यौन सहनशक्ति और लिंग की ताकत बढ़ाने के तरीके: क्या असर करता है और क्या नहीं
छोटा जवाब
यौन सहनशक्ति या मर्दाना ताकत कम लगने के पीछे अक्सर कोई एक अलग बीमारी नहीं होती, बल्कि वही चीज़ें होती हैं जो बाकी शरीर की ऊर्जा को भी प्रभावित करती हैं: कम नींद, लंबा तनाव, कम हलचल, ज़्यादा शराब या तंबाकू, और बढ़ता वजन.
सबसे बड़ा उपाय कोई चमत्कारी चीज़ नहीं है. नियमित कार्डियो एक्सरसाइज़, सात से आठ घंटे की नींद, संतुलित खाना, तनाव पर नियंत्रण, और शराब-तंबाकू में कमी, इन पांच चीज़ों से ज़्यादातर पुरुषों को असली और टिकने वाला फर्क महसूस होता है. बाज़ार में मिलने वाली जल्दी असर करने वाली चीज़ों से दूर रहना भी उतना ही ज़रूरी है जितना ऊपर बताए बदलाव करना.
सहनशक्ति, जोश और परफॉरमेंस में क्या फर्क है
यह समझना ज़रूरी है क्योंकि इंटरनेट पर अक्सर तीन अलग चीज़ों को एक ही समझ लिया जाता है.
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इरेक्शन से जुड़ी परफॉरमेंस एक खास शारीरिक क्रिया है, जिसमें सही समय पर खून का सही जगह पहुंचना ज़रूरी होता है. इस पर अलग से इरेक्शन की दिक्कत के घरेलू उपाय में पूरी जानकारी है.
सहनशक्ति या ताकत अलग है. यह जुड़ी है शरीर की कुल ऊर्जा से, थकान कितनी जल्दी आती है उससे, और सांस व मांसपेशियों की सहनशीलता से. किसी एक में दिक्कत होने का मतलब दूसरी दिक्कत होना ज़रूरी नहीं, लेकिन तीनों की जड़ें अक्सर एक जैसी होती हैं यानी नींद, तनाव, फिटनेस और आदतें.
शरीर में सहनशक्ति को असल में कौन सी चीज़ें प्रभावित करती हैं
चार चीज़ें बार बार सामने आती हैं, और ज़्यादातर पुरुषों में एक से ज़्यादा चीज़ एक साथ मौजूद रहती है.
खून का बहाव. शरीर के इस हिस्से तक पहुंचने वाली नसें बहुत बारीक होती हैं, इसलिए हाई बीपी, ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज़ का असर यहां अक्सर पहले दिखता है, दिल से जुड़ी किसी बड़ी समस्या से भी पहले.
नींद और हार्मोन. शरीर के ज़्यादातर हार्मोन का चक्र गहरी नींद के दौरान संतुलित होता है. लगातार टूटी हुई नींद इस चक्र को बिगाड़ देती है.
वजन और सक्रियता. पेट के आसपास ज़्यादा चर्बी होना कम टेस्टोस्टेरोन और खराब खून के बहाव से जुड़ा पाया गया है. बिना हलचल वाली दिनचर्या इसे और बिगाड़ देती है.
तनाव और थकान. लंबे समय का तनाव शरीर को लगातार सतर्क अवस्था में रखता है, जिसमें ऊर्जा बचाव और ज़रूरी कामों में लगती है, सहनशक्ति जैसी चीज़ें शरीर के लिए प्राथमिकता नहीं रहतीं.
इन चारों में एक बात साझा है, कोई भी अकेले में पूरी तस्वीर नहीं बताता. ज़्यादातर पुरुषों में दो या तीन चीज़ें एक साथ मौजूद रहती हैं, और इसीलिए सिर्फ एक आदत बदलने से असर अक्सर अधूरा लगता है.
नींद की भूमिका
नींद को सबसे कम गंभीरता से लिया जाता है, जबकि यह सबसे पहले ठीक करने वाली चीज़ है.
कुछ रातों की टूटी हुई नींद भी तनाव हार्मोन बढ़ा देती है, ऊर्जा घटा देती है और हार्मोन के रोज़ के चक्र को बिगाड़ देती है. सात से आठ घंटे की नींद, सोने और उठने का एक जैसा समय, और सोने से एक घंटे पहले मोबाइल स्क्रीन से दूरी, यह तीन आदतें ज़्यादातर लोगों के लिए सबसे बड़ा शुरुआती कदम हैं.
अगर सोने में ही दिक्कत होती है, तो उस समस्या को अलग से हल करना ज़रूरी है, क्योंकि नींद ठीक हुए बिना बाकी बदलाव असर नहीं दिखाते.
एक्सरसाइज़ से क्या फर्क पड़ता है
कार्डियो एक्सरसाइज़, जैसे तेज़ चलना, साइकिल चलाना या तैरना, हफ्ते में ज़्यादातर दिन तीस मिनट, खून के बहाव को पूरे शरीर में बेहतर बनाती है, यहां भी शामिल करके.
इसके साथ नियमित एक्सरसाइज़ नींद सुधारती है, तनाव कम करती है और शरीर की बनावट बदलकर आत्मविश्वास भी बढ़ाती है. पेल्विक फ्लोर यानी श्रोणि की मांसपेशियों को मज़बूत करने वाली कुछ साधारण कसरतें भी कुछ पुरुषों में मदद करती पाई गई हैं, हालांकि इस पर सबूत अभी सीमित है और इनका कोई नुकसान भी नहीं है इसलिए आज़माना ठीक है.
एक सीमा भी है जो याद रखनी चाहिए. बहुत ज़्यादा कसरत, कम खाना और कम आराम के साथ, असर उल्टा कर सकती है. अगर आप भारी ट्रेनिंग करते हैं और लगातार थका हुआ महसूस करते हैं, तो कम खाना और कम रिकवरी एक मुमकिन वजह है. रोज़ की सामान्य ताकत और ऊर्जा बढ़ाने के लिए स्टैमिना कैसे बढ़ाएं में और विस्तार से बताया गया है.
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खानपान में क्या ध्यान रखें
खाना किसी चीज़ को सीधे तुरंत नहीं बढ़ाता, लेकिन पूरी मशीनरी को सहारा देता है, और यह असर असली है. थाली में बार बार बदलाव करने की ज़रूरत नहीं, बस कुछ चीज़ें रोज़ मौजूद होनी चाहिए.
प्रोटीन पर्याप्त लें. दाल, राजमा, चना, अंडा, मछली, पनीर और सोया, यह मांसपेशियों और स्थिर ऊर्जा दोनों के लिए ज़रूरी हैं.
साबुत अनाज को तरजीह दें. ज़्यादा रिफाइंड आटे की जगह साबुत अनाज ब्लड शुगर को दिन भर ज़्यादा स्थिर रखता है, जिससे अचानक थकान कम आती है.
हरी सब्ज़ियां और फल. यह शरीर को वे छोटे पोषक तत्व देते हैं जिनकी कमी अक्सर पकड़ में नहीं आती.
पानी पर्याप्त पिएं. डिहाइड्रेशन का असर ऊर्जा और खून के बहाव पर लोगों की सोच से ज़्यादा पड़ता है.
आयरन और विटामिन डी की कमी को नज़रअंदाज़ न करें. दोनों भारत में बहुत आम हैं और दोनों की कमी से आने वाली थकान अक्सर सहनशक्ति की कमी समझ ली जाती है. सही रास्ता है पहले जांच, फिर ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सुधार, अंदाज़े से सप्लीमेंट शुरू करना नहीं.
शराब और तंबाकू का असर
यह हिस्सा अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जबकि असर में यह सबसे बड़े कारणों में गिना जाता है.
तंबाकू, चाहे सिगरेट हो या चबाने वाला रूप, सीधे खून की नसों को नुकसान पहुंचाता है और खून के बहाव को घटाता है. जो पुरुष नियमित तंबाकू लेते हैं, उनमें यह असर सबसे ज़्यादा और सबसे जल्दी दिखता है. छोड़ने के कुछ हफ्तों में ही नसों का काम करने का तरीका सुधरना शुरू हो जाता है.
ज़्यादा या बार बार शराब पीना नींद, हार्मोन और नसों के काम करने के तरीके को बिगाड़ता है. पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं, लेकिन नियमित भारी मात्रा को घटाकर कभी कभार की मात्रा तक लाना कई पुरुषों के लिए असली फर्क ला देता है.