्ज़, और बहुत ज़्यादा नमकीन या तला हुआ खाना, ये सब मिलकर उन दिनों को ज़्यादा तकलीफ़देह बना देते हैं।
कैसा दर्द आम है और कैसा नहीं
यह फ़र्क समझना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि दोनों तरफ़ ग़लती होती है। कुछ लड़कियां हल्के दर्द से भी घबरा जाती हैं, और कुछ बहुत तेज़ दर्द को भी सालों तक चुपचाप सहती रहती हैं क्योंकि उन्हें बताया गया है कि यह तो होता ही है।
आम तौर पर पहले एक दो दिन का हल्का या मध्यम दर्द, जो सिकाई और आराम से कम हो जाता है और आपको रोज़ के काम से नहीं रोकता, चिंता की बात नहीं है।
पर अगर दर्द इतना तेज़ है कि आप बिस्तर से उठ नहीं पातीं, अगर हर महीने दर्द पिछले महीने से बढ़ता जा रहा है, अगर दर्द पीरियड ख़त्म होने के बाद भी बना रहता है, या अगर साथ में बहुत ज़्यादा खून आना, उल्टी या बेहोशी जैसा एहसास हो, तो यह सिर्फ़ सामान्य ऐंठन नहीं है। इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय जांच कराना ज़रूरी है।
तुरंत राहत के घरेलू उपाय
गर्म सिकाई, सबसे भरोसेमंद उपाय
अगर सिर्फ़ एक ही उपाय चुनना हो तो यह है। पेट के निचले हिस्से या कमर पर गर्म पानी की बोतल रखने से मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं और ऐंठन काफ़ी कम महसूस होती है। एक बार में पंद्रह से बीस मिनट, दिन में दो तीन बार। बीच में पतला कपड़ा रखें ताकि त्वचा जले नहीं।
गुनगुने पानी से नहाना भी उसी तरह काम करता है, खासकर जब कमर और टांगों में जकड़न ज़्यादा हो।
गुनगुना पानी और सही तरल
उन दिनों ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी थोड़ा थोड़ा पूरे दिन पीना ज़्यादा आरामदेह लगता है। पानी कम होने पर सिरदर्द और भारीपन बढ़ता है, और कब्ज़ दर्द को और बढ़ा देती है। सूप, छाछ और नारियल पानी भी अच्छे हैं। पानी की भूमिका सिर्फ़ इन दिनों तक सीमित नहीं है, पानी पीने के फायदे वाली गाइड में यह पूरी तस्वीर समझाई गई है।
अदरक, सौंफ, अजवाइन और हल्दी वाला दूध
घर की रसोई में मौजूद कुछ चीज़ें उन दिनों सुकून देती हैं। अदरक की हल्की चाय, सौंफ का पानी, अजवाइन को गुनगुने पानी के साथ लेना, या रात में हल्दी वाला गुनगुना दूध, ये पेट की जकड़न और भारीपन कम करने में मदद करते हैं।
यह साफ़ कहना ज़रूरी है कि ये उपाय आराम देने के लिए हैं, किसी बीमारी का इलाज नहीं। अगर दर्द तेज़ है तो नुस्खों पर भरोसा करके डॉक्टर से मिलना टालना ठीक नहीं।
हल्की मालिश और सही मुद्रा
पेट के निचले हिस्से पर हथेली से हल्के गोल घेरे में सौम्य मालिश करना, या कमर पर थोड़े तेल से हल्की मालिश, कई महिलाओं को राहत देती है। ज़ोर लगाकर दबाने की ज़रूरत नहीं।
घुटनों को मोड़कर करवट लेकर लेटना, या पीठ के बल लेटकर घुटनों के नीचे तकिया रखना, पेट की मांसपेशियों का खिंचाव कम करता है। बहुत तंग कपड़े उन दिनों टालें, ढीले और आरामदेह कपड़े फ़र्क डालते हैं।
हल्की हरकत, पूरा आराम नहीं
यह उल्टा लगता है, पर पूरे दिन बिल्कुल लेटे रहना अक्सर जकड़न बढ़ा देता है। धीमी चाल में दस पंद्रह मिनट टहलना, हल्का stretching, बच्चे की मुद्रा जैसे आसान योग आसन, ये खून का बहाव सुधारते हैं और मूड भी हल्का करते हैं। भारी वज़न उठाना या बहुत तेज़ workout उन दिनों ज़रूरी नहीं।
कुछ आसान आसन जो उन दिनों काम आते हैं
योग में कुछ सौम्य आसन खासकर कमर और पेट की जकड़न के लिए उपयोगी माने जाते हैं। बच्चे की मुद्रा में घुटनों के बल बैठकर आगे झुकना और माथा ज़मीन पर टिकाना कमर के निचले हिस्से को खोलता है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती की तरफ़ हल्के से लाना पेट के दबाव को कम करता है। दीवार के सहारे टांगें ऊपर करके कुछ मिनट लेटना थकान और भारीपन में सुकून देता है।
इन्हें ज़ोर लगाकर या दर्द सहते हुए करने की ज़रूरत नहीं। हर आसन में सिर्फ़ उतना ही जाएं जितना आराम से हो, और सांस सामान्य रखें। अगर कोई आसन करते समय दर्द बढ़े तो वहीं रुक जाएं। नियमित हल्का योग बाकी दिनों में भी करते रहने से उन दिनों की तकलीफ़ अक्सर कम महसूस होती है, इस पर मोटापा कम करने के लिए योग वाली गाइड में शुरुआत करने वालों के लिए आसान क्रम दिया गया है।
खाने में क्या बदलें, क्या टालें
उन दिनों शरीर को हल्का, गुनगुना और आसानी से पचने वाला खाना सबसे अच्छा लगता है। दाल, खिचड़ी, सब्ज़ी, दही, केला, तिल, गुड़, ड्राई फ्रूट्स और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शरीर को iron और ज़रूरी mineral देती हैं, जो पीरियड में खून जाने के बाद अहम हो जाते हैं।
दूसरी तरफ़ बहुत ज़्यादा नमक वाला packaged खाना, बहुत तला हुआ खाना और ज़्यादा मीठा उन दिनों सूजन, भारीपन और थकान बढ़ा सकता है। बहुत ज़्यादा चाय या coffee कुछ महिलाओं में बेचैनी और नींद की दिक्कत बढ़ा देती है, तो मात्रा पर नज़र रखें।
एक बात जो कम लोग जोड़ते हैं, कब्ज़ और पीरियड के दर्द का सीधा रिश्ता है। पेट साफ़ न हो तो नीचे का दबाव बढ़ता है और ऐंठन ज़्यादा तकलीफ़देह लगती है। अगर यह आपकी लगातार दिक्कत है तो कब्ज़ के घरेलू उपाय वाली गाइड में fibre, पानी और रोज़ की आदतों का असली तालमेल समझाया गया है।
कुछ आम मिथक, जिन पर भरोसा करना नुकसानदेह है
पीरियड के आसपास जितनी सलाह मिलती है, उसमें से बहुत कुछ बस सुनी सुनाई बात होती है। कुछ बहुत आम मिथक साफ़ कर देना ज़रूरी है।
पहला, यह कहा जाता है कि उन दिनों नहाना नहीं चाहिए। यह ग़लत है। साफ़ सफाई उन दिनों और भी ज़रूरी है, और गुनगुने पानी से नहाना दर्द कम करने में मदद ही करता है।
दूसरा, यह मानना कि दर्द जितना तेज़ हो उतना ही सामान्य है और चुपचाप सहना ही समझदारी है। ऐसा नहीं है। तेज़ और बढ़ता दर्द एक संकेत है, बहादुरी की परीक्षा नहीं।
तीसरा, यह भरोसा कि किसी एक घरेलू चीज़ से पीरियड का दर्द जड़ से ख़त्म हो जाएगा। घरेलू उपाय आराम देते हैं, कारण नहीं बदलते। अगर कारण कोई medical स्थिति है, तो उसकी जांच ही असली रास्ता है।
चौथा, बहुत तेज़ या बहुत गर्म चीज़ें अपने आप आज़माना, या इंटरनेट पर देखकर कोई भी दवा शुरू कर देना। यह राहत के बजाय नई दिक्कत खड़ी कर सकता है।
नींद और तनाव, दो छिपे हुए कारण
यह हिस्सा अक्सर छूट जाता है, पर इसका असर बहुत बड़ा है। जब नींद लगातार पूरी न हो, तो शरीर की दर्द बर्दाश्त करने की क्षमता घट जाती है। वही ऐंठन जो अच्छी नींद के बाद सहनीय लगती है, दो रात की खराब नींद के बाद कई गुना तेज़ महसूस होती है। अगर उन दिनों में या आम दिनों में भी आपको नींद आने में दिक्कत होती है, तो रात को नींद नहीं आती तो क्या करें वाली गाइड में बिना दवा के आज़माने वाले आसान तरीके दिए गए हैं।
तनाव का असर भी सीधा है। लगातार दबाव में रहने पर मांसपेशियां कसी रहती हैं और शरीर हर छोटी तकलीफ़ को ज़्यादा तेज़ी से महसूस करता है। गहरी सांस लेने के कुछ मिनट, थोड़ी देर की सैर, स्क्रीन से ब्रेक, ये सब उन दिनों सिर्फ़ मूड नहीं, दर्द भी हल्का करते हैं। इस पर विस्तार से तनाव कम करने के उपाय वाली गाइड में लिखा गया है।
महीने भर की तैयारी, सिर्फ़ उन दिनों की नहीं
सबसे बड़ा फ़र्क उन आदतों से आता है जो आप बाकी पच्चीस दिन निभाती हैं। जो लड़कियां पूरे महीने ठीक से खाती हैं, पानी पीती हैं, थोड़ी हरकत करती हैं और नींद पूरी लेती हैं, उन्हें अक्सर पीरियड के दिन कम तकलीफ़देह लगते हैं।
अपने cycle की तारीख़ नोट करना भी बहुत काम आता है। इससे आपको पहले से अंदाज़ा रहता है कि किस दिन थकान ज़्यादा होगी, और आप उसी हिसाब से अपने काम और आराम की योजना बना सकती हैं। यही रिकॉर्ड डॉक्टर के पास जाने पर भी बहुत मददगार साबित होता है।
डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है
घरेलू उपाय हल्के और आम दर्द के लिए हैं। कुछ हालात ऐसे हैं जहां देर करना ठीक नहीं।
अगर दर्द इतना तेज़ है कि आप रोज़ के काम नहीं कर पातीं, अगर उल्टी या बेहोशी जैसा एहसास होता है, अगर खून बहुत ज़्यादा आ रहा है और हर एक दो घंटे में pad बदलना पड़ रहा है, अगर दर्द पीरियड के बाद भी बना रहता है, या अगर हर महीने दर्द बढ़ता जा रहा है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से ज़रूर मिलें।
पीरियड का बहुत अनियमित होना, कई महीने रुक जाना, साथ में चेहरे पर अनचाहे बाल आना या तेज़ी से वज़न बढ़ना, इनके पीछे कोई hormonal वजह हो सकती है जिसकी जांच ज़रूरी है। इस विषय को हमने PCOS में वजन कैसे कम करें वाली गाइड में विस्तार से समझाया है। इसी तरह लगातार थकान, ठंड ज़्यादा लगना और बिना वजह वज़न बढ़ना कभी thyroid से भी जुड़ा होता है, जिस पर थायरॉइड में वजन कैसे कम करें वाली गाइड मददगार है।
दर्द की कोई भी दवा अपने आप शुरू करने या बार बार लेने के बजाय डॉक्टर से पूछकर ही लें। यह छोटी सी सावधानी लंबे समय में बहुत काम आती है।
छोटे कदम, हर महीने थोड़ी ज़्यादा राहत
पीरियड का दर्द झेलना अकेलेपन जैसा महसूस हो सकता है, खासकर जब इस पर खुलकर बात न होती हो। पर राहत की बात यह है कि आपको महंगे नुस्खों की ज़रूरत नहीं। गर्म सिकाई, गुनगुना पानी, हल्की हरकत, आरामदेह कपड़े, सादा गुनगुना खाना, पूरी नींद और थोड़ा कम तनाव, यही असली नींव है।
अगर इन आदतों को अकेले जोड़कर निभाना मुश्किल लगता है, तो यहीं SuperLiving काम आता है। App पर सेहत, पोषण, नींद और अच्छी आदतों में मदद के लिए 20 से ज़्यादा coaches की गाइडेंस एक ही जगह मिलती है, रोज़ के छोटे और आसान कदमों के साथ। आप SuperLiving को मुफ़्त में शुरू कर के देख सकती हैं कि यह आपके लिए सही बैठता है या नहीं, बिना किसी दबाव के।
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। हर शरीर अलग होता है। अगर आपका दर्द तेज़, लगातार या बढ़ता हुआ है, या साथ में कोई और लक्षण दिख रहे हैं, तो कृपया किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।