आंख फड़कना क्यों होता है: अंधविश्वास नहीं, असली वजहें और घरेलू उपाय

SuperLiving Expert Team·

आंख फड़कना क्यों होता है: अंधविश्वास नहीं, असली वजहें और घरेलू उपाय

छोटा जवाब

आंख फड़कना एक आम और लगभग हमेशा हानिरहित शारीरिक घटना है, जिसका शुभ या अशुभ होने से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है. असली वजहें आमतौर पर रोज़मर्रा की आदतों में छिपी होती हैं, जैसे नींद की कमी, लगातार तनाव, ज़्यादा चाय कॉफी, स्क्रीन के सामने बहुत देर बैठना, या कभी कभी मैग्नीशियम जैसे किसी पोषक तत्व की कमी. ज़्यादातर मामलों में यह कुछ सेकंड से कुछ मिनट में अपने आप रुक जाता है और कुछ दिनों में पूरी तरह चला जाता है. यह लेख बताता है कि असल में होता क्या है, अंधविश्वास की बात में कितनी सच्चाई है, कौन सी आदतें इसे बढ़ाती हैं, क्या करने से राहत मिलती है, और कब यह डॉक्टर को दिखाने लायक बात बन जाती है.

आंख फड़कना असल में है क्या

पलक के आसपास एक बहुत पतली मांसपेशी होती है जो पलक झपकाने का काम करती है. जब यह मांसपेशी किसी वजह से थोड़ी ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है, तो यह अपने आप, बार बार, हल्के से सिकुड़ने लगती है. इसी हरकत को हम आंख फड़कना कहते हैं.

यह हरकत आमतौर पर इतनी हल्की होती है कि किसी और को दिखती भी नहीं, लेकिन जिसे हो रही होती है उसे साफ महसूस होती है, क्योंकि पलक के आसपास की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है. डॉक्टरी भाषा में इसे आई ट्विच या माइओकिमिया कहा जाता है, और यह शरीर की बाकी मांसपेशियों में होने वाली हल्की फड़कन जैसी ही एक सामान्य घटना है, बस आंख के पास होने की वजह से ज़्यादा ध्यान खींचती है.

शुभ अशुभ की बात में कितनी सच्चाई है

भारत में और कई दूसरी संस्कृतियों में यह मान्यता पुरानी है कि दायीं आंख फड़कना एक बात का संकेत है और बायीं आंख फड़कना दूसरी बात का, और यह मान्यता पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है.

विज्ञान की नज़र से इस मान्यता का कोई आधार नहीं मिलता. आंख किस तरफ फड़केगी, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर के उस तरफ की मांसपेशी और तंत्रिका मार्ग उस पल कितने थके हुए या संवेदनशील हैं, न कि किसी आने वाली घटना पर. जिस तरफ नींद की कमी, तनाव या थकान ज़्यादा असर कर रही है, फड़कन अक्सर उसी तरफ ज़्यादा महसूस होती है.

यह समझना ज़रूरी है ताकि फड़कन होने पर अनावश्यक चिंता या डर की जगह, असली वजह पर ध्यान दिया जा सके, जो लगभग हमेशा शरीर के अंदर की कोई साधारण स्थिति होती है, बाहर की कोई घटना नहीं.

सबसे आम असली वजहें

नींद की कमी. यह सबसे बड़ी और सबसे आम वजह है. जब शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता, तो तंत्रिका तंत्र सामान्य से ज़्यादा सक्रिय रहता है, और इसका असर सबसे पहले शरीर की छोटी और संवेदनशील मांसपेशियों पर दिखता है, जिसमें पलक की मांसपेशी भी शामिल है. अगर रात को नींद आने में बार बार दिक्कत हो रही है, तो रात को नींद नहीं आती तो क्या करें में तुरंत असर करने वाले उपाय दिए गए हैं.

लगातार तनाव. तनाव के दौरान शरीर में कुछ ऐसे रासायनिक बदलाव होते हैं जो मांसपेशियों को ज़्यादा उत्तेजित बना देते हैं. यही वजह है कि परीक्षा, ज़रूरी मीटिंग या किसी मुश्किल दौर के समय आंख फड़कने की शिकायत ज़्यादा सुनने को मिलती है. तनाव को रोज़ की आदतों में कैसे कम करें, इसके लिए तनाव कम करने के उपाय एक अच्छी शुरुआत है.

ज़्यादा चाय, कॉफी या कैफीन वाली चीज़ें. कैफीन तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है, और दिन में चार पांच कप या उससे ज़्यादा लेने पर छोटी मांसपेशियां ज़्यादा संवेदनशील हो जाती हैं, जिससे फड़कन की संभावना बढ़ जाती है.

स्क्रीन के सामने बहुत देर तक लगातार बैठना. बिना ब्रेक के घंटों मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है, पलक झपकाने की आदत भी कम हो जाती है, और इससे आंख की मांसपेशी थक जाती है.

आंखों में सूखापन. जिन लोगों की आंखें बार बार सूखी महसूस होती हैं, खास तौर पर एसी वाले कमरों में या स्क्रीन के सामने ज़्यादा समय बिताने से, उनमें फड़कन की शिकायत भी ज़्यादा देखी जाती है.

शराब और सिगरेट. दोनों ही तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं और शरीर में उन तत्वों के स्तर को भी बदल सकते हैं जो मांसपेशियों के सामान्य काम के लिए ज़रूरी होते हैं.

पुराना या गलत चश्मे का नंबर. अगर आंखों पर ज़ोर देकर कुछ पढ़ने या देखने की आदत बन गई है, क्योंकि चश्मे का नंबर अब सही नहीं है, तो आंख की मांसपेशियों पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यह दबाव समय के साथ उसी तरह की फड़कन पैदा कर सकता है जैसी नींद की कमी या स्क्रीन के ज़्यादा समय से होती है, इसलिए अगर फड़कन के साथ पढ़ने में आंखों पर ज़ोर भी महसूस होता है, तो आंखों की जांच करवाना एक आसान और सस्ता कदम है.

मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व की कमी. मैग्नीशियम मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के ठीक से काम करने में सीधी भूमिका निभाता है. इसकी कमी होने पर मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं, चाहे वह आंख के पास हो या पिंडलियों में रात की ऐंठन के रूप में. इस कमी के पूरे लक्षण और इसे कैसे ठीक करें, इसके लिए मैग्नीशियम की कमी के लक्षण और उपाय पूरी जानकारी देता है.

छोटी छोटी आदतें ही सबसे ज़्यादा असर डालती हैं, लेकिन इन्हें रोज़ निभाना अकेले मुश्किल लगता है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी नींद, तनाव और स्क्रीन टाइम के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि ऐसी छोटी परेशानियां समय रहते ठीक हो जाएं. SuperLiving डाउनलोड करें

यह सब खुद करने की ज़रूरत नहीं है

SuperLiving पर 20+ expert coaches आपकी थाली के हिसाब से प्लान बनाते हैं. शुरुआत फ्री.

फ्री में शुरू करें

यह सामान्य फड़कन से अलग कब है

ज़्यादातर आंख फड़कना हल्का होता है और सिर्फ पलक के एक छोटे हिस्से में महसूस होता है, वह भी कुछ सेकंड से कुछ मिनट के लिए. एक अलग और कम आम स्थिति होती है जिसमें पूरी पलक बार बार पूरी तरह बंद होने लगती है, जिसे ब्लेफेरोस्पाज़्म कहा जाता है. यह सामान्य थकान वाली फड़कन से अलग है, लंबे समय तक चलती है, और इसमें डॉक्टरी जांच ज़रूरी हो जाती है.

इसी तरह अगर फड़कन के साथ चेहरे के दूसरे हिस्से में भी हरकत होने लगे, जैसे मुंह का एक तरफ खिंचना या गाल की मांसपेशी में भी कंपन, तो यह सिर्फ थकान वाली फड़कन नहीं हो सकती और इसे अलग से जांचना ज़रूरी है. सामान्य फड़कन सिर्फ एक छोटी, हल्की हरकत तक सीमित रहती है और किसी और मांसपेशी तक नहीं फैलती.

घरेलू स्तर पर क्या मदद करता है

नींद का समय नियमित करना. रोज़ एक जैसे समय पर सोना और उठना, सात से आठ घंटे की नींद पूरी करना, फड़कन को ठीक करने का सबसे असरदार तरीका है. एक ही रात की अच्छी नींद से भी अक्सर फर्क महसूस होने लगता है.

आंखों को बीच बीच में आराम देना. हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए किसी दूर की चीज़ को देखना, और जानबूझकर पूरी तरह पलक झपकाना, आंख की मांसपेशी पर दबाव कम करता है.

चाय कॉफी धीरे धीरे कम करना. एक ही दिन में पूरी तरह बंद करने की जगह, एक हफ्ते में धीरे धीरे मात्रा घटाना बेहतर रहता है, ताकि सिरदर्द जैसी दिक्कत न हो.

हल्की ठंडी या गुनगुनी सिकाई. बंद आंख पर साफ, हल्के गीले कपड़े से कुछ मिनट सिकाई करने से मांसपेशी को आराम मिलता है और कई लोगों को तुरंत राहत महसूस होती है.

थाली में मैग्नीशियम और पानी का ध्यान रखना. कद्दू के बीज, बादाम, केला और साबुत अनाज जैसी चीज़ें थाली में शामिल करना, साथ में दिन भर पर्याप्त पानी पीना, मांसपेशियों को सामान्य रूप से काम करने में मदद करता है.

तनाव कम करने के छोटे तरीके. दिन में कुछ मिनट गहरी सांस लेना, काम के बीच छोटे ब्रेक लेना, और सोने से पहले फोन दूर रखना, तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करता है.

क्या चीज़ें फड़कन को बढ़ा देती हैं

नींद की कमी को नज़रअंदाज़ करते रहना. एक दो रात कम सोकर काम चलाने की आदत, हफ्तों तक चलती रहे तो फड़कन बार बार लौट आती है, भले ही बाकी सब ठीक रखा जाए.

दिन भर कैफीन लेते रहना. सुबह की चाय के बाद दोपहर और शाम को भी कई कप चाय कॉफी लेना, तंत्रिका तंत्र को लगातार उत्तेजित रखता है और फड़कन को बार बार ट्रिगर करता है.

स्क्रीन को बिना ब्रेक के देखते रहना. घंटों बिना रुके मोबाइल या लैपटॉप देखना, खास तौर पर कम रोशनी में, आंख की मांसपेशी को ज़्यादा थका देता है.

फड़कन को बार बार हाथ से छूते या मलते रहना. यह आदत आंख को और ज़्यादा संवेदनशील बना सकती है और कभी कभी हल्की जलन भी पैदा कर सकती है.

दो हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता. रोज़ एक तय समय पर सोना शुरू कीजिए और सात घंटे की नींद का लक्ष्य रखिए. साथ ही, दिन की आखिरी चाय या कॉफी शाम पांच बजे से पहले तय कर लीजिए.

दूसरा हफ्ता. स्क्रीन के हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड का ब्रेक लेने की आदत डालिए, और थाली में कद्दू के बीज या बादाम जैसी एक मैग्नीशियम वाली चीज़ रोज़ जोड़िए.

नापने का तरीका. रोज़ एक लाइन लिखिए कि फड़कन हुई या नहीं, और कितनी देर तक रही. दो हफ्ते बाद इन लाइनों को साथ पढ़िए, ज़्यादातर लोगों को इस दौरान फड़कन में साफ कमी महसूस होती है.

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है

अगर फड़कन दो तीन हफ्तों से लगातार बनी है और नींद, तनाव या कैफीन कम करने के बावजूद ठीक नहीं हो रही, अगर पूरी पलक बार बार पूरी तरह बंद होने लगती है, अगर फड़कन के साथ आंख लाल हो या उसमें से पानी या चिपचिपा पदार्थ निकलने लगे, अगर चेहरे के किसी और हिस्से में भी हरकत या कमज़ोरी महसूस हो, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है.

मिलाकर बात यह है

आंख फड़कना लगभग हमेशा एक छोटी, हानिरहित शारीरिक घटना है जिसका किसी शुभ अशुभ घटना से कोई संबंध नहीं. असली वजह रोज़ की आदतों में छिपी होती है, नींद की कमी, लगातार तनाव, ज़्यादा कैफीन, स्क्रीन का ज़्यादा समय, या कभी कभी मैग्नीशियम जैसी किसी कमी.

नींद का समय नियमित रखिए, स्क्रीन के बीच बीच में आंखों को आराम दीजिए, कैफीन धीरे धीरे कम कीजिए, और थाली में मैग्नीशियम वाली चीज़ें शामिल कीजिए. ज़्यादातर मामलों में यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी नींद, तनाव और रोज़ की आदतों के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि ऐसी छोटी परेशानियां समय रहते संभल जाएं.

SuperLiving डाउनलोड करें और कोच से बात करें


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आंख फड़कना शुभ या अशुभ होने की बात में कितनी सच्चाई है? विज्ञान की नज़र से इसमें कोई सच्चाई नहीं है. आंख फड़कना एक शारीरिक प्रक्रिया है, पलक के आसपास की मांसपेशी के बार बार हल्के से सिकुड़ने से होता है, और इसका किसी आने वाली घटना से कोई वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है. असली वजह लगभग हमेशा रोज़मर्रा की आदतों में छिपी होती है.

क्या बायीं और दायीं आंख फड़कने का अलग अलग मतलब होता है? चिकित्सकीय रूप से नहीं. मांसपेशी जिस तरफ ज़्यादा थकी हुई है या जिस तरफ का तंत्रिका मार्ग उस पल ज़्यादा सक्रिय है, फड़कन उसी तरफ दिखती है. यह पूरी तरह शरीर की अपनी स्थिति पर निर्भर करता है, न कि किसी दिशा या तरफ पर.

आंख फड़कना आमतौर पर कितने समय तक रहता है? ज़्यादातर मामलों में यह कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक चलता है और अपने आप रुक जाता है. अगर फड़कन हफ्तों तक लगातार बनी रहती है, तो यह सामान्य थकान वाली फड़कन से अलग है और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी हो जाता है.

क्या मैग्नीशियम की कमी सच में आंख फड़काने की वजह बन सकती है? हां. मैग्नीशियम मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के ठीक से काम करने में ज़रूरी भूमिका निभाता है, और इसकी कमी होने पर मांसपेशियां ज़्यादा आसानी से अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं. अगर साथ में पिंडलियों में रात को ऐंठन भी रहती है, तो मैग्नीशियम की कमी की जांच करना समझदारी है.

कैफीन कम करने से क्या फड़कन रुक सकती है? कई लोगों में हां, खास तौर पर अगर दिन में चार पांच कप चाय कॉफी पी जा रही हो. कैफीन को धीरे धीरे, एक हफ्ते में थोड़ा थोड़ा करके कम करना सबसे अच्छा तरीका है.

कौन से लक्षण होने पर आंख फड़कने को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए? अगर फड़कन के साथ चेहरे के दूसरे हिस्से में भी हरकत होने लगे, अगर पलक पूरी तरह बंद होने लगे, अगर आंख लाल हो या उसमें से पानी निकले, या अगर फड़कन दो तीन हफ्तों से लगातार बनी हो, तो डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर फड़कन लंबे समय तक बनी रहती है, चेहरे के दूसरे हिस्सों में फैलती है, या इसके साथ आंख में लालिमा, दर्द या पानी निकलने जैसी समस्या है, तो कृपया योग्य डॉक्टर से सलाह लें.

SuperLiving

अपना डाइट प्लान 2 मिनट में बनाएं

घर का खाना खाकर वजन कम करें. 20+ expert coaches से हिंदी में बात करें, जब चाहें. शुरुआत फ्री, उसके बाद ₹199 प्रति महीना.

फ्री में शुरू करें

10 लाख+ डाउनलोड, Google Play पर उपलब्ध

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आंख फड़कना शुभ या अशुभ होने की बात में कितनी सच्चाई है?+

विज्ञान की नज़र से इसमें कोई सच्चाई नहीं है. आंख फड़कना एक शारीरिक प्रक्रिया है, पलक के आसपास की एक बहुत पतली मांसपेशी के बार बार हल्के से सिकुड़ने से होता है, और इसका किसी आने वाली घटना, शुभ या अशुभ, से कोई वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है. यह मान्यता सदियों पुरानी लोककथा से आई है, जैसे कई संस्कृतियों में अलग अलग शरीर के संकेतों को भविष्य से जोड़ा जाता रहा है. असली वजह लगभग हमेशा रोज़मर्रा की आदतों में छिपी होती है, जैसे नींद, तनाव या कैफीन, न कि आने वाले कल में.

क्या बायीं और दायीं आंख फड़कने का अलग अलग मतलब होता है?+

चिकित्सकीय रूप से नहीं. मांसपेशी जिस तरफ ज़्यादा थकी हुई है, नींद की कमी से प्रभावित है, या जिस तरफ का तंत्रिका मार्ग उस पल ज़्यादा सक्रिय है, फड़कन उसी तरफ दिखती है. यह पूरी तरह शरीर की अपनी स्थिति पर निर्भर करता है, न कि किसी दिशा या तरफ पर. दोनों आंखों में समय समय पर फड़कन होना सामान्य है, और एक ही तरफ बार बार होना भी इस बात का संकेत है कि उस तरफ की मांसपेशी या नींद का पैटर्न ज़्यादा प्रभावित है, न कि कोई शुभ अशुभ संकेत.

आंख फड़कना आमतौर पर कितने समय तक रहता है?+

ज़्यादातर मामलों में यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक चलता है और अपने आप रुक जाता है. कभी कभी यह कुछ घंटों या एक दो दिन तक रुक रुक कर आ सकता है, खास तौर पर अगर नींद की कमी या तनाव लगातार बना हुआ हो. अगर फड़कन हफ्तों तक लगातार बनी रहती है, या इतनी तेज़ हो जाती है कि पलक पूरी तरह बंद होने लगे, तो यह सामान्य थकान वाली फड़कन से अलग है और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी हो जाता है.

क्या मैग्नीशियम की कमी सच में आंख फड़काने की वजह बन सकती है?+

हां, और यह एक कम चर्चा में रहने वाली लेकिन असली वजह है. मैग्नीशियम मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के ठीक से काम करने में ज़रूरी भूमिका निभाता है, और इसकी कमी होने पर मांसपेशियां ज़्यादा आसानी से अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगती हैं, जिसमें आंख के आसपास की पतली मांसपेशी भी शामिल है. अगर फड़कन के साथ पिंडलियों में रात को ऐंठन या हल्की बेचैनी भी रहती है, तो मैग्नीशियम की कमी की जांच करना समझदारी है.

कैफीन कम करने से क्या फड़कन रुक सकती है?+

कई लोगों में हां, खास तौर पर अगर दिन में चार पांच कप चाय कॉफी पी जा रही हो. कैफीन तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है, जिससे छोटी मांसपेशियां ज़्यादा संवेदनशील हो जाती हैं और फड़कने की संभावना बढ़ जाती है. कैफीन को धीरे धीरे, एक हफ्ते में थोड़ा थोड़ा करके कम करना सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि अचानक पूरी तरह बंद करने से सिरदर्द और चिड़चिड़ापन हो सकता है.

कौन से लक्षण होने पर आंख फड़कने को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?+

अगर फड़कन के साथ पलक या चेहरे के दूसरे हिस्से में भी हरकत होने लगे, अगर पलक पूरी तरह बंद होने लगे, अगर आंख लाल हो या उसमें से पानी या चिपचिपा पदार्थ निकले, अगर चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियां कमज़ोर महसूस हों, या अगर फड़कन दो तीन हफ्तों से लगातार बनी हो और घरेलू बदलावों से ठीक न हो रही हो, तो यह सामान्य थकान वाली फड़कन का दायरा नहीं है और डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है.

आगे पढ़ें

रोज़ की परेशानियां पर सभी 31 आर्टिकल देखें →
← सभी articles देखें