फोलेट यानी विटामिन बी9 की कमी के लक्षण और घरेलू उपाय: थाली, जांच और प्रेगनेंसी में सावधानी
छोटा जवाब
अगर पिछले कुछ हफ्तों से बिना वजह थकान महसूस हो रही है, चेहरे का रंग पहले से पीला लगने लगा है, मुंह के कोने बार बार छिल रहे हैं, और मन का उखड़ा हुआ सा रहना आम हो गया है, तो फोलेट यानी विटामिन बी9 की कमी उन वजहों में से है जिन्हें एक साधारण जांच से पकड़ा जा सकता है.
सबसे बड़ा उपाय थाली से शुरू होता है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, मूंग और मसूर जैसी दालें, राजमा-चने और संतरा-नींबू जैसे खट्टे फल रोज़ की थाली में जोड़िए, सब्ज़ियों को ज़रूरत से ज़्यादा न उबालिए, और अगर लक्षण साफ हैं या आप गर्भावस्था की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर से बात करके जांच करा लीजिए. फोलेट अकेला सप्लीमेंट बिना जांच के शुरू करना यहां खास तौर पर सही रास्ता नहीं है, क्योंकि यह विटामिन बी12 की कमी को छुपा सकता है.
फोलेट शरीर में करता क्या है
फोलेट, यानी विटामिन बी9, शरीर में नई कोशिकाएं बनाने के सबसे बुनियादी काम में शामिल है. जिस भी हिस्से में कोशिकाएं तेज़ी से बनती और बदलती हैं, जैसे खून, आंतों की परत और त्वचा, वहां फोलेट की ज़रूरत सबसे ज़्यादा रहती है.
सबसे जाना पहचाना काम लाल रक्त कोशिकाएं बनाना है. फोलेट की कमी में ये कोशिकाएं ठीक से नहीं बन पातीं, वे सामान्य से बड़ी और अधूरी बनती हैं, और शरीर के बाकी हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम कमज़ोर पड़ जाता है. यही वजह है कि थकान, सांस फूलना और पीलापन इसके सबसे आम लक्षणों में आते हैं.
दूसरा काम डीएनए और शरीर की बढ़त से जुड़ा है, और यही वजह है कि गर्भावस्था में, जब बच्चे की कोशिकाएं बहुत तेज़ रफ्तार से बन रही होती हैं, फोलेट की ज़रूरत सामान्य से कई गुना बढ़ जाती है.
कमी के लक्षण जो लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं
फोलेट की कमी की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसके लक्षण किसी एक साफ बीमारी जैसे नहीं लगते, वे धीरे धीरे आते हैं और रोज़मर्रा की छोटी शिकायतों में घुल जाते हैं.
लगातार थकान जो नींद से नहीं जाती. यह सबसे पहली और सबसे आम शिकायत है, खास तौर पर दोपहर के बाद ऊर्जा का अचानक गिर जाना.
चेहरे का रंग पीला पड़ना. आईने में या परिवार वालों के कहने पर पता चलता है कि रंग पहले से फीका लग रहा है.
मुंह के कोने छिलना और जीभ में जलन. बार बार मुंह के छाले होना, जीभ का लाल या चिकना दिखना, और खाना खाते समय हल्की जलन महसूस होना.
भूख कम लगना और वज़न में मामूली गिरावट. बिना किसी खास वजह के खाने की इच्छा घट जाना.
सांस जल्दी फूलना और दिल की धड़कन तेज़ लगना. सीढ़ियां चढ़ते या थोड़ा तेज़ चलते समय सामान्य से ज़्यादा हांफना.
मन का उखड़ा हुआ या उदास रहना. चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में दिक्कत, और छोटी बातों पर गुस्सा आना.
ध्यान दीजिए कि यह सूची जांच की जगह नहीं ले सकती. इनमें से लगभग हर लक्षण खून की कमी, थायराइड की गड़बड़ी या नींद की कमी में भी दिखता है. खून की कमी की एक और बड़ी वजह आयरन की कमी है, जिसे अलग से समझने के लिए आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया के लक्षण और डाइट पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि थकान और पीलापन दोनों में एक जैसे दिखते हैं पर वजह अलग अलग हो सकती है.
फोलेट और विटामिन बी12 की कमी में फर्क कैसे समझें
यह वह हिस्सा है जहां सबसे ज़्यादा उलझन होती है, और समझना सबसे ज़रूरी भी है.
फोलेट और विटामिन बी12 दोनों मिलकर लाल रक्त कोशिकाएं बनाने का काम करते हैं, इसलिए दोनों में से किसी की भी कमी एक जैसी स्थिति बना सकती है जिसे मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है. खून की शुरुआती जांच में दोनों लगभग एक जैसी तस्वीर दिखा सकती हैं, थकान, पीलापन और सांस फूलना दोनों में मिलता है.
फर्क एक बहुत ज़रूरी जगह पर है. विटामिन बी12 की कमी में हाथ पैरों की उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नता, चलते समय संतुलन बिगड़ना और याददाश्त कमज़ोर पड़ने जैसे नसों से जुड़े लक्षण भी जुड़ जाते हैं, जबकि फोलेट की कमी में ऐसा लगभग नहीं होता. यह फर्क इसलिए मायने रखता है क्योंकि अगर सिर्फ फोलेट का सप्लीमेंट बिना जांच के शुरू कर दिया जाए, तो वह खून की तस्वीर को ठीक दिखा सकता है जबकि नीचे बी12 की कमी से होने वाला नसों का नुकसान चुपचाप बढ़ता रहता है, और यह नुकसान कई बार पूरी तरह ठीक नहीं होता.
इसीलिए डॉक्टर लगभग हमेशा दोनों की जांच साथ कराने की सलाह देते हैं, न कि लक्षण देखकर अंदाज़े से एक तय कर लेने की. दोनों के बीच का यह फर्क समझने के लिए विटामिन बी12 की कमी के लक्षण और उपाय पूरी तरह पढ़ने लायक है, खास तौर पर अगर आप शाकाहारी हैं, क्योंकि बी12 पूरी तरह पौधों से नहीं मिलता जबकि फोलेट शाकाहारी थाली में अपेक्षाकृत आसानी से मिल जाता है.
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किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है
गर्भवती महिलाएं और वे महिलाएं जो बच्चा प्लान कर रही हैं, क्योंकि इस दौरान शरीर की ज़रूरत सामान्य से कई गुना बढ़ जाती है. जो लोग नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, क्योंकि शराब फोलेट के सोखे जाने और शरीर में उसके इस्तेमाल दोनों में रुकावट डालती है. जिन्हें आंत से जुड़ी कोई ऐसी स्थिति है जिसमें पोषक तत्व सोखने में दिक्कत होती है. जो लोग बहुत कम सब्ज़ियां और दालें खाते हैं या लंबे समय से बहुत सीमित डाइट पर हैं. और बुज़ुर्ग, जिनमें खाने की मात्रा कम होने के साथ साथ सोखने की क्षमता भी घट जाती है.
अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं और ऊपर बताए लक्षणों में से दो तीन आप पर लागू होते हैं, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से बात कर लेना सबसे सीधा रास्ता है.
थाली से फोलेट कैसे बढ़ाएं
यह सबसे सस्ता और सबसे भरोसेमंद उपाय है, और भारतीय शाकाहारी थाली में इसके लिए काफी गुंजाइश है.
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. पालक, मेथी, सरसों का साग और बथुआ फोलेट के सबसे अच्छे स्रोतों में गिने जाते हैं.
दालें और फलियां. मूंग, मसूर, चना, राजमा और सोयाबीन, ये सब थाली में फोलेट के साथ साथ प्रोटीन भी जोड़ते हैं.
खट्टे फल. संतरा, मौसमी और नींबू जैसे फलों में भी ठीक मात्रा में फोलेट मिलता है.
मूंगफली और बीज. मूंगफली, सूरजमुखी के बीज और अलसी, हल्के नाश्ते के साथ साथ फोलेट का अच्छा स्रोत भी हैं.
पकाने का तरीका मायने रखता है. फोलेट पानी में घुलने वाला विटामिन है, इसलिए सब्ज़ियों को ज़रूरत से ज़्यादा पानी में या बहुत देर तक उबालने से इसका बड़ा हिस्सा निकल जाता है. हल्का भाप में पकाना या कम पानी में जल्दी पकाना ज़्यादा फोलेट बचाता है.