मुंह सूखने की समस्या का घरेलू इलाज: कारण, लार कम होने की वजह और बचाव के तरीके

SuperLiving Expert Team·

मुंह सूखने की समस्या का घरेलू इलाज: कारण, लार कम होने की वजह और बचाव के तरीके

छोटा जवाब

अगर दिन में बार बार या रात में सोते समय मुंह सूखा सा महसूस होता है, गला खुश्क लगता है, और बार बार पानी पीने की ज़रूरत पड़ती है, तो ज़्यादातर मामलों में इसके पीछे कोई एक बड़ी बीमारी नहीं, बल्कि मुंह से सांस लेने की आदत, कम पानी पीना, लगातार तनाव, या उम्र के साथ लार कम बनना जैसी सादी वजहें होती हैं.

सबसे बड़ा उपाय है दिन भर थोड़ा थोड़ा पानी पीना, नाक से सांस लेने की आदत पर ध्यान देना, कमरे की हवा को बहुत सूखा न रहने देना, और तंबाकू या शराब की मात्रा कम करना. अगर यह सब आज़माने के बावजूद हफ्तों तक सूखापन बना रहे, या निगलने और बोलने में दिक्कत आए, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलना सही कदम है.

मुंह सूखने के पीछे असली वजहें क्या हैं

मुंह सूखना किसी एक वजह से नहीं, बल्कि अक्सर कई छोटी छोटी आदतों के मिलने से होता है.

मुंह से सांस लेने की आदत. यह सबसे आम वजह है. जब नाक बंद हो, एलर्जी हो, या बस आदत के चलते कोई दिन या रात में मुंह से सांस लेता है, तो मुंह के अंदर की नमी बहुत तेज़ी से उड़ जाती है. सोते समय यह असर सबसे ज़्यादा दिखता है, क्योंकि कई घंटों तक मुंह खुला रहता है.

कम पानी पीना. शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर लार ग्रंथियां भी कम लार बनाती हैं. जो लोग दिन भर काम में इतने उलझे रहते हैं कि पानी पीना याद ही नहीं रहता, उनमें यह समस्या बहुत आम है.

लगातार तनाव या घबराहट. तनाव के समय शरीर का वही हिस्सा सक्रिय होता है जो खतरे के लिए शरीर को तैयार करता है, और इस दौरान लार बनने की रफ्तार अपने आप धीमी पड़ जाती है. यही वजह है कि किसी ज़रूरी बातचीत या परीक्षा से पहले मुंह सूखा सा महसूस होता है.

उम्र बढ़ने के साथ बदलाव. उम्र के साथ लार ग्रंथियों की सक्रियता धीरे धीरे कम होती जाती है, इसलिए बड़ी उम्र के लोगों में यह शिकायत युवाओं के मुकाबले ज़्यादा देखी जाती है.

कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट. एलर्जी, नींद या बीपी के लिए ली जाने वाली कुछ सामान्य दवाएं मुंह सूखने को एक जाना पहचाना साइड इफेक्ट बताती हैं. नई दवा शुरू करने के बाद यह समस्या दिखे तो डॉक्टर से इसका ज़िक्र ज़रूर करें.

एसी या गर्म सूखी हवा में लगातार रहना. बंद एसी वाले कमरे या गर्म सूखे मौसम में घंटों रहने से हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे मुंह और गला दोनों सूखे महसूस होते हैं.

तंबाकू, गुटखा और शराब. ये चीज़ें लार ग्रंथियों की कार्यक्षमता को सीधा प्रभावित करती हैं, इसलिए इन्हें नियमित इस्तेमाल करने वालों में यह शिकायत ज़्यादा और ज़्यादा लगातार रहती है.

इनमें से कुछ वजहें कुछ घंटों के लिए होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं, जबकि कुछ रोज़ की आदत से जुड़ी होती हैं और तभी ठीक होती हैं जब वह आदत बदली जाए.

लार कम क्यों बनती है, यह समझना ज़रूरी है

लार को ज़्यादातर लोग सिर्फ मुंह की नमी समझते हैं, जबकि इसका काम कहीं ज़्यादा बड़ा है.

लार खाने को निगलने में मदद करती है, मुंह के अंदर के बैक्टीरिया को लगातार बहाकर बाहर निकालती रहती है, दांतों की सतह को एक हद तक सुरक्षित रखती है, और बोलने को आसान बनाती है क्योंकि जीभ और गले को सही तरीके से हिलने के लिए थोड़ी नमी चाहिए होती है. जब लार कम बनती है, तो यह सारा काम अधूरा रह जाता है, इसलिए सिर्फ सूखेपन का अहसास नहीं, बल्कि निगलने में अटकन और होंठ फटने जैसी तकलीफें भी साथ में दिख सकती हैं.

दिन और रात में लार बनने की रफ्तार एक जैसी नहीं रहती. खाने के समय लार सबसे ज़्यादा बनती है, जबकि सोते समय यह रफ्तार अपने आप धीमी हो जाती है, इसलिए सुबह उठते ही हल्का सूखापन महसूस होना किसी हद तक सामान्य है. दिक्कत तब शुरू होती है जब यह सूखापन बहुत ज़्यादा हो, नींद तोड़ दे, या दिन में भी बार बार लौटता रहे.

एक और बात समझना ज़रूरी है. मुंह सूखना और मुंह की दुर्गंध, दोनों अलग समस्याएं हैं, लेकिन एक दूसरे से जुड़ी हैं. लार मुंह के अंदर बैक्टीरिया को बहाकर बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है, और जब लार कम बनती है, तो यही बैक्टीरिया जीभ और दांतों पर ज़्यादा जमा होने लगते हैं, जिससे बदबू बढ़ जाती है. इसीलिए मुंह सूखने की शिकायत वाले लोगों में अक्सर मुंह की दुर्गंध की समस्या भी साथ में देखी जाती है. अगर आपकी मुख्य परेशानी बदबू है, सूखापन नहीं, तो वहां अलग वजहें और उपाय समझना ज़्यादा काम का रहेगा.

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घरेलू उपाय जो असल में काम करते हैं

दिन भर थोड़ा थोड़ा पानी पिएं. एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय हर एक दो घंटे में कुछ घूंट पीना मुंह को ज़्यादा लगातार नमी देता है. पानी पीने की आदत को समझने के लिए पानी पीने के फायदे पर हमारा विस्तृत गाइड पढ़ना उपयोगी रहेगा.

नाक से सांस लेने का अभ्यास करें. दिन में जब भी याद आए, होंठ बंद रखकर नाक से सांस लेने की कोशिश करें. यह एक सादी आदत है, लेकिन लगातार अभ्यास से शरीर इसे खुद ही अपनाने लगता है.

कमरे की हवा में नमी बनाए रखें. अगर आप एसी वाले कमरे में घंटों बैठते हैं, तो बीच बीच में कुछ मिनट ताज़ी हवा में निकलना या कमरे में पानी का एक खुला बर्तन रखना हवा का सूखापन कम करने में मदद कर सकता है.

सौंफ या इलायची मुंह में रखें. खाने के बाद या जब भी सूखापन महसूस हो, एक इलायची या थोड़ी सौंफ मुंह में रखना लार बनने की प्रक्रिया को हल्का सा बढ़ा देता है.

तंबाकू, गुटखा और शराब की मात्रा घटाएं. जितनी जल्दी यह मात्रा कम होती है, उतनी ही जल्दी लार ग्रंथियां अपने सामान्य काम की तरफ लौटती हैं.

सोने की पोज़िशन पर ध्यान दें. पीठ के बल सोने पर मुंह से सांस लेने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए करवट लेकर सोना कई लोगों के लिए रात के सूखेपन को कम कर देता है.

जीभ और दांतों की सफाई पर ध्यान दें. लार कम होने पर बैक्टीरिया को बहाने वाला प्राकृतिक तरीका कमज़ोर पड़ चुका होता है, इसलिए सफाई का काम थोड़ा और ज़रूरी हो जाता है.

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किन आदतों से बचें

बहुत मीठी चीज़ों से सूखापन मिटाने की कोशिश. बार बार मीठा खाने से मुंह में बैक्टीरिया को और खाना मिल जाता है, जिससे लंबे समय में समस्या बढ़ सकती है.

मुंह से सांस लेने की आदत को नज़रअंदाज़ करना. यह सबसे बड़ी वजहों में से एक है, और इसे पहचानना ही आधा उपाय है.

पानी एक साथ बहुत ज़्यादा और फिर घंटों नहीं पीना. यह तरीका शरीर को लगातार नमी नहीं देता, थोड़ा थोड़ा करके पीना कहीं ज़्यादा असरदार है.

कैफीन वाली चाय और कॉफी पर पूरी तरह निर्भर रहना. ये शरीर से पानी की कुछ मात्रा बाहर निकालने का काम भी करते हैं, इसलिए इन्हें पानी का विकल्प मानना ठीक नहीं.

लंबे समय तक सूखेपन को सामान्य मानकर टालना. अगर यह रोज़ की शिकायत बन गई है, तो इसे मौसम या उम्र पर डालकर छोड़ देना सही तरीका नहीं.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता, पानी और सांस की आदत पर ध्यान दें. दिन भर पानी की बोतल पास रखें और हर एक दो घंटे में कुछ घूंट पीने की आदत डालें. साथ ही जब भी याद आए, नाक से सांस लेने की कोशिश करें.

दूसरा हफ्ता, रात और कमरे की हवा पर ध्यान दें. सोने की पोज़िशन बदलकर करवट लेकर सोने की कोशिश करें, और एसी में सोते हैं तो तापमान बहुत कम न रखें. साथ ही तंबाकू या शराब की मात्रा कम करने का एक छोटा कदम उठाएं.

नापने का तरीका. रोज़ सुबह और दिन में दो तीन बार दस में से सूखेपन को अंक दें. ज़्यादातर लोगों को पानी और सांस की आदत से पहले हफ्ते में ही थोड़ा फर्क महसूस होने लगता है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर ऊपर बताए उपाय दो से तीन हफ्तों तक ईमानदारी से आज़माने के बावजूद भी सूखापन कम नहीं होता, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है.

अगर निगलने या बोलने में लगातार दिक्कत रहती है, मुंह के अंदर बार बार छाले या जलन होती है, होंठ बार बार फटते और घाव बनाते हैं, स्वाद महसूस करने की क्षमता कम हो गई लगती है, या सूखापन किसी नई दवा शुरू करने के बाद से बढ़ा है, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलना ज़रूरी है. कभी कभी लगातार बना रहने वाला सूखापन किसी गहरी स्वास्थ्य स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जिसे सिर्फ घरेलू उपायों से ठीक नहीं किया जा सकता.

मिलाकर बात यह है

मुंह सूखना अक्सर किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं, बल्कि कम पानी पीना, मुंह से सांस लेना, लगातार तनाव, या उम्र के साथ आने वाला सादा बदलाव जैसी रोज़ की आदतों का नतीजा होता है.

दिन भर थोड़ा थोड़ा पानी पीना, नाक से सांस लेने की आदत पर ध्यान देना, रात की पोज़िशन बदलना, और तंबाकू या शराब की मात्रा कम करना, यही असली उपाय है. मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, इसे हफ्ते दर हफ्ते निभाना है.

SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या और पानी पीने की आदत समझकर छोटे, रोज़ निभाने लायक कदम तय करते हैं.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुंह सूखने की समस्या सबसे ज़्यादा किसे होती है? जो लोग मुंह से सांस लेते हैं, जिन्हें नाक बंद रहने की शिकायत है, जो दिन में बहुत कम पानी पीते हैं, जिन पर लगातार तनाव रहता है, और उम्र में बड़े लोग, इन सबमें यह समस्या ज़्यादा देखी जाती है. धूम्रपान करने वालों, एसी वाले कमरे में घंटों बैठने वालों और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट वाले लोगों में भी यह शिकायत सामान्य से ज़्यादा मिलती है. अक्सर एक साथ दो तीन वजहें मिलकर समस्या को बढ़ा देती हैं.

रात में सोते समय मुंह बहुत सूख जाता है, क्या यह सामान्य है? हल्का सूखापन सामान्य है, क्योंकि रात में लार बनना अपने आप कम हो जाता है. लेकिन अगर हर रात मुंह इतना सूख जाता है कि नींद टूट जाती है, गला भी सूखा महसूस होता है, या सुबह उठते ही पानी पीने की तेज़ ज़रूरत महसूस होती है, तो यह आमतौर पर मुंह से सांस लेने की आदत की तरफ इशारा करता है. कई बार नाक बंद होना, एलर्जी या सोने की पोज़िशन भी इसमें भूमिका निभाती है.

क्या तनाव से भी मुंह सूख सकता है? हां, और यह बात ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होती. जब शरीर पर तनाव या घबराहट का असर होता है, तो शरीर का वही हिस्सा सक्रिय होता है जो खतरे के समय शरीर को तैयार करता है, और इस दौरान लार बनने की रफ्तार अपने आप धीमी पड़ जाती है. यही वजह है कि किसी ज़रूरी मीटिंग, परीक्षा या मुश्किल बातचीत से पहले अक्सर मुंह और गला सूखा सा महसूस होता है. जिन लोगों पर तनाव लगातार बना रहता है, उनमें यह सूखापन भी रोज़ की समस्या बन सकता है.

पानी ज़्यादा पीने के बावजूद मुंह सूखा क्यों रहता है? अगर पानी की मात्रा ठीक है और फिर भी सूखापन बना रहता है, तो वजह शायद शरीर में पानी की कमी नहीं, बल्कि कोई और कारण है. इसमें मुंह से सांस लेने की आदत, नाक बंद रहना, लगातार तनाव, कुछ दवाओं का असर, या एसी वाले कमरे की सूखी हवा शामिल हो सकती है. ऐसी स्थिति में सिर्फ पानी की मात्रा बढ़ाने के बजाय ऊपर बताई गई दूसरी वजहों पर भी ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है.

मुंह सूखने और मुंह की दुर्गंध का क्या रिश्ता है? दोनों अलग समस्याएं हैं, लेकिन एक दूसरे को बढ़ाती हैं. लार मुंह के अंदर बैक्टीरिया को बहाकर बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है, और जब लार कम बनती है, तो यही बैक्टीरिया जीभ और दांतों पर ज़्यादा जमा होने लगते हैं, जिससे दुर्गंध बढ़ जाती है. इसीलिए जिन लोगों को मुंह सूखने की शिकायत रहती है, उनमें मुंह की दुर्गंध की समस्या भी ज़्यादा देखी जाती है.

मुंह सूखने की समस्या में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? अगर घरेलू उपाय दो तीन हफ्तों तक आज़माने के बावजूद सूखापन कम नहीं होता, अगर निगलने या बोलने में लगातार दिक्कत रहती है, अगर मुंह के अंदर बार बार छाले या जलन होती है, या अगर सूखापन किसी नई दवा शुरू करने के बाद से बढ़ा है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलकर असली वजह समझना सही कदम है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर निगलने या बोलने में लगातार दिक्कत रहती है, मुंह के अंदर बार बार छाले या जलन होती है, या घरेलू उपायों के बावजूद हफ्तों तक सूखापन बना रहता है, तो कृपया योग्य डॉक्टर या डेंटिस्ट से सलाह लें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुंह सूखने की समस्या सबसे ज़्यादा किसे होती है?+

जो लोग मुंह से सांस लेते हैं, जिन्हें नाक बंद रहने की शिकायत है, जो दिन में बहुत कम पानी पीते हैं, जिन पर लगातार तनाव रहता है, और उम्र में बड़े लोग, इन सबमें यह समस्या ज़्यादा देखी जाती है. धूम्रपान करने वालों, एसी वाले कमरे में घंटों बैठने वालों और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट वाले लोगों में भी यह शिकायत सामान्य से ज़्यादा मिलती है. अक्सर एक साथ दो तीन वजहें मिलकर समस्या को बढ़ा देती हैं.

रात में सोते समय मुंह बहुत सूख जाता है, क्या यह सामान्य है?+

हल्का सूखापन सामान्य है, क्योंकि रात में लार बनना अपने आप कम हो जाता है. लेकिन अगर हर रात मुंह इतना सूख जाता है कि नींद टूट जाती है, गला भी सूखा महसूस होता है, या सुबह उठते ही पानी पीने की तेज़ ज़रूरत महसूस होती है, तो यह आमतौर पर मुंह से सांस लेने की आदत की तरफ इशारा करता है. कई बार नाक बंद होना, एलर्जी या सोने की पोज़िशन भी इसमें भूमिका निभाती है. अगर साथ में बहुत ज़्यादा खर्राटे भी आते हैं, तो इसे अलग से समझना फायदेमंद रहेगा.

क्या तनाव से भी मुंह सूख सकता है?+

हां, और यह बात ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होती. जब शरीर पर तनाव या घबराहट का असर होता है, तो शरीर का वही हिस्सा सक्रिय होता है जो खतरे के समय शरीर को तैयार करता है, और इस दौरान लार बनने की रफ्तार अपने आप धीमी पड़ जाती है. यही वजह है कि किसी ज़रूरी मीटिंग, परीक्षा या मुश्किल बातचीत से पहले अक्सर मुंह और गला सूखा सा महसूस होता है. यह कोई बीमारी नहीं, बस शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, लेकिन जिन लोगों पर तनाव लगातार बना रहता है, उनमें यह सूखापन भी रोज़ की समस्या बन सकता है.

पानी ज़्यादा पीने के बावजूद मुंह सूखा क्यों रहता है?+

अगर पानी की मात्रा ठीक है और फिर भी सूखापन बना रहता है, तो वजह शायद शरीर में पानी की कमी नहीं, बल्कि कोई और कारण है. इसमें मुंह से सांस लेने की आदत, नाक बंद रहना, लगातार तनाव, कुछ दवाओं का असर, या एसी वाले कमरे की सूखी हवा शामिल हो सकती है. कई बार लोग पानी घूंट घूंट पीने के बजाय एक साथ बहुत सारा पी लेते हैं, जिससे मुंह को लगातार नमी नहीं मिलती. ऐसी स्थिति में सिर्फ पानी की मात्रा बढ़ाने के बजाय ऊपर बताई गई दूसरी वजहों पर भी ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है.

मुंह सूखने और मुंह की दुर्गंध का क्या रिश्ता है?+

दोनों अलग समस्याएं हैं, लेकिन एक दूसरे को बढ़ाती हैं. लार मुंह के अंदर बैक्टीरिया को बहाकर बाहर निकालने का प्राकृतिक तरीका है, और जब लार कम बनती है, तो यही बैक्टीरिया जीभ और दांतों पर ज़्यादा जमा होने लगते हैं, जिससे दुर्गंध बढ़ जाती है. इसीलिए जिन लोगों को मुंह सूखने की शिकायत रहती है, उनमें मुंह की दुर्गंध की समस्या भी ज़्यादा देखी जाती है. अगर आपकी मुख्य शिकायत बदबू है, सूखापन नहीं, तो उसके पीछे की अलग वजहें और उपाय समझना ज़्यादा उपयोगी रहेगा.

मुंह सूखने की समस्या में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?+

अगर घरेलू उपाय दो तीन हफ्तों तक आज़माने के बावजूद सूखापन कम नहीं होता, अगर निगलने या बोलने में लगातार दिक्कत रहती है, अगर मुंह के अंदर बार बार छाले या जलन होती है, या अगर सूखापन किसी नई दवा शुरू करने के बाद से बढ़ा है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलकर असली वजह समझना सही कदम है, खुद अंदाज़ा लगाकर समय निकालने से बेहतर.

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