जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या: घरेलू उपाय, सावधानियां और डॉक्टर से कब मिलें
छोटा जवाब
जल्दी डिस्चार्ज होना पुरुषों में सबसे आम यौन समस्याओं में से एक है, और सबसे कम बात की जाने वाली भी. यही चुप्पी असली दिक्कत है, क्योंकि इसकी वजह से लोग सालों तक अकेले परेशान रहते हैं या इंटरनेट पर बिकने वाली अनजान चीज़ों के भरोसे बैठ जाते हैं.
ज़्यादातर मामलों में यह समस्या तनाव, घबराहट, नींद की कमी और शरीर की सीखी हुई प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है, न कि किसी गंभीर बीमारी से. स्टार्ट स्टॉप तकनीक, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज, सांस पर ध्यान और तनाव कम करने की आदतें, इन सबसे कई पुरुषों को असली फर्क महसूस होता है, हालांकि इसमें समय और लगातार अभ्यास लगता है. यह लेख कोई दवा या सप्लीमेंट का सुझाव नहीं देता, क्योंकि वह फैसला डॉक्टर की जांच के बाद होना चाहिए, किसी विज्ञापन या इंटरनेट सर्च के आधार पर नहीं.
जल्दी डिस्चार्ज होना असल में क्या है
चिकित्सा भाषा में इसे प्रीमैच्योर इजैकुलेशन कहा जाता है, यानी वह स्थिति जब संबंध शुरू होने के बहुत जल्दी, अक्सर एक मिनट के अंदर, स्खलन हो जाता है, और व्यक्ति चाहकर भी उसे रोक नहीं पाता.
यहां "जल्दी" का कोई एक तय समय नहीं है जो हर किसी पर लागू हो. असली पहचान समय से ज़्यादा नियंत्रण की कमी और उससे होने वाली परेशानी से होती है. अगर यह कभी कभार होता है और न तो व्यक्ति को न पार्टनर को खास फर्क पड़ता है, तो यह चिंता की बात नहीं है. यह समस्या तब बनती है जब यह लगातार हो, नियंत्रण लगभग न के बराबर महसूस हो, और इसके साथ शर्मिंदगी या बचने की कोशिश जुड़ जाए.
यह समझना ज़रूरी है कि यह किसी कमज़ोरी या मर्दानगी की कमी की निशानी नहीं है. यह शरीर की एक सीखी हुई प्रतिक्रिया है, ठीक वैसे ही जैसे कोई आदत बन जाती है, और आदतों को समझकर बदला जा सकता है.
इसके पीछे की असली वजहें
ज़्यादातर मामलों में एक से ज़्यादा वजहें एक साथ काम कर रही होती हैं.
घबराहट और प्रदर्शन का दबाव. नए रिश्ते में, लंबे अंतराल के बाद, या "इस बार ठीक करना है" जैसी सोच के साथ संबंध बनाने पर शरीर पहले से ही ज़्यादा उत्तेजित अवस्था में होता है, जिससे नियंत्रण मुश्किल हो जाता है.
रोज़ का तनाव. दफ्तर का दबाव, पैसों की चिंता, नींद की कमी, ये सब शरीर को लगातार सतर्क अवस्था में रखते हैं, और यही अवस्था यौन नियंत्रण को भी प्रभावित करती है.
शुरुआती अनुभव और सीखी हुई आदत. जिन पुरुषों ने शुरुआती सालों में जल्दबाज़ी में या पकड़े जाने के डर में संबंध बनाना सीखा है, उनके शरीर ने अक्सर "जल्दी खत्म करो" वाली प्रतिक्रिया को आदत बना लिया है, जो बाद में बदलना पड़ती है.
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां. ये मांसपेशियां सीधे स्खलन को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती हैं. अगर ये कमज़ोर हैं या इनके काम करने का तरीका ठीक से समझा नहीं गया है, तो नियंत्रण मुश्किल हो जाता है.
शारीरिक वजहें. कभी कभी थायराइड की गड़बड़ी, प्रोस्टेट से जुड़ी सूजन, या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कोई स्थिति भी इसका कारण बन सकती है. ये कम आम हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर ही सही तरीके से पहचान सकते हैं.
इनमें से कई वजहें उन्हीं आदतों से जुड़ी हैं जो पुरुषों की समग्र यौन इच्छा को भी प्रभावित करती हैं, इस बारे में विस्तार से नैचुरल तरीके से लिबिडो कैसे बढ़ाएं में पढ़ा जा सकता है, जो नींद, तनाव और रिश्ते जैसे उन्हीं पहलुओं को कवर करता है.
घरेलू और व्यवहारिक तरीके जो काम करते हैं
यह वह हिस्सा है जहां असली फर्क बनता है, और इसमें सबसे बड़ी शर्त धैर्य है.
स्टार्ट स्टॉप तकनीक. जैसे ही उत्तेजना चरम के करीब महसूस हो, पूरी तरह रुक जाइए और उत्तेजना को थोड़ा कम होने दीजिए, फिर दोबारा शुरू कीजिए. इसे कई बार दोहराने से शरीर धीरे धीरे यह पहचानना सीखता है कि नियंत्रण कहां से वापस लिया जा सकता है. शुरुआत अकेले अभ्यास से करना आसान होता है.
स्क्वीज़ तकनीक. उसी पल पर लिंग के सिरे पर, जहां सिर और बाकी हिस्सा मिलते हैं, कुछ सेकंड के लिए हल्का दबाव डाला जाता है. इससे उत्तेजना का स्तर नीचे आता है और समय बढ़ता है.
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज. पेशाब को बीच में रोकने की कोशिश करके सही मांसपेशी पहचानिए, फिर उसे रोज़ाना कसने और छोड़ने का अभ्यास कीजिए, दस से पंद्रह बार, दिन में दो या तीन बार. यह किसी भी समय, कहीं भी किया जा सकता है, और किसी को पता भी नहीं चलता.
सांस पर ध्यान. उत्तेजना बढ़ने पर सांस अक्सर तेज़ और उथली हो जाती है, जो शरीर को और ज़्यादा उत्तेजित करती है. जानबूझकर धीमी और गहरी सांस लेने का अभ्यास इस चक्र को तोड़ने में मदद करता है.
अकेले अभ्यास से शुरुआत. बहुत से पुरुषों के लिए दबाव तब कम हो जाता है जब वे इन तकनीकों को पहले अकेले आज़माते हैं, बिना किसी प्रदर्शन की चिंता के, और भरोसा बनने के बाद पार्टनर के साथ इसे धीरे धीरे शामिल करते हैं.
इनमें से कोई भी तकनीक जादुई नहीं है. इनका असर दिखने में हफ्तों लगते हैं, और बीच में असफल कोशिशें होना पूरी तरह सामान्य है.
जानना आसान है, रोज़ अभ्यास में लाना असली चुनौती है. SuperLiving पर 20+ प्रशिक्षित कोच मौजूद हैं, जिनमें Pankaj Sir पुरुषों के स्वास्थ्य, स्टैमिना और आत्मविश्वास से जुड़े सवालों को बिना किसी झिझक के सीधे संभालते हैं. सेशन निजी होते हैं और लेक्चर की जगह छोटे रोज़ाना कदमों में बंटे होते हैं. SuperLiving पर पुरुषों की सेहत से जुड़ी कोचिंग देखें