शराब छोड़ने के बाद नींद क्यों नहीं आती: कारण, कितना समय लगता है और क्या मदद करता है

SuperLiving Expert Team·

रात के दो बज रहे हैं. आपने शराब छोड़े दस दिन हो गए हैं. आपको लगा था कि अब शरीर हल्का होगा और नींद गहरी आएगी, पर हो उल्टा रहा है. आंख बंद करते ही दिमाग दौड़ने लगता है, करवटें बदलते बदलते सुबह हो जाती है, और मन में एक ही बात आती है कि बस एक पैग ले लूं तो नींद आ जाएगी.

अगर आप इस दौर से गुज़र रहे हैं तो पहले यह जान लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं और आपका फैसला गलत नहीं है. शराब छोड़ने के बाद नींद बिगड़ना बहुत आम है, और यह अक्सर इस बात का संकेत होता है कि शरीर खुद को दोबारा संभाल रहा है. इस लेख में हम सीधी भाषा में समझेंगे कि ऐसा क्यों होता है, यह कितने दिन चलता है, रात में क्या करना काम आता है और कब डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है.

छोटा जवाब

शराब दिमाग को सुस्त करके नींद जैसा असर देती है. लंबे समय तक पीने पर दिमाग उसी सहारे पर सोने का आदी हो जाता है. जब शराब बंद होती है तो दिमाग कुछ समय तक ज़रूरत से ज़्यादा जागा हुआ रहता है, इसलिए नींद नहीं आती, बार बार टूटती है और सपने तेज़ हो जाते हैं.

बहुत से लोगों में सबसे मुश्किल रातें पहले हफ्ते में होती हैं और दो से चार हफ्तों में सुधार दिखने लगता है. ज़्यादा और लंबे समय तक पीने वालों में पूरी तरह ठीक होने में कुछ महीने लग सकते हैं. रोज़ एक तय समय पर उठना, दिन की रोशनी, शाम की चाय कॉफी घटाना और बिस्तर से जुड़ी कुछ आदतें इसमें सबसे ज़्यादा मदद करती हैं.

पीकर जो नींद आती थी, वह असल में कैसी थी

बहुत लोग कहते हैं कि शराब से तो लेटते ही नींद आ जाती थी. यह बात सच है, लेकिन अधूरी है. शराब से नींद जल्दी आती है, अच्छी नहीं आती.

शराब पीने के बाद रात का पहला हिस्सा भारी और बेहोशी जैसा होता है. जैसे जैसे शरीर शराब को तोड़ता है, रात का दूसरा हिस्सा बिगड़ने लगता है. नींद हल्की हो जाती है, आप बार बार जागते हैं, पेशाब के लिए उठते हैं, और सपनों वाली नींद भी दबी रहती है. यही सपनों वाली नींद याददाश्त और मूड को संभालने में काम आती है.

इसीलिए पीने वाले लोग अक्सर आठ घंटे बिस्तर पर रहकर भी थके हुए उठते हैं. यानी शराब ने आपको अच्छी नींद कभी दी ही नहीं थी. उसने बस नींद में जाने का रास्ता छोटा किया था. अब वह रास्ता बंद है, इसलिए फर्क ज़्यादा महसूस हो रहा है.

शराब छोड़ने के बाद नींद क्यों बिगड़ती है

दिमाग का ब्रेक और एक्सीलरेटर बिगड़ जाता है. शराब दिमाग के शांत करने वाले सिस्टम को बढ़ाती है और जगाने वाले सिस्टम को दबाती है. रोज़ पीने पर दिमाग इस दबाव के हिसाब से खुद को बदल लेता है. शराब हटते ही जगाने वाला सिस्टम तेज़ रह जाता है. इसे ऐसे समझिए जैसे गाड़ी का ब्रेक अचानक हट गया हो और एक्सीलरेटर दबा रह गया हो.

सपनों वाली नींद वापस ज़ोर से आती है. सालों से दबी हुई यह नींद अब भरपाई करती है. इसी वजह से सपने बहुत साफ, लंबे और कभी कभी डरावने लगते हैं, और इनसे नींद टूट भी जाती है.

शरीर की घड़ी गड़बड़ होती है. देर रात तक पीना, देर से उठना और खाने का कोई तय समय न होना शरीर की अंदरूनी घड़ी को बिगाड़ देता है. उसे दोबारा सेट होने में समय लगता है.

मन की बेचैनी खुलकर सामने आती है. बहुत से लोग तनाव, उदासी या अकेलेपन को शराब से दबाते हैं. शराब हटते ही वही बातें रात की खामोशी में सामने आ जाती हैं. कई बार समस्या नींद की नहीं, उन विचारों की होती है जिन्हें अब तक दबाया गया था.

नींद का डर खुद नींद रोकने लगता है. दो तीन खराब रातों के बाद बिस्तर देखते ही चिंता होने लगती है कि आज भी नींद नहीं आएगी. यही चिंता शरीर को जगाए रखती है. यह चक्र टूट सकता है, और आगे के तरीके इसी के लिए हैं.

नींद ठीक होने में कितना समय लगता है

हर व्यक्ति की रफ्तार अलग होती है. यह पीने की मात्रा, कितने सालों से पी रहे थे, उम्र, तनाव और सेहत पर निर्भर करता है. फिर भी आम तौर पर तस्वीर कुछ ऐसी रहती है:

| समय | आम तौर पर क्या होता है | |---|---| | पहले 1 से 3 दिन | सबसे कठिन रातें, बेचैनी, पसीना, बहुत कम नींद | | 4 से 7 दिन | शरीर के लक्षण घटने लगते हैं, नींद अब भी टूटी हुई | | दूसरा से चौथा हफ्ता | कई लोगों की नींद लंबी होने लगती है, सपने अब भी तेज़ | | एक से तीन महीने | नींद काफी बेहतर, कुछ रातें फिर भी हल्की | | तीन महीने के बाद | ज़्यादा और लंबे समय तक पीने वालों में छोटी मोटी दिक्कत कुछ समय और रह सकती है |

एक ज़रूरी बात. सुधार सीधी रेखा में नहीं होता. तीन अच्छी रातों के बाद एक खराब रात आ सकती है, और इसका मतलब यह नहीं कि आप वापस शुरुआत पर पहुंच गए हैं. शरीर में बाकी क्या बदलता है, यह जानना हो तो शराब छोड़ने के बाद शरीर में हफ्ते दर हफ्ते आने वाले बदलाव पढ़ सकते हैं.

सबसे मुश्किल पल अक्सर रात के होते हैं, और तब साथ की ज़रूरत सबसे ज़्यादा होती है. SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी में आपकी बात सुनते हैं और क्रेविंग, नींद और रोज़ की दिनचर्या पर छोटे छोटे कदम तय करने में मदद करते हैं. ऐप डाउनलोड करें

यह सब खुद करने की ज़रूरत नहीं है

SuperLiving पर 20+ expert coaches आपकी थाली के हिसाब से प्लान बनाते हैं. शुरुआत फ्री.

फ्री में शुरू करें

दिन में क्या करें ताकि रात आसान हो

अच्छी नींद की तैयारी रात को नहीं, सुबह से शुरू होती है.

रोज़ एक ही समय पर उठिए. रात कैसी भी गई हो, उठने का समय मत बदलिए. यह अकेली आदत शरीर की घड़ी को सबसे तेज़ी से सेट करती है.

सुबह की धूप लीजिए. उठने के एक घंटे के अंदर 15 से 20 मिनट बाहर टहलिए. दिन की रोशनी दिमाग को बताती है कि कब जागना है और कब सोना है.

शरीर को थकाइए. रोज़ 30 मिनट तेज़ चलना, साइकिल या हल्का योग नींद को गहरा करने में मदद करता है. बस सोने से तीन घंटे पहले तक कसरत खत्म कर लीजिए.

दोपहर के बाद चाय कॉफी बंद कीजिए. शराब छोड़ने पर बहुत लोग चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक बढ़ा देते हैं. कैफीन शरीर में कई घंटे रहता है, इसलिए दोपहर दो बजे के बाद इसे छोड़ दीजिए. सिगरेट और तंबाकू भी शरीर को जगाए रखते हैं.

खाना समय पर खाइए. रात का खाना सोने से दो से तीन घंटे पहले और हल्का रखिए. खाली पेट सोने से भी बचिए, क्योंकि भूख बेचैनी और क्रेविंग दोनों बढ़ाती है.

लंबी दोपहर की नींद छोड़िए. बहुत ज़रूरी हो तो तीन बजे से पहले बीस से तीस मिनट काफी हैं.

सोने से पहले और रात में क्या करें

वही समय, जो पहले पीने का था, उसे नया काम दीजिए. अगर आप रोज़ रात नौ बजे पीते थे, तो वह घंटा सबसे खतरनाक है. उस समय गर्म दूध या बिना कैफीन वाली कोई चीज़, टहलना, किसी से बात करना या नहाना तय कर लीजिए. क्रेविंग से निपटने के और तरीके शराब कैसे छोड़ें वाले लेख में मिलेंगे.

एक घंटा पहले रोशनी और मोबाइल कम कीजिए. हल्की रोशनी रखिए और फोन को बिस्तर से दूर चार्ज कीजिए.

मन का बोझ कागज़ पर उतारिए. सोने से पहले एक कॉपी में कल के तीन काम और जो बात परेशान कर रही है, लिख दीजिए. दिमाग को भरोसा मिलता है कि बात कहीं दर्ज है और अभी उसे दोहराने की ज़रूरत नहीं है.

धीमी सांस लीजिए. चार गिनती तक सांस अंदर, छह गिनती तक बाहर. पांच मिनट ऐसा करने से शरीर की घबराहट धीमी होने लगती है.

बीस मिनट का नियम अपनाइए. अगर लगभग बीस मिनट में नींद न आए तो बिस्तर से उठ जाइए. दूसरे कमरे में हल्की रोशनी में कोई शांत काम कीजिए, और नींद आने पर ही लौटिए. घड़ी मत देखिए. इससे दिमाग बिस्तर को जागने और चिंता से नहीं, नींद से जोड़ना सीखता है. सोने की बाकी आदतों के लिए रात को नींद नहीं आती तो क्या करें भी काम आएगा.

खराब रात का हिसाब मत लगाइए. एक या दो रात कम सोने से आपका कोई बड़ा नुकसान नहीं होता. थकान होगी, पर आप अगला दिन निकाल लेंगे. यह बात खुद से कहना भी चिंता को हल्का करता है.

इन गलतियों से बचिए

  • नींद के लिए "बस एक पैग" लेना. नींद न आना दोबारा शुरू करने की बड़ी वजहों में से एक है. एक रात की राहत अगली कई रातें खराब करती है.
  • किसी की दी हुई नींद की गोली खाना. बिना डॉक्टर की सलाह ऐसी दवाएं नई आदत और खतरा दोनों बन सकती हैं.
  • दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना. इससे शरीर की घड़ी और बिगड़ती है.
  • देर तक सोकर रात की कमी पूरी करना. यह अगली रात को और मुश्किल बनाता है.
  • अकेले सब कुछ झेलना. घर के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताइए कि रातें मुश्किल चल रही हैं.

कब डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है

यह हिस्सा सबसे ज़रूरी है. अगर आप लंबे समय से रोज़ ज़्यादा पीते थे, तो शराब अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में छोड़ने का फैसला डॉक्टर की निगरानी में लेना चाहिए.

तुरंत अस्पताल जाइए अगर ये लक्षण दिखें:

  • हाथ या शरीर बहुत ज़्यादा कांपना
  • तेज़ बुखार, बहुत पसीना या दिल की तेज़ धड़कन
  • उलझन, समय और जगह का पता न चलना
  • ऐसी चीज़ें दिखना या सुनाई देना जो वहां नहीं हैं
  • दौरा पड़ना

इनके अलावा डॉक्टर से तब मिलिए जब तीन से चार हफ्ते बाद भी नींद बहुत खराब रहे, ज़ोर से खर्राटे आएं या सोते समय सांस रुकती लगे, या उदासी और घबराहट बढ़ती जाए. लंबी अनिद्रा के लिए नींद की खास थेरेपी भी होती है, जिसके बारे में डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक बता सकते हैं. अगर खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं तो उसी समय किसी अपने को बताइए और तुरंत मदद लीजिए.

मिलाकर बात यह है

शराब छोड़ने के बाद नींद न आना यह नहीं बताता कि आपका शरीर बिना शराब के नहीं चल सकता. यह बताता है कि दिमाग अब अपने दम पर सोना दोबारा सीख रहा है. इसमें समय लगता है, कुछ रातें खराब होंगी, और फिर भी ज़्यादातर लोगों की नींद धीरे धीरे बेहतर होती है.

आज रात के लिए बस एक काम चुनिए: कल सुबह का उठने का समय तय कर लीजिए और उस पर टिकिए. अगर इस सफर में रोज़ किसी से बात करके आगे बढ़ना चाहें, तो SuperLiving के कोच आपके साथ छोटे कदम तय कर सकते हैं.

SuperLiving डाउनलोड करें और कोच से बात करें


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शराब छोड़ने के बाद नींद ठीक होने में कितना समय लगता है? बहुत से लोगों को दो से चार हफ्तों में नींद में साफ सुधार दिखने लगता है. जो लोग सालों से रोज़ ज़्यादा पीते रहे हैं, उनकी नींद को पूरी तरह संभलने में कुछ महीने या उससे भी ज़्यादा समय लग सकता है.

क्या नींद के लिए थोड़ी सी शराब पी सकते हैं? इससे बचना ही बेहतर है. एक पैग से उस रात नींद जल्दी आ सकती है, लेकिन दिमाग का सुधार वहीं रुक जाता है और अगली रातें फिर मुश्किल हो जाती हैं.

शराब छोड़ने के बाद इतने अजीब और डरावने सपने क्यों आते हैं? शराब सपनों वाली नींद को दबाती है. पीना बंद करते ही दिमाग उस कमी की भरपाई करता है, इसलिए सपने ज़्यादा और तेज़ लगते हैं. ज़्यादातर लोगों में यह कुछ हफ्तों में कम होने लगता है.

रात भर नींद न आए तो क्या अगले दिन दिन में सो जाना चाहिए? लंबी दोपहर की नींद से बचिए. बहुत थकान हो तो तीन बजे से पहले बीस से तीस मिनट की झपकी काफी है, और सुबह उठने का समय वही रखिए.

क्या शराब छोड़ने के बाद नींद की गोली लेनी चाहिए? अपने आप या किसी के कहने पर नींद की गोली शुरू मत कीजिए. नींद की समस्या बनी रहे तो डॉक्टर को बताइए कि आपने शराब कब और कितनी छोड़ी है.

शराब छोड़ने के बाद नींद न आने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? तीन से चार हफ्ते बाद भी नींद बहुत खराब हो, या उदासी और घबराहट बढ़ रही हो, तो डॉक्टर से मिलिए. बहुत कंपकंपी, उलझन, भ्रम या दौरा इमरजेंसी है.

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है. अगर आप लंबे समय से रोज़ ज़्यादा शराब पीते रहे हैं तो उसे अचानक बंद करने से पहले डॉक्टर से बात कीजिए. कंपकंपी, उलझन, भ्रम, तेज़ बुखार या दौरे जैसे लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाइए.

SuperLiving

अपना डाइट प्लान 2 मिनट में बनाएं

घर का खाना खाकर वजन कम करें. 20+ expert coaches से हिंदी में बात करें, जब चाहें. शुरुआत फ्री, उसके बाद ₹199 प्रति महीना.

फ्री में शुरू करें

10 लाख+ डाउनलोड, Google Play पर उपलब्ध

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शराब छोड़ने के बाद नींद ठीक होने में कितना समय लगता है?+

बहुत से लोगों को दो से चार हफ्तों में नींद में साफ सुधार दिखने लगता है. जो लोग सालों से रोज़ ज़्यादा पीते रहे हैं, उनकी नींद को पूरी तरह संभलने में कुछ महीने या उससे भी ज़्यादा समय लग सकता है. यह समय पीने की मात्रा, उम्र, तनाव और दिनचर्या पर निर्भर करता है.

क्या नींद के लिए थोड़ी सी शराब पी सकते हैं?+

इससे बचना ही बेहतर है. एक पैग से उस रात नींद जल्दी आ सकती है, लेकिन दिमाग का सुधार वहीं रुक जाता है और अगली रातें फिर मुश्किल हो जाती हैं. नींद न आना दोबारा पीने की सबसे आम वजहों में से एक है, इसलिए इस रात के लिए कोई और योजना पहले से बना लीजिए.

शराब छोड़ने के बाद इतने अजीब और डरावने सपने क्यों आते हैं?+

शराब सपनों वाली नींद को दबाती है. पीना बंद करते ही दिमाग उस कमी की भरपाई करता है, इसलिए सपने ज़्यादा, तेज़ और कई बार डरावने लगते हैं. बहुत से लोग सपने में शराब पीते हुए भी खुद को देखते हैं. यह आम बात है और ज़्यादातर लोगों में कुछ हफ्तों में कम होने लगती है.

रात भर नींद न आए तो क्या अगले दिन दिन में सो जाना चाहिए?+

लंबी दोपहर की नींद से बचिए, क्योंकि उससे रात की नींद और दूर चली जाती है. बहुत थकान हो तो दोपहर तीन बजे से पहले बीस से तीस मिनट की झपकी ले सकते हैं. सुबह उठने का समय वही रखिए, भले ही रात खराब गई हो.

क्या शराब छोड़ने के बाद नींद की गोली लेनी चाहिए?+

अपने आप या किसी के कहने पर नींद की गोली शुरू मत कीजिए. कुछ दवाएं शराब छोड़ रहे व्यक्ति में नई निर्भरता बना सकती हैं. अगर नींद की समस्या बनी रहे तो डॉक्टर को बताइए कि आपने शराब कब और कितनी छोड़ी है, ताकि वे आपके हिसाब से सही रास्ता चुन सकें.

शराब छोड़ने के बाद नींद न आने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?+

अगर तीन से चार हफ्ते बाद भी नींद बहुत खराब है, या उदासी और घबराहट बढ़ रही है, तो डॉक्टर से मिलिए. हाथ बहुत कांपना, तेज़ पसीना, उलझन, ऐसी चीज़ें दिखना जो वहां नहीं हैं, या दौरा पड़ना इमरजेंसी है. ऐसे में तुरंत अस्पताल जाइए.

आगे पढ़ें

नशा छोड़ें पर सभी 11 आर्टिकल देखें →
← सभी articles देखें