वजन घटाने में कितना समय लगता है: हफ्ते में कितना कम होना सही है
छोटा जवाब
हफ्ते में आधा से एक किलो. यही वह रफ्तार है जिसे दुनिया भर के जानकार सुरक्षित और टिकाऊ मानते हैं. इस हिसाब से 5 किलो घटाने में करीब 2 से 3 महीने और 10 किलो घटाने में 4 से 6 महीने लगते हैं.
पहले एक दो हफ्ते में इससे ज़्यादा गिरता है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा पानी होता है, चर्बी नहीं. और जो भी तरीका "एक महीने में 10 किलो" जैसा वादा करता है, वह या तो पानी और मांसपेशी घटा रहा है या कुछ हफ्तों बाद वजन वापस लौटा देगा.
इस लेख में हम यही तीन चीज़ें साफ करेंगे: सही रफ्तार क्या है और क्यों, 5, 10 और 20 किलो की असली टाइमलाइन क्या दिखती है, और कौन सी स्थिति में वजन का गिरना चिंता की बात है.
हफ्ते में आधा से एक किलो ही क्यों
यह नंबर हवा से नहीं आया, इसके पीछे सीधा गणित है.
एक किलो चर्बी में लगभग 7700 कैलोरी होती है. यानी एक हफ्ते में एक किलो चर्बी घटाने के लिए आपको रोज़ करीब 1000 कैलोरी कम खानी या ज़्यादा खर्च करनी होगी, और आधा किलो के लिए करीब 500. रोज़ 500 से 1000 कैलोरी की कमी वह दायरा है जिसे ज़्यादातर लोग भूखे रहे बिना, प्रोटीन और ज़रूरी पोषण बचाए रखते हुए निभा सकते हैं. यह पूरा हिसाब कैसे काम करता है, यह अलग से समझना हो तो कैलोरी डेफिसिट क्या होता है पढ़िए.
इससे तेज़ चलने की कीमत शरीर वसूलता है. बहुत बड़ी कटौती में शरीर चर्बी के साथ मांसपेशी भी जलाने लगता है, जिससे चयापचय और धीमा हो जाता है. भूख के हारमोन बढ़ जाते हैं, नींद और मूड बिगड़ते हैं, और डाइट छूटने के बाद वजन पहले से ज़्यादा तेज़ी से लौटता है. यही वह चक्र है जिसमें लोग हर साल वही 8 किलो घटाते और वापस चढ़ाते रहते हैं.
एक और आसान पैमाना याद रखिए: हफ्ते में अपने कुल वजन का आधा से एक प्रतिशत. 60 किलो वाले व्यक्ति के लिए यह 300 से 600 ग्राम है, 100 किलो वाले के लिए आधा से एक किलो. जिनका वजन बहुत ज़्यादा है, उनके शुरुआती हफ्ते स्वाभाविक रूप से तेज़ होते हैं और यह ठीक है.
5 किलो, 10 किलो, 20 किलो: असली टाइमलाइन
अब इसी रफ्तार को असली लक्ष्यों पर रखते हैं.
5 किलो: करीब 8 से 12 हफ्ते. यह सबसे आम लक्ष्य है और सबसे ज़्यादा बार अधूरा भी इसी लिए रहता है कि लोग इसे 3 हफ्ते का काम मान लेते हैं. ढाई तीन महीने का इरादा लेकर चलिए.
10 किलो: करीब 4 से 6 महीने. कागज़ पर 10 से 20 हफ्ते बनते हैं, लेकिन असली ज़िंदगी में त्योहार आते हैं, शादियां आती हैं, और बीच में एक दो बार वजन रुकता भी है. इसलिए 6 महीने की योजना बनाना हार मानना नहीं, समझदारी है.
20 किलो या ज़्यादा: 8 महीने से एक साल या उससे भी ज़्यादा. यहां रास्ता सीधी ढलान नहीं होता, सीढ़ियों जैसा होता है. कुछ हफ्ते वजन गिरता है, फिर कुछ हफ्ते रुका रहता है, फिर से गिरता है. यह रुक रुक कर चलना ही सामान्य तरीका है.
एक बात और. वजन कभी सीधी लाइन में नहीं गिरता. किसी हफ्ते 900 ग्राम, किसी हफ्ते कुछ नहीं, किसी हफ्ते 200 ग्राम ऊपर. फैसला महीने के औसत से कीजिए, किसी एक हफ्ते के नंबर से नहीं. और रफ्तार से ज़्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि आपकी थाली में क्या है, उसके लिए वजन घटाने का डाइट चार्ट एक अच्छी शुरुआत है.
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पहले हफ्ते में तेज़ी से क्यों गिरता है, और फिर धीमा क्यों हो जाता है
लगभग हर व्यक्ति के साथ यही होता है: पहले 7 से 10 दिन में 2 से 3 किलो कम, और फिर अचानक रफ्तार आधी.
इसकी वजह पानी है. शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लाइकोजन के रूप में जमा रखता है, और ग्लाइकोजन का हर ग्राम अपने साथ करीब 3 ग्राम पानी बांधता है. जैसे ही आप खाना घटाते हैं, खास तौर पर चावल, रोटी, चीनी, तो यह भंडार खर्च होता है और उसका पानी भी निकल जाता है. तराजू तेज़ी से गिरता है, लेकिन चर्बी अभी बमुश्किल छुई गई है.
दूसरे हफ्ते से जो धीमी रफ्तार दिखती है, वही असली चर्बी घटने की रफ्तार है. ज़्यादातर लोग इसी मोड़ पर हिम्मत हार देते हैं, क्योंकि उन्होंने पहले हफ्ते को पैमाना मान लिया था. सच इसका उल्टा है: धीमा होना इस बात का संकेत है कि अब काम सही जगह पर हो रहा है.
रफ्तार किन बातों पर निर्भर करती है
एक ही डाइट पर दो लोगों का वजन अलग रफ्तार से गिरता है, और इसकी ठोस वजहें हैं.
शुरुआती वजन. जितना ज़्यादा वजन, शुरुआत उतनी तेज़. 100 किलो वाला व्यक्ति शुरू में हफ्ते का एक किलो आराम से घटा सकता है, 62 किलो वाले के लिए 300 ग्राम भी अच्छी रफ्तार है.
उम्र और मांसपेशी. उम्र के साथ मांसपेशी घटती है और चयापचय धीमा होता है. इसीलिए 45 की उम्र में वही डाइट 25 की उम्र के मुकाबले धीमा नतीजा देती है. यह रुकने की वजह नहीं, धैर्य बढ़ाने की वजह है.
नींद और तनाव. कम नींद भूख के हारमोन बढ़ाती है और मीठे की तलब तेज़ करती है. हफ्ते में दो तीन रातें खराब नींद पूरी डाइट का हिसाब बिगाड़ सकती हैं.
थायराइड, PCOS और दूसरी स्थितियां. इनके साथ वजन घटता ज़रूर है, लेकिन धीमा. अगर ऐसी कोई स्थिति है तो अपनी तुलना दूसरों से करना छोड़िए और अपने पिछले महीने से कीजिए.
लगातार बने रहना. सबसे बड़ा फर्क यही डालता है. हफ्ते में 5 दिन ठीक खाना और 2 दिन पूरी छूट, यह गणित अक्सर पूरे हफ्ते की कैलोरी की कमी को मिटा देता है. सख्ती नहीं, नियमितता चाहिए.