मुंह की दुर्गंध का घरेलू इलाज: कारण, पाचन का रिश्ता और बचाव के तरीके
छोटा जवाब
अगर ब्रश करने और माउथवॉश इस्तेमाल करने के बावजूद मुंह से बदबू वापस आ जाती है, तो समस्या सिर्फ मुंह की सफाई तक सीमित नहीं है. ज़्यादातर मामलों में इसके पीछे जीभ पर जमी परत, मसूड़ों की हल्की सूजन, खाली पेट रहने की आदत, या पेट और पाचन से जुड़ी कोई गड़बड़ी होती है.
सबसे बड़ा उपाय है रोज़ सुबह-शाम ब्रश के साथ जीभ की सफाई, दिन भर पर्याप्त पानी, खाने के बीच लंबे अंतराल से बचना, और अगर कब्ज या गैस की शिकायत बनी रहती है तो उसे नज़रअंदाज़ न करना. अगर सफाई ठीक होने के बावजूद बदबू हफ्तों तक बनी रहे, तो डेंटिस्ट से मिलना सही कदम है.
मुंह की दुर्गंध के पीछे असली कारण क्या हैं
मुंह की दुर्गंध अक्सर एक नहीं बल्कि कई वजहों के मिलने से बनती है.
जीभ पर जमी परत. मुंह की दुर्गंध का सबसे आम कारण यही है. जीभ के पिछले हिस्से पर बैक्टीरिया, खाने के बारीक कण और मरी हुई कोशिकाओं की एक परत जमा होती रहती है. यही बैक्टीरिया सल्फर जैसे यौगिक बनाते हैं, जिनकी गंध तेज़ और अप्रिय होती है.
मसूड़ों की हल्की सूजन. अगर ब्रश करते समय मसूड़ों से हल्का खून आता है या वे सूजे हुए दिखते हैं, तो वहां भी बैक्टीरिया जमा होकर दुर्गंध बढ़ाते हैं. शुरुआती मसूड़ों की समस्या दर्द नहीं देती, इसलिए लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं.
मुंह का सूखापन. लार मुंह को साफ रखने का प्राकृतिक तरीका है. रात में सोते समय लार कम बनती है, इसलिए सुबह उठते ही मुंह से बदबू आना आम बात है. लेकिन दिन में भी अगर मुंह बार-बार सूखा रहता है, चाहे कम पानी पीने से हो या सांस मुंह से लेने की आदत से, तो बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं.
खाली पेट रहना. लंबे समय तक कुछ न खाने से पेट में एसिड बनता है और सांस में एक अलग तरह की गंध आ सकती है. जो लोग सुबह नाश्ता छोड़ देते हैं या दोपहर तक कुछ नहीं खाते, उनमें यह ज़्यादा देखा जाता है.
कुछ खास खाना और आदतें. प्याज़, लहसुन, तंबाकू और गुटखा जैसी चीज़ें मुंह की दुर्गंध को सीधा बढ़ाती हैं. इनकी मात्रा जितनी ज़्यादा और जितनी बार-बार, बदबू भी उतनी ही ज़्यादा और लगातार बनी रहती है.
दांतों में फंसा खाना. दांतों के बीच फंसा खाना कई घंटों तक वहीं रहकर बैक्टीरिया को खाना देता है, खासकर अगर फ्लॉस करने की आदत नहीं है.
पुरानी दांत की समस्याएं. कैविटी, टूटा हुआ दांत, या मसूड़ों के आसपास पस जैसी स्थिति भी लगातार बदबू का कारण बन सकती है. ऐसी समस्याएं सिर्फ ब्रश करने से ठीक नहीं होतीं, क्योंकि गड़बड़ी दांत के अंदर या मसूड़े की जड़ में होती है, ऊपर की सफाई से वहां तक पहुंचना मुमकिन नहीं है.
नाक बंद होना और मुंह से सांस लेना. सर्दी-जुकाम में या एलर्जी के दौरान जब नाक बंद हो जाती है, तो लोग मुंह से सांस लेने लगते हैं. इससे मुंह जल्दी सूख जाता है और बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिल जाता है. जिन लोगों को सोते समय भी मुंह खुला रहता है, उनमें सुबह की बदबू सामान्य से ज़्यादा तेज़ होती है.
डेंचर या ब्रेसेस की सफाई में कमी. जिन लोगों के दांतों पर ब्रेसेस लगे हैं या जो नकली दांत इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए जीभ और दांतों के साथ-साथ इन उपकरणों की सफाई भी उतनी ही ज़रूरी है, क्योंकि खाना और बैक्टीरिया इनके नीचे भी आसानी से फंस जाते हैं.
बहुत सख्त लो-कार्ब डाइट. जो लोग वजन घटाने के लिए अचानक बहुत कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट लेने लगते हैं, उनके शरीर में कीटोन नाम के यौगिक बनने लगते हैं, और इनकी एक अलग, हल्की मीठी सी गंध सांस में आ सकती है. यह कोई खतरे की बात नहीं है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं, क्योंकि यह बताता है कि डाइट बहुत अचानक और बहुत सख्ती से बदली गई है, और ऐसे बदलाव धीरे-धीरे करना शरीर के लिए ज़्यादा आसान रहता है.
उम्र के साथ बदलाव. उम्र बढ़ने के साथ लार बनने की मात्रा अपने आप कम होने लगती है, और मसूड़े भी थोड़े पीछे खिसकने लगते हैं, जिससे दांतों की जड़ के आसपास सफाई करना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ मुंह की दुर्गंध की शिकायत भी बढ़ती देखी जाती है, भले ही सफाई की आदतें पहले जैसी ही क्यों न हों.
यहां एक फर्क समझना ज़रूरी है. मुंह की दुर्गंध और मुंह के छाले, दोनों अलग समस्याएं हैं. छाले मुंह के अंदर एक तय जगह पर दर्द के साथ दिखने वाला घाव होते हैं, और वे कुछ दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं, जबकि दुर्गंध पूरे मुंह से आने वाली एक लगातार बनी रहने वाली गंध है, जिसमें दर्द ज़रूरी नहीं है. दोनों की वजहें भी अलग हैं और घरेलू देखभाल का तरीका भी अलग है. अगर आपकी समस्या छाले जैसी दिखती है, तो मुंह के छालों का घरेलू इलाज पर हमारा अलग गाइड पढ़ना ज़्यादा सही रहेगा.
पाचन और मुंह की दुर्गंध का रिश्ता, जिसे ज़्यादातर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं
यहां एक ऐसी बात है जो अक्सर छूट जाती है. मुंह की दुर्गंध हमेशा मुंह के अंदर की समस्या नहीं होती, कई बार इसकी जड़ पेट में होती है.
जब पाचन धीमा पड़ जाता है या खाना पेट में सामान्य से ज़्यादा देर रुका रहता है, तो उसके टूटने से बनने वाली गैस कई बार सांस के ज़रिए बाहर आती है. यही वजह है कि जिन लोगों को लगातार गैस, भारीपन या पेट फूलने की शिकायत रहती है, उनमें मुंह की दुर्गंध भी ज़्यादा देखी जाती है. पाचन को बेहतर बनाने के रोज़ के तरीके पाचन कैसे सुधारें में विस्तार से बताए गए हैं.
कब्ज का असर भी सीधा दिखता है. जब मल कई दिनों तक आंतों में रुका रहता है, तो उसमें बनने वाली गैस शरीर में वापस सोखी जा सकती है, और इसका एक हिस्सा सांस के ज़रिए बाहर निकलता है. यही वजह है कि कब्ज ठीक होते ही कई लोगों को अपने आप मुंह की बदबू में फर्क महसूस होता है. अगर यह आपकी भी समस्या है, तो कब्ज के घरेलू उपाय पर हमारा विस्तृत गाइड पढ़ना उपयोगी रहेगा.
एसिडिटी और पेट में जलन भी मुंह तक अपना असर पहुंचा सकती है, क्योंकि पेट का एसिड कई बार गले तक वापस आता है और साथ में एक खट्टी या तीखी गंध भी लाता है.
यहां समझने वाली बात यह है कि दांतों और जीभ की सफाई अपनी जगह ज़रूरी है, लेकिन अगर पेट और पाचन ठीक नहीं है, तो अकेले माउथवॉश या टूथपेस्ट से पूरा फर्क नहीं पड़ेगा. दोनों तरफ ध्यान देना ज़रूरी है.
सिर्फ सफाई नहीं, पूरी आदत बदलनी होती है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी डाइट, पानी पीने की आदत और रोज़ की दिनचर्या के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि पाचन और मुंह दोनों की सेहत साथ में सुधरे. SuperLiving डाउनलोड करें