महिलाओं में कम सेक्स ड्राइव के कारण: हार्मोन, तनाव और कब डॉक्टर से मिलें
छोटा जवाब
महिलाओं में सेक्स ड्राइव कम होना कोई अकेली या दुर्लभ समस्या नहीं है, यह ज़िंदगी के किसी न किसी पड़ाव पर बहुत सी महिलाओं के साथ होता है। इसके पीछे अक्सर एक नहीं बल्कि कई वजहें एक साथ काम कर रही होती हैं, जैसे हार्मोन का बदलना, लगातार तनाव और नींद की कमी, थायराइड या पीसीओएस जैसी स्थितियां, और रिश्ते में बनी हुई दूरी या थकान।
ज़्यादातर मामलों में यह किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत नहीं, बल्कि शरीर और मन की एक समझ में आने वाली प्रतिक्रिया होती है। नींद पूरी करना, तनाव को व्यावहारिक तरीके से कम करना और साथी से खुलकर बात करना, इन तीन चीज़ों से बहुत से मामलों में कुछ हफ्तों में फर्क दिखने लगता है। लेकिन अगर यह छह महीने से ज़्यादा समय से बना हुआ है, या पीरियड्स में गड़बड़ी, दर्द या मन की लगातार उदासी के साथ आ रहा है, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से बात करना सही कदम है।
ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी और जीवनशैली से जुड़े सुझावों के लिए है और किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। सेक्स ड्राइव से जुड़े कई कारणों की पहचान सिर्फ जांच से होती है, और हर व्यक्ति में इलाज अलग हो सकता है। लगातार बने रहने वाले लक्षणों के लिए योग्य डॉक्टर या गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
सेक्स ड्राइव कम होना असल में क्या है, और इसके कारण
सेक्स ड्राइव या इच्छा कोई एक स्विच नहीं है जो बस ऑन या ऑफ होता है। यह शरीर, हार्मोन, नींद, तनाव, मन की स्थिति और रिश्ते की गुणवत्ता, इन सबके मिलने से बनने वाली एक स्थिति है। जब इनमें से एक या ज़्यादा चीज़ें असंतुलित होती हैं, तो इच्छा अपने आप कम होने लगती है, और यह शरीर की कोई खराबी नहीं बल्कि एक तरह की प्रतिक्रिया है।
यह भी समझना ज़रूरी है कि हर महिला की सेक्स ड्राइव का अपना एक सामान्य स्तर होता है, और वह ज़िंदगी भर एक जैसा नहीं रहता। पीरियड्स के चक्र के दौरान, गर्भावस्था में, डिलीवरी के बाद, स्तनपान के दौरान और मेनोपॉज़ के आसपास, इन सब पड़ावों में सेक्स ड्राइव का घटना बढ़ना पूरी तरह स्वाभाविक है। दिक्कत तब बनती है जब यह कमी बहुत लंबे समय तक बनी रहती है, अचानक और बिना किसी साफ वजह के आती है, या व्यक्ति को खुद परेशान करने लगती है। असली सवाल किसी और से तुलना करना नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह बदलाव आपके अपने सामान्य स्तर से बहुत अलग है।
शारीरिक कारण जो सबसे ज़्यादा असर डालते हैं
हार्मोन का बदलना। महिलाओं की सेक्स ड्राइव में हार्मोन की भूमिका सबसे बड़ी है। पीरियड्स का चक्र, गर्भावस्था, डिलीवरी, स्तनपान और मेनोपॉज़, इन सभी में हार्मोन का स्तर बदलता है, और हर बदलाव के साथ इच्छा भी ऊपर नीचे होती है। स्तनपान के दौरान एक खास हार्मोन का स्तर स्वाभाविक रूप से ऊंचा रहता है, जो सीधे तौर पर सेक्स ड्राइव को दबाता है, यह किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं बल्कि शरीर का सामान्य तरीका है।
थायराइड की गड़बड़ी। थायराइड हार्मोन शरीर की लगभग हर प्रक्रिया को प्रभावित करता है, ऊर्जा से लेकर मूड तक। जब यह असंतुलित होता है तो थकान, वजन में बदलाव और मन की सुस्ती के साथ सेक्स ड्राइव में कमी भी आम है। इसे सिर्फ जांच से पकड़ा जा सकता है, अंदाज़े से नहीं। हार्मोन और शरीर के बाकी सिस्टम के आपसी रिश्ते को विस्तार से समझने के लिए हार्मोनल इम्बैलेंस के लक्षण और उपाय पूरी तस्वीर देता है।
पीसीओएस। पीसीओएस में हार्मोन का असंतुलन, अनियमित पीरियड्स और शरीर की छवि को लेकर बना असहज एहसास, ये सब मिलकर सेक्स ड्राइव पर असर डाल सकते हैं। इस स्थिति में सेक्स ड्राइव कम होना अकेला लक्षण नहीं होता, बल्कि आमतौर पर वजन, त्वचा और चक्र से जुड़े दूसरे बदलावों के साथ आता है। पीसीओएस में असल में क्या होता है, यह पीसीओएस के लक्षण और कारण में विस्तार से समझाया गया है।
नींद की लगातार कमी। नींद पूरी न होने पर शरीर की ऊर्जा और हार्मोन दोनों गड़बड़ाते हैं, और थकान इतनी हावी हो जाती है कि इच्छा के लिए मानसिक जगह ही नहीं बचती।
दर्द या असहजता जुड़ी कोई स्थिति। अगर सेक्स के दौरान दर्द या सूखापन महसूस होता है, तो शरीर धीरे धीरे उस स्थिति से बचने लगता है, जो अपने आप में इच्छा को कम कर देता है। यह खास तौर पर मेनोपॉज़ के आसपास आम है।
मानसिक और रिश्ते से जुड़े कारण
शरीर की कहानी आधी कहानी है, बाकी आधा हिस्सा मन और रिश्ते का है।
लगातार तनाव। काम का दबाव, घर की ज़िम्मेदारी, पैसों की चिंता या कोई बड़ा बदलाव, तनाव के ये सभी रूप शरीर में तनाव वाला हार्मोन ऊंचा रखते हैं, और यह सीधे इच्छा से जुड़े हार्मोन को दबाता है। इसके अलावा तनाव दिमाग को हमेशा किसी न किसी सोच में उलझाए रखता है, जिससे मौजूद पल में आना, जो इच्छा जागने के लिए ज़रूरी है, मुश्किल हो जाता है।
शरीर की छवि को लेकर असहजता। डिलीवरी के बाद, वजन बढ़ने पर या किसी बीमारी के बाद शरीर बदलता है, और कई महिलाएं इस बदले हुए शरीर के साथ सहज महसूस नहीं करतीं, जो सीधे इच्छा को कम कर देता है।
रिश्ते में बनी दूरी या बिना कहे चलती नाराज़गी। जब रोज़ की बातचीत सिर्फ काम और ज़िम्मेदारियों तक सीमित रह जाती है, तो भावनात्मक नज़दीकी कम होती है, और शारीरिक इच्छा अक्सर उसी के पीछे पीछे चलती है।
मन की उदासी या लगातार बेचैनी। इस स्थिति में शरीर की लगभग हर इच्छा कम हो जाती है, खाने की, बाहर निकलने की और सेक्स ड्राइव की भी। यह चरित्र की कमज़ोरी नहीं, मन की एक स्थिति है जिसमें सही सहारे से सुधार मुमकिन है।
जानकारी पहला कदम है, रोज़ निभाना असली काम है। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी नींद, आपका तनाव और आपकी रोज़ की दिनचर्या समझकर छोटे कदम तय करते हैं, ताकि शरीर और मन दोनों को संभलने का सही मौका मिले। SuperLiving डाउनलोड करें