पथरी से बचने के उपाय: पानी, खाना और रोज़ की आदतें जो किडनी स्टोन का खतरा घटाती हैं

SuperLiving Expert Team·

पथरी से बचने के उपाय: पानी, खाना और रोज़ की आदतें जो किडनी स्टोन का खतरा घटाती हैं

छोटा जवाब

गुर्दे की पथरी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय कोई खास चीज़ नहीं, बल्कि एक सीधी आदत है: दिन भर इतना पानी पीना कि पेशाब हल्के पीले रंग का रहे. ज़्यादातर पथरी तब बनती है जब पेशाब गाढ़ा होता है और उसमें घुले खनिज आपस में जुड़कर क्रिस्टल बनाने लगते हैं.

पानी के बाद तीन बातें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं. खाने में नमक कम करना, क्योंकि नमक पेशाब में कैल्शियम बढ़ाता है. दूध और दही बंद करने के बजाय खाने के साथ सामान्य मात्रा में लेते रहना. और मीठे पेय, बहुत ज़्यादा मांसाहार और पैकेट वाले नमकीन खाने को सीमित रखना. जिन लोगों को एक बार पथरी हो चुकी है, उनके लिए ये आदतें और भी ज़रूरी हैं, क्योंकि दोबारा होने की संभावना काफी रहती है.

पथरी बनती कैसे है

हमारे गुर्दे खून को छानकर बेकार चीज़ों को पेशाब के रास्ते बाहर निकालते हैं. इन बेकार चीज़ों में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और फॉस्फेट जैसे कई खनिज होते हैं. जब तक पेशाब में पानी पर्याप्त है, ये सब घुले रहते हैं और आराम से बाहर निकल जाते हैं.

दिक्कत तब शुरू होती है जब पानी कम और खनिज ज़्यादा हो जाते हैं. इसे ऐसे समझिए जैसे एक गिलास पानी में चीनी घोलते जाएं. एक समय के बाद चीनी घुलना बंद कर देती है और नीचे जमने लगती है. पेशाब में भी यही होता है. पहले छोटे छोटे क्रिस्टल बनते हैं, फिर वे आपस में चिपककर धीरे धीरे बड़े होते जाते हैं, और महीनों या सालों में एक पथरी का रूप ले लेते हैं.

पथरी कई तरह की होती है. सबसे आम कैल्शियम ऑक्सलेट की पथरी है. उसके बाद यूरिक एसिड की पथरी आती है, जो खास तौर पर उन लोगों में दिखती है जिनके खून में यूरिक एसिड ज़्यादा रहता है. यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द वाले हिस्से को अलग से समझने के लिए यूरिक एसिड को प्राकृतिक तरीके से कैसे कम करें पढ़ना उपयोगी रहेगा. कुछ पथरी बार बार होने वाले पेशाब के संक्रमण से भी जुड़ी होती है.

किन लोगों में खतरा ज़्यादा है

भारत में, खास तौर पर उत्तर और पश्चिम के गर्म इलाकों में, पथरी काफी आम है. इसकी सबसे बड़ी वजह गर्मी और पसीना है, जिससे शरीर का पानी बिना पता चले निकल जाता है.

कम पानी पीने वाले लोग. दफ्तर में घंटों बैठे रहने वाले, बार बार शौचालय न जाने के लिए जानबूझकर कम पानी पीने वाले, और वे लोग जिन्हें प्यास कम लगती है.

धूप और गर्मी में काम करने वाले. खेत, निर्माण, ड्राइविंग या रसोई जैसे काम जहां पसीना ज़्यादा आता है.

जिन्हें पहले पथरी हो चुकी है. यह सबसे बड़ा जोखिम है. एक बार पथरी होने का मतलब है कि शरीर में वे हालात मौजूद हैं जो उसे बनाते हैं.

परिवार में पथरी का इतिहास. अगर माता पिता या भाई बहन को पथरी रही है, तो आपका खतरा भी ज़्यादा है.

ज़्यादा वजन, डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग. ये तीनों स्थितियां पेशाब की बनावट को इस तरह बदलती हैं कि पथरी बनना आसान हो जाता है.

सबसे बड़ा उपाय: पानी, और उसे सही तरीके से पीना

यह बात सुनने में बहुत आसान लगती है, इसीलिए सबसे ज़्यादा टाली जाती है. पानी पथरी से बचाव का अकेला सबसे असरदार तरीका है, क्योंकि यह हर तरह की पथरी पर काम करता है.

कितना पानी. ज़्यादातर बड़े लोगों के लिए दिन भर में ढाई से तीन लीटर तरल एक अच्छा शुरुआती लक्ष्य है. गर्मी के दिनों में या पसीने वाले काम में इससे ज़्यादा चाहिए.

सबसे भरोसेमंद पैमाना: पेशाब का रंग. गिलास गिनने से आसान तरीका यह है कि दिन में पेशाब का रंग देखिए. हल्का पीला या लगभग साफ मतलब ठीक. गहरा पीला मतलब पानी कम है.

दिन भर में बांटकर. सुबह उठते ही एक गिलास, हर खाने के साथ एक गिलास, और बीच में हर एक दो घंटे में थोड़ा थोड़ा. एक बार में दो लीटर पीने से कोई फायदा नहीं, उसका बड़ा हिस्सा तुरंत निकल जाता है.

रात का गिलास. सोने से पहले एक गिलास पानी. रात में आठ घंटे कुछ न पीने से सुबह तक पेशाब सबसे गाढ़ा होता है, और यही वह समय है जब क्रिस्टल बनने का खतरा सबसे ज़्यादा रहता है.

पानी की आदत को लेकर और भी फायदे समझने हों तो पानी पीने के फायदे में पूरी बात है. यहां बस इतना याद रखिए कि पथरी के मामले में पानी "अच्छी आदत" नहीं, बल्कि असली बचाव है.

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खाने में क्या बदलें

यहां लोग सबसे ज़्यादा उलझते हैं, क्योंकि इंटरनेट पर "पथरी में क्या न खाएं" की सूचियां इतनी लंबी हैं कि लगता है कुछ भी खाने लायक नहीं बचा. असल तस्वीर इससे काफी आसान है.

नमक कम कीजिए, यह सबसे ज़रूरी बदलाव है. खाने में ज़्यादा नमक का मतलब है पेशाब में ज़्यादा कैल्शियम, और ज़्यादा कैल्शियम का मतलब है पथरी का ज़्यादा खतरा. भारतीय खाने में नमक सिर्फ दाल सब्ज़ी में नहीं, बल्कि अचार, पापड़, नमकीन, बिस्कुट, ब्रेड, पैकेट वाले स्नैक्स और बाहर के खाने में छिपा होता है. ऊपर से नमक छिड़कने की आदत छोड़ना और अचार पापड़ को रोज़ की जगह कभी कभार की चीज़ बनाना बड़ा फर्क डालता है.

दूध और दही बंद मत कीजिए. यह सुनकर कई लोग हैरान होते हैं, लेकिन खाने के साथ लिया गया कैल्शियम आंत में ही ऑक्सलेट से जुड़ जाता है और उसे खून में पहुंचने से रोकता है. जो लोग पथरी के डर से दूध, दही, पनीर छोड़ देते हैं, उनमें कई बार खतरा उल्टा बढ़ जाता है. सामान्य मात्रा, जैसे दिन में एक कटोरी दही और एक गिलास दूध, खाने के साथ लेना ठीक माना जाता है.

ज़्यादा ऑक्सलेट वाली चीज़ें संतुलन में. पालक, चुकंदर, बहुत ज़्यादा मेवे, खास तौर पर बादाम, और बहुत गाढ़ी चाय में ऑक्सलेट ज़्यादा होता है. इन्हें पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं, लेकिन रोज़ बड़ी मात्रा में लेना ठीक नहीं, खास तौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें कैल्शियम ऑक्सलेट की पथरी हो चुकी है. पालक बनाएं तो साथ में दही या पनीर रखें.

प्रोटीन, खास तौर पर मांसाहार, सीमित रखें. बहुत ज़्यादा मटन, चिकन, मछली या अंडा पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ाते हैं और साइट्रेट घटाते हैं, जो पथरी को रोकने में मदद करता है. मांसाहार छोड़ने की ज़रूरत नहीं, बस रोज़ की हर थाली में बड़ी मात्रा से बचिए और दाल, चना, राजमा जैसे पौधे वाले प्रोटीन को भी जगह दीजिए.

फल और सब्ज़ियां बढ़ाइए. संतरा, मौसंबी, नींबू, खीरा, लौकी, तरबूज़ और ज़्यादातर हरी सब्ज़ियां पानी और साइट्रेट दोनों देती हैं. फल और सब्ज़ियों से भरी थाली पेशाब को कम अम्लीय बनाती है, जो कई तरह की पथरी के खिलाफ मदद करता है.

मीठे पेय और कोल्ड ड्रिंक कम करें. ज़्यादा चीनी, खास तौर पर पैकेट वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक में मिली फ्रुक्टोज़, पथरी के खतरे से जुड़ी है. प्यास बुझाने का पहला विकल्प सादा पानी होना चाहिए, फिर नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ.

अगर आप वजन भी घटाना चाहते हैं, तो अच्छी खबर यह है कि पथरी से बचाने वाली थाली और वजन घटाने वाली थाली काफी हद तक एक जैसी है: कम नमक, कम चीनी, ज़्यादा सब्ज़ी, संतुलित प्रोटीन. पूरा ढांचा समझने के लिए वजन घटाने का डाइट चार्ट एक अच्छी शुरुआत है.

नींबू पानी, नारियल पानी और बाकी घरेलू चीज़ें

नींबू पानी. नींबू में साइट्रेट होता है, जो पेशाब में कैल्शियम को क्रिस्टल बनाने से रोकने में मदद करता है. रोज़ एक बोतल पानी में एक नींबू निचोड़ना सस्ता और उपयोगी सहारा है. बस चीनी मत मिलाइए.

नारियल पानी और छाछ. दोनों अच्छे तरल हैं, खास तौर पर गर्मी में. छाछ में नमक कम रखिए.

जौ का पानी और कुल्थी की दाल. ये पारंपरिक घरेलू चीज़ें हैं जो पानी की मात्रा बढ़ाने का एक अच्छा तरीका हैं. इनके बारे में जो बड़े दावे सुने जाते हैं, जैसे "पथरी गला देती हैं", उनके पीछे मज़बूत सबूत नहीं हैं. इन्हें पानी की आदत का हिस्सा मानिए, इलाज नहीं.

बीयर से पथरी निकलती है, यह मिथक है. शराब शरीर से पानी निकालती है, और कई तरह की पथरी में यूरिक एसिड भी बढ़ाती है. इसे उपाय मानना नुकसानदेह है.

रोज़ की आदतें जो फर्क डालती हैं

पेशाब रोककर मत रखिए. लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत संक्रमण का खतरा बढ़ाती है, और संक्रमण कुछ तरह की पथरी से जुड़ा है.

वजन पर ध्यान दीजिए, लेकिन धीरे धीरे. ज़्यादा वजन पथरी का जोखिम बढ़ाता है, लेकिन बहुत तेज़ी से वजन घटाने वाली कड़ी डाइट भी, खास तौर पर बहुत ज़्यादा प्रोटीन वाली, खतरा बढ़ा सकती है. महीने में दो से चार किलो का धीमा बदलाव ज़्यादा सुरक्षित है.

सप्लीमेंट अपने मन से मत लीजिए. कैल्शियम, विटामिन सी या विटामिन डी की ज़्यादा मात्रा वाली गोलियां कुछ लोगों में पथरी का खतरा बढ़ा सकती हैं. कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात कीजिए, खास तौर पर अगर पहले पथरी हो चुकी है.

जो काम नहीं करता

पहला, सिर्फ दर्द के दिनों में पानी बढ़ाना. बचाव रोज़ का काम है. पथरी महीनों में बनती है, इसलिए दो दिन ज़्यादा पानी पीकर बाकी दिन भूल जाने से कुछ नहीं बदलता.

दूसरा, इंटरनेट की हर सूची से खाना हटाते जाना. टमाटर, भिंडी, चावल, सब कुछ बंद करने से थाली खराब होती है, पथरी का खतरा नहीं घटता. असली बदलाव गिने चुने हैं: पानी, नमक, मीठे पेय और ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन.

तीसरा, "पथरी गलाने" वाले नुस्खों पर भरोसा करके जांच टालना. कोई भी घरेलू चीज़ बनी हुई बड़ी पथरी को गला देगी, इसका भरोसेमंद सबूत नहीं है. दर्द या लक्षण हैं तो जांच ज़रूरी है.

चौथा, पथरी निकलने के बाद पुरानी आदतों पर लौट जाना. यही सबसे आम गलती है, और इसी वजह से बहुत से लोगों को दोबारा पथरी होती है.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता, सिर्फ पानी. एक लीटर की बोतल लीजिए और दिन में कितनी बार भरी, यह गिनिए. लक्ष्य तीन बार. सुबह उठते ही एक गिलास और सोने से पहले एक गिलास जोड़िए. दिन में दो बार पेशाब का रंग देखिए. इस हफ्ते खाने में कुछ मत बदलिए.

दूसरा हफ्ता, नमक और मीठे पेय. ऊपर से नमक डालना बंद कीजिए, अचार और पापड़ को हफ्ते में दो बार तक सीमित कीजिए, और कोल्ड ड्रिंक या पैकेट जूस की जगह नींबू पानी या छाछ लीजिए. दही को रोज़ के खाने में बनाए रखिए.

नापने का तरीका: रोज़ एक लाइन लिखिए, कितनी बोतल पानी पिया और पेशाब का रंग कैसा रहा. दो हफ्ते बाद अगर ज़्यादातर दिन रंग हल्का रहा, तो आदत पकड़ में आ रही है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर कमर के एक तरफ या पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द है जो लहरों में आता है और किसी भी स्थिति में कम नहीं होता, अगर पेशाब में खून दिखे, पेशाब करते समय जलन के साथ बुखार हो, बार बार उल्टी हो, या पेशाब आना बहुत कम या बंद हो जाए, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है. बुखार के साथ पथरी का दर्द तुरंत इलाज मांगता है.

जिन लोगों को एक से ज़्यादा बार पथरी हो चुकी है, उनके लिए डॉक्टर से एक बार यह बात करना उपयोगी है कि पथरी किस तरह की थी और क्या खून या पेशाब की कोई जांच बचाव का तरीका तय करने में मदद करेगी. गर्भवती महिलाएं, बच्चे, और गुर्दे की किसी पुरानी समस्या वाले लोग खाने या पानी में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें.

मिलाकर बात यह है

पथरी से बचाव में कोई जादुई चीज़ नहीं है, और यही इसकी सबसे अच्छी बात है. दिन भर इतना पानी कि पेशाब हल्का रहे, कम नमक, दूध और दही खाने के साथ, सब्ज़ी और फल ज़्यादा, मीठे पेय और ज़रूरत से ज़्यादा मांसाहार कम. यही वह छोटी सूची है जो सबसे ज़्यादा काम करती है.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, बल्कि इसे हर दिन निभाना है, खास तौर पर उन दिनों जब काम ज़्यादा हो और पानी की बोतल भूल जाए. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या के हिसाब से इसे छोटे कदमों में बांटते हैं, ताकि यह एक और लंबी सूची नहीं बल्कि रोज़ की आदत बने.

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SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. कमर या पेट में तेज़ दर्द, पेशाब में खून, बुखार के साथ दर्द, या पेशाब रुकने जैसी स्थिति में कृपया तुरंत योग्य डॉक्टर से सलाह लें. पानी की मात्रा, खाने में बड़े बदलाव या कोई भी सप्लीमेंट गुर्दे की किसी पुरानी समस्या, गर्भावस्था या दिल से जुड़ी स्थिति में डॉक्टर की सलाह से ही तय करें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पथरी से बचने के लिए रोज़ कितना पानी पीना चाहिए?+

ज़्यादातर बड़े लोगों के लिए मोटा लक्ष्य यह है कि दिन भर में इतना पानी पिया जाए कि पेशाब का रंग हल्का पीला या लगभग साफ रहे और दिन में ढाई लीटर के आसपास पेशाब बने. आम तौर पर इसके लिए दिन भर में ढाई से तीन लीटर तरल चाहिए होता है, और गर्मी, धूप में काम या ज़्यादा पसीने वाले दिनों में इससे भी ज़्यादा. एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय दिन भर थोड़ा थोड़ा पीना बेहतर है, और रात को सोने से पहले एक गिलास भी मदद करता है क्योंकि रात में पेशाब सबसे गाढ़ा होता है. अगर आपको दिल, गुर्दे या किसी और वजह से पानी सीमित रखने की सलाह मिली है, तो मात्रा अपने डॉक्टर से तय कराइए.

क्या पथरी वाले लोगों को दूध और दही बंद कर देना चाहिए?+

आम तौर पर नहीं, और यह सबसे आम गलतफहमी है. ज़्यादातर पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट की होती है, इसलिए लोग मान लेते हैं कि कैल्शियम ही दुश्मन है. असल में खाने के साथ लिया गया कैल्शियम आंतों में ऑक्सलेट से जुड़ जाता है और उसे खून में जाने से पहले ही रोक लेता है. जब लोग दूध, दही और पनीर बहुत कम कर देते हैं, तो ऑक्सलेट ज़्यादा सोखा जाता है और पथरी का खतरा कई बार बढ़ जाता है. इसलिए सामान्य मात्रा में दूध और दही खाने के साथ लेते रहना ठीक माना जाता है. हां, कैल्शियम की गोलियां अपने मन से लेना अलग बात है, वह फैसला डॉक्टर के साथ करना चाहिए.

पालक और टमाटर खाने से पथरी होती है क्या?+

टमाटर को लेकर डर ज़्यादातर बेवजह है, सामान्य मात्रा में इसका पथरी से कोई ठोस रिश्ता नहीं दिखता. पालक में ऑक्सलेट काफी ज़्यादा होता है, इसलिए जिन लोगों को पहले कैल्शियम ऑक्सलेट की पथरी हो चुकी है उन्हें रोज़ बड़ी मात्रा में पालक, चुकंदर या बहुत ज़्यादा मेवे खाने से बचने की सलाह दी जाती है. लेकिन किसी चीज़ को हमेशा के लिए बंद करने से ज़्यादा ज़रूरी है संतुलन, जैसे हफ्ते में कभी कभार पालक खाना और उसके साथ दही या पनीर रखना. जिसे कभी पथरी नहीं हुई, उसके लिए सब्ज़ियां छोड़ने से नुकसान ज़्यादा है, फायदा कम.

क्या नींबू पानी सच में पथरी से बचाता है?+

नींबू में साइट्रेट होता है, और साइट्रेट पेशाब में कैल्शियम को क्रिस्टल बनाने से कुछ हद तक रोकता है. इसलिए रोज़ के पानी में आधा या एक नींबू निचोड़ना एक सस्ता और उपयोगी सहारा माना जाता है, खास तौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले पथरी हो चुकी है. लेकिन यह पानी की कुल मात्रा का विकल्प नहीं है, असली फायदा पानी से ही आता है. ध्यान रखिए कि उसमें चीनी न मिलाएं, क्योंकि मीठे पेय पथरी का खतरा बढ़ाते हैं. जिन्हें एसिडिटी या दांतों की संवेदनशीलता है, वे नींबू पानी स्ट्रॉ से या खाने के साथ लें.

एक बार पथरी निकल गई तो क्या दोबारा हो सकती है?+

हां, और यही वजह है कि बचाव का हिस्सा इलाज से ज़्यादा लंबा चलता है. जिन लोगों को एक बार पथरी हो चुकी है, उनमें अगले कुछ सालों में दोबारा होने की संभावना काफी रहती है, अगर पानी और खाने की आदतें वैसी की वैसी रहें. सबसे उपयोगी कदम यह है कि निकली हुई पथरी की जांच कराई जाए ताकि पता चले वह किस तरह की थी, क्योंकि कैल्शियम, यूरिक एसिड और बाकी तरह की पथरी में बचाव के तरीके थोड़े अलग होते हैं. उसके बाद पानी, नमक और प्रोटीन की आदतें स्थायी रूप से बदलना ही दोबारा होने का खतरा घटाने का सबसे भरोसेमंद रास्ता है.

पथरी के दर्द में कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?+

अगर कमर के एक तरफ या पेट के निचले हिस्से में ऐसा तेज़ दर्द है जो बैठने, लेटने या करवट बदलने से भी कम नहीं होता, अगर उसके साथ बुखार या कंपकंपी है, अगर बार बार उल्टी हो रही है और पानी भी नहीं रुक रहा, अगर पेशाब में खून है, या पेशाब आना ही बंद हो गया है, तो घर पर इंतज़ार मत कीजिए. बुखार के साथ पथरी का दर्द संक्रमण का संकेत हो सकता है, जो जल्दी इलाज न मिलने पर गंभीर हो सकता है. गर्भावस्था में, एक ही गुर्दे वाले लोगों में और बुज़ुर्गों में भी ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

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