गर्दन का दर्द का घरेलू इलाज: कारण, राहत के तरीके और कब डॉक्टर से मिलें
छोटा जवाब
अगर आपकी गर्दन दिन के आखिर में जकड़ जाती है, सिर घुमाने में अकड़न महसूस होती है, या सुबह उठते ही गर्दन भारी लगती है, तो ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह कोई बड़ी बीमारी नहीं बल्कि दिनभर की मुद्रा और आदतें होती हैं।
सबसे बड़ा उपाय भी उतना ही सीधा है। फोन और लैपटॉप की स्क्रीन को आंखों की ऊंचाई पर रखें, सही तकिए पर सोएं, हर आधे घंटे में गर्दन को थोड़ा घुमाकर आराम दें, और हल्की स्ट्रेचिंग को रोज़ की आदत बनाएं। अगर दर्द हाथ तक फैलने लगे, सुन्नपन महसूस हो या किसी चोट के बाद शुरू हुआ हो, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर से मिलना ज़रूरी हो जाता है।
गर्दन में दर्द क्यों होता है
गर्दन शरीर का वह हिस्सा है जो दिनभर सिर का पूरा वजन संभालता है, इसलिए यह छोटी सी गड़बड़ी पर भी जल्दी थक जाती है।
सबसे आम कारण है लगातार झुकी हुई मुद्रा। फोन में घंटों नीचे देखना, लैपटॉप की स्क्रीन नीचे रखकर काम करना, या किताब पढ़ते समय गर्दन को बहुत देर तक एक ही कोण पर रखना, यह सब गर्दन की मांसपेशियों पर बेवजह दबाव डालता है। इसके अलावा गलत तकिए पर सोना, पेट के बल सोकर सिर को घंटों एक तरफ मोड़े रखना, और लंबी यात्रा में गाड़ी या बस में गर्दन को बिना सहारे झुकाए सो जाना भी दर्द की बड़ी वजहें हैं।
तनाव भी गर्दन के दर्द में छिपा हुआ किरदार निभाता है। जब मन पर दबाव होता है, तो गर्दन और कंधों की मांसपेशियाँ अपने आप कसने लगती हैं, अक्सर हमें इसका पता भी नहीं चलता। यही वजह है कि तनाव भरे दिनों के बाद गर्दन का दर्द अचानक बढ़ जाता है, बिना किसी नई चोट या गलती के।
किन आदतों से दर्द बढ़ता है
कुछ आदतें ऐसी हैं जो दर्द को शुरू भी करती हैं और उसे लंबा भी खींचती हैं।
फोन को नीचे रखकर घंटों देखना। इसे अक्सर टेक नेक कहा जाता है। सिर को हर बार नीचे झुकाने पर गर्दन पर सामान्य से कई गुना ज़्यादा भार पड़ता है, और यह भार घंटों जमा होकर दर्द बन जाता है।
लैपटॉप की स्क्रीन बहुत नीचे रखना। जब स्क्रीन आंखों से नीचे होती है, तो गर्दन पूरे दिन झुकी रहती है, बिना इसका एहसास हुए भी।
बिना सहारे फोन कान और कंधे के बीच फंसाकर बात करना। यह गर्दन की एक तरफ की मांसपेशियों पर असामान्य दबाव डालता है और कुछ ही मिनटों में दर्द शुरू कर सकता है।
गलत तकिया या पेट के बल सोना। यह रातभर गर्दन को गलत कोण पर रखता है, इसलिए सुबह उठते ही दर्द या अकड़न महसूस होती है।
एक ही मुद्रा में घंटों बैठे रहना। चाहे वजह पढ़ाई हो, काम हो या यात्रा, बिना हिले-डुले लंबे समय तक बैठना मांसपेशियों को कमज़ोर और कड़ा बना देता है।
सही मुद्रा और तकिए का चुनाव
बहुत सी दिक्कतें सिर्फ मुद्रा ठीक करने से हल हो जाती हैं, और यह किसी खर्चे की मांग भी नहीं करती।
फोन को ऊपर उठाकर देखें। सिर झुकाने के बजाय फोन को आंखों की सीध में ऊपर लाएं। शुरुआत में हाथ थकेंगे, लेकिन गर्दन को बड़ी राहत मिलेगी।
लैपटॉप की ऊंचाई बढ़ाएं। किताबों या स्टैंड का सहारा लेकर स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों की ऊंचाई पर लाएं, और अलग कीबोर्ड-माउस इस्तेमाल करें ताकि हाथों की मुद्रा भी सही रहे। वर्क फ्रॉम होम में कमर के दर्द से राहत वाली गाइड में डेस्क सेटअप के बाकी हिस्से भी विस्तार से बताए गए हैं।
सही तकिया चुनें। ऐसा तकिया जो सिर, गर्दन और रीढ़ को एक सीधी लाइन में रखे, न बहुत ऊंचा न बहुत सपाट। पेट के बल सोने की आदत धीरे धीरे करवट या पीठ के बल सोने में बदलने की कोशिश करें।
बैठते समय कुर्सी की ऊंचाई देखें। कुर्सी इतनी ऊंची या नीची न हो कि गर्दन को स्क्रीन देखने के लिए ऊपर या नीचे झुकना पड़े। स्क्रीन, आंखें और कुर्सी की ऊंचाई एक सीध में होनी चाहिए।
घर पर राहत पाने के तरीके
अगर दर्द हल्का है और किसी चोट से नहीं जुड़ा, तो कुछ सरल घरेलू तरीके अच्छी राहत दे सकते हैं।
सिकाई। नई चोट या सूजन में ठंडी सिकाई पहले एक दो दिन आराम देती है। पुराने या अकड़न वाले दर्द में गर्म सिकाई बेहतर काम करती है क्योंकि यह मांसपेशियों को ढीला करती है। सिकाई हमेशा कपड़े में लपेटकर करें और पंद्रह से बीस मिनट से ज़्यादा न रखें।
हल्की मालिश। गर्दन और कंधों पर हल्के हाथों से गोलाई में मालिश करने से जकड़न कम होती है। किसी सादे तेल को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल करना और भी आराम देता है, लेकिन दबाव हल्का ही रखें।
गर्म पानी से नहाना। गुनगुने पानी से नहाते समय पानी की धार गर्दन और कंधों पर कुछ मिनट रखने से मांसपेशियों की जकड़न में फर्क महसूस होता है।
पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी मांसपेशियों की जकड़न को बढ़ा सकती है, इसलिए दिनभर पानी पीते रहना छोटा लेकिन असरदार कदम है।