पैर मुड़ने के बाद घरेलू देखभाल: सूजन, दर्द और रिकवरी का सही तरीका
छोटा जवाब, और पैर मुड़ने पर शरीर के अंदर क्या होता है
सीढ़ी से उतरते हुए, असमान रास्ते पर या अचानक मुड़ते हुए पैर मुड़ जाना, जिसे ज़्यादातर लोग "टखना मुड़ना" कहते हैं, बहुत आम चोट है और अक्सर घर पर ही ठीक हो जाती है। पहले 48 घंटों में सही देखभाल इस बात में बड़ा फर्क डालती है कि सूजन कितनी बढ़ेगी और दर्द कितने दिन रहेगा। सबसे ज़रूरी बात यह समझना है कि पैर पर वज़न डालना फौरन रोकना है, पैर को ऊंचा रखना है, बर्फ लगानी है और हल्की पट्टी से सहारा देना है। इसी तरीके को अक्सर RICE कहा जाता है, आराम, बर्फ, पट्टी और ऊंचाई।
यह समझना भी ज़रूरी है कि टखने के अंदर असल में क्या होता है। टखने को जगह पर रखने वाले ligament, यानी हड्डियों को जोड़ने वाले मज़बूत रेशे, अचानक और ज़्यादा खिंचाव सहन नहीं कर पाते। जब पैर अंदर या बाहर की तरफ मुड़ता है, तो यही ligament खिंच जाते हैं, कभी-कभी थोड़े से रेशे टूट भी जाते हैं। यही वजह है कि चोट लगने के कुछ ही मिनटों में शरीर उस जगह खून और तरल पदार्थ भेजना शुरू कर देता है, जिससे सूजन दिखने लगती है। यह सूजन कोई अलग से होने वाली समस्या नहीं, बल्कि शरीर की मरम्मत करने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। दर्द का काम भी यही है, वह शरीर को उस जगह आराम देने के लिए मजबूर करता है जब तक रेशे कुछ हद तक जुड़ न जाएं।
यह चोट किसी एक वजह से नहीं होती। असमान सड़क पर अचानक पैर पड़ना, जल्दी में सीढ़ियां उतरना, गलत ऊंचाई के जूते, खराब रोशनी में चलना, या किसी खेल के दौरान अचानक दिशा बदलना, यह सब टखने को मोड़ने वाली आम स्थितियां हैं। जिन लोगों की मांसपेशियां पहले से कमज़ोर हों या जिन्हें पहले कभी यही चोट लग चुकी हो, उनमें दोबारा मुड़ने का खतरा थोड़ा ज़्यादा रहता है, क्योंकि एक बार खिंचा हुआ ligament अगली बार उतना मज़बूत नहीं रहता जितना पहले था।
मोच कितनी गंभीर है, यह इस पर निर्भर करता है कि रेशे कितने खिंचे या टूटे हैं, और इसे मोटे तौर पर तीन स्तर में समझा जा सकता है। हल्की मोच में रेशे सिर्फ थोड़े खिंचते हैं, सूजन कम रहती है और चलना मुश्किल लेकिन मुमकिन रहता है। मध्यम मोच में कुछ रेशे आंशिक रूप से टूटते हैं, सूजन साफ दिखती है, टखना थोड़ा ढीला सा महसूस होता है और चलने में साफ दर्द होता है। गंभीर मोच में रेशे पूरी तरह टूट सकते हैं, टखना बहुत ढीला लगता है, सूजन तेज़ी से बढ़ती है और वज़न डालना लगभग असंभव हो जाता है। जोड़ों के दर्द की यह समझ सिर्फ टखने तक सीमित नहीं, घुटनों में भी कारण और स्तर कुछ इसी तरह काम करते हैं, जिसे घुटनों के दर्द के घरेलू उपाय में अलग से समझाया गया है।
मोच कितनी गंभीर भी हो, पहले 48 घंटों में RICE तरीका सही से अपनाएं
यह वह दौर है जब देखभाल सबसे ज़्यादा फर्क डालती है, इसलिए इसे जल्दबाज़ी में न करें।
आराम। चोट लगने के बाद जितना हो सके उस पैर पर चलना टालें। पूरी तरह न हिलना ज़रूरी नहीं, पर ज़बरदस्ती चलना या सामान्य काम करते रहना ligament को ठीक होने का मौका नहीं देता। ज़रूरत हो तो किसी सहारे, छड़ी या किसी के हाथ का इस्तेमाल करें ताकि पूरा वज़न सीधे चोट वाले पैर पर न जाए।
बर्फ। चोट के पहले 48 घंटों में हर दो से तीन घंटे पर पंद्रह से बीस मिनट बर्फ लगाना सूजन को काफी हद तक नियंत्रण में रखता है। बर्फ को कभी सीधे त्वचा पर न रखें, हमेशा पतले कपड़े या तौलिये में लपेटकर लगाएं। रात में सोते समय बर्फ लगाने की ज़रूरत नहीं, शरीर को आराम करने दें।
पट्टी। एक हल्की इलास्टिक पट्टी टखने को सहारा देती है और सूजन को फैलने से रोकती है। पट्टी बहुत कसकर न बांधें, उंगलियों का रंग, झनझनाहट या सुन्नपन जांचते रहें। अगर कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत पट्टी ढीली करें।
ऊंचाई। लेटते या बैठते समय पैर को दिल के स्तर से ऊपर रखें, जैसे तकिए के सहारे। यह सीधा और आसान तरीका है जो सूजन को गुरुत्वाकर्षण के ज़रिए कम फैलने देता है। दिन में जितनी बार मुमकिन हो, कुछ देर पैर ऊंचा रखें।
इन दो दिनों के दौरान रोज़ टखने को ध्यान से देखते रहें। हल्की सूजन और हल्का दर्द धीरे-धीरे कम होना चाहिए, बढ़ना नहीं। अगर सूजन दूसरे दिन भी पहले दिन जैसी ही तेज़ है, रंग बदल रहा है, या दर्द पहले से ज़्यादा बढ़ रहा है, तो यह इंतज़ार करने का समय नहीं, बल्कि जांच कराने का संकेत है।
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