बच्चों में पेट दर्द के आम कारण और घरेलू उपाय: कब राहत मिलती है, कब डॉक्टर ज़रूरी है
छोटा जवाब
बच्चों में पेट दर्द की शिकायत बहुत आम है, और ज़्यादातर बार इसके पीछे कोई गंभीर बीमारी नहीं होती. जल्दी-जल्दी खाना, पानी कम पीना, कब्ज, गैस, या थोड़ा भारी खाना, ये सबसे सामान्य वजहें हैं. ऐसे मामलों में हल्की पेट की मालिश, गुनगुना पानी, आराम और थोड़ा सादा खाना अक्सर कुछ घंटों में राहत दे देते हैं.
लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता, जैसे तेज़ बुखार के साथ दर्द, पेट का सख्त हो जाना, उल्टी में खून या हरा रंग, मल में खून, या बच्चे का बहुत सुस्त पड़ जाना. इन स्थितियों में देर किए बिना डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है. इस लेख में हम दोनों पहलू समझेंगे, पहला घर पर क्या करें, दूसरा कब घर की सीमा खत्म हो जाती है.
बच्चों में पेट दर्द की सबसे आम वजहें
पेट दर्द अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक संकेत है कि शरीर के अंदर कुछ सामान्य से अलग हो रहा है. ज़्यादातर बच्चों में इसके पीछे कुछ दोहराई जाने वाली वजहें होती हैं.
जल्दी-जल्दी खाना और हवा निगल जाना. बच्चे अक्सर खेलते-खेलते या जल्दी में खाना खा लेते हैं, जिससे साथ में हवा भी पेट में चली जाती है. यह हवा बाद में गैस बनकर पेट में हल्का दर्द या भारीपन देती है.
कब्ज. पेट साफ न होना बच्चों में पेट दर्द की सबसे बड़ी और सबसे नज़रअंदाज़ की जाने वाली वजहों में से एक है. अगर बच्चा दो तीन दिन से मल त्याग नहीं कर रहा, या मल सख्त और कम मात्रा में आ रहा है, तो दर्द की जड़ वहीं हो सकती है.
पानी कम पीना. बच्चे खेल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि प्यास लगने पर भी पानी पीना टाल देते हैं. कम पानी पाचन को धीमा करता है और पेट में भारीपन बढ़ाता है.
खाने की कोई चीज़ ठीक से न पचना. बहुत तला हुआ, बहुत मीठा, या अचानक कोई नई चीज़ खा लेना कुछ बच्चों के पेट को असहज कर देता है. दूध से बनी चीज़ें भी कुछ बच्चों को सूट नहीं करतीं.
वायरल इंफेक्शन या पेट की हल्की गड़बड़ी. मौसम बदलने पर या किसी और बच्चे से संक्रमण फैलने पर पेट में हल्की गड़बड़ी, दस्त या उल्टी के साथ दर्द होना सामान्य है. यह आमतौर पर एक दो दिन में अपने आप ठीक हो जाता है.
तनाव और घबराहट. यह वजह अक्सर नज़रअंदाज़ होती है, लेकिन असली है. परीक्षा का डर, स्कूल में किसी बात की चिंता, या घर में कुछ नया बदलाव, ये सब बच्चों में पेट दर्द के रूप में सामने आ सकते हैं, क्योंकि बच्चों का पेट और दिमाग का रिश्ता बड़ों जितना ही गहरा होता है.
घर पर पहले क्या करें, कौन से तरीके मदद करते हैं
अगर बच्चा सामान्य दिख रहा है, खेल रहा है, बुखार नहीं है, और दर्द हल्का है, तो घर पर कुछ आसान तरीके आमतौर पर राहत देते हैं.
पेट पर हल्की मालिश. नाभि के आसपास गोलाई में, बहुत हल्के हाथ से, धीरे धीरे मालिश करना गैस को आगे बढ़ने में मदद करता है. दबाव बहुत ज़्यादा नहीं होना चाहिए, और अगर बच्चा दर्द से कसमसाए तो रुक जाएं.
गुनगुनी सिकाई. एक हल्का गर्म कपड़ा या गुनगुने पानी से भरी बोतल, तौलिये में लपेटकर, पेट पर कुछ मिनट रखना मांसपेशियों को ढीला करता है और आराम देता है. पानी बहुत गर्म न हो, यह ध्यान रखना ज़रूरी है.
आराम से लिटाना. बच्चे को करवट में या पीठ के बल आराम से लिटाएं, पेट पर किसी तरह का दबाव न पड़े. कई बार सिर्फ लेटकर आराम करने से ही गैस धीरे धीरे निकल जाती है और दर्द कम हो जाता है.
थोड़ा थोड़ा गुनगुना पानी. एक साथ ज़्यादा पानी पिलाने के बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में बार बार दें. इससे पेट पर बोझ नहीं पड़ता और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती.
बच्चे का पेट दर्द देखना किसी भी घर में चिंता की सबसे आम वजहों में से एक है, और यह जानना कि कब घर पर संभालना है और कब डॉक्टर के पास जाना है, अकेले समझना मुश्किल लग सकता है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में परिवार की रोज़ की दिनचर्या, खाने की आदतें और पानी पीने जैसी छोटी चीज़ों को याद रखना आसान बनाते हैं, ताकि ऐसी छोटी परेशानियां कम बार लौटें. SuperLiving डाउनलोड करें
थोड़ी देर टहलना या हल्की हलचल. अगर बच्चा ठीक महसूस कर रहा है तो कमरे में थोड़ा चलना फिरना भी गैस को आगे बढ़ने में मदद करता है. ज़्यादा दौड़भाग से बचें, सिर्फ हल्की हलचल काफी है.
खाने में क्या दें, किन चीज़ों से थोड़ी देर बचें
पेट दर्द के दौरान सही खाना बहुत बड़ा फर्क डालता है. भारी खाना शरीर पर और बोझ डालता है, जबकि सही हल्का खाना पाचन को आराम देता है.
क्या दें. सादी खिचड़ी, मूंग की दाल का पानी, उबले केले, सादा दलिया, और नारियल पानी या ओआरएस जैसा घोल थोड़ी थोड़ी मात्रा में. यह सब पेट पर हल्के होते हैं और शरीर को ज़रूरी नमक और पानी भी देते हैं.
क्या टालें. तला हुआ खाना, बहुत मसालेदार चीज़ें, पैकेट वाले स्नैक्स, ज़्यादा मीठा, और कार्बोनेटेड ड्रिंक कुछ घंटों के लिए पूरी तरह टाल दें. अगर दूध से बनी चीज़ें दर्द के दौरान सूट नहीं कर रही हैं तो उन्हें भी थोड़ी देर रोक सकते हैं.
खाने का तरीका भी मायने रखता है. एक बार में बहुत ज़्यादा खाने के बजाय थोड़ा थोड़ा और बार बार खाना पेट पर कम बोझ डालता है. बच्चे को जल्दी में निगलने के बजाय आराम से चबा चबाकर खाने की आदत डालना लंबे समय में भी फायदेमंद है.
कब्ज से राहत के लिए. अगर दर्द की जड़ कब्ज लग रही है, तो पानी बढ़ाना, फल जैसे पपीता और नाशपाती, और हरी सब्ज़ियां रोज़ की थाली में शामिल करना मदद करता है. यह बदलाव एक दिन में नहीं दिखता, कुछ दिनों तक लगातार रखना ज़रूरी है.