ज़्यादा चाय कॉफी पीने के नुकसान: कितने कप ठीक हैं और आदत कैसे कम करें
छोटा जवाब
चाय और कॉफी अपने आप में बुरी नहीं हैं. सीमित मात्रा में ये सतर्कता बढ़ाती हैं, थकान थोड़ी देर के लिए दूर करती हैं और बहुत से लोगों के लिए दिन का सबसे सुकून भरा पल होती हैं. दिक्कत तब शुरू होती है जब कप गिनती से बाहर हो जाते हैं.
ज़्यादातर स्वस्थ वयस्कों के लिए दिन भर में लगभग 400 मिलीग्राम कैफीन तक को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है. यह मोटे तौर पर 3 से 4 कप कॉफी या 6 से 8 छोटे कप घर वाली चाय के बराबर है. इससे ज़्यादा, या शाम के बाद पी गई चाय कॉफी, कई लोगों में नींद खराब करती है, एसिडिटी बढ़ाती है, दिल की धड़कन तेज़ करती है, घबराहट बढ़ाती है और खाने से आयरन सोखने में रुकावट डालती है. अच्छी खबर यह है कि आदत को पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं. सही समय, सही मात्रा और धीरे धीरे कटौती से ज़्यादातर नुकसान अपने आप कम हो जाते हैं.
चाय और कॉफी में असल में कितना कैफीन होता है
कैफीन की मात्रा पत्ती, बनाने के तरीके और कप के आकार पर बहुत निर्भर करती है, इसलिए नीचे दी गई संख्याएं सिर्फ मोटा अंदाज़ा हैं:
घर वाली दूध की चाय (एक छोटा कप, लगभग 100 से 120 मिलीलीटर): करीब 30 से 50 मिलीग्राम. जितनी देर उबालेंगे और जितनी पत्ती डालेंगे, उतना ज़्यादा.
कड़क या दो बार उबली चाय: करीब 50 से 70 मिलीग्राम.
ग्रीन टी (एक कप): करीब 25 से 45 मिलीग्राम.
फिल्टर या ब्रू कॉफी (एक कप, लगभग 150 मिलीलीटर): करीब 80 से 120 मिलीग्राम.
इंस्टेंट कॉफी (एक चम्मच): करीब 60 से 80 मिलीग्राम.
कोल्ड ड्रिंक (एक कैन): करीब 30 से 40 मिलीग्राम.
एनर्जी ड्रिंक (एक कैन): करीब 80 से 150 मिलीग्राम, कुछ में इससे भी ज़्यादा.
यहां ज़्यादातर लोग एक गलती करते हैं. वे सिर्फ चाय के कप गिनते हैं और बाकी को भूल जाते हैं. सुबह दो कप चाय, दफ्तर में एक कॉफी, दोपहर में एक कोल्ड ड्रिंक और शाम को फिर दो कप चाय, यह सब मिलकर आसानी से 350 से 400 मिलीग्राम पार कर जाता है, और व्यक्ति को लगता है कि वह तो बस "थोड़ी सी चाय" पीता है.
ज़्यादा चाय कॉफी के 8 आम नुकसान
1. नींद पर असर. कैफीन का असर शरीर में घंटों तक रहता है. आमतौर पर पीने के 5 से 6 घंटे बाद भी उसकी लगभग आधी मात्रा शरीर में बची रहती है. यानी शाम 6 बजे की कॉफी रात 11 बजे भी आपके दिमाग को जगाए रख सकती है. कई लोग कहते हैं कि उन्हें चाय पीकर भी नींद आ जाती है. नींद आ भी जाए, तब भी गहरी नींद का हिस्सा कम हो सकता है और सुबह थकान रहती है. अगर नींद आपकी मुख्य परेशानी है, तो रात को नींद न आने के उपाय पर हमारा लेख पूरा रूटीन समझाता है.
2. एसिडिटी और पेट में जलन. चाय और कॉफी दोनों पेट में एसिड बढ़ा सकती हैं और खाने की नली के निचले हिस्से की मांसपेशी को ढीला कर सकती हैं, जिससे एसिड ऊपर आता है. खाली पेट बेड टी, कड़क चाय, और तले हुए नाश्ते के साथ चाय, यह तीनों मिलकर जलन, खट्टी डकार और पेट फूलने को बढ़ाते हैं.
3. घबराहट और बेचैनी. ज़्यादा कैफीन शरीर के तनाव वाले हार्मोन को बढ़ा सकता है. इसका असर होता है हाथ कांपना, मन बेचैन रहना, बात बात पर चिड़चिड़ापन और अचानक घबराहट. जिन लोगों को पहले से चिंता या घबराहट की समस्या है, उनमें छोटी मात्रा भी लक्षण बढ़ा सकती है.
4. दिल की धड़कन तेज़ होना. कई लोगों को चौथे पांचवें कप के बाद दिल ज़ोर से या तेज़ धड़कता महसूस होता है. कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर भी थोड़ी देर के लिए बढ़ जाता है. जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर या दिल की धड़कन से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें अपनी सीमा डॉक्टर से तय करवानी चाहिए.
5. आयरन सोखने में रुकावट. चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन जैसे तत्व खाने से आयरन सोखने में रुकावट डालते हैं, खास तौर पर दाल, साग और अनाज वाले आयरन को. भारत में बहुत लोग खाने के ठीक बाद चाय पीते हैं, और उनमें से कई की थाली में आयरन पहले से कम होता है. लंबे समय में यह आदत थकान और खून की कमी में एक कारण बन सकती है.
6. पानी कम पीना. कप भर चाय से प्यास कुछ देर के लिए दब जाती है. जो लोग दिन भर चाय पर चलते हैं, वे अक्सर पानी बहुत कम पीते हैं. नतीजा होता है सिर दर्द, कब्ज, गहरे रंग का पेशाब और दोपहर की सुस्ती, जिसे फिर एक और कप चाय से ठीक करने की कोशिश होती है.
7. चीनी और खाली कैलोरी. यह नुकसान कैफीन का नहीं, चाय के साथ आने वाली चीज़ों का है. एक कप में दो चम्मच चीनी, दिन में छह कप, यानी 12 चम्मच चीनी सिर्फ चाय से. ऊपर से हर कप के साथ दो बिस्कुट, नमकीन या मठरी. वजन, शुगर और दांत, तीनों पर इसका असर पड़ता है, और ज़्यादातर लोग इसे कभी गिनते ही नहीं.
8. निर्भरता और छोड़ने पर सिर दर्द. रोज़ कैफीन लेने वाला शरीर उसका आदी हो जाता है. सुबह की चाय में देर हुई तो सिर भारी, ध्यान न लगना और चिड़चिड़ापन. यह इस बात का संकेत है कि शरीर अब कैफीन के बिना सामान्य महसूस नहीं कर पा रहा.
जानते सब हैं, कप फिर भी कम नहीं होते. चाय की आदत अक्सर थकान, तनाव, बोरियत और दफ्तर के रूटीन से जुड़ी होती है, इसलिए सिर्फ "कम पियो" कहने से काम नहीं चलता. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या देखकर यह समझने में मदद करते हैं कि आपके कप कब और क्यों बढ़ते हैं, और फिर छोटे, निभाने लायक बदलाव तय करते हैं. SuperLiving डाउनलोड करें