वजन घटना रुक जाए तो क्या करें? प्लेटो तोड़ने का पूरा तरीका
सबसे पहले सीधा जवाब
शुरुआत के कुछ हफ्ते सब ठीक चला. तराजू का नंबर हर हफ्ते थोड़ा नीचे जाता रहा और भरोसा बना कि यह रास्ता काम कर रहा है. फिर अचानक सब रुक गया. वही डाइट, वही वॉक, वही मेहनत, पर नंबर तीन हफ्ते से एक ही जगह अटका है. यही वह मोड़ है जहां ज़्यादातर लोग या तो और कम खाना शुरू कर देते हैं या पूरी कोशिश ही छोड़ देते हैं. दोनों गलत हैं.
सीधा जवाब यह है कि प्लेटो शरीर के खराब होने का संकेत नहीं, गणित के बदल जाने का संकेत है. आपका शरीर अब पहले से छोटा है, इसलिए उसे कम ऊर्जा चाहिए, और जो कमी छह हफ्ते पहले बन रही थी वह अब उतनी नहीं बन रही. साथ ही समय के साथ हिस्से चुपचाप बढ़ जाते हैं और नापने में ढील आ जाती है.
इसे तोड़ने का तरीका भूखा रहना नहीं है. पहले दो हफ्ते ईमानदारी से देखिए कि असल में कितना जा रहा है, फिर प्रोटीन बढ़ाइए, ताकत वाली एक्सरसाइज़ जोड़िए, रोज़ के कदम बढ़ाइए, नींद ठीक कीजिए, और सबसे आखिर में ज़रूरत पड़े तो कैलोरी थोड़ी घटाइए. इसी क्रम में.
ज़रूरी बात: यह लेख स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य जानकारी है. अगर आपको थायरॉइड, डायबिटीज़, PCOS, दिल या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, आप कोई नियमित दवा लेते हैं, या आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो डाइट या एक्सरसाइज़ में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह ज़रूर लें.
पहले यह तय कीजिए कि यह प्लेटो है भी या नहीं
बहुत सारे प्लेटो असली होते ही नहीं. इसलिए कुछ भी बदलने से पहले एक मिनट रुककर यह जांच लेना ज़रूरी है.
शरीर का वजन एक ही दिन में एक से दो किलो तक ऊपर नीचे हो सकता है और इसका चर्बी से कोई लेना देना नहीं होता. ज़्यादा नमक वाला खाना शरीर में पानी रोक लेता है, अधूरी नींद और तनाव भी यही करते हैं, नई एक्सरसाइज़ शुरू करने पर मांसपेशियों में कुछ दिनों तक पानी जमा रहता है, और महिलाओं में पीरियड से पहले के दिनों में यह जमाव अक्सर पूरे हफ्ते की असली कमी को ढक देता है.
इसलिए नियम यह है. हफ्ते में एक बार तौलिए, हमेशा एक ही दिन, सुबह उठकर, बाथरूम जाने के बाद और कुछ खाने पीने से पहले. फिर तीन हफ्ते के औसत की तुलना कीजिए, एक दिन के नंबर की नहीं. अगर तीन से चार हफ्ते तक औसत बिल्कुल नहीं बदला और आप अपनी योजना ईमानदारी से निभा रहे थे, तब जाकर इसे प्लेटो कहिए.
और एक सवाल खुद से ज़रूर पूछिए. क्या कमर की इंच भी वहीं है? अगर तराजू रुका है पर कमर एक इंच कम हुई है, तो यह प्लेटो नहीं, शरीर की बनावट का बदलना है और यह अच्छी खबर है.
प्लेटो आता क्यों है
शरीर छोटा हो गया है. यह सबसे बड़ी और सबसे कम समझी जाने वाली वजह है. अस्सी किलो के व्यक्ति को चलने, सीढ़ी चढ़ने और बस ज़िंदा रहने में जितनी ऊर्जा लगती है, बहत्तर किलो के उसी व्यक्ति को उससे कम लगती है. आठ किलो कम होने पर रोज़ की ज़रूरत आमतौर पर डेढ़ सौ से तीन सौ कैलोरी तक घट जाती है. यानी जो थाली शुरू में पांच सौ की कमी बना रही थी, वही अब सिर्फ दो सौ की बना रही है.
हिस्से चुपचाप बढ़ गए हैं. शुरुआत में लोग नापकर खाते हैं, बाद में अंदाज़े से. तेल का चम्मच थोड़ा भरा हुआ हो जाता है, रोटी थोड़ी बड़ी बन जाती है, चाय में चीनी लौट आती है. अकेले इनमें से कोई बड़ी बात नहीं, पर मिलकर ये रोज़ की दो सौ से तीन सौ कैलोरी बन जाते हैं और यही पूरी कमी खा जाते हैं.
दिन भर की हलचल घट गई है. जब कैलोरी लंबे समय तक कम रहती है तो शरीर चुपचाप ऊर्जा बचाना शुरू करता है. आप कम टहलते हैं, कम खड़े रहते हैं, और यह आपको पता भी नहीं चलता. साथ ही जो वॉक तीन महीने पहले भारी लगती थी वह अब आसान है, इसलिए उससे कम कैलोरी खर्च होती है.
मांसपेशियां घट गई हैं. अगर कमी बहुत तेज़ रही और प्रोटीन कम रहा, तो घटे हुए वजन का एक हिस्सा मांसपेशी भी था. मांसपेशी आराम की हालत में भी ऊर्जा खर्च करती है, इसलिए उसका घटना रोज़ के खर्च को और नीचे ले आता है. यह पूरा गणित मेटाबॉलिज़्म कैसे बढ़ाएं वाली गाइड में विस्तार से खुलता है.
नींद और तनाव. दोनों भूख के संकेतों को तेज़ करते हैं और पानी के जमाव को भी बढ़ाते हैं, जिससे असली कमी हफ्तों तक तराजू पर दिखती ही नहीं.