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झाइयां जल्दी आने के कारण: चेहरे पर मेलास्मा क्यों और कैसे बनती हैं

SuperLiving Expert Team·

झाइयां जल्दी आने के कारण, और जो असल में समझना ज़रूरी है

आईने में अचानक गालों पर या माथे पर एक जैसा फैला हुआ हल्का भूरा रंग दिखे, तो पहला सवाल यही आता है कि यह पिंपल का दाग है या धूप की कालिमा। असल में यह अक्सर इनमें से कोई नहीं होता, यह झाइयां होती हैं, और झाइयां चेहरे के आम दाग धब्बों से अलग तरीके से बनती और व्यवहार करती हैं।

यह गाइड इसी फर्क को साफ करेगी। हम समझेंगे कि झाइयां असल में हैं क्या, ये कम उम्र में जल्दी क्यों आ जाती हैं, कौन से घरेलू उपाय सच में मदद करते हैं, कौन सी बातें सिर्फ मिथक हैं, और कब त्वचा विशेषज्ञ के पास जाना ज़रूरी हो जाता है।

झाइयां असल में हैं क्या

झाइयों को अक्सर सामान्य दाग धब्बों जैसा समझ लिया जाता है, पर यह गलती महंगी पड़ती है क्योंकि दोनों का इलाज एक जैसा नहीं है।

सामान्य दाग धब्बे ज़्यादातर किसी एक चोट या पिंपल की प्रतिक्रिया में बनते हैं, यानी किसी एक जगह का निशान। झाइयां इससे अलग हैं। यह त्वचा के मेलेनिन बनाने वाले सेल्स के ज़्यादा सक्रिय हो जाने से बनती हैं, और यह सक्रियता चेहरे के दोनों तरफ लगभग एक जैसी शक्ल में दिखती है। इसीलिए झाइयां आमतौर पर दोनों गालों, माथे, नाक के ऊपरी हिस्से और कभी कभी ऊपरी होंठ के पास एक जैसे, फैले हुए पैच की तरह नज़र आती हैं।

यह सममित पैटर्न ही सबसे बड़ा संकेत है। अगर दाग सिर्फ एक तरफ है या किसी एक बिंदु जैसा है, तो वह शायद पुराना पिंपल का निशान है। अगर वह चेहरे के दोनों तरफ लगभग एक जैसी जगह पर, एक जैसी शक्ल में फैला है, तो झाइयों की संभावना ज़्यादा है।

एक और फर्क यह है कि झाइयां अक्सर मौसम और हार्मोन के साथ बदलती रहती हैं। गर्मियों में या धूप में ज़्यादा समय बिताने के बाद ये गहरी हो सकती हैं, और सर्दियों में या धूप से बचाव बढ़ाने पर थोड़ी हल्की भी पड़ सकती हैं। सामान्य दाग धब्बे इतनी आसानी से मौसम के साथ नहीं बदलते, वे ज़्यादातर एक बार बनने के बाद धीरे धीरे अपने आप फीके पड़ते हैं। यही उतार चढ़ाव झाइयों को पहचानने का एक और तरीका है।

जल्दी झाइयां आने के असली कारण

बीस या तीस की उम्र में ही झाइयां दिखने लगें, तो आमतौर पर इनमें से कई वजहें साथ मिलकर काम कर रही होती हैं।

धूप और गर्मी का मिला जुला असर। ज़्यादातर लोग सिर्फ यूवी किरणों को दोष देते हैं, पर सच पूरा नहीं है। चेहरे की त्वचा में गर्मी बढ़ना, चाहे वह धूप से हो या रसोई के चूल्हे, हीटर या तेज़ रोशनी वाले उपकरणों से, मेलेनिन बनाने वाले सेल्स को उकसाता है। यही वजह है कि सिर्फ छांव में रहने वाले लोगों में भी झाइयां दिख सकती हैं, अगर वे रोज़ चूल्हे के पास लंबा समय बिताते हैं।

हार्मोनल बदलाव। प्रेगनेंसी सबसे जाना पहचाना ट्रिगर है, इतना कि कई जगह झाइयों को प्रेगनेंसी का मास्क भी कहा जाता है। इसके अलावा कुछ गर्भनिरोधक तरीके और थायराइड की गड़बड़ी भी हार्मोन के स्तर को बदलकर झाइयों को जन्म दे सकते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन मेलेनिन बनाने वाले सेल्स को सीधा प्रभावित करते हैं, इसलिए जब भी शरीर में इनका संतुलन बदलता है, चेहरे की रंगत पर उसका असर सबसे पहले दिखता है। थायराइड और वज़न के बीच के रिश्ते को समझने के लिए थायराइड में वजन कैसे कम करें वाली गाइड एक अच्छी शुरुआत है, क्योंकि दोनों समस्याओं की जड़ अक्सर एक ही जगह होती है।

जेनेटिक झुकाव। अगर परिवार में मां, नानी या बहन को झाइयां रही हैं, तो यह झुकाव अगली पीढ़ी में भी दिखने की संभावना बढ़ जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि झाइयां आनी ही हैं, पर इसका मतलब यह है कि धूप से बचाव जैसी आदतें ऐसे परिवारों में और ज़्यादा ज़रूरी हो जाती हैं, क्योंकि जिस त्वचा में झुकाव पहले से मौजूद है, उसमें कम ट्रिगर से भी ज़्यादा असर दिख सकता है।

कुछ प्रोडक्ट और परफ्यूम। कुछ साबुन, परफ्यूम और स्किन प्रोडक्ट में मौजूद तत्व त्वचा को धूप के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बना देते हैं। इन्हें लगाकर तुरंत तेज़ धूप में निकलने से त्वचा पर असामान्य पैच बन सकते हैं, जो बाद में झाइयों जैसे ही दिखते हैं। इसीलिए नया परफ्यूम या साबुन आज़माने के तुरंत बाद तेज़ धूप में निकलने से बचना एक छोटी पर उपयोगी आदत है।

लगातार तनाव। तनाव के दौरान बढ़ने वाला कॉर्टिसोल हार्मोन शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है, और त्वचा भी इससे अछूती नहीं। लंबे समय के तनाव में झाइयां और तेज़ी से गहरी हो सकती हैं, और नींद की कमी इस असर को और बढ़ा देती है क्योंकि शरीर को त्वचा की मरम्मत का पूरा समय नहीं मिलता।

किन लोगों में झाइयों का खतरा ज़्यादा है

प्रेगनेंसी और उसके बाद के महीनों में महिलाएं, थायराइड या हार्मोनल गड़बड़ी से जूझ रहे लोग, जिनके परिवार में झाइयों का इतिहास रहा हो, दिन का ज़्यादातर समय बाहर धूप में या रसोई की गर्मी में बिताने वाले लोग, और गहरे रंग की त्वचा वाले लोग जिनमें मेलेनिन बनाने वाले सेल्स वैसे भी ज़्यादा सक्रिय होते हैं, इन सबमें झाइयों का खतरा बाकियों से ज़्यादा रहता है।

अगर आप इनमें से किसी समूह में आते हैं, तो धूप से बचाव जैसी आदतें विकल्प नहीं, बुनियाद मानी जानी चाहिए। इंतज़ार करने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि झुकाव जितना ज़्यादा हो, उतनी जल्दी आदतें शुरू करने का असर उतना ही बड़ा होता है।

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जो घरेलू उपाय सच में मदद कर सकते हैं

अब बात उस चीज़ की जो सबसे ज़्यादा पूछी जाती है, घर पर क्या किया जा सकता है। ईमानदार जवाब यह है कि घरेलू उपाय हल्की और नई झाइयों पर धीरे धीरे कुछ फर्क ला सकते हैं, पर ये चमत्कार नहीं करते।

धूप से बचाव, सबसे ज़रूरी कदम। रोज़ सुबह एसपीएफ तीस या उससे ऊपर वाला सनस्क्रीन लगाना, चाहे धूप निकली हो या न निकली हो, झाइयों को रोकने का सबसे असरदार तरीका है। साथ में छाता, टोपी या स्कार्फ से चेहरा ढककर निकलना और दोपहर की सीधी धूप से बचना भी उतना ही ज़रूरी है। सनस्क्रीन को सिर्फ बाहर निकलते समय याद रखना काफी नहीं, खिड़की के पास बैठकर काम करने वालों को भी घर के अंदर इसे लगाना चाहिए, क्योंकि कांच यूवी किरणों को पूरी तरह नहीं रोकता।

गर्मी से भी बचाव। सिर्फ धूप नहीं, रसोई के चूल्हे के पास लंबे समय काम करते वक्त चेहरे को थोड़ा दूर रखना और तेज़ हीटर के सामने ज़्यादा देर न बैठना भी मददगार है। गर्म पानी से लंबे समय तक चेहरा धोना या भाप लेना भी त्वचा में गर्मी बढ़ाता है, इसलिए इसे हफ्ते में एक दो बार तक सीमित रखना बेहतर है।

सौम्य देखभाल। दिन में दो बार हल्के क्लींज़र से चेहरा धोना और उसके बाद मॉइस्चराइज़र लगाना त्वचा की सुरक्षा परत को मज़बूत रखता है। कड़े स्क्रब और बार बार रगड़ना त्वचा में जलन बढ़ाता है, और जलन झाइयों को और गहरा कर सकती है। तौलिये से रगड़ने के बजाय चेहरे को थपथपाकर सुखाना भी इसी वजह से बेहतर आदत है।

एलोवेरा जैसी सौम्य चीज़ें। ताज़ा एलोवेरा जेल त्वचा को शांत करने में मदद कर सकता है, पर यह झाइयां मिटाता नहीं, बस त्वचा की जलन कम करता है ताकि वह बेहतर तरीके से ठीक हो सके। खीरे के ठंडे टुकड़े या गुलाब जल जैसी सौम्य चीज़ें भी इसी तरह त्वचा को राहत देती हैं, चमत्कार नहीं करतीं। बाकी त्वचा की सेहत से जुड़ी आदतें समझने के लिए ग्लोइंग स्किन के घरेलू उपाय वाली गाइड भी काम की है।

नींद और खानपान। पूरी नींद और सब्ज़ियों, फलों से भरी थाली त्वचा को अंदर से मरम्मत का मौका देती है। इसका सीधा असर झाइयों पर नहीं दिखता, पर यह त्वचा को हर तरह की जलन और गड़बड़ी से जल्दी उबरने में मदद करता है।

धैर्य। झाइयों में फर्क दिखने में हफ्तों नहीं, महीनों लगते हैं। ज़्यादातर लोग तभी उपाय छोड़ देते हैं जब वह असल में काम कर रहा होता है, बस नतीजा धीमा होता है।

जो चीज़ें झाइयों को बदतर बना देती हैं

चेहरे पर सीधे नींबू का रस लगाना एक बहुत आम पर गलत सलाह है। नींबू त्वचा को धूप के प्रति और संवेदनशील बना देता है, और उसके बाद धूप में निकलने से झाइयां घटने की बजाय बढ़ सकती हैं। इसी तरह घर पर बनाए गए तेज़ ब्लीच जैसे नुस्खे और कड़े रगड़ने वाले स्क्रब त्वचा में जलन पैदा करते हैं, जो मेलेनिन बनने को और उकसाती है।

कोई भी ऐसा दावा जो कहे कि कुछ ही दिनों में झाइयां पूरी तरह मिटा देगा, संदेह के साथ देखिए। झाइयां धीरे बनती हैं और धीरे ही हल्की होती हैं, इसमें शॉर्टकट नहीं है।

झाइयां और झुर्रियां, अलग समस्याएं हैं

बहुत बार दोनों को एक साथ जोड़कर देखा जाता है क्योंकि दोनों उम्र के साथ दिखाई देने वाली त्वचा की चिंताएं हैं, लेकिन ये बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। झाइयां रंगत का मामला हैं, यानी त्वचा किस जगह कितना मेलेनिन बना रही है। झुर्रियां बनावट का मामला हैं, यानी त्वचा की लचक और कसाव कितना बचा है। एक व्यक्ति में सिर्फ झाइयां हो सकती हैं, सिर्फ झुर्रियां हो सकती हैं, या दोनों साथ हो सकती हैं, और दोनों के कारण भी अलग होते हैं। अगर आपको महीन रेखाओं और त्वचा के ढीलेपन की चिंता ज़्यादा है, तो झुर्रियां कैसे हटाएं वाली गाइड उस समस्या को अलग से विस्तार से समझाती है।

एक आसान हफ्ते का ढांचा

पहले तीन दिन, सिर्फ एक बदलाव जोड़िए, रोज़ सुबह सनस्क्रीन लगाना, चाहे कहीं भी जाना हो या नहीं। इसे टालने की आदत यहीं से टूटनी चाहिए।

अगले तीन दिन, दूसरा बदलाव जोड़िए, चेहरे को धोने और मॉइस्चराइज़ करने का एक तय समय बनाइए, सुबह और रात, बिना जल्दबाज़ी और बिना ज़ोर से रगड़े।

हफ्ते के आखिरी दिन, अपने चेहरे को ध्यान से देखिए, क्या कोई पैच पहले से हल्का लग रहा है, क्या कोई जगह नई दिख रही है। यह नापने का सबसे आसान तरीका है, और इसे हर हफ्ते दोहराना असली फर्क दिखाता है।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है

अगर झाइयां बहुत तेज़ी से फैल रही हों, अगर महीनों की सही धूप से बचाव के बाद भी कोई सुधार न दिखे, अगर झाइयों के साथ साथ पीरियड अनियमित हों, बाल असामान्य रूप से झड़ रहे हों या लगातार थकान बनी रहती हो, तो यह सिर्फ घरेलू देखभाल का मामला नहीं रह जाता। ऐसे में पीछे कोई हार्मोनल या थायराइड जैसी वजह हो सकती है, और सही जांच के लिए त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।

मिलाकर बात यह है

झाइयां सामान्य दाग धब्बों जैसी नहीं हैं, इनकी वजहें अलग हैं और इनका व्यवहार भी अलग है। धूप और गर्मी से बचाव, सौम्य त्वचा देखभाल और धैर्य, यही तीन चीज़ें सबसे बड़ा फर्क डालती हैं, और इनमें से किसी के लिए महंगे प्रोडक्ट की ज़रूरत नहीं।

मुश्किल हिस्सा जानकारी नहीं, यह सब हफ्ते दर हफ्ते निभाना है। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी त्वचा और आपकी दिनचर्या के हिसाब से इसे छोटे और आसान कदमों में बांटते हैं, ताकि यह एक और भूली हुई सलाह नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक आदत बने।

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SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अगर झाइयां तेज़ी से बढ़ रही हों, महीनों की सही देखभाल के बाद भी कोई फर्क न दिख रहा हो, या इनके साथ हार्मोनल लक्षण भी मौजूद हों, तो कृपया योग्य त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

झाइयां और सामान्य दाग धब्बों में क्या फर्क है?+

सामान्य दाग धब्बे ज़्यादातर एक अकेली जगह के निशान होते हैं, जैसे किसी पिंपल के ठीक होने के बाद बचा काला धब्बा। झाइयां इससे अलग हैं। ये आमतौर पर दोनों गालों, माथे, नाक और कभी कभी ऊपरी होंठ पर एक जैसी, फैली हुई और सममित पैच की तरह दिखती हैं, यानी चेहरे के दोनों तरफ लगभग एक जैसी शक्ल में। यह फर्क समझना ज़रूरी है क्योंकि झाइयों के पीछे की वजहें और उनका व्यवहार सामान्य दाग धब्बों से अलग होता है, और इसीलिए इलाज का तरीका भी अलग होता है।

झाइयां किन कारणों से जल्दी आती हैं?+

सबसे बड़ी वजह धूप और गर्मी का मिला जुला असर है, अकेली यूवी किरणें नहीं बल्कि चेहरे की त्वचा में गर्मी बढ़ना भी इसमें भूमिका निभाता है। इसके साथ हार्मोनल बदलाव, जैसे प्रेगनेंसी, कुछ गर्भनिरोधक तरीके या थायराइड की गड़बड़ी, झाइयों को ट्रिगर करते हैं। परिवार में अगर मां या बहन को झाइयां रही हों तो जेनेटिक झुकाव भी एक वजह है। कुछ परफ्यूम, स्किन प्रोडक्ट या साबुन में मौजूद तत्व धूप के साथ मिलकर त्वचा को ज़्यादा संवेदनशील बना देते हैं, और यह भी झाइयों को बढ़ावा देता है।

क्या धूप के बिना भी झाइयां हो सकती हैं?+

पूरी तरह धूप के बिना बहुत कम होता है, लेकिन सिर्फ यूवी किरणें ही एकमात्र ट्रिगर नहीं हैं। रसोई के चूल्हे की गर्मी, हीटर के पास लंबे समय बैठना और मोबाइल या लैपटॉप की तेज़ रोशनी में लंबे समय स्क्रीन के पास चेहरा रखना भी त्वचा में उसी तरह की गर्मी बढ़ाता है जो मेलेनिन बनने को उकसाती है। यही वजह है कि सिर्फ धूप से बचना काफी नहीं, चेहरे को हर तरह की तेज़ गर्मी और तेज़ रोशनी से बचाना भी मायने रखता है।

प्रेगनेंसी के बाद झाइयां अपने आप चली जाती हैं क्या?+

कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद हार्मोन सामान्य होने के साथ झाइयां अपने आप हल्की पड़ जाती हैं, लेकिन यह हर किसी के साथ नहीं होता और इसमें महीनों लग सकते हैं। जिन महिलाओं में झाइयां गहरी हो चुकी हैं, उनमें ये अपने आप पूरी तरह नहीं जातीं और धूप से बचाव के साथ साथ किसी त्वचा विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी हो जाती है। डिलीवरी के बाद वजन और सेहत से जुड़े बदलावों को समझने के लिए [डिलीवरी के बाद वजन कम करने के तरीके](/blog/delivery-ke-baad-vajan-kam-kare) वाली गाइड भी उपयोगी रहेगी।

घरेलू उपायों से झाइयां कितनी हल्की हो सकती हैं?+

ईमानदार जवाब यह है कि हल्की और नई झाइयों पर सही धूप से बचाव और सौम्य देखभाल से कुछ हद तक फर्क दिख सकता है, लेकिन गहरी और पुरानी झाइयां घरेलू नुस्खों से पूरी तरह नहीं जातीं। घरेलू देखभाल का असली काम रोकथाम है, यानी नई झाइयां बनने से रोकना और मौजूद झाइयों को और गहरा होने से बचाना। जो झाइयां सालों से जमी हैं उनके लिए त्वचा विशेषज्ञ के पास मौजूद तरीके कहीं ज़्यादा असरदार होते हैं।

झाइयों के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?+

अगर झाइयां बहुत तेज़ी से फैल रही हों, अचानक बहुत गहरी हो गई हों, महीनों की सही धूप से बचाव के बाद भी कोई फर्क न दिख रहा हो, या इनके साथ अनियमित पीरियड, बालों का असामान्य झड़ना या थकान जैसे लक्षण भी हों, तो घरेलू उपायों में और समय न लगाएं। ऐसी स्थिति में पीछे कोई हार्मोनल या थायराइड जैसी वजह हो सकती है, जिसकी जांच ज़रूरी है, और त्वचा विशेषज्ञ सही दिशा बता सकते हैं।

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