मुंहासों के दाग धब्बे घरेलू तरीके से कैसे हटाएं, सच्चाई और सही तरीका
छोटा जवाब
पिंपल तो हफ्ते भर में चला गया, पर उसकी जगह जो काला या लाल निशान रह गया, वह महीनों तक आईने में दिखता रहता है। यह परेशानी लगभग हर उस व्यक्ति की है जिसे कभी मुंहासे हुए हों, और इसके साथ ही आती है सलाहों की भरमार, कोई नींबू लगाने को कहता है, कोई बेकिंग सोडा।
सच्चाई इससे थोड़ी बारीक है। हल्के, रंग वाले दाग समय, धूप से बचाव और सौम्य देखभाल से खुद फीके पड़ते हैं। लेकिन जो निशान गड्ढेनुमा हैं, यानी त्वचा की बनावट ही बदल चुकी है, वे अकेले घरेलू उपाय से नहीं भरते और वहां त्वचा विशेषज्ञ की मदद चाहिए होती है। यह गाइड दोनों तरह के दाग को अलग अलग समझाएगी।
दाग और निशान में फर्क, यह समझना सबसे पहला कदम है
ज़्यादातर लोग हर तरह के निशान को एक ही श्रेणी में रख देते हैं, पर असल में इनके बीच बड़ा फर्क है, और यही फर्क तय करता है कि कौन सा उपाय काम करेगा।
रंग वाला दाग, यानी post inflammatory mark. यहां त्वचा की सतह सपाट रहती है, बस रंग गहरा भूरा या हल्का लाल हो जाता है, उंगली फिराने पर कोई गड्ढा महसूस नहीं होता। यह त्वचा की सूजन के बाद बना अस्थायी रंग है, और समय के साथ, खासकर धूप से बचाव के साथ, अपने आप हल्का पड़ता है।
गड्ढेनुमा निशान, यानी असली scarring. यहां त्वचा की गहरी परत को नुकसान पहुंच चुका होता है, इसलिए सतह पर एक छोटा गड्ढा या धंसाव रह जाता है जो उंगली से महसूस होता है। ऐसे निशान अपने आप भरने का इंतज़ार करते रहना अक्सर सालों की निराशा में बदल जाता है।
अगर आपका दाग सिर्फ रंग का है, तो धैर्य और सही आदतें काफी हैं। अगर वह गड्ढेनुमा है, तो घरेलू नुस्खों में समय जाया करने की जगह सीधे विशेषज्ञ की राय लेना बेहतर है।
दाग धब्बे बनते क्यों हैं
पिंपल के ठीक होने की प्रक्रिया में त्वचा एक तरह की मरम्मत करती है। जहां सूजन हल्की और कम समय की होती है, वहां त्वचा आसानी से बिना निशान के ठीक हो जाती है। जहां सूजन गहरी, लंबी या बार बार दोहराई जाती है, वहां मरम्मत का तरीका बिगड़ जाता है, और यही गड़बड़ रंग के दाग या गड्ढे के रूप में दिखती है।
कुछ चीज़ें इस प्रक्रिया को सीधे बिगाड़ती हैं। पिंपल को दबाना या फोड़ना सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि इससे सूजन आसपास फैल जाती है और गहरी परत तक नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। बार बार एक ही जगह मुंहासे आना भी निशान गहरा करता है, क्योंकि त्वचा को ठीक होने का पूरा मौका नहीं मिलता। धूप में बिना बचाव के रहना रंग के दाग को गहरा कर देता है, क्योंकि UV किरणें उस जगह ज़्यादा melanin बनाने का संकेत देती हैं। और त्वचा को बार बार छेड़ना, जैसे कड़ा scrub करना या नाखूनों से खुजलाना, ठीक हो रही त्वचा को दोबारा चोट पहुंचाता है।
कुछ लोगों की त्वचा स्वभाव से ही ज़्यादा निशान छोड़ती है, इसका मतलब यह नहीं कि उपाय बेकार हैं, बस उम्मीद और समय realistic रखना ज़रूरी है।
कौन से घरेलू उपाय सच में मदद करते हैं
अब उस सवाल पर आते हैं जो सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। सच यह है कि घरेलू उपाय रंग वाले हल्के और नए दागों पर धीरे धीरे थोड़ा फर्क ला सकते हैं। ये चमत्कार नहीं करते, पर सही तरीके से और लगातार किए जाएं तो बेकार भी नहीं।
रोज़ का sunscreen, सबसे असरदार आदत. यह किसी भी घरेलू नुस्खे से ज़्यादा फर्क डालता है। रोज़ सुबह SPF 30 या उससे ऊपर वाला sunscreen लगाना, चाहे धूप दिख रही हो या नहीं, नए दाग को गहरा होने से रोकता है। बिना इसके बाकी हर उपाय आधा रह जाता है।
गहरा और भरपूर moisturizing. जब त्वचा की सुरक्षा परत मज़बूत रहती है, तो वह तेज़ी से खुद को ठीक करती है। हल्का moisturizer दिन में दो बार लगाना मरम्मत की प्रक्रिया को सहारा देता है।
एलोवेरा और शहद जैसे soothing तत्व. ताज़ा एलोवेरा gel और शुद्ध शहद त्वचा को ठंडक देते हैं। ये किसी दाग को जादू से मिटाते नहीं, पर irritation कम करके त्वचा को ठीक होने का बेहतर मौका देते हैं।
हल्दी बेसन, कम मात्रा में. हफ्ते में एक दो बार पतली परत काफी है। लगाने के तुरंत बाद तेज़ धूप में जाने से बचें, वरना फायदे की जगह जलन हो सकती है।
त्वचा को छूना और छेड़ना बंद करना. यह किसी क्रीम से ज़्यादा असरदार आदत है। जितना कम आप अपने दाग को छूते या खुजलाते हैं, उतनी तेज़ी से त्वचा अपने आप ठीक होने का काम कर पाती है।
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कौन से उपाय सिर्फ मिथक हैं और उल्टा नुकसान करते हैं
पिंपल के दागों के मामले में सबसे ज़्यादा नुकसान अक्सर उपाय की कमी से नहीं, गलत उपायों से होता है।
सीधे नींबू का रस लगाना. नींबू का acid त्वचा का प्राकृतिक pH बिगाड़ता है। इसके बाद धूप में निकलने पर दाग हल्का होने की जगह उल्टा गहरा हो सकता है।
बेकिंग सोडा या टूथपेस्ट लगाना. ये दोनों त्वचा के लिए नहीं बने। इनकी तेज़ी त्वचा को रूखा और लाल कर देती है, और बार बार इस्तेमाल से जलन का चक्र बन जाता है।
हर हफ्ते नया product आज़माना. त्वचा को किसी भी चीज़ पर react करने में समय लगता है। लगातार products बदलते रहने से त्वचा भ्रमित और चिड़चिड़ी रहती है।
दाग को नाखूनों से खुजलाना या रगड़कर मिटाने की कोशिश करना. यह ठीक हो रही त्वचा को दोबारा चोट पहुंचाता है और रंग के दाग को गड्ढेनुमा निशान में बदल सकता है, जो सबसे बुरा नतीजा है।