वजन बढ़ाने का डाइट चार्ट: दुबले-पतले लोगों के लिए हेल्दी तरीके से वजन बढ़ाने की पूरी योजना
छोटा जवाब
अगर आप महीनों से दुबलेपन से परेशान हैं और जितना भी खा लें वज़न नहीं बढ़ता, तो असली दिक्कत ज़्यादातर बार भूख नहीं बल्कि तरीका होता है. सही रास्ता है रोज़ की कैलोरी में थोड़ा इज़ाफा, प्रोटीन को हर मील का हिस्सा बनाना, दिन में तीन बड़े खाने की जगह पांच छोटे मौकों पर खाना, और साथ में हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज़, ताकि वज़न सही जगह बढ़े.
एक हफ्ते का सीधा चार्ट यह है: सुबह भीगे बादाम और दूध, नाश्ते में पनीर या अंडे के साथ पराठा या टोस्ट, दोपहर में दाल चावल सब्ज़ी रोटी का पूरा थाल, शाम को केला और मूंगफली, और रात में हल्का लेकिन प्रोटीन वाला खाना. दो हफ्ते यही चार्ट लगातार निभाइए, फिर तराज़ू पर नंबर देखकर तय कीजिए कि मात्रा बढ़ानी है या यही ठीक है.
दुबलेपन की असली वजह समझना ज़रूरी है
वज़न बढ़ाने का चार्ट बनाने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि दुबलापन आया कहां से. ज़्यादातर मामलों में वजह कोई एक नहीं, बल्कि तीन चार आदतों का मेल होता है.
कम खाना, बिना यह जाने कि कम खा रहे हैं. बहुत से पतले लोग खुद को अच्छा खाने वाला मानते हैं, लेकिन असल में उनका हर मील छोटा होता है, बीच में कुछ नहीं खाया जाता, और दिन के अंत में कुल कैलोरी शरीर की ज़रूरत से कम रह जाती है.
तेज़ चयापचय. कुछ लोगों का शरीर स्वाभाविक रूप से खाना जल्दी ऊर्जा में बदल देता है. ऐसे लोगों को सामान्य से ज़्यादा बार और ज़्यादा मात्रा में खाना पड़ता है, वरना शरीर हमेशा कैलोरी की कमी में रहता है.
तनाव और अनियमित दिनचर्या. लगातार तनाव भूख कम कर देता है, और अनियमित काम के घंटे मील छूटने की वजह बनते हैं. समय पर न खाना और भूख का न लगना धीरे धीरे आदत बन जाती है. तनाव और भूख के इस रिश्ते को समझने के लिए काम का तनाव कैसे कम करें पढ़ना उपयोगी रहेगा.
नींद की कमी. नींद पूरी न होने पर शरीर में भूख बढ़ाने और घटाने वाले हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं, और कई लोगों में इसका असर भूख कम होने के तौर पर दिखता है.
पेट से जुड़ी दिक्कतें. लगातार गैस, एसिडिटी या पाचन की गड़बड़ी की वजह से भी शरीर खाए हुए खाने से पूरा फायदा नहीं ले पाता.
इनमें से कौन सी वजह आप पर लागू होती है, यह जानना डाइट चार्ट से भी ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि सिर्फ खाना बढ़ाने से तब तक फायदा नहीं होगा जब तक असली रुकावट दूर न हो.
एक हफ्ते का वजन बढ़ाने का डाइट चार्ट
यह चार्ट शाकाहारी और आम भारतीय रसोई को ध्यान में रखकर बनाया गया है. अंडा खाने वालों के लिए विकल्प साथ में दिए गए हैं.
सुबह उठते ही: पांच से सात भीगे बादाम, एक भीगी अंजीर या दो खजूर, एक गिलास गुनगुना दूध.
नाश्ता: दो अंडे या 100 ग्राम पनीर की भुर्जी, दो पराठे घी लगाकर या एक कटोरी पोहा उपमा जिसमें मूंगफली डली हो, साथ में एक गिलास छाछ या लस्सी.
दोपहर के पहले, यानी 11 बजे के आसपास: एक केला, मुट्ठी भर मूंगफली या भुने चने.
दोपहर का खाना: दो कटोरी दाल, एक कटोरी सब्ज़ी घी में बनी हुई, तीन रोटी, एक कटोरी चावल, एक कटोरी दही, साथ में सलाद.
शाम का नाश्ता: एक कप दूध के साथ मूंगफली या भुने चने, या एक उबला अंडा, या फल के साथ मुट्ठी भर मेवे.
रात का खाना: दाल या पनीर की सब्ज़ी, दो रोटी, एक कटोरी चावल, हल्की सब्ज़ी, सोने से पहले भारी खाना डालने से बचें ताकि नींद पर असर न पड़े.
सोने से पहले: एक गिलास गुनगुना दूध, चाहें तो एक चम्मच शहद या हल्दी के साथ.
यह चार्ट हर दिन बिल्कुल एक जैसा दोहराने की ज़रूरत नहीं है. दाल की जगह राजमा छोले, पनीर की जगह सोयाबीन या टोफू, और पराठे की जगह इडली सांभर जैसे बदलाव किए जा सकते हैं. असली नियम यह है कि हर मील में प्रोटीन का एक हिस्सा ज़रूर हो और दिन में पांच से छह बार खाना हो, तीन बड़े मील की जगह.
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प्रोटीन क्यों सबसे ज़रूरी हिस्सा है
वज़न बढ़ाने की बात आते ही ज़्यादातर लोग सीधे तेल घी और मीठे की तरफ भागते हैं, जबकि असली काम प्रोटीन करता है. कैलोरी वज़न बढ़ाती है, लेकिन प्रोटीन तय करता है कि वह वज़न मांसपेशियों में बढ़े या सिर्फ चर्बी में.
एक सामान्य पतले व्यक्ति को शरीर के हर किलो वज़न पर लगभग 1.2 से 1.6 ग्राम प्रोटीन रोज़ चाहिए होता है, जो एक्सरसाइज़ करने पर और भी ज़रूरी हो जाता है. यह मात्रा सुनने में ज़्यादा लगती है, लेकिन दाल, पनीर, दही, अंडा, सोयाबीन और मूंगफली को मिलाकर पूरे दिन में पूरी की जा सकती है.
शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन के अच्छे स्रोत जानना खास तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि सिर्फ दाल पर निर्भर रहना अक्सर कमी छोड़ जाता है. इस विषय पर पूरी जानकारी के लिए प्रोटीन के शाकाहारी स्रोत पढ़ना अच्छा अगला कदम है, जिसमें अलग अलग खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीन की मात्रा भी बताई गई है.