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नींद में दांत पीसना (ब्रक्सिज्म): कारण, लक्षण और घरेलू उपाय जो असर करते हैं

SuperLiving Expert Team·

नींद में दांत पीसना (ब्रक्सिज्म): कारण, लक्षण और घरेलू उपाय जो असर करते हैं

छोटा जवाब

अगर सुबह उठते ही जबड़ा अकड़ा हुआ लगता है, कनपटी में हल्का दर्द रहता है, या घर में किसी ने बताया है कि आप रात को दांत पीसते हैं, तो यह ब्रक्सिज्म हो सकता है, यानी नींद में अनजाने दांत भींचना या रगड़ना।

यह ज़्यादातर मामलों में तुरंत खतरनाक नहीं है, लेकिन महीनों तक चले तो दांतों की सतह घिस सकती है और जबड़े का जोड़ दर्द करने लगता है। ज़्यादातर मामलों में इसका सीधा रिश्ता तनाव और नींद की गुणवत्ता से होता है, इलाज की शुरुआत भी वहीं से होती है। सोने से पहले जबड़े और गर्दन को ढीला करना, दिन में तनाव कम करने की आदतें डालना, शाम को कैफीन और शराब का समय ठीक करना, और अगर दांत घिसने लगे हैं तो डेंटिस्ट से नाइट गार्ड के बारे में बात करना, ये सबसे भरोसेमंद कदम हैं।

दांत पीसना (ब्रक्सिज्म) क्या है और यह होता क्यों है

ब्रक्सिज्म एक ऐसी आदत है जिसमें जबड़े की मांसपेशियां नींद के दौरान बार बार सिकुड़ती हैं, ऊपर और नीचे के दांत आपस में दब जाते हैं या रगड़ खाते हैं। यह जागते हुए भी हो सकता है, जैसे किसी काम पर ध्यान लगाते समय अनजाने में जबड़ा भींच जाना, लेकिन नींद वाला रूप ज़्यादा आम और ज़्यादा नुकसानदेह माना जाता है, क्योंकि सोते समय व्यक्ति को खुद इसका पता नहीं चलता और रोकने का कोई मौका नहीं मिलता।

नींद के दौरान यह आमतौर पर उन पलों में होता है जब नींद हल्की हो रही होती है, यानी गहरी नींद से हल्की नींद की तरफ जाते समय शरीर में एक छोटा सा जागरण जैसा पल आता है। इसी पल में सांस, दिल की धड़कन और जबड़े की मांसपेशियां थोड़ी सक्रिय हो जाती हैं, और कुछ लोगों में यही सक्रियता दांत पीसने के रूप में सामने आती है। इसका मतलब है कि ब्रक्सिज्म अक्सर नींद की बनावट से जुड़ी एक चीज़ है, न कि सिर्फ दांतों या जबड़े की।

इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई कारण मिलकर काम करते हैं। सबसे बड़ी वजह तनाव और चिंता मानी जाती है, क्योंकि दिन भर का दबाव शरीर में जमा रहता है और रात में मांसपेशियों की जकड़न के रूप में निकलता है। इसके अलावा नींद के दौरान सांस से जुड़ी दिक्कतें, जैसे तेज़ खर्राटे या सांस का बार बार रुकना, भी इससे जुड़ी पाई गई हैं, क्योंकि दोनों ही हल्की नींद के पलों को बढ़ाते हैं। धूम्रपान, शाम को ज़्यादा कैफीन या शराब लेना, दांतों या जबड़े की बनावट में हल्का असंतुलन, और परिवार में किसी और को भी यह आदत होना, ये सब भी जोखिम बढ़ाने वाले कारक हैं। बच्चों में यह अक्सर दांत निकलने या जबड़े के बढ़ने के दौर से जुड़ा होता है और उम्र के साथ अपने आप कम हो जाता है।

किसे यह ज़्यादा होता है, इसका कोई एक तय जवाब नहीं, लेकिन कुछ पैटर्न बार बार दिखते हैं। जिन लोगों का काम लगातार डेडलाइन और दबाव वाला है, उनमें यह आदत ज़्यादा देखी जाती है। जो लोग शाम को देर तक स्क्रीन पर रहते हैं या सोने का समय हर रोज़ बदलता रहता है, उनमें भी नींद हल्की और बार बार टूटने वाली हो जाती है, जिससे जोखिम बढ़ता है। युवा वयस्कों में यह आदत अक्सर काम शुरू होने के शुरुआती सालों में ज़्यादा दिखती है, जब दिनचर्या और तनाव दोनों नए होते हैं, और उम्र के साथ अगर तनाव संभालने का तरीका बन जाए तो यह अपने आप कम होने लगती है।

लक्षण जो बताते हैं कि आप रात में दांत पीस रहे हैं

क्योंकि यह नींद में होता है, बहुत से लोगों को इसका पता तभी चलता है जब असर दिखने लगता है। कुछ संकेत ध्यान देने लायक हैं।

सुबह उठते ही जबड़े का अकड़ा हुआ या थका हुआ महसूस होना सबसे आम शिकायत है। इसके साथ कनपटी के आसपास हल्का सिरदर्द अक्सर जुड़ा रहता है, जो दिन चढ़ने के साथ कम हो जाता है। कुछ लोगों को ठंडा या मीठा खाने पर दांतों में अचानक झनझनाहट महसूस होती है, क्योंकि लगातार रगड़ से दांत की ऊपरी परत पतली हो जाती है। जबड़े के जोड़ में हल्की क्लिक जैसी आवाज़ या मुंह पूरा खोलने में थोड़ी अकड़न भी दिख सकती है। गाल के अंदर की तरफ या जीभ के किनारे पर हल्के दांतों के निशान बनना भी एक संकेत है। और अगर घर में कोई साथ सोता है, तो उसे रात में दांत रगड़ने की आवाज़ भी सुनाई दे सकती है, जो सबसे साफ संकेत है।

एक और संकेत जो अक्सर छूट जाता है वह है कान के आसपास हल्का दर्द या भारीपन, क्योंकि जबड़े का जोड़ कान के ठीक पास होता है और वहां की जकड़न कान तक महसूस हो सकती है। कई लोग इसे कान की समस्या समझकर अलग इलाज ढूंढते रहते हैं, जबकि असली वजह जबड़े में होती है। इनमें से कोई एक लक्षण अकेले दिखे तो घबराने की बात नहीं, लेकिन अगर दो तीन लक्षण बार बार साथ आएं, तो इसे पहचानकर कदम उठाना बेहतर है।

तनाव, नींद और दांत पीसने का रिश्ता, अनिद्रा से अलग समस्या

यहां एक ज़रूरी फर्क समझना ज़रूरी है। दांत पीसना और नींद न आने की समस्या दोनों तनाव से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों एक चीज़ नहीं हैं। नींद न आने की समस्या में दिक्कत सोने से पहले होती है, यानी बिस्तर पर लेटने के बावजूद दिमाग शांत नहीं होता। ब्रक्सिज्म इससे अलग है, यहां व्यक्ति आमतौर पर सो तो जाता है, लेकिन नींद के अंदर ही जबड़े की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए अगर आपको सोने में दिक्कत नहीं होती फिर भी सुबह जबड़ा अकड़ा मिलता है, तो यह अलग समस्या है और इसका समाधान भी थोड़ा अलग तरीके से करना पड़ता है। सोने से जुड़ी बाकी दिक्कतों और उनके व्यावहारिक हल के लिए रात को नींद नहीं आती तो क्या करें पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि वहां बताई गई कई आदतें, जैसे फोन से दूरी और सोने का तय समय, ब्रक्सिज्म में भी मदद करती हैं।

दिन का तनाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। जो लोग दिन भर काम के दबाव में रहते हैं, उनके शरीर में तनाव वाला हार्मोन शाम तक भी पूरी तरह उतरता नहीं, और यही जकड़न रात में जबड़े की मांसपेशियों तक पहुंच जाती है। इसलिए दिन में तनाव संभालने के तरीके सीखना दांत पीसने पर सीधा असर डालता है। ऑफिस के दबाव को दिन में ही कम करने के व्यावहारिक तरीकों के लिए काम का तनाव कैसे कम करें पूरी जानकारी देता है, खासकर डेस्क पर किया जाने वाला सांस वाला व्यायाम, जो जबड़े और गर्दन की जकड़न घटाने में भी काम आता है।

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घरेलू उपाय जो असल में मदद करते हैं

सोने से पहले जबड़े को ढीला करना। मुंह को हल्का सा खोलकर, जीभ को ऊपरी तालू से हल्के से छुआकर, दांतों को आपस में मिलने न देना सीखिए। दिन में कुछ बार यह मुद्रा दोहराने से शरीर को जबड़ा ढीला रखने की आदत बनती है।

गर्म सेक। सोने से पहले जबड़े के दोनों तरफ पांच मिनट के लिए गर्म कपड़े या गर्म पानी की थैली रखना मांसपेशियों को आराम देता है।

शाम की कैफीन और शराब कम करना। दोनों नींद की बनावट को हल्का और बार बार टूटने वाला बना देते हैं, और यही हल्की नींद ब्रक्सिज्म के लिए ज़्यादा मौका देती है। दोपहर के बाद चाय, कॉफी और शराब घटाना सीधा असर दिखाता है।

च्युइंगम से दूरी। दिन भर जबड़े को लगातार हिलाते रहना मांसपेशियों को थका देता है, जो रात में और जकड़न बढ़ा सकता है।

दिन में जबड़े पर ध्यान रखना। काम के बीच बीच खुद से पूछिए कि क्या दांत भिंचे हुए हैं। जागते हुए इस आदत को पकड़ना और छोड़ना, रात की आदत पर भी धीरे धीरे असर डालता है।

गर्दन और कंधों को ढीला रखना। जबड़े की मांसपेशियां गर्दन और कंधों से जुड़ी होती हैं, इसलिए दिन में कुछ बार कंधे घुमाना और गर्दन को हल्के से दोनों तरफ झुकाना पूरे सिस्टम को कम अलर्ट रखता है।

रात की आदतें जो हालत बिगाड़ती हैं

पहली, दर्द को नज़रअंदाज़ करते रहना जब तक दांत में घिसाव साफ न दिखने लगे। जितनी जल्दी आदत पकड़ में आती है, उतना ही कम नुकसान होता है।

दूसरी, देर रात भारी और मसालेदार खाना, जो नींद की गहराई को कम करता है और हल्की नींद के पलों को बढ़ाता है।

तीसरी, सोने से ठीक पहले फोन पर काम या तनाव भरी बातचीत जारी रखना, जिससे शाम का तनाव रात तक साथ चला जाता है।

चौथी, दर्द होने पर खुद से कुछ भी लेकर आराम खोजना, बिना डेंटिस्ट को दिखाए। सही कदम यह है कि पैटर्न पहचानते ही डेंटिस्ट से बात की जाए, ताकि वे दांतों की सतह देखकर सही सलाह दे सकें।

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता। रोज़ सोने से पहले जबड़ा ढीला रखने का अभ्यास पांच मिनट के लिए कीजिए, साथ में गर्म सेक भी जोड़िए। दोपहर के बाद कैफीन बंद कीजिए।

दूसरा हफ्ता। दिन में तीन बार खुद से पूछिए कि जबड़ा भिंचा तो नहीं, और उसी वक्त इसे ढीला कीजिए। साथ ही शाम को दस मिनट का कोई तनाव कम करने वाला अभ्यास जोड़िए, जैसे धीमी सांस लेना या थोड़ी देर टहलना।

नापने का तरीका। रोज़ सुबह एक लाइन लिखिए, जबड़े की अकड़न दस में से कितनी थी। दो हफ्ते बाद यह पैटर्न साफ दिखने लगेगा, और अगर सुधार धीमा लगे तो घबराने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि यह आदत महीनों में बनी है और ठीक होने में भी थोड़ा समय लगता है।

डॉक्टर या डेंटिस्ट से कब मिलना ज़रूरी है

अगर दांतों में साफ घिसाव, कोई कोना टूटना या दांत असामान्य रूप से छोटा दिखने लगे, तो डेंटिस्ट से मिलना ज़रूरी है। अगर जबड़ा पूरा खोलने में दिक्कत हो, मुंह खोलते समय जोड़ अटक जाए, या दर्द हफ्तों तक बना रहे और घरेलू उपायों से कम न हो, तो भी जांच करानी चाहिए।

अगर बच्चे में दांत पीसने के साथ ज़ोर के खर्राटे, मुंह से सांस लेना या दिन में असामान्य थकान भी दिखे, तो बच्चों के डॉक्टर से बात करना सही कदम है, क्योंकि यह मेल कभी कभी नींद में सांस से जुड़ी किसी दिक्कत की तरफ इशारा करता है। और अगर तनाव, बेचैनी या नींद की समस्या लगातार बनी है और रोज़ की ज़िंदगी को प्रभावित कर रही है, तो इसके लिए अलग से मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से मिलना भी उतना ही ज़रूरी है।

मिलाकर बात यह है

नींद में दांत पीसना ज़्यादातर मामलों में शरीर के तनाव संभालने के तरीके का एक हिस्सा है, दांतों की कोई अलग बीमारी नहीं। इसलिए सबसे भरोसेमंद रास्ता दांतों पर सीधा ध्यान देने से ज़्यादा, दिन के तनाव और रात की नींद को सुधारने से गुज़रता है।

शुरुआत के लिए तीन चीज़ें काफी हैं। सोने से पहले जबड़ा ढीला करने का अभ्यास, शाम को कैफीन और शराब कम करना, और दिन में तनाव कम करने की कोई एक आदत। दो हफ्ते ईमानदारी से निभाइए और सुबह की अकड़न में फर्क खुद महसूस कीजिए। अगर दांतों में घिसाव दिखने लगा है तो डेंटिस्ट से नाइट गार्ड की बात करना भी साथ में ज़रूरी है।

रोज़ की आदतें बनाना ही सबसे मुश्किल हिस्सा है, खासकर उन हफ्तों में जब काम का दबाव ज़्यादा हो। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या और आपके तनाव के स्तर के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि यह एक और भूली हुई सलाह नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दांत पीसना (ब्रक्सिज्म) क्या होता है और यह कितना आम है? ब्रक्सिज्म का मतलब है नींद में या कभी कभी जागते हुए भी अनजाने में दांतों को भींचना या आपस में रगड़ना। यह इतना आम है कि ज़्यादातर लोगों में कभी न कभी हल्के रूप में दिखता है, खासकर तनाव भरे दौर में। समस्या तब बनती है जब यह हफ्ते में कई रातें लगातार हो और सुबह जबड़े में दर्द या सिरदर्द छोड़ जाए।

सुबह जबड़े में दर्द होना हमेशा ब्रक्सिज्म का संकेत है? नहीं, हमेशा नहीं। जबड़े का दर्द गलत तकिए पर सोने, साइनस की तकलीफ या जबड़े के जोड़ की किसी अलग समस्या से भी हो सकता है। लेकिन अगर यह दर्द लगभग हर सुबह हो, साथ में कनपटी में सिरदर्द भी हो, और परिवार के किसी सदस्य ने रात में दांत रगड़ने की आवाज़ सुनी हो, तो ब्रक्सिज्म की संभावना ज़्यादा बढ़ जाती है।

क्या तनाव कम करने से दांत पीसना अपने आप बंद हो जाता है? बहुत से मामलों में तनाव सबसे बड़ी वजह होता है, इसलिए उसे कम करना असर ज़रूर दिखाता है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि आदत पूरी तरह रुक ही जाएगी। नींद की गुणवत्ता, कैफीन और शराब की आदतें भी भूमिका निभाते हैं, इसलिए तनाव के साथ रात की आदतें भी सुधारना ज़रूरी है।

नाइट गार्ड क्या होता है और क्या हर किसी को चाहिए? नाइट गार्ड एक हल्का सुरक्षा कवर है जिसे रात में दांतों पर पहना जाता है ताकि ऊपर नीचे के दांत सीधे न रगड़ें और घिसाव कम हो। यह कारण ठीक नहीं करता, बल्कि नुकसान रोकता है। हर किसी को इसकी ज़रूरत नहीं होती, यह फैसला डेंटिस्ट जांच के बाद करते हैं।

बच्चों में दांत पीसना कितना सामान्य है, चिंता कब करें? छोटे बच्चों में सोते समय दांत पीसना काफी सामान्य है, खासकर नए दांत आने या जबड़े के विकास के दौरान, और ज़्यादातर बच्चे बड़े होते होते इसे छोड़ देते हैं। चिंता तब है जब इसके साथ ज़ोर के खर्राटे, मुंह से सांस लेना या दिन में असामान्य थकान भी दिखे।

पार्टनर न बताए तो घर पर दांत पीसने की आदत कैसे पहचानें? कुछ संकेत खुद पकड़ में आ जाते हैं, जैसे सुबह जबड़े का अकड़ा हुआ महसूस होना, कनपटी में हल्का सिरदर्द, ठंडा या मीठा खाने पर दांतों में झनझनाहट, और गाल के अंदर हल्के दांतों के निशान दिखना। अगर दो तीन संकेत बार बार दिखें, तो अगली डेंटिस्ट विज़िट पर इसका ज़िक्र करना उपयोगी रहेगा।

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय या दंत चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अगर दांतों में घिसाव या टूटन दिखे, जबड़ा खोलने में दिक्कत हो, दर्द हफ्तों से बना रहे, या बच्चे में दांत पीसने के साथ खर्राटे और सांस से जुड़े संकेत भी दिखें, तो कृपया योग्य डेंटिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दांत पीसना (ब्रक्सिज्म) क्या होता है और यह कितना आम है?+

ब्रक्सिज्म का मतलब है नींद में या कभी कभी जागते हुए भी अनजाने में दांतों को भींचना या आपस में रगड़ना। यह इतना आम है कि ज़्यादातर लोगों में कभी न कभी हल्के रूप में दिखता है, खासकर तनाव भरे दौर में। समस्या तब बनती है जब यह हफ्ते में कई रातें लगातार हो और सुबह जबड़े में दर्द या सिरदर्द छोड़ जाए। हल्का, कभी कभार होने वाला दांत पीसना अक्सर अपने आप शांत हो जाता है, लेकिन लगातार बना रहने वाला पैटर्न दांतों और जबड़े के जोड़ पर असर डाल सकता है, इसलिए इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय पहचानना ज़रूरी है।

सुबह जबड़े में दर्द होना हमेशा ब्रक्सिज्म का संकेत है?+

नहीं, हमेशा नहीं। जबड़े का दर्द गलत तकिए पर सोने, साइनस की तकलीफ, दांत में इन्फेक्शन या जबड़े के जोड़ की किसी अलग समस्या से भी हो सकता है। लेकिन अगर यह दर्द लगभग हर सुबह हो, साथ में कनपटी में सिरदर्द भी हो, और परिवार के किसी सदस्य ने रात में दांत रगड़ने या पीसने की आवाज़ सुनी हो, तो ब्रक्सिज्म की संभावना ज़्यादा बढ़ जाती है। पक्का पता डेंटिस्ट की जांच से चलता है, क्योंकि वे दांतों की सतह पर घिसाव देखकर इसकी पुष्टि कर सकते हैं।

क्या तनाव कम करने से दांत पीसना अपने आप बंद हो जाता है?+

बहुत से मामलों में तनाव सबसे बड़ी वजह होता है, इसलिए उसे कम करना असर ज़रूर दिखाता है, लेकिन इससे यह तय नहीं हो जाता कि आदत पूरी तरह रुक ही जाएगी। नींद की गुणवत्ता, कैफीन और शराब की आदतें, और कुछ मामलों में जबड़े की बनावट भी भूमिका निभाते हैं। इसलिए सबसे भरोसेमंद तरीका यह है कि तनाव कम करने के साथ साथ रात की आदतें भी सुधारी जाएं, और अगर कुछ हफ्तों बाद भी सुधार न दिखे तो डेंटिस्ट से नाइट गार्ड जैसे विकल्प पर बात की जाए।

नाइट गार्ड क्या होता है और क्या हर किसी को चाहिए?+

नाइट गार्ड एक हल्का सुरक्षा कवर है जिसे रात में दांतों पर पहना जाता है ताकि ऊपर और नीचे के दांत सीधे न रगड़ें और घिसाव कम हो। यह ब्रक्सिज्म का कारण ठीक नहीं करता, बल्कि नुकसान को रोकता है, इसलिए इसे तनाव कम करने और आदतें सुधारने के साथ साथ इस्तेमाल करना समझदारी है। हर किसी को इसकी ज़रूरत नहीं होती, यह फैसला डेंटिस्ट दांतों की जांच के बाद करते हैं, खासकर तब जब घिसाव या संवेदनशीलता दिखने लगे।

बच्चों में दांत पीसना कितना सामान्य है, चिंता कब करें?+

छोटे बच्चों में सोते समय दांत पीसना काफी सामान्य है, खासकर जब नए दांत आ रहे हों या जबड़े का विकास हो रहा हो, और ज़्यादातर बच्चे बड़े होते होते इसे अपने आप छोड़ देते हैं। चिंता की बात तब है जब इसके साथ ज़ोर से खर्राटे, मुंह से सांस लेना, या दिन में असामान्य थकान भी दिखे, क्योंकि यह मेल कभी कभी नींद में सांस से जुड़ी किसी दिक्कत की तरफ इशारा करता है। ऐसी स्थिति में बच्चों के डॉक्टर या डेंटिस्ट से बात करना सही कदम है।

पार्टनर न बताए तो घर पर दांत पीसने की आदत कैसे पहचानें?+

कुछ संकेत खुद भी पकड़ में आ जाते हैं। सुबह उठते ही जबड़े का अकड़ा हुआ या थका हुआ महसूस होना, कनपटी के आसपास हल्का सिरदर्द, ठंडा या मीठा खाने पर दांतों में अचानक झनझनाहट, और गाल के अंदर या जीभ के किनारे पर हल्के दांतों के निशान दिखना, ये सब सामान्य संकेत हैं। अगर इनमें से दो तीन संकेत बार बार दिखें, तो अगली डेंटिस्ट विज़िट पर इसका ज़िक्र करना उपयोगी रहेगा, क्योंकि दांतों की सतह देखकर वे इसकी पुष्टि आसानी से कर सकते हैं।

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