रात को पैरों में अकड़न और ऐंठन के कारण: राहत, बचाव और जांच की पूरी बात

SuperLiving Expert Team·

रात को पैरों में अकड़न और ऐंठन के कारण: राहत, बचाव और जांच की पूरी बात

छोटा जवाब

अगर रात में सोते समय अचानक पिंडली या पंजे की मांसपेशी पत्थर जैसी सख्त हो जाती है और तेज़ दर्द के साथ नींद टूट जाती है, तो यह आमतौर पर रात की मांसपेशियों की ऐंठन है, न कि कोई गंभीर बीमारी. ज़्यादातर मामलों में इसके पीछे पानी की कमी, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना, दिन भर की ज़्यादा मेहनत, या मैग्नीशियम-कैल्शियम-पोटैशियम जैसे तत्वों की कमी होती है.

राहत का सबसे सीधा तरीका है मांसपेशी को तुरंत खींचना और हल्की मालिश करना. बचाव के लिए सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग, दिन भर पर्याप्त पानी, और थाली में सही पोषक तत्व जोड़ना काफी हद तक मदद करता है. अगर ऐंठन बहुत बार आने लगे या सामान्य उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर से जांच करवाना सही कदम है.

रात में पैरों की ऐंठन के पीछे क्या वजहें होती हैं

रात की पैरों की ऐंठन अचानक, बिना चेतावनी के आती है, लेकिन इसके पीछे आमतौर पर कई छोटी वजहें मिलकर काम करती हैं.

पानी की कमी. दिन भर कम पानी पीना शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बिगाड़ता है, और यही संतुलन मांसपेशियों के सही तरीके से सिकुड़ने-ढीले होने के लिए ज़रूरी है.

दिन भर ज़्यादा मेहनत या एक्सरसाइज़. सामान्य से ज़्यादा चलना, खड़े रहना या वर्कआउट करना मांसपेशियों को थका देता है, और थकी हुई मांसपेशी रात में ज़्यादा आसानी से अकड़ जाती है.

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना या खड़े रहना. दफ्तर में घंटों एक ही कुर्सी पर बैठे रहना या दुकान में खड़े रहकर काम करना, दोनों पिंडली की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ाते हैं.

मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटैशियम की कमी. ये तीनों तत्व मांसपेशियों के सिकुड़ने और ढीले होने की पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं. इनकी कमी होने पर मांसपेशी ठीक से आराम नहीं कर पाती. मैग्नीशियम की कमी के पूरे लक्षण और उपाय अलग से समझने के लिए मैग्नीशियम की कमी के लक्षण पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि वहां इसी तरह की रात की ऐंठन को विस्तार से समझाया गया है.

उम्र बढ़ना. उम्र के साथ मांसपेशियों और टेंडन की प्राकृतिक लचक कम होती जाती है, जिससे रात की ऐंठन की समस्या ज़्यादा आम हो जाती है, खास तौर पर पैंतालीस साल के बाद.

गर्भावस्था. गर्भावस्था के दौरान शरीर का वज़न और रक्त संचार दोनों बदलते हैं, जिससे कई महिलाओं को खास तौर पर दूसरी और तीसरी तिमाही में रात की पैरों की ऐंठन का सामना करना पड़ता है.

कुछ दवाएं. कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट भी मांसपेशियों की ऐंठन बढ़ा सकता है. अगर कोई नई दवा शुरू करने के बाद यह समस्या बढ़ी है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करना सही रहता है.

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम से यह कैसे अलग है

यह हिस्सा समझना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि दोनों समस्याएं रात में आती हैं और अक्सर एक दूसरे के साथ गड़बड़ा दी जाती हैं, जबकि इनका इलाज और वजह बिल्कुल अलग है.

रात की मांसपेशी ऐंठन में मांसपेशी अचानक कसकर सख्त हो जाती है, जैसे उसमें गांठ बन गई हो. साथ में तेज़, साफ महसूस होने वाला दर्द होता है. इसे खींचने या मसलने पर कुछ ही मिनट में राहत मिल जाती है, और दर्द आमतौर पर एक ही जगह, अक्सर पिंडली में होता है.

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम बिल्कुल अलग तरह से काम करता है. इसमें मांसपेशी सख्त नहीं होती और तेज़ दर्द भी नहीं होता, बल्कि पैर के अंदर रेंगने, खिंचाव या बेचैनी जैसी एक अजीब सी सनसनी होती है, जिसके साथ पैर को लगातार हिलाते रहने की तेज़ इच्छा बनी रहती है. यह आराम करने पर, यानी बैठे या लेटे रहने पर बढ़ती है, और चलने-फिरने से कुछ देर के लिए कम हो जाती है, फिर वापस आ जाती है. इसके पीछे की वजह मांसपेशी की थकान नहीं बल्कि दिमाग़ में नर्व सिग्नल के काम करने का तरीका होता है, और अक्सर दिमाग़ में आयरन की कमी से जुड़ी होती है. इसकी पूरी पहचान और वजहें रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के कारण और उपाय में विस्तार से बताई गई हैं.

सीधा फर्क याद रखने का तरीका यह है: अगर मांसपेशी सख्त होकर दर्द देती है और खींचने से तुरंत राहत मिलती है, तो यह ऐंठन है. अगर कोई साफ दर्द नहीं बल्कि सिर्फ हिलाते रहने की बेचैन इच्छा है, तो वह रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के करीब है. दोनों के इलाज और डॉक्टर को दिखाने की ज़रूरत भी अलग अलग है, इसलिए सही पहचान पहला कदम है.

सही आदतें जानना काफी नहीं, उन्हें रोज़ निभाना असली काम है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली, आपका पानी पीने का तरीका और आपकी रोज़ की दिनचर्या के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि रात की ऐंठन जैसी समस्याएं धीरे धीरे कम हों. SuperLiving डाउनलोड करें

किन लोगों में खतरा सबसे ज़्यादा है

कुछ लोगों में रात की पैरों की ऐंठन ज़्यादा आम होती है, और इनमें से किसी में आना अपने आप में चिंता की बात नहीं, बस ध्यान देने लायक संकेत है.

पैंतालीस साल से ज़्यादा उम्र के लोग, जिनकी मांसपेशियों की लचक स्वाभाविक रूप से कम हो चुकी होती है. गर्भवती महिलाएं, खास तौर पर दूसरी और तीसरी तिमाही में. दिन भर खड़े रहकर काम करने वाले लोग, जैसे दुकानदार, शिक्षक या फैक्ट्री में काम करने वाले. नियमित रूप से तेज़ एक्सरसाइज़ करने वाले एथलीट और जिम जाने वाले लोग. डायबिटीज़ या थायराइड जैसी स्थिति वाले लोग. और वे लोग जो बहुत कम पानी पीते हैं या गर्मी में ज़्यादा पसीना बहाते हैं.

अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं और हफ्ते में दो तीन बार से ज़्यादा ऐंठन आती है, तो नीचे बताए बचाव के उपाय शुरू करना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से बात करना समझदारी है.

ऐंठन आने पर तुरंत राहत कैसे पाएं

जब ऐंठन आए, तो घबराने के बजाय इन कदमों को आज़माइए.

मांसपेशी को धीरे धीरे खींचिए. पिंडली में ऐंठन हो तो पैर को सीधा करके पंजे को अपनी तरफ खींचिए, जैसे पंजे से छत को धक्का दे रहे हों. यह सबसे तेज़ और सबसे भरोसेमंद तरीका है.

हल्के हाथ से मालिश कीजिए. मांसपेशी को ऊपर से नीचे की तरफ धीरे धीरे मसलने से सिकुड़न ढीली होती है.

हल्की गर्माहट दीजिए. गर्म पानी की थैली या गुनगुने पानी से सिकाई करने से मांसपेशी को आराम मिलता है.

खड़े होकर थोड़ा चलिए. अगर दर्द सहन करने लायक है तो कुछ कदम चलना मांसपेशी को खिंचने और ढीला होने में मदद करता है.

ज़बरदस्ती न करें. मांसपेशी को और ज़्यादा दबाने, अचानक झटके से हिलाने या बहुत ज़ोर से खींचने से बचें, इससे दर्द बढ़ सकता है और मांसपेशी में खिंचाव आ सकता है.

यह सब खुद करने की ज़रूरत नहीं है

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बचाव के लिए रोज़ की आदतें

ऐंठन को बार बार आने से रोकने का सबसे भरोसेमंद तरीका रोज़ की कुछ छोटी आदतें हैं, कोई एक चमत्कारी उपाय नहीं.

दिन भर पर्याप्त पानी पीना. खास तौर पर गर्मी के मौसम में या एक्सरसाइज़ के दिनों में पानी की मात्रा बढ़ाइए. ज़्यादा पसीना बहने पर नमक-चीनी का घोल भी मदद कर सकता है.

सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग. पिंडली और जांघ की मांसपेशियों को दो से तीन मिनट धीरे धीरे खींचना सबसे असरदार आदतों में से एक है, और बार-बार टूटने वाली रात की नींद को बेहतर करने में भी मदद करता है.

थाली में सही पोषक तत्व जोड़ना. बादाम, कद्दू के बीज, केला, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और साबुत अनाज, ये सब मैग्नीशियम और पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं. दूध, दही और पनीर कैल्शियम के लिए ज़रूरी हैं.

लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहना. अगर काम ऐसा है जिसमें घंटों बैठना या खड़े रहना पड़ता है, तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना या पैर हिलाना मददगार रहता है.

आरामदायक जूते पहनना. ज़्यादा टाइट या गलत साइज़ के जूते पिंडली की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं.

जांच कब और क्यों कराएं

ज़्यादातर रात की ऐंठन के लिए किसी जांच की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि यह अक्सर पानी की कमी या मेहनत की वजह से होती है और घरेलू उपायों से ठीक हो जाती है.

लेकिन अगर ऐंठन हफ्ते में कई बार आने लगे, अगर सामान्य उपायों से राहत न मिले, अगर साथ में मांसपेशियों की कमज़ोरी या सुन्नपन भी महसूस हो, या अगर आपको डायबिटीज़, थायराइड या किडनी से जुड़ी कोई स्थिति पहले से है, तो डॉक्टर मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटैशियम और विटामिन डी जैसी बुनियादी जांचों की सलाह दे सकते हैं. यह एक साधारण खून की जांच है और इससे यह साफ पता चल जाता है कि कोई अंदरूनी कमी तो नहीं है.

जो काम नहीं करता

हर ऐंठन को गंभीर बीमारी मान लेना. ज़्यादातर मामलों में यह सिर्फ पानी की कमी या थकान की वजह से होती है, घबराने की ज़रूरत नहीं.

ऐंठन के दौरान मांसपेशी को ज़ोर से दबाना या झटका देना. इससे राहत की जगह दर्द और बढ़ सकता है.

सिर्फ दर्द की दवा लेकर बैठे रहना और पानी, स्ट्रेचिंग जैसी बुनियादी आदतें नज़रअंदाज़ करना. दवा अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन असली वजह पर काम नहीं करती.

बिना जांच के सप्लीमेंट शुरू करना. मैग्नीशियम, कैल्शियम या पोटैशियम की ज़्यादा मात्रा भी शरीर के लिए सही नहीं है, इसलिए जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी सप्लीमेंट शुरू करना ठीक नहीं.

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम और सामान्य ऐंठन को एक ही समझकर एक जैसा इलाज करना. दोनों की वजह अलग है, इसलिए सही पहचान के बिना सही मदद मिलना मुश्किल है.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. दिन भर पानी की बोतल साथ रखिए और नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालिए. सोने से पहले पिंडली और जांघ को दो से तीन मिनट धीरे धीरे खींचिए.

दूसरा हफ्ता. थाली में रोज़ मुट्ठीभर बादाम या कद्दू के बीज, और हफ्ते में कई बार हरी पत्तेदार सब्ज़ी जोड़िए. अगर दिन में ज़्यादा मेहनत या एक्सरसाइज़ होती है, तो उसके बाद अतिरिक्त पानी और हल्की स्ट्रेचिंग को आदत बना लीजिए.

नापने का तरीका: रोज़ एक लाइन लिखिए, रात में ऐंठन आई या नहीं. दो हफ्ते बाद इन लाइनों को साथ पढ़िए. ज़्यादातर लोगों में सिर्फ पानी और स्ट्रेचिंग की आदत से ही हफ्ते दो हफ्ते में साफ फर्क दिखने लगता है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर ऐंठन हफ्ते में कई बार आने लगे, अगर सामान्य घरेलू उपायों से कुछ हफ्तों में राहत न मिले, अगर साथ में पैर में सूजन, लालिमा या लगातार कमज़ोरी भी हो, अगर ऐंठन के साथ सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो, या अगर आप गर्भवती हैं और ऐंठन बहुत तकलीफदेह हो रही है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है.

मिलाकर बात यह है

रात की पैरों की ऐंठन डरावनी लगती है, लेकिन ज़्यादातर मामलों में इसकी वजहें बहुत सीधी हैं, पानी की कमी, ज़्यादा मेहनत, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना, या मैग्नीशियम-कैल्शियम-पोटैशियम जैसे तत्वों की कमी. राहत के लिए मांसपेशी को खींचना और हल्की मालिश काफी है, और बचाव के लिए सोने से पहले स्ट्रेचिंग, दिन भर पर्याप्त पानी और सही थाली से बड़ा फर्क पड़ता है.

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, यह सब रोज़ निभाना है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी थाली, आपका पानी पीने का तरीका और आपकी रोज़ की दिनचर्या के हिसाब से इसे छोटे कदमों में बांटते हैं, ताकि यह एक और लंबी सूची नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रात को सोते समय पैरों में अचानक ऐंठन क्यों आती है? ज़्यादातर मामलों में इसके पीछे कोई एक बड़ी वजह नहीं होती, बल्कि कई छोटी चीज़ें मिलकर असर करती हैं. दिन भर पानी कम पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे या खड़े रहना, सामान्य से ज़्यादा मेहनत या एक्सरसाइज़ करना, और मैग्नीशियम, कैल्शियम या पोटैशियम जैसे तत्वों की कमी, ये सब मांसपेशियों को रात में अचानक सिकुड़ने के लिए उकसा सकते हैं. उम्र बढ़ने के साथ भी यह समस्या ज़्यादा आम हो जाती है.

रात की पैरों की ऐंठन और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में क्या फर्क है? दोनों रात में परेशान करते हैं, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग हैं. रात की ऐंठन में मांसपेशी अचानक कसकर सख्त हो जाती है, तेज़ दर्द होता है, और खींचकर या मसलकर राहत मिलती है. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में तेज़ दर्द नहीं होता, बल्कि पैर को हिलाते रहने की बेचैन इच्छा होती है, जो आराम करने पर बढ़ती है और चलने फिरने से कम हो जाती है.

ऐंठन आने पर तुरंत क्या करना चाहिए? जिस मांसपेशी में ऐंठन है उसे धीरे धीरे सीधा खींचिए. पिंडली में ऐंठन हो तो पैर को सीधा करके पंजे को अपनी तरफ खींचिए. इसके साथ मांसपेशी को हल्के हाथ से मसलना और हल्की गर्माहट देना भी राहत देता है. ज़बरदस्ती मांसपेशी को और ज़्यादा दबाने या अचानक झटके से हिलाने से बचें, इससे दर्द बढ़ सकता है.

क्या पानी की कमी से भी रात में पैर में ऐंठन आ सकती है? हां, और यह सबसे आम वजहों में से एक है. पानी की कमी से शरीर में सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ता है, और यही संतुलन मांसपेशियों के सही तरीके से सिकुड़ने और ढीले होने के लिए ज़रूरी है. गर्मी के मौसम में या ज़्यादा पसीना बहाने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है.

क्या रात की पैरों की ऐंठन किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है? ज़्यादातर मामलों में नहीं, लेकिन कुछ स्थितियों में यह एक संकेत हो सकती है. लीवर या किडनी से जुड़ी कुछ स्थितियां, थायराइड की गड़बड़ी, डायबिटीज़ के कारण नसों पर असर, और कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट भी बार बार आने वाली ऐंठन से जुड़े पाए गए हैं. अगर ऐंठन हफ्ते में कई बार आने लगे, तो डॉक्टर से जांच करवाना सही रहता है.

रात की ऐंठन से बचने के लिए सोने से पहले क्या करना चाहिए? सोने से पहले पिंडली और जांघ की मांसपेशियों को हल्के हाथ से दो से तीन मिनट खींचना सबसे असरदार आदतों में से एक है. इसके साथ शाम को पर्याप्त पानी पी लेना और दिन में ज़्यादा मेहनत हुई हो तो सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करना भी मदद करता है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर ऐंठन हफ्ते में कई बार आती है, सामान्य घरेलू उपायों से राहत नहीं मिलती, साथ में सुन्नपन, कमज़ोरी या सूजन भी है, या आप गर्भवती हैं और तकलीफ ज़्यादा है, तो कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. मैग्नीशियम, कैल्शियम या किसी भी सप्लीमेंट को जांच और डॉक्टर की सलाह के बिना अपने मन से शुरू न करें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रात को सोते समय पैरों में अचानक ऐंठन क्यों आती है?+

ज़्यादातर मामलों में इसके पीछे कोई एक बड़ी वजह नहीं होती, बल्कि कई छोटी चीज़ें मिलकर असर करती हैं. दिन भर पानी कम पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे या खड़े रहना, सामान्य से ज़्यादा मेहनत या एक्सरसाइज़ करना, और मैग्नीशियम, कैल्शियम या पोटैशियम जैसे तत्वों की कमी, ये सब मांसपेशियों को रात में अचानक सिकुड़ने के लिए उकसा सकते हैं. रात में शरीर का तापमान थोड़ा गिरता है और मांसपेशियां पहले से ज़्यादा आराम की स्थिति में होती हैं, इसी बदलाव के बीच अचानक सिकुड़न आ जाती है. उम्र बढ़ने के साथ भी यह समस्या ज़्यादा आम हो जाती है, क्योंकि मांसपेशियों की लचक धीरे धीरे कम होती जाती है.

रात की पैरों की ऐंठन और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में क्या फर्क है?+

दोनों रात में परेशान करते हैं, इसलिए अक्सर गड़बड़ हो जाती है, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग हैं. रात की ऐंठन में मांसपेशी अचानक कसकर पत्थर जैसी सख्त हो जाती है, तेज़ दर्द होता है, और मांसपेशी को खींचकर या मसलकर सीधे राहत मिलती है. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में इस तरह का तेज़ दर्द नहीं होता, बल्कि पैर को हिलाते रहने की एक बेचैन सी इच्छा होती है, जो आराम करने पर बढ़ती है और चलने फिरने से कुछ देर के लिए कम हो जाती है. अगर मांसपेशी में साफ सख्तपन और दर्द महसूस होता है तो यह ऐंठन है, अगर सिर्फ बेचैनी और हिलाने की इच्छा है तो वह रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के करीब है.

ऐंठन आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?+

सबसे पहले जिस मांसपेशी में ऐंठन है उसे धीरे धीरे सीधा खींचिए. पिंडली में ऐंठन हो तो पैर को सीधा करके पंजे को अपनी तरफ खींचिए, जैसे पंजे से छत को धक्का दे रहे हों. इसके साथ मांसपेशी को हल्के हाथ से मसलना और उस पर हल्की गर्माहट देना भी राहत देता है, जैसे गर्म पानी की थैली या गुनगुने पानी से सिकाई. खड़े होकर थोड़ा चलना भी कई बार मदद करता है, क्योंकि इससे मांसपेशी खिंचती और ढीली होती है. ज़बरदस्ती मांसपेशी को और ज़्यादा दबाने या अचानक झटके से हिलाने से बचें, इससे दर्द बढ़ सकता है.

क्या पानी की कमी से भी रात में पैर में ऐंठन आ सकती है?+

हां, और यह सबसे आम वजहों में से एक है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. पानी की कमी से शरीर में सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ता है, और यही संतुलन मांसपेशियों के सही तरीके से सिकुड़ने और ढीले होने के लिए ज़रूरी है. गर्मी के मौसम में या ज़्यादा पसीना बहाने वाले दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है. दिन भर पर्याप्त पानी पीना और पसीना ज़्यादा बहने पर नमक-चीनी वाला घोल लेना इस वजह को काफी हद तक कम कर सकता है.

क्या रात की पैरों की ऐंठन किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है?+

ज़्यादातर मामलों में नहीं, लेकिन कुछ स्थितियों में यह एक संकेत हो सकती है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. लीवर या किडनी से जुड़ी कुछ स्थितियां, थायराइड की गड़बड़ी, डायबिटीज़ के कारण नसों पर असर, और कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट भी बार बार आने वाली ऐंठन से जुड़े पाए गए हैं. गर्भावस्था में भी यह समस्या आम है और आमतौर पर डिलीवरी के बाद अपने आप ठीक हो जाती है. अगर ऐंठन हफ्ते में कई बार आने लगे या सामान्य घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर से जांच करवाना सही रहता है.

रात की ऐंठन से बचने के लिए सोने से पहले क्या करना चाहिए?+

सोने से पहले पिंडली और जांघ की मांसपेशियों को हल्के हाथ से दो से तीन मिनट खींचना सबसे असरदार आदतों में से एक है. इसके साथ शाम को पर्याप्त पानी पी लेना, दिन में अगर ज़्यादा एक्सरसाइज़ या मेहनत का काम हुआ हो तो सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करना, और बिस्तर पर पैरों को ज़्यादा टाइट चादर या कंबल में बहुत कसकर न दबाना, ये सब मदद करते हैं. जिन लोगों को बार बार ऐंठन आती है उनके लिए रात को हल्के गुनगुने पानी से पैर धोना या छोटी सी मालिश करना भी एक अच्छी आदत बन सकती है.

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