चक्कर आना और सिर घूमने के कारण: कब सामान्य है और कब जांच ज़रूरी है
छोटा जवाब
अगर आपको बीच बीच में अचानक चक्कर आता है, सिर हल्का लगता है, या ऐसा लगता है कि पैरों तले ज़मीन थोड़ी देर के लिए डगमगा गई, तो ज़्यादातर मामलों में इसकी वजह कोई गंभीर बीमारी नहीं बल्कि रोज़मर्रा की कोई छोटी सी बात होती है, जैसे कम पानी पीना, बहुत जल्दी उठ जाना, खाली पेट रहना, या लो बीपी.
पर हर चक्कर एक जैसा नहीं होता. कभी कभी आने वाला हल्का चक्कर अलग बात है, और बार बार आना, अचानक तेज़ होना, या कान में आवाज़ और सुनने में दिक्कत के साथ आना बिलकुल अलग बात है. फर्क पहचानना ज़रूरी है, क्योंकि एक हिस्से का इलाज सिर्फ पानी और आराम से हो जाता है, जबकि दूसरे हिस्से को जांच की ज़रूरत होती है.
ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकता. अगर चक्कर के साथ तेज़ सिरदर्द, बोलने में दिक्कत, कमज़ोरी या सीने में दर्द जैसी कोई बात हो, तो कृपया तुरंत योग्य डॉक्टर से सलाह लें.
चक्कर आना असल में होता क्या है
चक्कर एक लक्षण है, बीमारी नहीं. यह दिमाग को यह बताने का शरीर का तरीका है कि संतुलन बनाए रखने वाली किसी व्यवस्था में कहीं कुछ ठीक से तालमेल नहीं बिठा पा रहा.
शरीर का संतुलन तीन चीज़ों की मदद से बनता है, आंखें जो बताती हैं कि आसपास क्या है, पैरों और जोड़ों के अंदर मौजूद सेंसर जो बताते हैं कि शरीर किस स्थिति में है, और कान के सबसे अंदरूनी हिस्से में मौजूद एक नाज़ुक तंत्र जो सिर की हर हरकत को नापता है. दिमाग इन तीनों से आई जानकारी को हर सेकंड मिलाकर तय करता है कि शरीर कहां है और कैसे हिल रहा है. जब इनमें से किसी एक हिस्से की जानकारी बाकी दो से मेल नहीं खाती, या जब दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई थोड़ी कम पड़ जाती है, तो दिमाग उसे चक्कर के रूप में महसूस कराता है.
यही वजह है कि चक्कर की वजहें इतनी अलग अलग हो सकती हैं, कभी यह सिर्फ पानी की कमी होती है, कभी बीपी का उतार चढ़ाव, और कभी कान के अंदर की कोई छोटी गड़बड़ी.
आम और ज़्यादातर हानिरहित कारण
रोज़मर्रा में आने वाले ज़्यादातर चक्कर की जड़ में यह चीज़ें होती हैं.
पानी की कमी. खून की मात्रा थोड़ी कम होते ही बीपी नीचे जाता है और दिमाग तक खून पहुंचने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. गर्मी में, वर्कआउट के बाद, या चाय कॉफी ज़्यादा पीकर पानी कम पीने पर यह और बढ़ जाता है.
अचानक खड़े होना. लेटे या बैठे से एकदम खड़े होने पर खून को पैरों से दिमाग तक वापस पहुंचने में कुछ सेकंड लगते हैं, इस बीच का हल्का अंधेरा या चक्कर जैसा एहसास ज़्यादातर लोगों को कभी न कभी होता है.
खाली पेट रहना या देर तक कुछ न खाना. खून में शक्कर का स्तर गिरने पर दिमाग को ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिससे कमज़ोरी और चक्कर जैसा महसूस होता है.
कम नींद और लगातार थकान. नींद पूरी न होने पर शरीर की सतर्कता और संतुलन बनाए रखने की क्षमता, दोनों थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती हैं.
घबराहट और चिंता. तेज़ सांस लेने या घबराहट में सांस का पैटर्न बदलने से खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे हल्कापन और चक्कर जैसा महसूस हो सकता है.
सफर में मोशन सिकनेस. गाड़ी, बस या नाव में लगातार हिलने पर आंखें और कान का संतुलन तंत्र अलग अलग जानकारी भेजते हैं, जिससे मितली के साथ चक्कर जैसा एहसास होता है.
इनमें से हर कारण अपने आप में सामान्य है और ज़्यादातर लोग इसे कभी न कभी अनुभव करते हैं. असली सवाल यह है कि यह कितनी बार आता है और साथ में और क्या दिखता है.
यह टिनिटस और कान की दूसरी समस्याओं से कैसे अलग है
चक्कर को अक्सर कान में आवाज़ आने की समस्या यानी टिनिटस समझ लिया जाता है, जबकि दोनों की जड़ें अलग हैं.
टिनिटस में मुख्य शिकायत होती है कान में लगातार सीटी, भनभनाहट या घंटी जैसी आवाज़ सुनाई देना, चाहे आसपास कोई असली आवाज़ न हो. यह अक्सर तेज़ शोर में लंबे समय रहने, उम्र बढ़ने या कान की नस से जुड़ी किसी स्थिति से जुड़ा होता है, और इसमें संतुलन बिगड़ने की शिकायत ज़रूरी नहीं होती.
चक्कर, खासकर वर्टिगो वाला चक्कर, इससे अलग है. इसमें मुख्य एहसास यह होता है कि आसपास की चीज़ें घूम रही हैं या शरीर खुद घूम रहा है, और यह अक्सर सिर की स्थिति बदलने, जैसे करवट बदलने या ऊपर देखने पर शुरू होता है. दोनों समस्याएं कान के अंदरूनी हिस्से से जुड़ी हो सकती हैं, इसलिए कभी कभी साथ भी दिखती हैं, पर एक का होना यह तय नहीं करता कि दूसरा भी होगा. अगर आपको बार बार कान में आवाज़ की शिकायत रहती है और चक्कर उसका हिस्सा नहीं है, तो यह अलग जांच का विषय है.
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चक्कर का हाथ पैर ठंडे रहने और बीपी से क्या रिश्ता है
चक्कर, ठंडे हाथ पैर और बीपी का उतार चढ़ाव, तीनों का एक ही जड़ से रिश्ता हो सकता है, यानी शरीर में खून का बंटवारा.
जब बीपी सामान्य से नीचे रहता है, तो शरीर पहले दिमाग और दिल जैसे ज़रूरी अंगों को खून भेजना प्राथमिकता में रखता है, और हाथ पैर जैसे बाहरी हिस्सों को कम खून मिलता है. यही वजह है कि जिन लोगों को अक्सर हाथ पैर ठंडे रहने और खराब ब्लड सर्कुलेशन की शिकायत रहती है, उन्हें अचानक खड़े होने पर चक्कर आने की शिकायत भी अक्सर साथ दिखती है, क्योंकि दोनों के पीछे एक जैसा तंत्र काम कर रहा होता है.
दूसरी तरफ बहुत ज़्यादा बीपी भी चक्कर की वजह बन सकता है, हालांकि इसके पैटर्न अलग होते हैं, जैसे सिर के पिछले हिस्से में भारीपन के साथ हल्का चक्कर जैसा महसूस होना. अगर आपका बीपी अक्सर ज़्यादा रहता है या पहले से बीपी की दवा चल रही है, तो ब्लड प्रेशर को नेचुरल तरीकों से कैसे कंट्रोल करें पढ़ना समझने में मदद करेगा कि नमक, नींद और तनाव का बीपी और इसके साथ आने वाले चक्कर जैसे लक्षणों पर कैसा असर पड़ता है. सीधी बात यह है कि बीपी चाहे कम हो या ज़्यादा, दोनों ही स्थितियां चक्कर की वजह बन सकती हैं, इसलिए बार बार चक्कर आने पर बीपी नापना पहला और सबसे आसान कदम है.