बवासीर के घरेलू उपाय: लक्षण, कारण और आराम पाने का सही तरीका
छोटा जवाब
अगर मल त्याग के बाद हल्की जलन, खुजली या टॉयलेट पेपर पर थोड़ा खून दिख रहा है, तो यह बवासीर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, और अच्छी खबर यह है कि शुरुआती स्तर पर यह घरेलू उपायों से काफी हद तक संभाला जा सकता है.
सबसे बड़ा उपाय है मल को नरम रखना, ताकि मल त्याग के समय ज़ोर न लगाना पड़े. इसके लिए रोज़ाना पानी ज़्यादा पीना, फाइबर से भरपूर सब्ज़ियां और फल खाना, और टॉयलेट पर कम समय बिताना सबसे असरदार तरीके हैं. अगर खून आना जारी रहता है या गांठ बाहर निकल आती है, तो डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी है, क्योंकि वहां घरेलू उपायों की सीमा खत्म हो जाती है.
बवासीर क्या है और यह क्यों होता है
बवासीर यानी मलद्वार के अंदर या बाहर मौजूद नसों का सूज जाना. ये नसें सामान्य रूप से मल त्याग को नियंत्रित करने में मदद करती हैं, लेकिन जब इन पर बार बार ज़्यादा दबाव पड़ता है, तो ये फूलने लगती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पैरों में वैरिकोज़ वेन्स फूल जाती हैं.
यह दबाव सबसे ज़्यादा तब बनता है जब मल सख्त होता है और उसे बाहर निकालने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है. कब्ज़ इसकी सबसे आम वजह है, लेकिन अकेली वजह नहीं. लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहना, चाहे वह टॉयलेट पर हो या दफ्तर की कुर्सी पर, पेट के निचले हिस्से में खून के बहाव को धीमा कर देता है, जिससे वहां की नसों पर दबाव बढ़ता है.
गर्भावस्था में बढ़ता वज़न और हार्मोन का बदलाव भी इस दबाव को बढ़ाते हैं, इसीलिए गर्भवती महिलाओं में यह समस्या काफी आम है. वज़न ज़्यादा होना, लंबे समय तक खड़े रहने वाला काम, और भारी वज़न बार बार उठाना भी इसी कड़ी में आते हैं. ज़्यादातर मामलों में यह किसी एक कारण से नहीं, बल्कि इन आदतों के साथ मिलकर बनता है.
शुरुआती लक्षण जो नज़रअंदाज़ हो जाते हैं
बवासीर की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि शुरुआती लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग उन्हें भूल जाते हैं, और आदतें वैसी ही बनी रहती हैं जिनकी वजह से समस्या दोबारा लौटती है.
मल त्याग के बाद हल्की जलन या खुजली. यह सबसे पहला संकेत है, और अक्सर कुछ घंटों में अपने आप शांत हो जाता है, इसलिए नज़रअंदाज़ होता है.
टॉयलेट पेपर या पानी में हल्का खून. यह आमतौर पर दर्द रहित होता है, चमकीला लाल रंग का होता है, और मल के ऊपर या साथ में दिखता है, अंदर मिला हुआ नहीं.
मलद्वार के पास भारीपन या छोटी गांठ जैसा महसूस होना. खास तौर पर लंबे समय तक बैठने या मल त्याग के बाद. शुरुआत में यह अपने आप अंदर चला जाता है.
बैठने में थोड़ी असहजता. यह दर्द जितना तेज़ नहीं होता, बस एक अजीब सा दबाव जैसा महसूस होता है, खास तौर पर सख्त कुर्सी पर.
इन लक्षणों को समझना इसलिए ज़रूरी है कि ये कब्ज़ के घरेलू उपाय वाली समस्या से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों एक जैसे नहीं हैं. कब्ज़ सिर्फ मल सख्त होने की समस्या है, जबकि बवासीर उस दबाव का नतीजा है जो बार बार कब्ज़ की वजह से नसों पर पड़ता है.
किन आदतों से बवासीर बढ़ता है
कुछ आम आदतें ऐसी हैं जो बवासीर को शुरू होने में मदद करती हैं, और उसके बाद उसे बार बार लौटाती भी रहती हैं.
टॉयलेट पर मोबाइल लेकर बैठना. जितनी देर आप बैठे रहते हैं, उतना ही दबाव मलद्वार की नसों पर बना रहता है. यह आदत बदलना सबसे ज़्यादा फर्क डालता है.
बहुत कम पानी पीना. कम पानी से मल सख्त हो जाता है, और सख्त मल को निकालने के लिए ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है. पानी पीने के फायदे समझना यहां सीधे काम आता है, क्योंकि सही मात्रा में पानी पीना सबसे सस्ता और असरदार बचाव है.
फाइबर कम, प्रोसेस्ड खाना ज़्यादा. सफेद ब्रेड, मैदे की चीज़ें और तला भुना खाना मल को सख्त बनाता है, जबकि सब्ज़ी, फल और साबुत अनाज उसे नरम रखते हैं.
लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में बैठना या खड़ा रहना. दफ्तर का काम हो या दुकान में खड़े रहना, दोनों निचले हिस्से में खून के बहाव को धीमा करते हैं.
मल त्याग को रोकना या टालना. शरीर का संकेत अनसुना करने पर मल ज़्यादा देर अंदर रहकर सख्त हो जाता है, जिससे अगली बार ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है.
घरेलू उपाय जो वाकई काम करते हैं
यहां सबसे ज़रूरी बात समझनी है, असली उपाय सूजन को सीधे ठीक करना नहीं, बल्कि उस दबाव को कम करना है जो सूजन को बार बार बढ़ाता है.
फाइबर रोज़ाना बढ़ाएं. भीगा इसबगोल रात को या सुबह खाली पेट, पपीता, पालक जैसी हरी सब्ज़ियां, और साबुत अनाज मल को नरम और ज़्यादा मात्रा में बनाते हैं, जिससे वह आसानी से बाहर निकलता है.
पानी की मात्रा पूरी रखें. दिन भर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी और सादे तरल पदार्थ फाइबर को ठीक से काम करने देते हैं. सिर्फ फाइबर बढ़ाना और पानी कम रखना उल्टा असर भी डाल सकता है, इसलिए दोनों साथ चलना चाहिए.
गुनगुने पानी में सिट्ज़ बाथ. एक बड़े टब या बाल्टी में गुनगुना पानी लेकर दिन में दो से तीन बार दस मिनट बैठना सूजन और जलन दोनों में आराम देता है. पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए.
मल त्याग के समय ज़ोर लगाने से बचें. अगर मल आने में देर लगे तो थोड़ा इंतज़ार करें, जल्दी में ज़ोर लगाने से बचें. पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखकर बैठने की पोज़िशन बदलने से भी कुछ लोगों को आराम मिलता है.
टॉयलेट पर समय सीमित रखें. पांच मिनट से ज़्यादा न बैठें, और मोबाइल साथ ले जाने की आदत छोड़ें. यह सबसे छोटा बदलाव है, लेकिन असर सबसे बड़ा है.
हल्की सफाई, रगड़ नहीं. मल त्याग के बाद पानी से धीरे धोना बेहतर है, सूखे टिशू से बार बार रगड़ना सूजन को और बढ़ा सकता है.
ये सारे उपाय धीरे धीरे असर दिखाते हैं. एक दो दिन में बड़ा फर्क महसूस न हो तो यह मान लेना ठीक नहीं कि उपाय काम नहीं कर रहे, आमतौर पर एक से दो हफ्ते लगते हैं इनका असर दिखने में.
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