स्किन टैग्स होने का कारण और घरेलू देखभाल: कब डॉक्टर से हटवाना ज़रूरी है

SuperLiving Expert Team·

स्किन टैग्स होने का कारण और घरेलू देखभाल: कब डॉक्टर से हटवाना ज़रूरी है

छोटा जवाब

अगर गर्दन, बगल, पलकों के पास या पेट की किसी सिलवट में एक छोटा, मुलायम, त्वचा के रंग का उभार दिखा है जो न दर्द करता है न बढ़ता हुआ महसूस होता है, तो यह ज़्यादातर मामलों में स्किन टैग है, कोई गंभीर बीमारी नहीं. यह उभार त्वचा की ऊपरी परत का एक हानिरहित बढ़ाव है जो घर्षण, उम्र और कुछ हद तक हार्मोन के बदलाव से जुड़ा होता है.

घर पर सबसे ज़रूरी काम है जगह को साफ और सूखा रखना, तंग कपड़ों या गहनों का घर्षण कम करना, और खुद से धागे, कैंची या ब्लेड से काटने की कोशिश न करना. अगर टैग बड़ा हो रहा है, बार बार कपड़ों में उलझता है, रंग या आकार बदल रहा है, या दिखने में असहज लगता है, तो क्लीनिक में कुछ मिनट की प्रक्रिया से इसे सुरक्षित तरीके से हटवाया जा सकता है.

स्किन टैग्स क्या होते हैं और क्यों बनते हैं

स्किन टैग यानी एक्रोकॉर्डन त्वचा की ऊपरी परत का एक छोटा, मुलायम और अक्सर लटका हुआ सा उभार होता है. इसका रंग आमतौर पर आसपास की त्वचा जैसा या थोड़ा गहरा होता है, और यह आकार में एक चावल के दाने से लेकर मटर के दाने जितना हो सकता है, कुछ मामलों में इससे भी बड़ा.

इसके बनने की सबसे बड़ी वजह लगातार घर्षण मानी जाती है. जहां त्वचा से त्वचा या त्वचा से कपड़ा बार बार रगड़ता है, जैसे गर्दन पर चेन का घिसना, बगल में कपड़े का रगड़ना, पेट की सिलवट में त्वचा का आपस में टकराना, या पलकों के आसपास लगातार हिलना, वहां समय के साथ यह छोटे उभार बनने लगते हैं. उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की सिलवटें गहरी होती हैं और घर्षण की जगहें भी बढ़ती हैं, इसलिए मध्य आयु के बाद यह ज़्यादा आम हो जाते हैं.

हार्मोन का भी इसमें कुछ हिस्सा माना जाता है, यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में अचानक नए स्किन टैग दिखने लगते हैं. वज़न ज़्यादा होने पर शरीर की सिलवटें बढ़ती हैं, जिससे घर्षण की जगहें भी बढ़ती हैं और स्किन टैग्स की संख्या पर असर पड़ सकता है.

परिवार में इसका थोड़ा असर भी देखा गया है. अगर माता-पिता में से किसी को कम उम्र से ही कई स्किन टैग रहे हों, तो बच्चों की त्वचा की बनावट भी कुछ हद तक वैसी ही हो सकती है, हालांकि यह किसी बीमारी की तरह सीधे विरासत में मिलने वाली चीज़ नहीं है. त्वचा जितनी पतली और मुलायम होती है, घर्षण का असर उतनी ही आसानी से उस पर उभर कर दिखता है, इसलिए कुछ लोगों में यह बाकियों से जल्दी और ज़्यादा संख्या में दिखने लगते हैं.

स्किन टैग्स के लक्षण और पहचान कैसे करें

स्किन टैग पहचानना ज़्यादातर मामलों में आसान है, क्योंकि इसकी कुछ साफ पहचान होती हैं.

मुलायम और लटका हुआ आकार. यह त्वचा से एक पतली डंडी जैसे हिस्से से जुड़ा होता है, जिसकी वजह से यह हल्का सा लटका हुआ दिखता है और छूने पर सख्त नहीं लगता.

त्वचा जैसा या हल्का गहरा रंग. ज़्यादातर टैग आसपास की त्वचा के रंग के होते हैं, कुछ हल्के भूरे रंग के भी हो सकते हैं.

दर्द रहित होना. सामान्य स्थिति में यह न दर्द करता है, न खुजली करता है, जब तक कि कपड़ों, गहनों या शेविंग के दौरान इसमें बार बार रगड़ या चोट न लगे.

धीमी बढ़त, अचानक बड़ा उछाल नहीं. आकार में बहुत धीरे धीरे बदलाव आता है, और यह किसी हफ्ते में अचानक कई गुना बड़ा नहीं होता.

आम जगहें. गर्दन, बगल, पलकों के पास, पेट या जांघ की सिलवट, और महिलाओं में स्तन के नीचे का हिस्सा सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली जगहें हैं.

पलकों के आसपास बनने वाला टैग थोड़ा अलग ध्यान मांगता है, क्योंकि वहां की त्वचा बाकी शरीर से ज़्यादा पतली और संवेदनशील होती है. काजल, आईलाइनर या चश्मे के लगातार संपर्क से वहां हल्की जलन बनी रह सकती है, और चूंकि यह जगह आंख के बहुत पास है, इसलिए घर पर किसी भी तरह की छेड़छाड़ से पूरी तरह बचना चाहिए. आंख के पास किसी भी उभार को हटवाने का फैसला हमेशा किसी योग्य डॉक्टर के पास ही छोड़ना बेहतर रहता है.

अगर उभार में अचानक दर्द, खून बहना, तेज़ी से बढ़ना, या रंग में असमान बदलाव दिखे, तो इसे सामान्य स्किन टैग मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

यह मस्से, तिल और फंगल इन्फेक्शन से कैसे अलग है

स्किन टैग को अक्सर मस्से, तिल या किसी त्वचा के इन्फेक्शन के साथ मिला दिया जाता है, जबकि तीनों की वजह और बनावट अलग है.

तिल त्वचा की रंगत बनाने वाली कोशिकाओं के जमाव से बनता है, आमतौर पर सपाट या हल्का उभरा होता है और त्वचा के साथ जुड़ा रहता है, लटकता नहीं. मस्सा एक वायरस की वजह से बनता है, इसकी सतह अक्सर खुरदरी होती है और यह एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल भी सकता है. स्किन टैग इनसे अलग है क्योंकि यह किसी वायरस या रंगत की कोशिकाओं से नहीं बल्कि घर्षण और त्वचा की सामान्य संरचना से जुड़ा होता है, और इसकी बनावट मुलायम व लटकी हुई होती है.

फंगल इन्फेक्शन की तस्वीर बिल्कुल अलग है. वहां त्वचा पर एक गोल या अंडाकार दाग बनता है जिसके किनारे उभरे और लाल होते हैं, और साथ में खुजली भी लगातार बनी रहती है, जिसके बारे में फंगल इन्फेक्शन के घरेलू उपाय में विस्तार से बताया गया है. स्किन टैग में न तो ऐसा गोल दाग बनता है और न ही खुजली इसका मुख्य लक्षण है, जब तक कि रगड़ से जलन न हो.

इसी तरह तैलीय त्वचा और मुहांसों की समस्या भी अलग तरह की होती है, जहां सीबम यानी त्वचा के अपने तेल के ज़्यादा बनने से दाने और चिपचिपाहट होती है, जिसे तैलीय त्वचा के लिए घरेलू उपाय में समझाया गया है. स्किन टैग का तेल ग्रंथियों से कोई सीधा संबंध नहीं है, इसलिए तैलीय त्वचा की देखभाल का तरीका इस पर असर नहीं डालता.

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किन लोगों में स्किन टैग्स ज़्यादा होते हैं

उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या ज़्यादा आम होती है, खासकर चालीस साल के बाद. जिन लोगों का वज़न ज़्यादा है उनमें त्वचा की सिलवटें ज़्यादा होती हैं, जिससे घर्षण की जगहें और स्किन टैग्स की संख्या दोनों बढ़ सकती हैं.

गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं में नए टैग अचानक दिखने लगते हैं, और डिलीवरी के बाद कई बार इनकी संख्या अपने आप कम भी हो जाती है. जिन लोगों को ब्लड शुगर या इंसुलिन से जुड़ी दिक्कत है, उनमें भी यह थोड़ा ज़्यादा देखे जाते हैं, इसलिए कई टैग एक साथ अचानक दिखना कभी कभी शुगर जांच कराने का संकेत माना जाता है. परिवार में अगर माता-पिता को स्किन टैग की समस्या रही है, तो बच्चों में भी इसकी संभावना थोड़ी बढ़ जाती है.

जो लोग रोज़ तंग गहने, टाइट कॉलर वाले कपड़े या भारी हार पहनते हैं, उनमें गर्दन के आसपास घर्षण ज़्यादा होता है, इसलिए वहां टैग बनने की संभावना बाकी जगहों से ज़्यादा रहती है.

जिन लोगों का काम शारीरिक मेहनत वाला है या जो रोज़ लंबे समय तक पसीने में रहते हैं, उनमें भी बगल और पीठ की सिलवटों में घर्षण के साथ साथ नमी भी जुड़ जाती है, जो त्वचा को और ज़्यादा संवेदनशील बना देती है. दफ्तर में लगातार भारी बैग या पट्टा एक ही कंधे पर टिकाकर रखने की आदत भी उसी जगह पर बार बार रगड़ पैदा करती है, इसलिए ऐसी आदतों को समय समय पर बदलते रहना छोटी लेकिन असरदार सावधानी है.

घर पर देखभाल जो असल में मदद करती है

घरेलू देखभाल स्किन टैग को पूरी तरह गायब कर देगी, इसका कोई पक्का भरोसा नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह जलन कम करने और नए टैग बनने की संभावना घटाने में मदद कर सकती है.

घर्षण की वजह कम करें. अगर किसी खास गहने, कॉलर या कपड़े की वजह से एक जगह बार बार रगड़ लग रही है, तो उसे थोड़ा ढीला करना या बदलना पहला कदम होना चाहिए.

जगह को साफ और सूखा रखें. नहाने के बाद प्रभावित जगह को हल्के हाथों से पोंछें, ज़्यादा रगड़ें नहीं, क्योंकि लगातार रगड़ जलन बढ़ा सकती है.

हल्का नारियल तेल लगाएं. यह जगह को मुलायम रखता है और कपड़ों के घर्षण से होने वाली जलन को कुछ हद तक कम कर सकता है, हालांकि इससे टैग गायब होने का कोई पक्का भरोसा नहीं है.

ढीले सूती कपड़े पहनें. खासकर बगल और पेट की सिलवट वाली जगहों पर, ताकि हवा पहुंचती रहे और नमी कम टिके.

खुद से छेड़छाड़ न करें. बार बार छूना, खींचना या नाखून से कुरेदना जगह को छिला सकता है और जलन या संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है.

शेविंग करते समय सावधानी बरतें. गर्दन या बगल में रेज़र चलाते समय अगर वहां कोई टैग है तो उसे छूने से बचें, क्योंकि रेज़र से कटने पर वहां से खून बहने और जलन होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. ऐसी जगहों पर धीरे और हल्के हाथों से रेज़र चलाना या इलेक्ट्रिक ट्रिमर का इस्तेमाल करना ज़्यादा सुरक्षित रहता है.

क्या नहीं करना चाहिए

धागे से बांधकर घर पर हटाने की कोशिश. यह तरीका पुराना ज़रूर है, लेकिन खून बहने, संक्रमण और जगह पक जाने का खतरा साथ लाता है, खासकर बड़े टैग्स पर.

कैंची या ब्लेड से खुद काटना. सफाई और सुन्न करने की सही व्यवस्था के बिना यह प्रक्रिया दर्दनाक और असुरक्षित दोनों हो सकती है.

बिना जांच के टैग को मस्सा या तिल समझकर इलाज करना. अगर पहचान ग़लत हो, तो घरेलू उपाय ग़लत समस्या पर लगाए जा रहे होते हैं, जिसका कोई फायदा नहीं मिलता.

हर उभार को अनदेखा कर देना. ज़्यादातर स्किन टैग हानिरहित हैं, लेकिन आकार, रंग या बनावट में असामान्य बदलाव को बिना जांचे टाल देना सही रणनीति नहीं है.

बार बार छूना और खींचना. जिज्ञासा या आदतवश बार बार छूने से जगह में जलन बढ़ती है और कई बार टैग मुड़कर दर्द करने लगता है.

डॉक्टर से कब मिलना और हटवाने का तरीका

क्लीनिक में स्किन टैग हटवाना आमतौर पर कुछ मिनट की सीधी प्रक्रिया है. डॉक्टर जगह को सुन्न करके छोटी कैंची, इलेक्ट्रिक विधि या ठंडक से जमाने वाली तकनीक से टैग हटा देते हैं, और ज़्यादातर मामलों में उसी दिन सामान्य दिनचर्या शुरू की जा सकती है.

डॉक्टर से मिलना तब ज़रूरी हो जाता है जब टैग तेज़ी से बड़ा हो रहा हो, रंग असमान या गहरा होता जा रहा हो, उसमें से खून बह रहा हो या दर्द बढ़ रहा हो, एक साथ कई नए टैग अचानक दिखने लगें, या टैग कपड़ों और गहनों में बार बार उलझकर चोट पहुंचा रहा हो. डायबिटीज़ जैसी मौजूदा स्थिति में घर पर कोई भी छेड़छाड़ करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना और भी ज़रूरी है, क्योंकि ऐसी स्थिति में घाव भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लग सकता है.

क्लीनिक में जाने से पहले घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह एक बहुत आम और छोटी प्रक्रिया मानी जाती है. डॉक्टर पहले टैग को ध्यान से देखकर यह पक्का करते हैं कि यह वाकई सामान्य स्किन टैग है, न कि कोई और तरह का उभार, और उसके बाद ही हटाने का तरीका तय करते हैं. ज़्यादातर मामलों में प्रक्रिया के तुरंत बाद हल्की लालिमा के अलावा कोई बड़ी परेशानी नहीं होती, और कुछ दिनों में वह जगह सामान्य दिखने लगती है.

मिलाकर बात यह है

स्किन टैग एक बहुत आम और ज़्यादातर मामलों में हानिरहित त्वचा का उभार है, जो घर्षण, उम्र और कुछ हद तक हार्मोन के बदलाव से जुड़ा होता है. इसे मस्से, तिल या फंगल इन्फेक्शन से अलग पहचानना पहला ज़रूरी कदम है, ताकि देखभाल सही दिशा में जाए. त्वचा की समग्र चमक और सेहत बनाए रखने के लिए ग्लोइंग स्किन के घरेलू उपाय में बताई गई आसान आदतें भी अपनाई जा सकती हैं.

घर पर घर्षण कम करना, जगह साफ और सूखी रखना, और खुद से काटने या बांधने से बचना, यही सबसे सुरक्षित रास्ता है. अगर टैग बड़ा हो, बार बार परेशान करे या असामान्य दिखे, तो क्लीनिक में कुछ मिनट की प्रक्रिया इसे स्थायी रूप से हल कर देती है.

छोटी छोटी त्वचा और सेहत से जुड़ी आदतों को रोज़ निभाना ही असली फर्क बनाता है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या और आपकी त्वचा के हिसाब से छोटे, व्यावहारिक कदम सुझाते हैं.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्किन टैग्स क्या शरीर में किसी बीमारी का संकेत होते हैं? ज़्यादातर मामलों में नहीं. स्किन टैग्स सिर्फ त्वचा की ऊपरी परत का एक छोटा, मुलायम उभार होते हैं जो घर्षण और उम्र के साथ बनते हैं. हां, जिन लोगों को अधिक वजन या ब्लड शुगर से जुड़ी दिक्कत है उनमें यह थोड़ा ज़्यादा देखे जाते हैं, इसलिए कई स्किन टैग्स एक साथ अचानक दिखें तो एक बार शुगर की जांच करा लेना समझदारी है.

क्या घर पर धागे से बांधकर या कैंची से काटकर स्किन टैग हटाया जा सकता है? यह तरीका जितना आसान लगता है उतना सुरक्षित नहीं है. धागे से बांधने या कैंची, ब्लेड से काटने पर खून बहने, जगह पक जाने और घाव में संक्रमण होने का खतरा रहता है. किसी क्लीनिक में सही उपकरण से हटवाना कुछ मिनट का काम है और यह जोखिम टाल देता है.

स्किन टैग बार बार एक ही जगह पर क्यों बन जाते हैं? इसकी मुख्य वजह उस जगह पर लगातार बना रहने वाला घर्षण है, जैसे गर्दन पर चेन का रगड़ना या बगल में कपड़े का घिसना. यह घर्षण जितनी देर और जितनी बार होता है, उस जगह पर नया टैग बनने की संभावना उतनी ही बनी रहती है, इसलिए एक हटवाने के बाद भी आसपास दूसरा उभर सकता है.

क्या स्किन टैग हटवाने के बाद वह उसी जगह दोबारा उग आता है? सही तरीके से हटवाया गया स्किन टैग खुद उसी जगह दोबारा नहीं उगता, क्योंकि पूरा उभार हटा दिया जाता है. लेकिन अगर घर्षण की वजह वही बनी रहती है, तो उसी इलाके में आसपास एक नया टैग बन सकता है, इसलिए घर्षण कम करना भी ज़रूरी है.

क्या नारियल तेल या सेब के सिरके से स्किन टैग पूरी तरह गायब हो सकता है? इनके गायब कर देने का कोई पक्का भरोसा नहीं दिया जा सकता. नारियल तेल जगह को मुलायम रख सकता है, लेकिन इनसे टैग का पूरी तरह झड़ जाना हर व्यक्ति में नहीं देखा जाता. अगर टैग बड़ा है या असहज महसूस होता है, तो क्लीनिक में हटवाना ज़्यादा भरोसेमंद तरीका है.

बच्चों में स्किन टैग होना कितना आम है? बच्चों में यह वयस्कों जितना आम नहीं है. आमतौर पर यह उम्र बढ़ने, वजन बढ़ने और त्वचा की सिलवटें गहरी होने के साथ ज़्यादा दिखने लगते हैं. अगर किसी बच्चे में अचानक कई उभार एक साथ दिखें, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से एक बार दिखा लेना बेहतर रहता है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर कोई उभार तेज़ी से बढ़ रहा है, रंग या आकार में असामान्य बदलाव दिखा रहा है, उससे खून बह रहा है, या आपको डायबिटीज़ जैसी कोई मौजूदा स्थिति है, तो कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें. किसी भी उभार को खुद से काटने, बांधने या हटाने की कोशिश न करें.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्किन टैग्स क्या शरीर में किसी बीमारी का संकेत होते हैं?+

ज़्यादातर मामलों में नहीं. स्किन टैग्स सिर्फ त्वचा की ऊपरी परत का एक छोटा, मुलायम उभार होते हैं जो घर्षण और उम्र के साथ बनते हैं, और अपने आप में कोई गंभीर स्थिति नहीं हैं. हां, जिन लोगों को अधिक वजन या ब्लड शुगर से जुड़ी दिक्कत है उनमें यह थोड़ा ज़्यादा देखे जाते हैं, इसलिए कई स्किन टैग्स एक साथ अचानक दिखें तो एक बार शुगर की जांच करा लेना समझदारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर स्किन टैग किसी बीमारी की निशानी है.

क्या घर पर धागे से बांधकर या कैंची से काटकर स्किन टैग हटाया जा सकता है?+

यह तरीका जितना आसान लगता है उतना सुरक्षित नहीं है. धागे से बांधने या कैंची, ब्लेड से काटने पर खून बहने, जगह पक जाने और घाव में संक्रमण होने का खतरा रहता है, खासकर उन जगहों पर जहां सफाई मुश्किल हो. डायबिटीज़ जैसी स्थिति में यह जोखिम और बढ़ जाता है क्योंकि घाव भरने में सामान्य से ज़्यादा समय लगता है. किसी क्लीनिक में सही उपकरण से हटवाना कुछ मिनट का काम है और यह जोखिम टाल देता है.

स्किन टैग बार बार एक ही जगह पर क्यों बन जाते हैं?+

इसकी मुख्य वजह उस जगह पर लगातार बना रहने वाला घर्षण है, जैसे गर्दन पर चेन या कॉलर का रगड़ना, बगल में कपड़े का घिसना या पेट की सिलवट में त्वचा से त्वचा का टकराना. यह घर्षण जितनी देर और जितनी बार होता है, उस जगह पर नया टैग बनने की संभावना उतनी ही बनी रहती है, इसलिए एक हटवाने के बाद भी आसपास दूसरा उभर सकता है. उम्र के साथ त्वचा की सिलवटें बढ़ने पर भी यह ज़्यादा दिखते हैं.

क्या स्किन टैग हटवाने के बाद वह उसी जगह दोबारा उग आता है?+

सही तरीके से हटवाया गया स्किन टैग खुद उसी जगह दोबारा नहीं उगता, क्योंकि पूरा उभार हटा दिया जाता है. लेकिन अगर घर्षण की वजह वही बनी रहती है, जैसे वही तंग कॉलर या वही रगड़ने वाला गहना, तो उसी इलाके में आसपास एक नया टैग बन सकता है. यही वजह है कि हटवाने के साथ साथ घर्षण की वजह कम करना भी ज़रूरी माना जाता है.

क्या नारियल तेल या सेब के सिरके से स्किन टैग पूरी तरह गायब हो सकता है?+

इनके गायब कर देने का कोई पक्का भरोसा नहीं दिया जा सकता. नारियल तेल जगह को मुलायम और कम खुजली वाला रख सकता है, और कुछ लोग सेब के सिरके से हल्के जलन जैसे अनुभव की बात करते हैं, लेकिन इनसे टैग का पूरी तरह झड़ जाना हर व्यक्ति में नहीं देखा जाता और यह समय भी बहुत ज़्यादा ले सकता है. अगर टैग बड़ा है, बार बार कपड़ों में उलझता है या दिखने में असहज महसूस होता है, तो क्लीनिक में हटवाना ज़्यादा भरोसेमंद तरीका है.

बच्चों में स्किन टैग होना कितना आम है?+

बच्चों में यह वयस्कों जितना आम नहीं है, हालांकि पूरी तरह असंभव भी नहीं. आमतौर पर यह उम्र बढ़ने, वजन बढ़ने और त्वचा की सिलवटें गहरी होने के साथ ज़्यादा दिखने लगते हैं, इसलिए मध्य आयु और उसके बाद इसकी संख्या ज़्यादा देखी जाती है. अगर किसी बच्चे में अचानक कई उभार एक साथ दिखें, तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से एक बार दिखा लेना बेहतर रहता है.

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