हिचकी अचानक शुरू होती है, कुछ मिनट परेशान करती है, और ज़्यादातर बार खुद ही चली भी जाती है। फिर भी जब यह मीटिंग के बीच, खाने की टेबल पर, या किसी ज़रूरी बातचीत के दौरान आती है, तो हर कोई एक ही सवाल पूछता है, इसे रोकें कैसे।
अच्छी बात यह है कि हिचकी लगभग हमेशा एक बिल्कुल सामान्य, बिना किसी नुकसान वाली शारीरिक प्रतिक्रिया है। यह डायफ्राम नाम की मांसपेशी के अचानक सिकुड़ने से होती है, और ज़्यादातर बार कुछ मिनटों में अपने आप या किसी छोटे घरेलू उपाय से शांत हो जाती है। दिक्कत सिर्फ तब होती है जब यह बार-बार आए या बहुत लंबे समय तक बनी रहे।
इस article में हम बात करेंगे कि हिचकी आती क्यों है, कौन से घरेलू उपाय सच में तुरंत असर करते हैं, हिचकी के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं, बच्चों और बड़ों की हिचकी में क्या फर्क है, और कब इसे नज़रअंदाज़ न करके डॉक्टर से मिलना ज़रूरी हो जाता है।
हिचकी आती क्यों है?
हिचकी के पीछे की मशीनरी सुनने में जितनी अजीब लगती है, समझने में उतनी ही आसान है। सीने और पेट के बीच एक बड़ी, चपटी मांसपेशी होती है जिसे डायफ्राम कहते हैं, और यही मांसपेशी सांस लेने में मुख्य भूमिका निभाती है। जब यह किसी वजह से अचानक और बेकाबू तरीके से सिकुड़ जाती है, तो उसी पल आवाज़ की नली का ऊपरी हिस्सा भी तुरंत बंद हो जाता है। यही अचानक बंद होना वह जानी-पहचानी "हिच" जैसी आवाज़ पैदा करता है।
सबसे आम trigger है जल्दी-जल्दी खाना या ज़रूरत से ज़्यादा खा लेना। जब पेट अचानक भर जाता है, तो वह डायफ्राम पर सीधा दबाव डालता है, और यह दबाव हिचकी को शुरू कर देता है। इसी तरह carbonated cold drinks पीने से पेट में हवा भर जाती है, जो वही असर करती है।
तापमान का अचानक बदलना भी एक जाना-पहचाना कारण है। बहुत ठंडी चीज़ पीने के फौरन बाद कुछ गरम खा लेना, या इसका उल्टा, कई लोगों में हिचकी ट्रिगर कर देता है। तेज़ मसालेदार खाना, बहुत ज़्यादा शराब या तंबाकू का इस्तेमाल, और खाते-पीते समय बहुत ज़्यादा बात करना, इन सबमें हवा निगलने की मात्रा बढ़ जाती है, और यह भी हिचकी का एक सामान्य रास्ता है।
इसके अलावा भावनात्मक बदलाव भी असर डालते हैं। अचानक तेज़ हंसी, घबराहट, ज़्यादा excitement, या तनाव, यह सब सांस लेने के rhythm को थोड़ी देर के लिए बिगाड़ देते हैं, और उसी बिगड़े हुए rhythm में डायफ्राम की यह बेकाबू सिकुड़न शुरू हो जाती है। ज़्यादातर मामलों में यह सब कुछ मिनटों में शांत हो जाता है और इसे किसी बीमारी की तरह देखने की ज़रूरत नहीं होती।
घरेलू उपाय जो सच में असर करते हैं
हिचकी रोकने के लिए दुनिया भर में सैकड़ों घरेलू तरीके बताए जाते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे हैं जिनके पीछे एक साफ logic है और जो ज़्यादातर लोगों पर काम करते हैं।
सबसे भरोसेमंद तरीका है धीरे-धीरे पानी के छोटे-छोटे घूंट पीना, बिना रुके, लगातार दस से पंद्रह सेकंड तक। इससे गले और डायफ्राम के बीच का rhythm टूटता है, जो हिचकी को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होता है। कुछ लोगों को उल्टी दिशा से पानी पीना, यानी गिलास के दूर वाले किनारे से थोड़ा आगे झुककर पीना, ज़्यादा असरदार लगता है।
थोड़ी देर के लिए सांस रोकना भी एक जाना-पहचाना और असरदार तरीका है। गहरी सांस लीजिए, कुछ सेकंड के लिए रोकिए, और फिर धीरे-धीरे छोड़िए। इसे दो-तीन बार दोहराया जा सकता है। इससे खून में carbon dioxide का स्तर थोड़ा बदलता है, और यही बदलाव डायफ्राम की सिकुड़न को शांत करने में मदद करता है।
आगे झुककर घुटनों को छाती के पास लाना पेट पर हल्का दबाव डालता है, जो कई लोगों में हिचकी को रोक देता है। यह उतना ही सादा है जितना सुनने में लगता है, लेकिन इसका असर surprisingly अच्छा होता है।
थोड़ी चीनी या शहद जीभ पर रखकर धीरे-धीरे घोलना एक और पुराना घरेलू नुस्खा है। माना जाता है कि इसका हल्का सा खट्टा-मीठा स्वाद गले की नसों को एक अलग signal भेजता है, जो हिचकी के rhythm को तोड़ने में मदद करता है।
कान के नरम हिस्से को हल्के से कुछ सेकंड दबाना, या ठंडे पानी से कुल्ला करना, यह दोनों भी कई घरों में आज़माए जाने वाले तरीके हैं। इनका कोई नुकसान नहीं है, इसलिए इन्हें आज़माने में हर्ज नहीं, बस ध्यान रहे कि यह जबरदस्ती या तेज़ी से न किया जाए।
एक बात याद रखने लायक है, कोई एक तरीका हर व्यक्ति और हर बार एक जैसा काम नहीं करता। शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है, इसलिए दो-तीन उपाय बदल-बदल कर आज़माना सबसे practical तरीका है।
हिचकी के दौरान क्या करें और क्या न करें
जब हिचकी आ रही हो, तो घबराने के बजाय कुछ सीधी और सादी बातें ध्यान में रखना ज़्यादा मदद करता है।
क्या करें: शांत रहिए, धीरे और गहरी सांस लीजिए, और पानी के छोटे घूंट पीते रहिए। अगर आप खाना खा रहे थे, तो खाने की स्पीड धीमी कर लीजिए और कुछ देर के लिए रुक जाइए। अगर हिचकी बच्चे को आई है, तो उसे सीधा पकड़कर पीठ पर हल्के से थपथपाना और डकार दिलाना अक्सर काफी होता है।
क्या न करें: बहुत तेज़ी से एक साथ बहुत ज़्यादा पानी न पिएं, इससे उल्टा असहजता बढ़ सकती है। सांस रोकने को ज़बरदस्ती लंबा न खींचें, यह चक्कर या असहजता पैदा कर सकता है। किसी को डराकर या अचानक चौंकाकर हिचकी रोकने की कोशिश भी हमेशा सुरक्षित नहीं होती, खास तौर पर बच्चों, बुज़ुर्गों या दिल की किसी स्थिति वाले लोगों के साथ इससे बचना ही बेहतर है।
अगर आपको बार-बार खाने के बाद हिचकी की शिकायत रहती है, तो इसका एक हिस्सा सीधे digestion से भी जुड़ा हो सकता है। इस मामले में गैस और ब्लोटिंग के घरेलू उपाय पढ़ना उपयोगी रहेगा, क्योंकि पेट में फंसी हवा और हिचकी का ट्रिगर अक्सर एक जैसा ही होता है।