बहुत से लोग स्ट्रेच मार्क्स को देखकर घबरा जाते हैं, खासकर जब वे पहली बार पेट, जांघ, कमर या सीने के आसपास दिखते हैं। शुरुआत में ये हल्के गुलाबी, लाल या बैंगनी रंग की महीन रेखाओं जैसे दिखते हैं, और समय के साथ सफेद या चांदी जैसे हो जाते हैं। सबसे पहली बात यह समझनी चाहिए कि यह कोई बीमारी नहीं है, और हर दूसरे व्यक्ति के शरीर पर कहीं न कहीं ये निशान मौजूद हैं, चाहे प्रेगनेंसी, बढ़ती उम्र या जिम में मांसपेशी बढ़ाने की वजह से।
इस गाइड में हम समझेंगे कि स्ट्रेच मार्क्स असल में बनते कैसे हैं, किन लोगों में इनकी संभावना ज़्यादा होती है, कौन से घरेलू उपाय सच में त्वचा की मदद करते हैं, और कब डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से मिलना ज़रूरी हो जाता है। कहीं भी यहां कोई जादुई इलाज नहीं बताया जाएगा, क्योंकि वह सच नहीं है।
स्ट्रेच मार्क्स असल में बनते कैसे हैं
त्वचा की सबसे बाहरी परत के नीचे एक परत होती है जिसमें कोलेजन और इलास्टिन नाम के फाइबर होते हैं। इन्हीं फाइबर की वजह से त्वचा खिंचने पर अपनी जगह वापस आ जाती है, ठीक रबर बैंड की तरह।
जब शरीर बहुत तेज़ी से बदलता है, जैसे प्रेगनेंसी में पेट का तेज़ी से बढ़ना, किशोरावस्था में अचानक लंबाई बढ़ना, तेज़ी से वजन बढ़ना या जिम में तेज़ी से मांसपेशी बनना, तो त्वचा को उसी रफ्तार से खिंचना पड़ता है। अगर यह खिंचाव इतना तेज़ हो कि कोलेजन और इलास्टिन फाइबर उस रफ्तार को झेल न पाएं, तो वे जगह जगह से टूट जाते हैं। यही टूटन त्वचा पर महीन रेखाओं के रूप में दिखती है, जिन्हें हम स्ट्रेच मार्क्स कहते हैं।
शुरुआत में ये रेखाएं लाल, गुलाबी या बैंगनी दिखती हैं क्योंकि खून की नलियां त्वचा की सतह के करीब आ जाती हैं। महीनों बाद रंग फीका पड़कर सफेद या चांदी जैसा हो जाता है, क्योंकि वहां अब सामान्य त्वचा की जगह एक तरह का निशान ऊतक बन चुका होता है।
किन लोगों में स्ट्रेच मार्क्स की संभावना ज़्यादा होती है
प्रेगनेंसी। यह सबसे आम कारण है। पेट कुछ ही महीनों में जिस रफ्तार से बढ़ता है, उसे झेलना त्वचा के लिए आसान नहीं होता, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में।
किशोरावस्था की तेज़ी से बढ़त। लड़के और लड़कियां दोनों में, जब कद या वजन कुछ महीनों में तेज़ी से बढ़ता है, पीठ, जांघ और कमर पर हल्के निशान आम हैं।
तेज़ी से वजन बढ़ना या घटना। जब शरीर का वजन थोड़े समय में काफी बदलता है, त्वचा को उतनी ही तेज़ी से एडजस्ट करना पड़ता है।
जिम में तेज़ी से मांसपेशी बढ़ाना। कंधे, बांह और जांघ पर तेज़ी से मांसपेशी बनाने की कोशिश करने वालों में वहां निशान दिखना असामान्य नहीं है।
पारिवारिक इतिहास। अगर मां या पिता की त्वचा पर स्ट्रेच मार्क्स रहे हैं, तो बच्चों में भी संभावना ज़्यादा रहती है, क्योंकि त्वचा की लचक काफी हद तक जेनेटिक होती है।
कुछ हार्मोनल स्थितियां। कुछ मामलों में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ने से त्वचा की लचक कमज़ोर पड़ जाती है, जिससे कम खिंचाव पर भी निशान बन सकते हैं। अगर निशान अचानक बहुत गहरे बैंगनी रंग के और बिना साफ वजह के आ रहे हों, तो यह जांच कराने लायक संकेत है।
घरेलू उपाय जो सच में मदद करते हैं
यहां एक ईमानदार बात शुरू में ही समझ लेना ज़रूरी है। कोई भी घरेलू उपाय बने हुए निशान को पूरी तरह मिटा नहीं सकता। इनका असली काम त्वचा को नरम रखना, नमी बनाए रखना और खुजली या खिंचाव का एहसास कम करना है, साथ ही नए और हल्के निशानों के रंग को थोड़ा हल्का करने में मदद करना है।
नारियल तेल या बादाम का तेल। हल्के गुनगुने तेल से रोज़ पेट, जांघ और कमर पर गोलाई में मालिश करना त्वचा को नरम रखता है और रक्त संचार बढ़ाता है। रात को सोने से पहले लगाना सबसे अच्छा रहता है क्योंकि तब त्वचा को पूरी रात नमी सोखने का समय मिलता है।
एलोवेरा यानी ग्वारपाठे का ताज़ा gel। इसमें त्वचा को ठंडक और नमी देने वाले गुण होते हैं। ताज़ी पत्ती से निकाला गया gel हल्की खुजली वाली त्वचा पर आराम पहुंचा सकता है, खासकर प्रेगनेंसी के दौरान जब पेट की त्वचा में खिंचाव के साथ खुजली भी होती है।
कोकोआ बटर या शिया बटर। ये गाढ़े और नमी बनाए रखने वाले होते हैं, इसलिए खिंचती हुई त्वचा पर सुरक्षा परत जैसा काम करते हैं। नहाने के तुरंत बाद, जब त्वचा हल्की नम हो, तब लगाना सबसे असरदार रहता है।
विटामिन ई तेल की कुछ बूंदें। इसे नारियल या बादाम के तेल में मिलाकर लगाना बेहतर रहता है, सीधे गाढ़ा विटामिन ई तेल कई बार जलन कर सकता है। यह कोलेजन की मरम्मत में मदद करने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है।
हल्की मालिश की आदत। तेल या क्रीम कोई भी हो, असली फायदा मालिश की हरकत से भी आता है। गोलाई में हल्के दबाव से की गई मालिश उस हिस्से में रक्त संचार बढ़ाती है, जो त्वचा की मरम्मत में मदद करता है।
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नए और पुराने स्ट्रेच मार्क्स में फर्क समझना ज़रूरी है
घरेलू उपायों से उम्मीद कितनी रखनी चाहिए, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि निशान कितने पुराने हैं।
नए निशान, जो अभी भी लाल, गुलाबी या बैंगनी रंग के हैं, उन पर नियमित देखभाल का असर सबसे ज़्यादा दिखता है। इस दौर में त्वचा सक्रिय रूप से ठीक हो रही होती है, इसलिए मालिश, नमी और अच्छा खानपान रंग हल्का करने और खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं।
पुराने निशान, जो सफेद या चांदी जैसे रंग के हो चुके हैं, वे असल में एक तरह का स्थायी निशान ऊतक होते हैं। यहां घरेलू उपायों से त्वचा की बनावट नरम हो सकती है, लेकिन सफेद रंग और महीन रेखा का पूरी तरह गायब होना मुश्किल है। अगर निशान परेशान करते हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट के पास क्लिनिकल विकल्प मौजूद हैं, लेकिन घर पर कुछ भी करना नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बस बहुत ज़्यादा उम्मीद न रखें।