विटामिन ए की कमी के लक्षण और आंखों की सेहत के लिए आसान घरेलू उपाय
छोटा जवाब
अगर शाम ढलते ही या अंधेरे कमरे में जाते समय कुछ पल के लिए कुछ दिखना बंद सा हो जाता है, आंखें दिन भर सूखी और खुरदुरी लगती हैं, और बार बार पलकें झपकाने का मन करता है, तो विटामिन ए की कमी उन वजहों में से है जिन्हें जांचना आसान है, लेकिन जिसे लोग स्क्रीन की थकान समझकर सबसे ज़्यादा टाल देते हैं.
सबसे बड़ा उपाय थाली से शुरू होता है, महंगे सप्लीमेंट से नहीं. गाजर, पालक, मेथी, पपीता, आम, अंडे और दूध को रोज़ की थाली में जगह दीजिए, साथ में थोड़ी चिकनाई भी रखिए क्योंकि यह विटामिन बिना चिकनाई के ठीक से सोखा नहीं जाता. अगर शाम की नज़र में साफ दिक्कत महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से जांच की बात कीजिए, क्योंकि सिर्फ अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना यहां भी सही रास्ता नहीं है.
विटामिन ए आंखों के लिए क्यों ज़रूरी है
ज़्यादातर लोगों ने विटामिन ए के बारे में सिर्फ इतना सुना है कि यह आंखों के लिए अच्छा होता है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज़्यादा दिलचस्प है.
आंख के अंदर एक खास हिस्सा होता है जो कम रोशनी में देखने का काम करता है, और यह हिस्सा सीधे विटामिन ए पर निर्भर करता है. जब रोशनी कम होती है, आंख को अंधेरे के हिसाब से खुद को ढालने के लिए इस विटामिन की ज़रूरत पड़ती है. यही वजह है कि कमी का सबसे पहला और सबसे साफ संकेत शाम या रात की रोशनी में देखने की दिक्कत के रूप में सामने आता है.
इसके अलावा विटामिन ए आंख की ऊपरी सतह को नम और सेहतमंद बनाए रखने में भी भूमिका निभाता है. कमी होने पर यह सतह सूखने लगती है, जिससे जलन, किरकिराहट और बार बार इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है. यह विटामिन त्वचा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर की बढ़त से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी काम आता है, इसलिए इसका असर सिर्फ आंखों तक सीमित नहीं रहता.
कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं
विटामिन ए की कमी की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इसके लक्षण किसी एक साफ बीमारी जैसे नहीं लगते. वे धीरे धीरे आते हैं और रोज़मर्रा की छोटी शिकायतों में घुल जाते हैं.
शाम या कम रोशनी में देखने में दिक्कत. दिन में नज़र सामान्य रहती है, लेकिन शाम ढलते ही या अंधेरे कमरे में जाते समय आंखें रोशनी के हिसाब से खुद को ढाल नहीं पातीं.
आंखों का लगातार सूखापन. आंखें खुरदुरी, थकी और रेतीली सी महसूस होती हैं, भले ही नींद पूरी हो.
बार बार पलकें झपकाने की ज़रूरत. आंखों को नम रखने के लिए बार बार झपकाना, जिसे ज़्यादातर लोग आदत समझ लेते हैं.
आंख के सफेद हिस्से पर हल्के धब्बे. कुछ मामलों में आंख की सतह पर हल्के झागदार से धब्बे दिख सकते हैं, जिन्हें आमतौर पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.
त्वचा का रूखापन और बार बार इंफेक्शन. त्वचा खुरदुरी लग सकती है और गले या आंख में इंफेक्शन बार बार लौट सकता है, क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है.
बहुत गंभीर मामलों में. आंख की सतह पर सूखापन इतना बढ़ सकता है कि नज़र पर असर पड़ने लगे. ऐसी स्थिति में देर न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें.
ध्यान दीजिए कि यह सूची जांच की जगह नहीं ले सकती. सूखी आंख और थकान के पीछे स्क्रीन का ज़्यादा इस्तेमाल, एलर्जी या नींद की कमी भी हो सकती है.
स्क्रीन की थकान और विटामिन ए की कमी में फर्क
यह वह जगह है जहां सबसे ज़्यादा गफलत होती है, इसलिए इसे अलग से समझना ज़रूरी है.
स्क्रीन पर घंटों देखने से आंखें भारी लगती हैं, जलन होती है, और सिर में हल्का दर्द भी हो सकता है. लेकिन यह दिक्कत रात को अच्छी नींद और अगले दिन स्क्रीन से ब्रेक लेने पर काफी हद तक ठीक हो जाती है, क्योंकि यहां मुख्य वजह आंखों की मांसपेशियों की थकान और कम पलकें झपकना है.
विटामिन ए की कमी में कहानी अलग है. यहां दिक्कत आराम करने से नहीं सुधरती, क्योंकि यह किसी थकान की नहीं बल्कि आंख के अंदर की उस रासायनिक प्रक्रिया की समस्या है जो कम रोशनी में देखने में मदद करती है. अगर स्क्रीन कम करने, आंखों को आराम देने और अच्छी नींद लेने के बावजूद शाम की नज़र में कोई फर्क नहीं आता, तो यह सोचने का समय है कि वजह पोषण से जुड़ी हो सकती है, स्क्रीन से नहीं.
दोनों एक साथ भी हो सकते हैं, और आजकल शहरों में यह मेल आम होता जा रहा है, क्योंकि लंबे स्क्रीन घंटे और असंतुलित थाली अक्सर साथ साथ चलते हैं.
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भारत में यह कमी इतनी आम क्यों है
असंतुलित थाली. बहुत से घरों में रोज़ की थाली में हरी पत्तेदार सब्ज़ी और रंगीन फल कम ही जगह पाते हैं, जबकि यही सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं.
चिकनाई की कमी वाला खाना. विटामिन ए को सोखने के लिए थोड़ी चिकनाई ज़रूरी होती है. बहुत कम तेल वाला या बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना यह प्रक्रिया कमज़ोर कर देता है.
पेट और आंत से जुड़ी स्थितियां. पाचन या आंत से जुड़ी दिक्कत जिसमें चिकनाई ठीक से सोखी नहीं जाती, वहां विटामिन ए की कमी का खतरा भी बढ़ जाता है.
बच्चों की थाली में अनदेखी. छोटे बच्चों को हरी सब्ज़ी और फल खिलाना मुश्किल माना जाता है, इसलिए यह कमी बच्चों में खास तौर पर आम रहती है.
लंबी बीमारी या कुपोषण की स्थिति. शरीर जब लगातार किसी बीमारी से जूझ रहा हो, तब पोषक तत्वों का भंडार तेज़ी से खर्च होता है, और विटामिन ए भी इसी में शामिल है.
किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है
छोटे बच्चे जिनकी थाली में हरी सब्ज़ी और फल कम शामिल हैं, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, पेट या आंत से जुड़ी किसी ऐसी स्थिति वाले लोग जिसमें चिकनाई सोखने में दिक्कत होती है, बहुत कम चिकनाई वाला खाना खाने वाले लोग, और वे जो बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड व पैकेट का खाना खाते हैं.
अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से बात कर लेना सबसे सीधा रास्ता है. थकान और त्वचा के रूखेपन जैसे बाकी लक्षणों पर भी ध्यान देना उपयोगी रहता है, क्योंकि ये कई बार अकेले नहीं आते. थकान और सूखी त्वचा विटामिन डी की कमी में भी दिखते हैं, और यह रिश्ता समझने के लिए विटामिन डी की कमी के लक्षण पढ़ना उपयोगी रहेगा, खास तौर पर अगर आंखों की शिकायत के साथ साथ शरीर में लगातार थकान भी बनी रहती हो.