कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान कैसे बनाएं: शुरुआती लोगों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

SuperLiving Expert Team·

कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान कैसे बनाएं: शुरुआती लोगों के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

छोटा जवाब

कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान बनाने का मतलब कोई नई या अलग डाइट खोजना नहीं है। इसका मतलब है अपने रोज़ के खाने को इस तरह बांटना कि कुल कैलोरी मेंटेनेंस से थोड़ी कम रहे, फिर भी थाली भरी हुई और पेट संतुष्ट लगे।

शुरुआती लोगों के लिए सबसे आसान रास्ता पांच कदमों में है: अपना मेंटेनेंस नंबर पता करना, उससे चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम का लक्ष्य तय करना, दिन को तीन से चार थालियों में बांटना, हर थाली में प्रोटीन और सब्ज़ी को प्राथमिकता देना, और तेल-चीनी जैसी छिपी कैलोरी पर नज़र रखना। इस लेख में यही पांच कदम, एक सात दिन का सैंपल प्लान और शुरुआती लोगों की सबसे आम गलतियां, सब साथ में दिए गए हैं।

प्लान शुरू करने से पहले दो चीज़ें तय करना ज़रूरी है

ज़्यादातर प्लान इसलिए टूट जाते हैं क्योंकि उन्हें शुरू करने से पहले नींव नहीं रखी जाती। दो चीज़ें ऐसी हैं जो किसी भी प्लान से पहले तय हो जानी चाहिए।

पहली, आपका मेंटेनेंस नंबर। यह वह कैलोरी है जिस पर आपका वज़न न बढ़ता है न घटता है। इसे पता करने का सबसे भरोसेमंद तरीका दो से तीन हफ़्ते अपने सामान्य खाने को बिना बदले लिखना और हफ़्ते में एक बार वज़न नोट करना है। अगर वज़न लगभग स्थिर रहता है, तो उन दिनों की औसत कैलोरी ही आपका मेंटेनेंस नंबर है। इसे पूरी तरह से कैसे निकालें, यह कैलोरी डेफिसिट क्या होता है में विस्तार से समझाया गया है।

दूसरी, आपका कमी का लक्ष्य। मेंटेनेंस नंबर मिलने के बाद उससे चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम करना एक संतुलित शुरुआत है। इससे ज़्यादा कमी शुरुआती लोगों के लिए खतरनाक नहीं तो मुश्किल ज़रूर बन जाती है, क्योंकि भूख और थकान बहुत जल्दी हावी हो जाती है और प्लान तीसरे हफ़्ते तक टूट जाता है।

इन दोनों नंबरों के बिना बनाया गया कोई भी प्लान सिर्फ़ अंदाज़े पर टिका रहता है, और अंदाज़े से बना प्लान ज़्यादा दिन नहीं चलता।

दिन को कितनी थालियों में बांटें

शुरुआती लोगों के लिए सबसे आसान ढांचा तीन मुख्य थाली और एक या दो छोटे नाश्ते का है। इससे ज़्यादा जटिल योजना, जैसे पांच छोटी मील या इंटरमिटेंट फास्टिंग, शुरुआत में उलझा सकती है और छोड़ने का कारण बन सकती है।

सुबह का नाश्ता। दिन की शुरुआत प्रोटीन के साथ करना भूख को दिन भर काबू में रखने में मदद करता है। अंडा, पोहा में मूंगफली, दही के साथ फल, या बेसन का चीला जैसे विकल्प आसानी से घर में बन जाते हैं।

दोपहर का खाना। यही वह थाली है जिसमें सबसे ज़्यादा लोग दिन की सबसे बड़ी गलती करते हैं, या तो बहुत ज़्यादा चावल-रोटी या बहुत कम सब्ज़ी। आधी थाली सब्ज़ी और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडा, चिकन या मछली) और एक चौथाई अनाज (रोटी या चावल) का ढांचा ज़्यादातर घरों में बिना किसी अलग सामान के बन जाता है।

शाम का छोटा नाश्ता। भुना चना, मखाना, एक फल या दही, यह शाम की भूख को काबू में रखता है और रात के खाने में ज़्यादा खाने से बचाता है।

रात का खाना। दोपहर से थोड़ा हल्का, जल्दी खाया गया और सोने से दो से तीन घंटे पहले पूरा किया गया रात का खाना नींद और अगले दिन की भूख दोनों पर अच्छा असर डालता है।

शुरुआती लोगों के लिए सात दिन का सैंपल प्लान

यह कोई सख्त नियम नहीं है, बल्कि एक ढांचा है जिसे अपने घर के खाने के हिसाब से बदला जा सकता है। हर दिन का कुल हिसाब लगभग एक जैसा रखा गया है, पर खाना अलग अलग है ताकि बोरियत न हो।

दिन 1: नाश्ता, दो अंडे और एक रोटी। दोपहर, दो रोटी, एक कटोरी दाल, सब्ज़ी और सलाद। शाम, भुना चना। रात, एक रोटी, सब्ज़ी और एक कटोरी दही।

दिन 2: नाश्ता, पोहा मूंगफली के साथ। दोपहर, एक कटोरी चावल, राजमा और सलाद। शाम, एक फल। रात, दो रोटी और मिक्स सब्ज़ी।

दिन 3: नाश्ता, बेसन का चीला। दोपहर, दो रोटी, पनीर की सब्ज़ी और सलाद। शाम, मखाना। रात, एक कटोरी दाल और सब्ज़ी।

दिन 4: नाश्ता, दही और फल। दोपहर, एक कटोरी चावल, सांभर और सब्ज़ी। शाम, भुना चना। रात, दो रोटी और पनीर भुर्जी।

दिन 5: नाश्ता, उबले अंडे और एक रोटी। दोपहर, दो रोटी, चने की सब्ज़ी और सलाद। शाम, एक फल। रात, खिचड़ी और दही।

दिन 6, थोड़ा लचीला दिन: नाश्ता सामान्य, दोपहर का खाना परिवार के साथ बाहर या घर पर थोड़ा ज़्यादा विविध, पर हिस्से का ध्यान रखते हुए। शाम और रात हल्की।

दिन 7, आराम और रिव्यू का दिन: सामान्य खाना, और हफ़्ते भर का हिसाब देखने का दिन। वज़न नोट कीजिए और अगले हफ़्ते के लिए कोई एक छोटी चीज़ तय कीजिए जिसे बेहतर करना है।

इस पूरे ढांचे में तेल नापकर डालना और चाय की चीनी कम करना सबसे असरदार बदलाव हैं, क्योंकि यही दो चीज़ें ज़्यादातर घरों में हिसाब से बाहर रह जाती हैं। किसी भी मिली जुली चीज़ की सही कैलोरी निकालने का तरीका खाने की कैलोरी कैसे गिनें में पूरी पतीली वाले तरीके से समझाया गया है।

नंबर सही हैं, पर रोज़ निभाना मुश्किल है? SuperLiving पर 20+ कोच आपकी थाली और आपकी दिनचर्या के हिसाब से हिंदी और हिंग्लिश में छोटे कदम तय करते हैं, ताकि प्लान कागज़ पर नहीं, रोज़ की ज़िंदगी में चले। SuperLiving डाउनलोड करें

यह सब खुद करने की ज़रूरत नहीं है

SuperLiving पर 20+ expert coaches आपकी थाली के हिसाब से प्लान बनाते हैं. शुरुआत फ्री.

फ्री में शुरू करें

शुरुआती लोग सबसे ज़्यादा कहां गलती करते हैं

बहुत सख्त शुरुआत। पहले ही दिन रोटी-चावल पूरी तरह बंद कर देना या चाय-चीनी एक साथ छोड़ देना उत्साह में सही लगता है, पर तीसरे हफ़्ते तक अक्सर पूरा प्लान छूट जाता है। बेहतर है कि पहले हफ़्ते सिर्फ़ तेल और चीनी पर काम किया जाए, फिर हिस्सों पर।

हर दिन एक जैसा खाना। यह दिखने में आसान लगता है, पर दसवें दिन तक थकान और बोरियत ला देता है। दाल, सब्ज़ी और प्रोटीन के स्रोत बदलते रहने से प्लान लंबे समय तक चलता है।

छिपी कैलोरी को नज़रअंदाज़ करना। एक चम्मच तेल लगभग सवा सौ कैलोरी का होता है और थाली में दिखता नहीं है। दिन भर में तीन से चार चम्मच अतिरिक्त तेल आसानी से पूरे दिन की मेहनत को बेअसर कर देते हैं।

वीकेंड को हिसाब से बाहर रखना। सोमवार से शुक्रवार अच्छा हिसाब और शनिवार-रविवार पूरी तरह आज़ाद खाना, पूरे हफ़्ते के औसत को बिगाड़ देता है। वीकेंड पर भी हिस्से का ध्यान रखना प्लान को असल में काम करने देता है।

बहुत जल्दी नतीजा चाहना। रोज़ वज़न देखकर घबरा जाना और दो दिन में फ़र्क न दिखने पर प्लान बदल देना सबसे आम गलती है। शरीर हफ़्तों में जवाब देता है, दिनों में नहीं।

प्लान को लंबे समय तक चलाने वाली तीन आदतें

प्रोटीन को हर थाली में रखना। दाल, पनीर, अंडा, चिकन, मछली या सोया, भूख को सबसे लंबे समय तक काबू में रखते हैं और मांसपेशियों को बचाते हैं, जो किसी भी कैलोरी डेफिसिट का सबसे बड़ा डर होता है।

नींद पूरी करना। अधूरी नींद वाले दिनों में भूख बढ़ाने वाले संकेत तेज़ हो जाते हैं और मीठे-तले की तलब साफ़ बढ़ जाती है। सात घंटे की नींद को प्लान का ही हिस्सा मानिए, अलग काम नहीं।

रोज़ की हलचल बढ़ाना। खाने के बाद दस मिनट की वॉक, लिफ्ट की जगह सीढ़ी, फोन पर बात करते हुए टहलना, यह सब बिना अलग समय निकाले कैलोरी डेफिसिट को मज़बूत करता है और जिम से भी ज़्यादा टिकाऊ होता है।

यह प्लान किसके लिए नहीं है, और कब डॉक्टर से मिलें

यह गाइड स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य जानकारी है। अगर आपको डायबिटीज़, थायरॉइड, पीसीओएस, दिल या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, आप कोई नियमित दवा लेते हैं, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो कोई भी कैलोरी प्लान शुरू करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन से सलाह लेना ज़रूरी है।

इसी तरह अगर प्लान शुरू करने के बाद लगातार थकान, चक्कर, बाल झड़ना, नींद में गड़बड़ी, महिलाओं में पीरियड अनियमित होना या खाने के बारे में लगातार और परेशान करने वाले विचार आने लगें, तो यह इशारा है कि कमी बहुत बड़ी है या प्लान शरीर के लिए सही नहीं बैठ रहा। ऐसे में कैलोरी बढ़ाकर कुछ दिन मेंटेनेंस पर लौटना और ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से बात करना सबसे सही कदम है।

निचोड़

एक अच्छा कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान जटिल नहीं होता। इसकी नींव तीन चीज़ों पर टिकी है: अपना मेंटेनेंस नंबर जानना, उससे चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम का संतुलित लक्ष्य रखना, और थाली को प्रोटीन-सब्ज़ी के ढांचे में बांटना। बाकी सब, जैसे दिन में क्या बनेगा, यह आपके घर के खाने पर निर्भर करता है और इसमें बदलाव करने की पूरी गुंजाइश है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि प्लान वही अच्छा है जिसे आप हफ़्तों तक निभा सकें, कागज़ पर परफेक्ट दिखने वाला प्लान नहीं।

अगर रोज़ का हिसाब और प्लान अकेले बनाना भारी लगता है, तो SuperLiving पर आपको खाने का आसान लॉग मिलता है, साथ में 20+ कोच की गाइडेंस हिंदी और हिंग्लिश में, आपके घर के खाने के हिसाब से। आप SuperLiving को मुफ़्त में शुरू कर के देख सकते हैं कि यह आपके रोज़ के हिसाब में फिट बैठता है या नहीं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान बनाने के लिए सबसे पहला कदम क्या है? सबसे पहला कदम अपना मेंटेनेंस नंबर पता करना है, यानी वह कैलोरी जिस पर आपका वज़न न बढ़ता है न घटता है। इसके बिना बनाया गया कोई भी प्लान सिर्फ़ अंदाज़े पर टिका रहता है। दो से तीन हफ़्ते अपने सामान्य खाने को ईमानदारी से लिखिए और हफ़्ते में एक बार एक ही दिन वज़न नोट कीजिए, वहीं से आपका असली मेंटेनेंस नंबर निकलता है।

शुरुआती लोगों को रोज़ कितनी कैलोरी कम करनी चाहिए? ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए मेंटेनेंस से चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम करना एक संतुलित शुरुआत है, जिससे हफ़्ते में लगभग आधा किलो वज़न घटता है। इससे बहुत ज़्यादा कमी शुरुआती लोगों के लिए प्लान को तोड़ने का सबसे बड़ा कारण बनती है। महिलाओं के लिए लगभग बारह सौ और पुरुषों के लिए लगभग पंद्रह सौ कैलोरी से नीचे बिना डॉक्टर की निगरानी के नहीं जाना चाहिए।

क्या रोज़ एक जैसा खाना खाना ज़रूरी है या बदलाव रख सकते हैं? बदलाव रखना न सिर्फ़ ठीक है, बल्कि प्लान को टिकाऊ बनाने के लिए ज़रूरी भी है। असली ज़रूरत एक जैसी कैलोरी और एक जैसे हिस्सों की है, एक जैसे खाने की नहीं। दाल की जगह राजमा या चना, और एक सब्ज़ी की जगह दूसरी सब्ज़ी आराम से बदली जा सकती है, जब तक हिस्से का आकार और तेल की मात्रा लगभग वैसी ही रहे।

प्लान बनाते वक़्त सबसे ज़्यादा गलती कहां होती है? सबसे ज़्यादा गलती बहुत सख्त प्लान बनाने में होती है, जैसे रोटी या चावल पूरी तरह बंद कर देना, या शुरू से ही बहुत बड़ी कैलोरी कमी रख लेना। ऐसा प्लान पहले हफ़्ते में उत्साह से चल जाता है, पर तीसरे हफ़्ते तक भूख और थकान की वजह से टूट जाता है। दूसरी आम गलती तेल, चाय की चीनी और बाहर के नाश्ते को हिसाब में न जोड़ना है।

क्या वीकेंड या त्योहार के दिन प्लान से हट सकते हैं? हां, और यह प्लान तोड़ने जैसी बात नहीं है। शरीर हफ़्ते के औसत पर चलता है, एक दिन पर नहीं। अगर एक दिन ज़्यादा खाया गया, तो अगले दिन भूखा रहने की ज़रूरत नहीं, बस बाकी दिन अपने तय हिसाब पर लौट आइए।

प्लान शुरू करने के बाद वज़न कब तक दिखना शुरू होता है? ज़्यादातर लोगों को पहला साफ़ फ़र्क दो से तीन हफ़्ते में दिखता है, हालांकि पहले हफ़्ते में पानी के जमाव की वजह से वज़न ऊपर नीचे हो सकता है, जिसे असली बदलाव नहीं मानना चाहिए। हफ़्ते में एक बार, एक ही दिन वज़न नोट कीजिए और तीन हफ़्ते का औसत देखिए। अगर चार हफ़्ते में भी कोई हलचल नहीं है, तो हिसाब की ईमानदारी दोबारा जांचिए और ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से बात कीजिए।

यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर, डाइटीशियन या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति की ज़रूरत, बीमारी और दवाइयां अलग होती हैं। अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, आप कोई दवा लेते हैं, आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो कैलोरी घटाने या नया डाइट प्लान शुरू करने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। यहां दिए गए कैलोरी के आंकड़े मोटे अनुमान हैं और बनाने के तरीके व मात्रा के हिसाब से बदल सकते हैं।

SuperLiving

अपना डाइट प्लान 2 मिनट में बनाएं

घर का खाना खाकर वजन कम करें. 20+ expert coaches से हिंदी में बात करें, जब चाहें. शुरुआत फ्री, उसके बाद ₹199 प्रति महीना.

फ्री में शुरू करें

10 लाख+ डाउनलोड, Google Play पर उपलब्ध

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैलोरी डेफिसिट डाइट प्लान बनाने के लिए सबसे पहला कदम क्या है?+

सबसे पहला कदम अपना मेंटेनेंस नंबर पता करना है, यानी वह कैलोरी जिस पर आपका वजन न बढ़ता है न घटता है। इसके बिना बनाया गया कोई भी प्लान सिर्फ़ अंदाज़े पर टिका रहता है। दो से तीन हफ़्ते अपने सामान्य खाने को ईमानदारी से लिखिए और हफ़्ते में एक बार एक ही दिन वज़न नोट कीजिए, वहीं से आपका असली मेंटेनेंस नंबर निकलता है। उसके बाद ही यह तय होता है कि प्लान में कितनी कैलोरी घटानी है।

शुरुआती लोगों को रोज़ कितनी कैलोरी कम करनी चाहिए?+

ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए मेंटेनेंस से चार सौ से पांच सौ कैलोरी कम करना एक संतुलित शुरुआत है, जिससे हफ़्ते में लगभग आधा किलो वज़न घटता है। इससे बहुत ज़्यादा कमी शुरुआती लोगों के लिए प्लान को तोड़ने का सबसे बड़ा कारण बनती है, क्योंकि भूख और थकान बहुत जल्दी हावी हो जाती है। महिलाओं के लिए लगभग बारह सौ और पुरुषों के लिए लगभग पंद्रह सौ कैलोरी से नीचे बिना डॉक्टर की निगरानी के नहीं जाना चाहिए।

क्या रोज़ एक जैसा खाना खाना ज़रूरी है या बदलाव रख सकते हैं?+

बदलाव रखना न सिर्फ़ ठीक है, बल्कि प्लान को टिकाऊ बनाने के लिए ज़रूरी भी है। असली ज़रूरत एक जैसी कैलोरी और एक जैसे हिस्सों की है, एक जैसे खाने की नहीं। दाल की जगह राजमा या चना, और एक सब्ज़ी की जगह दूसरी सब्ज़ी आराम से बदली जा सकती है, जब तक हिस्से का आकार और तेल की मात्रा लगभग वैसी ही रहे। जो प्लान हर दिन बिल्कुल एक जैसा हो, वह तीसरे हफ़्ते तक बोरियत की वजह से छूट जाता है।

प्लान बनाते वक़्त सबसे ज़्यादा गलती कहां होती है?+

सबसे ज़्यादा गलती बहुत सख्त प्लान बनाने में होती है, जैसे रोटी या चावल पूरी तरह बंद कर देना, या शुरू से ही बहुत बड़ी कैलोरी कमी रख लेना। ऐसा प्लान पहले हफ़्ते में उत्साह से चल जाता है, पर तीसरे हफ़्ते तक भूख और थकान की वजह से टूट जाता है। दूसरी आम गलती तेल, चाय की चीनी और बाहर के नाश्ते को हिसाब में न जोड़ना है, जो पूरे हफ़्ते की मेहनत को आसानी से बेअसर कर देते हैं।

क्या वीकेंड या त्योहार के दिन प्लान से हट सकते हैं?+

हां, और यह प्लान तोड़ने जैसी बात नहीं है। शरीर हफ़्ते के औसत पर चलता है, एक दिन पर नहीं। अगर एक दिन ज़्यादा खाया गया, तो अगले दिन भूखा रहने की ज़रूरत नहीं, बस बाकी दिन अपने तय हिसाब पर लौट आइए। जो प्लान एक दिन के बहक जाने पर पूरी तरह टूट जाता है, वह शुरू से ही बहुत कमज़ोर ढांचे पर बना था।

प्लान शुरू करने के बाद वज़न कब तक दिखना शुरू होता है?+

ज़्यादातर लोगों को पहला साफ़ फ़र्क दो से तीन हफ़्ते में दिखता है, हालांकि पहले हफ़्ते में पानी के जमाव की वजह से वज़न ऊपर नीचे हो सकता है, जिसे असली बदलाव नहीं मानना चाहिए। हफ़्ते में एक बार, एक ही दिन और एक ही हालत में वज़न नोट कीजिए, और तीन हफ़्ते का औसत देखिए, एक दिन का नंबर नहीं। अगर चार हफ़्ते में भी कोई हलचल नहीं है, तो हिसाब की ईमानदारी दोबारा जांचिए और ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से बात कीजिए।

आगे पढ़ें

वजन घटाना पर सभी 47 आर्टिकल देखें →
← सभी articles देखें