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गर्मियों में घमोरियां (प्रिकली हीट रैश) से राहत कैसे पाएं: घरेलू उपाय और बचाव

SuperLiving Expert Team·

गर्मियों में घमोरियां (प्रिकली हीट रैश) से राहत कैसे पाएं: घरेलू उपाय और बचाव

छोटा जवाब

अगर गर्मी के मौसम में गर्दन, पीठ, कमर या कोहनी के मोड़ पर छोटे छोटे लाल दाने निकल आए हैं और उनमें खुजली या चुभन जैसा अहसास हो रहा है, तो यह ज़्यादातर घमोरियां (प्रिकली हीट रैश) हैं, जो पसीने की नलियों के बंद होने से होती हैं.

सबसे पहला और सबसे असरदार काम है उस हिस्से को ठंडा और हवादार रखना. ढीले सूती कपड़े पहनिए, ठंडे पानी से नहाइए और मुल्तानी मिट्टी जैसा ठंडक देने वाला उपाय लगाइए. पाउडर की मोटी परत, तेल और खुजलाना, ये तीन चीज़ें हालत को बेहतर करने की बजाय बिगाड़ देती हैं. ज़्यादातर घमोरियां घर की देखभाल से दो तीन दिन में ठीक हो जाती हैं.

घमोरियां असल में होती क्यों हैं

घमोरियां त्वचा की सतह के बहुत करीब मौजूद पसीने की छोटी नलियों की समस्या हैं. जब मौसम गरम और नम होता है, शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज़्यादा पसीना बनाता है. सामान्य हालत में यह पसीना नलियों के रास्ते बाहर निकल जाता है और भाप बनकर उड़ जाता है.

लेकिन जब यह रास्ता किसी वजह से बंद हो जाता है, जैसे मरी हुई त्वचा की परत जमना, धूल मिट्टी की परत बैठना, या तंग कपड़ों का लगातार रगड़ना, तो पसीना नली के अंदर ही फंस जाता है. फंसा हुआ पसीना आसपास की त्वचा में रिसने लगता है, जिससे शरीर उसे एक हल्की जलन या एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया मानकर सूजन शुरू कर देता है. यही सूजन छोटे छोटे लाल या पानी जैसे दानों और खुजली के रूप में दिखती है.

भारत के ज़्यादातर हिस्सों में गर्मी के साथ नमी भी ज़्यादा रहती है, यही वजह है कि घमोरियां यहां मौसमी लेकिन बहुत आम समस्या हैं, खासकर तटीय और मानसून वाले इलाकों में.

एक बार घमोरियां हो जाने के बाद भी वही जगह दोबारा जल्दी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि उस हिस्से की त्वचा पहले से थोड़ी संवेदनशील हो जाती है. यही वजह है कि कुछ लोगों को हर गर्मी में एक ही जगह, जैसे गर्दन के पीछे या कमर के आसपास, बार बार घमोरियां होती दिखती हैं, जबकि बाकी शरीर पर कोई असर नहीं होता.

घमोरियों को कैसे पहचानें

घमोरियों के दिखने का तरीका सबके लिए एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ पहचान आम हैं.

छोटे, साफ पानी जैसे दाने. यह सबसे हल्की किस्म है, इसमें दाने चुभते नहीं, बस त्वचा पर बारीक बुलबुलों जैसे दिखते हैं और आसानी से मिट जाते हैं.

लाल और उभरे हुए दाने. यह ज़्यादा आम किस्म है, इसमें दानों के आसपास हल्की लाली रहती है और उनमें खुजली या चुभन साफ महसूस होती है, खासकर पसीना आने पर.

गहरी, ज़्यादा चुभने वाली किस्म. कुछ मामलों में दाने बड़े और ज़्यादा गहरे हो जाते हैं, इनमें चुभन तेज़ होती है और यह ज़्यादा समय तक बनी रह सकती है. इस किस्म में देखभाल में देरी नहीं करनी चाहिए.

आमतौर पर यह गर्दन के पीछे, पीठ, छाती के ऊपरी हिस्से, कमर, कोहनी के मोड़ और बच्चों में डायपर के आसपास सबसे ज़्यादा दिखती हैं, यानी वे जगहें जहां कपड़े त्वचा से चिपके रहते हैं और हवा सबसे कम पहुंचती है.

किन लोगों और किन हालात में खतरा ज़्यादा है

कुछ लोग और कुछ हालात घमोरियों के लिए ज़्यादा अनुकूल होते हैं.

छोटे बच्चे, जिनकी पसीने की नलियां अभी पूरी तरह विकसित नहीं होतीं. जो लोग बहुत ज़्यादा पसीना बहाते हैं, जैसे खिलाड़ी, फैक्ट्री या खेत में काम करने वाले, या रोज़ाना भारी वर्कआउट करने वाले. जो लोग तंग या सिंथेटिक कपड़े ज़्यादा पहनते हैं, क्योंकि यह कपड़े हवा को गुज़रने नहीं देते. जो बुखार में ज़्यादा पसीना बहा चुके हैं या बिस्तर पर ज़्यादा देर लेटे रहते हैं. मोटापे से जूझ रहे लोग, क्योंकि त्वचा की सिलवटों में हवा कम पहुंचती है और पसीना जमा होने की जगह ज़्यादा बनती है.

अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं, तो गर्मी के मौसम में कपड़ों और नहाने की आदतों पर थोड़ा ज़्यादा ध्यान देना फायदेमंद रहता है.

बंद, बिना खिड़की वाले कमरों में लंबे समय तक रहना और लगातार बैठे रहकर पीठ या कमर पर हवा न पहुंचना भी खतरा बढ़ाता है, चाहे व्यक्ति ज़्यादा पसीना बहाने वाले काम में न भी लगा हो. दफ्तर में लगातार कुर्सी पर बैठे रहने वालों में पीठ के निचले हिस्से पर घमोरियां होना इसी वजह से आम है.

घमोरियां और सनबर्न में फर्क समझना ज़रूरी है

बहुत से लोग गर्मी में हुई किसी भी लाली को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन घमोरियां और सनबर्न असल में दो अलग समस्याएं हैं जिनकी देखभाल भी अलग है.

सनबर्न धूप की पराबैंगनी किरणों से त्वचा को होने वाली एक असली चोट है. इसमें त्वचा गर्म लगती है, छूने पर दर्द होता है, और यह सीधे धूप में रहे हिस्सों जैसे चेहरे, बांह और कंधों पर ज़्यादा दिखता है. घमोरियां इसके बिल्कुल उलट हैं, यह बंद पसीने की नलियों की वजह से होती हैं, इनमें दर्द की जगह खुजली और चुभन होती है, और यह ज़्यादातर कपड़ों से ढके, कम हवादार हिस्सों जैसे गर्दन, पीठ और कमर पर दिखती हैं, जहां धूप सीधे पहुंचती भी नहीं.

अगर लाली धूप में रहने के बाद आई है और त्वचा गर्म व दर्द वाली लगती है, तो वह सनबर्न के करीब है, इसकी देखभाल का तरीका अलग है, जिसे सनबर्न का घरेलू इलाज में विस्तार से समझा गया है. लेकिन अगर लाली पसीने वाली, ढकी हुई जगहों पर है और खुजली मुख्य शिकायत है, तो घमोरियां ही ज़्यादा संभावित वजह हैं.

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घर पर राहत के तरीके जो असल में काम करते हैं

घमोरियों में सबसे बड़ा उपाय ठंडक और हवा है, महंगी क्रीम नहीं.

ठंडे पानी से नहाना. दिन में एक या दो बार ठंडे, सामान्य तापमान के पानी से नहाना पसीने की नलियों को खुलने में मदद करता है और तुरंत ठंडक देता है. बहुत ठंडा या बर्फीला पानी ज़रूरी नहीं.

मुल्तानी मिट्टी. मुल्तानी मिट्टी को पानी में घोलकर प्रभावित हिस्से पर पतली परत लगाइए, बीस मिनट बाद धो लीजिए. यह त्वचा को ठंडक देती है और अतिरिक्त तेल और पसीना सोख लेती है.

ठंडा, गीला सूती कपड़ा. एक साफ सूती कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर प्रभावित हिस्से पर कुछ मिनट के लिए रखिए. यह खुजली और चुभन दोनों में तुरंत आराम देता है.

हल्का, बिना खुशबू वाला एलोवेरा जेल. ताज़ा एलोवेरा का गूदा या सादा एलोवेरा जेल हल्की परत में लगाने से ठंडक मिलती है, बिना त्वचा को बंद किए.

ढीले सूती कपड़े पहनना. नहाने के बाद और दिन भर ढीले, हल्के सूती कपड़े पहनना नलियों को खुला रखने में सबसे बड़ी मदद करता है.

अंदर से ठंडक के लिए नारियल पानी और छाछ. शरीर के तापमान को अंदर से संतुलित रखने में यह पीने की चीज़ें मदद करती हैं, जिससे पसीना बहुत ज़्यादा और अचानक नहीं बनता. दिन में सामान्य से थोड़ा ज़्यादा पानी पीना भी इसी कड़ी में आता है.

जो काम नहीं करता, यह जान लेना भी ज़रूरी है

कुछ आम आदतें घमोरियों को ठीक करने की बजाय बढ़ा देती हैं.

पाउडर की मोटी परत लगाना. पाउडर पसीने के साथ मिलकर एक मोटी परत बना देता है, जो नलियों को और बंद कर सकती है. हल्की मात्रा से ज़्यादा फायदा नहीं.

तेल या मलहम जैसी चिकनाई लगाना. चिकनाई वाली चीज़ें त्वचा पर परत बना देती हैं, जिससे नमी और गर्मी अंदर ही फंस जाती है, यह ठीक उल्टा असर करता है.

नाखूनों से खुजलाना. खुजलाने से त्वचा छिल जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मामूली घमोरियां भी बिगड़ सकती हैं.

तंग या सिंथेटिक कपड़े पहनना. यह कपड़े हवा को गुज़रने नहीं देते, जिससे पसीना फंसने की समस्या बनी रहती है.

बहुत गरम पानी से नहाना. गरम पानी त्वचा को और गरम कर देता है और राहत की जगह जलन बढ़ा सकता है.

बचाव के आसान तरीके

घमोरियों से बचना उसके इलाज से कहीं आसान और सस्ता है.

हल्के, ढीले सूती कपड़े चुनिए. खासकर गर्मी और नमी वाले दिनों में सिंथेटिक की जगह सूती कपड़ों को प्राथमिकता दीजिए.

पसीना आने पर जल्दी नहाइए या कपड़े बदलिए. पसीने से भीगे कपड़ों में लंबे समय तक रहना जोखिम बढ़ाता है.

कमरे को हवादार और ठंडा रखिए. पंखा या कूलर चलाकर नमी कम करना घमोरियों को बनने से पहले ही रोकता है.

भारी वर्कआउट के बाद तुरंत नहाइए. पसीना ज़्यादा देर त्वचा पर टिका रहने से नलियां बंद होने का खतरा बढ़ता है.

बच्चों को मौसम के हिसाब से कपड़े पहनाइए, ज़रूरत से ज़्यादा गरम नहीं.

बैठने की जगह पर हवा का ध्यान रखिए. अगर काम की वजह से लंबे समय तक एक ही जगह बैठना पड़ता है, तो बीच बीच में उठकर चलना और पीठ को थोड़ी देर खुली हवा में रखना पसीना जमा होने से रोकता है.

संवेदनशील त्वचा वालों के लिए खास ध्यान

जिन लोगों की त्वचा पहले से ही संवेदनशील या जल्दी रिएक्ट करने वाली है, उनके लिए घमोरियों के दौरान चुनाव थोड़ा और सावधानी से करना पड़ता है. खुशबू वाला मुल्तानी मिट्टी पैक, तेज़ साबुन या नई क्रीम आज़माने की बजाय, त्वचा को पहले शांत होने का मौका देना बेहतर रहता है.

संवेदनशील त्वचा की देखभाल किस क्रम में करनी चाहिए और नए उत्पाद कैसे धीरे धीरे जोड़ने चाहिए, यह समझने के लिए संवेदनशील त्वचा की देखभाल की दिनचर्या पढ़ना उपयोगी रहेगा, खासकर अगर घमोरियों के साथ त्वचा बार बार जलन या लाली भी दिखा रही हो.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. रोज़ ठंडे पानी से एक से दो बार नहाइए, ढीले सूती कपड़े पहनना शुरू कीजिए, और मुल्तानी मिट्टी हफ्ते में दो तीन बार लगाइए. पाउडर की जगह हल्के एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कीजिए.

दूसरा हफ्ता. कमरे को हवादार रखने की आदत डालिए, पसीना आने पर जल्दी कपड़े बदलिए, और अगर घमोरियां किसी खास कपड़े या साबुन के इस्तेमाल के बाद बढ़ती दिख रही हैं, तो उसे अलग करके देखिए.

नापने का तरीका. रोज़ एक लाइन लिखिए, दाने कम हुए, वैसे ही रहे, या बढ़े. ज़्यादातर हल्की घमोरियां दो तीन दिन में सुधार दिखाने लगती हैं, इसलिए एक हफ्ते बाद कोई बदलाव न दिखे तो देखभाल का तरीका फिर से जांचिए.

डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी है

ज़्यादातर घमोरियां घर की देखभाल से ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ संकेत हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

अगर दानों के आसपास सूजन, मवाद या तेज़ दर्द दिखे, अगर बुखार आ जाए, अगर दाने कुछ दिनों में सुधरने की जगह बढ़ते जाएं, अगर बच्चे में यह बहुत फैली हुई हो और वह बहुत बेचैन रहे, या अगर बार बार वही घमोरियां लौटती रहें, तो यह घरेलू देखभाल की सीमा से बाहर है और डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है.

मिलाकर बात यह है

घमोरियां गर्मी और नमी की एक बहुत आम मौसमी समस्या हैं, और इनका सबसे बड़ा इलाज ठंडक, हवा और थोड़ा धैर्य है. आपको महंगी क्रीम नहीं चाहिए, बस ढीले सूती कपड़े, ठंडे पानी से नहाना, मुल्तानी मिट्टी जैसा हल्का उपाय, और खुजलाने से बचना काफी है.

असली फर्क तब पड़ता है जब यह आदतें सिर्फ घमोरियां होने पर नहीं, बल्कि गर्मी के पूरे मौसम में बनी रहें. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या, कपड़ों की आदत और पसीने से जुड़ी दिक्कतों के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि यह जानकारी सिर्फ एक और लेख न रहकर रोज़ निभाने लायक आदत बने.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घमोरियां असल में होती क्यों हैं? घमोरियां तब होती हैं जब पसीना निकलने वाली छोटी नलियां किसी वजह से बंद हो जाती हैं और पसीना त्वचा के नीचे ही फंस जाता है. यह बंदिश धूल-मिट्टी, मरी हुई त्वचा की परत, तंग कपड़ों की रगड़ या बहुत ज़्यादा नमी वाले मौसम की वजह से होती है. फंसा हुआ पसीना आसपास की त्वचा में सूजन पैदा करता है, जिससे छोटे दाने, खुजली और जलन जैसा अहसास होता है.

घमोरियां और सनबर्न में क्या फर्क है, दोनों में तो त्वचा लाल हो जाती है? देखने में दोनों में लाली आती है, लेकिन वजह अलग है. सनबर्न धूप की किरणों से त्वचा के जलने की चोट है, इसमें त्वचा गर्म लगती है और दर्द होता है. घमोरियां बंद पसीने की नलियों से होती हैं, इसमें दर्द की जगह खुजली और चुभन होती है, और यह अक्सर कपड़ों से ढके, कम हवादार हिस्सों पर दिखती हैं जहां धूप सीधे पहुंचती भी नहीं.

क्या घमोरियों में पाउडर लगाना सही तरीका है? साधारण पाउडर से कुछ लोगों को थोड़ी सूखी राहत लगती है, लेकिन यह पसीने के साथ मिलकर मोटी परत बना देता है, जो नलियों को और बंद कर देती है. मुल्तानी मिट्टी या ठंडा सूती कपड़ा इस्तेमाल करना कहीं ज़्यादा भरोसेमंद तरीका है.

घमोरियां ठीक होने में सामान्यतः कितना समय लगता है? अगर तुरंत ठंडक और हवादार माहौल मिल जाए, तो हल्की घमोरियां दो से तीन दिन में अपने आप कम होने लगती हैं. ज़्यादा गंभीर या बार बार लौटने वाली घमोरियों में ठीक होने में एक हफ्ते तक का समय लग सकता है.

बच्चों को घमोरियां ज़्यादा क्यों होती हैं? बच्चों की पसीने की नलियां अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती और उनकी त्वचा भी ज़्यादा नाज़ुक होती है. साथ ही उन्हें अक्सर मौसम से ज़्यादा गरम कपड़े पहनाए जाते हैं, जिससे पसीना फंसने की संभावना बढ़ जाती है. हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनाने से घमोरियां काफी हद तक कम हो जाती हैं.

क्या घमोरियों को खुजलाना नुकसान पहुंचा सकता है? हां, खुजलाना सबसे आम गलती है. नाखूनों से खुजलाने पर त्वचा छिल जाती है, जिससे बैक्टीरिया अंदर जाने का रास्ता बन जाता है और मामूली घमोरियां भी संक्रमण में बदल सकती हैं. खुजली ज़्यादा हो तो ठंडा गीला कपड़ा रखना ज़्यादा सुरक्षित है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर दानों के आसपास सूजन, मवाद, तेज़ दर्द या बुखार दिखे, या घमोरियां बार बार लौटती रहें, तो कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. यहां बताए गए घरेलू उपाय हल्की घमोरियों के लिए हैं, संक्रमण या गंभीर लक्षणों के लिए नहीं.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घमोरियां असल में होती क्यों हैं?+

घमोरियां तब होती हैं जब पसीना निकलने वाली छोटी नलियां किसी वजह से बंद हो जाती हैं और पसीना त्वचा के नीचे ही फंस जाता है. यह बंदिश धूल-मिट्टी, मरी हुई त्वचा की परत, तंग कपड़ों की रगड़ या बहुत ज़्यादा नमी वाले मौसम की वजह से होती है. जब पसीना बाहर नहीं निकल पाता, तो वह आसपास की त्वचा में सूजन पैदा करता है, जिससे छोटे छोटे दाने, खुजली और कई बार जलन जैसा अहसास होता है. यही वजह है कि घमोरियां हमेशा उन्हीं जगहों पर ज़्यादा दिखती हैं जहां पसीना सबसे ज़्यादा जमा होता है और हवा सबसे कम पहुंचती है.

घमोरियां और सनबर्न में क्या फर्क है, दोनों में तो त्वचा लाल हो जाती है?+

देखने में दोनों में लाली आती है, लेकिन वजह और अहसास पूरी तरह अलग हैं. सनबर्न धूप की पराबैंगनी किरणों से त्वचा के जलने की चोट है, इसमें त्वचा गर्म लगती है, दर्द होता है और कई बार फफोले भी पड़ जाते हैं. घमोरियां इसके उलट बंद पसीने की नलियों से होती हैं, इसमें दर्द की जगह खुजली और चुभन जैसा अहसास होता है, और यह अक्सर कपड़ों से ढके, कम हवादार हिस्सों जैसे गर्दन, पीठ और कमर के आसपास दिखती हैं जहां धूप सीधे पहुंचती भी नहीं. अगर त्वचा धूप में रहने के बाद गर्म और दर्द वाली है तो वह सनबर्न के करीब है, और उसके लिए अलग देखभाल चाहिए.

क्या घमोरियों में पाउडर लगाना सही तरीका है?+

साधारण टैल्कम पाउडर से कुछ लोगों को थोड़ी सूखी राहत लगती है, लेकिन यह अक्सर पसीने के साथ मिलकर एक मोटी परत बना देता है, जो असल में पसीने की नलियों को और बंद कर देती है. इससे कुछ घंटों की राहत के बाद घमोरियां पहले से ज़्यादा बढ़ सकती हैं. मुल्तानी मिट्टी या हल्का ठंडा सूती कपड़ा इस्तेमाल करना कहीं ज़्यादा भरोसेमंद तरीका है, क्योंकि यह त्वचा को बंद करने की बजाय ठंडक देता है.

घमोरियां ठीक होने में सामान्यतः कितना समय लगता है?+

अगर तुरंत ठंडक और हवादार माहौल मिल जाए, तो हल्की घमोरियां दो से तीन दिन में अपने आप कम होने लगती हैं. ज़्यादा गंभीर या बार बार लौटने वाली घमोरियों में, खासकर जहां त्वचा खुजलाने से छिल गई हो, ठीक होने में एक हफ्ते तक का समय लग सकता है. जितनी जल्दी तंग कपड़े हटाकर हवादार और ठंडी जगह का इंतज़ाम किया जाए, उतनी तेज़ी से राहत मिलती है.

बच्चों को घमोरियां ज़्यादा क्यों होती हैं?+

बच्चों की पसीने की नलियां अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती और उनकी त्वचा भी ज़्यादा नाज़ुक होती है, इसलिए वे बड़ों के मुकाबले घमोरियों के लिए ज़्यादा संवेदनशील होते हैं. साथ ही बच्चों को अक्सर मौसम से ज़्यादा गरम कपड़े पहनाए जाते हैं या डायपर की वजह से कमर के आसपास हवा कम पहुंचती है, जिससे पसीना फंसने की संभावना और बढ़ जाती है. हल्के, ढीले सूती कपड़े और ठंडी जगह रखने से बच्चों में घमोरियां काफी हद तक कम हो जाती हैं.

क्या घमोरियों को खुजलाना नुकसान पहुंचा सकता है?+

हां, खुजलाना सबसे आम गलती है जो हालत बिगाड़ देती है. नाखूनों से खुजलाने पर पहले से संवेदनशील त्वचा छिल जाती है, जिससे बैक्टीरिया अंदर जाने का रास्ता बन जाता है और मामूली घमोरियां संक्रमण में बदल सकती हैं. खुजली ज़्यादा हो तो हल्के हाथों से ठंडा गीला कपड़ा रखना या हल्के हाथों से थपथपाना ज़्यादा सुरक्षित तरीका है, नाखूनों से रगड़ने की बजाय.

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