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चेहरे की रंगत निखारने के घरेलू उपाय: डाइट, आदतें और 4 हफ्ते का प्लान

SuperLiving Expert Team·

चेहरे की रंगत निखारने के घरेलू उपाय: डाइट, आदतें और 4 हफ्ते का प्लान

छोटा जवाब

चेहरे की रंगत का फीका या असमान दिखना ज़्यादातर तीन वजहों से होता है: धूप से हुई टैनिंग, त्वचा पर जमी मरी हुई कोशिकाओं की परत, और नींद, पानी और खाने में लंबे समय से चली आ रही कमी। इन तीनों को ठीक करने के उपाय घर पर मौजूद हैं और महंगे नहीं हैं। सबसे ज़्यादा असर चार चीज़ों का होता है: रोज़ धूप से बचाव, हल्की सफाई और मॉइस्चराइज़र वाला सीधा रूटीन, हफ्ते में एक या दो बार बहुत हल्की स्क्रबिंग, और डाइट में प्रोटीन, विटामिन सी और पानी की मात्रा ठीक करना। साथ में यह समझना भी उतना ही ज़रूरी है कि रंगत निखरने का मतलब त्वचा का साफ, समान और स्वस्थ दिखना है, न कि आपका प्राकृतिक रंग बदल जाना, क्योंकि वह जीन से तय होता है और उसे कोई उपाय बदल नहीं सकता।

ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी और जीवनशैली से जुड़े सुझावों के लिए है और किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। त्वचा की रंगत में अचानक बदलाव, तेज़ी से बढ़ती झाइयां, लगातार बनी रहने वाली जलन या ऐसे दाग जो ठीक नहीं हो रहे, इनके पीछे कोई ऐसी स्वास्थ्य स्थिति हो सकती है जिसकी जांच ज़रूरी है। कृपया ऐसी स्थिति में योग्य डॉक्टर या त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। किसी भी नए घरेलू पैक को पहली बार हाथ की त्वचा पर टेस्ट करके ही चेहरे पर लगाएं।

रंगत असल में बनती कैसे है

त्वचा का रंग मेलानिन नाम के एक रंगद्रव्य से तय होता है, जो त्वचा की सबसे निचली परत में बनता है। हर व्यक्ति में यह अलग मात्रा में बनता है और यह पूरी तरह जीन पर निर्भर करता है। मेलानिन कोई खराबी नहीं है, बल्कि यह त्वचा की सुरक्षा प्रणाली है, क्योंकि यह सूरज की यूवी किरणों को सोखकर नीचे की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।

तो फिर वही चेहरा कुछ महीनों में पहले से ज़्यादा फीका या दबा हुआ क्यों लगने लगता है। इसकी वजह मेलानिन का बुनियादी स्तर नहीं, बल्कि तीन बदलाव हैं। पहला, धूप में रहने पर शरीर बचाव के लिए ज़्यादा मेलानिन बनाता है और त्वचा गहरी दिखने लगती है, जिसे हम टैनिंग कहते हैं। दूसरा, त्वचा की सबसे ऊपरी परत पर मरी हुई कोशिकाएं जमा हो जाती हैं, जो रोशनी को बिखेरने के बजाय सोख लेती हैं, इसलिए चेहरा बेजान और मटमैला दिखता है। तीसरा, त्वचा के भीतर नमी और खून का बहाव कम होने पर चेहरा थका हुआ और सुस्त दिखता है, जो नींद की कमी और पानी की कमी में साफ नज़र आता है।

अच्छी बात यह है कि तीनों बदलाव पलटे जा सकते हैं। बुरी बात यह है कि इनमें से कोई भी एक हफ्ते में नहीं पलटता, क्योंकि त्वचा की ऊपरी परत को खुद को पूरी तरह बदलने में लगभग चार हफ्ते लगते हैं। इसीलिए किसी भी उपाय को कम से कम एक महीना देना पड़ता है, और तीन दिन में नतीजा दिखाने का दावा करने वाली किसी भी चीज़ पर शक करना चाहिए।

रंगत फीकी लगने के असली कारण

धूप और टैनिंग

भारत में यह पहले नंबर का कारण है और अकेला सबसे बड़ा भी। रोज़ बीस मिनट की स्कूटर की सवारी, छत पर कपड़े सुखाना, दोपहर में बाज़ार जाना, यह सब मिलकर साल भर में लगातार यूवी एक्सपोज़र बनाते हैं। इसका असर हाथ और गर्दन के रंग की तुलना पेट या बांह के ऊपरी हिस्से से करने पर तुरंत दिख जाता है। यह फर्क ही बताता है कि कितनी टैनिंग जमा हुई है।

मरी हुई कोशिकाओं की परत

नहाने और चेहरा धोने से यह परत पूरी तरह नहीं हटती। जब यह मोटी हो जाती है तो त्वचा खुरदरी महसूस होती है, मेकअप ठीक से नहीं बैठता, और चेहरा सूखा और मटमैला दिखता है। हफ्ते में एक या दो बार की हल्की सफाई इसे संभाल लेती है, लेकिन रोज़ रगड़ना उल्टा नुकसान करता है।

नींद की कमी

कम नींद का असर चेहरे पर सबसे जल्दी दिखता है। नींद के दौरान ही त्वचा की मरम्मत सबसे तेज़ होती है और खून का बहाव बेहतर होता है। लगातार पांच छह घंटे की नींद लेने वालों में आंखों के नीचे कालापन, चेहरे पर सूजन और रंगत का फीकापन साफ नज़र आता है। नींद ठीक करना किसी भी क्रीम से सस्ता और ज़्यादा असरदार कदम है। नींद न आने की दिक्कत हो तो हमारा विस्तृत गाइड रात को नींद नहीं आती तो क्या करें पूरा रूटीन देता है।

पानी और खानपान

शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा सबसे पहले असर दिखाती है, क्योंकि शरीर ज़रूरी अंगों को प्राथमिकता देता है। इसी तरह जिनकी डाइट में लंबे समय से प्रोटीन, फल और सब्ज़ियां कम हैं, उनकी त्वचा में मरम्मत की क्षमता घट जाती है। पानी की भूमिका पर विस्तार से पढ़ने के लिए पानी पीने के फायदे देख सकते हैं।

तनाव और हार्मोन

लंबे तनाव में शरीर के तनाव वाले हार्मोन बढ़ते हैं, जो त्वचा में सूजन और तेल दोनों बढ़ा सकते हैं। महिलाओं में मासिक चक्र, गर्भावस्था और हार्मोन से जुड़ी स्थितियों में पिगमेंटेशन का पैटर्न बदलता है। यह हिस्सा घरेलू उपायों के दायरे से बाहर है और इसकी जांच डॉक्टर से करानी चाहिए।

घर पर काम आने वाले उपाय

सफाई का सही तरीका

दिन में दो बार, सुबह और रात, हल्के क्लेंज़र से चेहरा धोइए। ज़्यादा नहीं। बार बार धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल हट जाता है और शरीर जवाब में और तेल बनाता है, जिससे चेहरा ज़्यादा चिपचिपा और बाद में ज़्यादा बेजान दिखता है। गरम पानी की जगह गुनगुना या ठंडा पानी इस्तेमाल कीजिए और तौलिये से रगड़ने के बजाय थपथपाकर सुखाइए।

रात को चेहरा धोना दिन में धोने से ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि दिन भर की धूल, प्रदूषण और तेल त्वचा पर बैठा रहता है। यह एक आदत अकेले चार हफ्तों में साफ फर्क दिखाती है।

हफ्ते में एक या दो बार हल्की स्क्रबिंग

बेसन, ओट्स को दरदरा पीसकर, या चावल का बारीक आटा, इनमें से किसी एक को दही या कच्चे दूध में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाइए। इसे चेहरे पर लगाकर बहुत हल्के गोल हाथों से एक मिनट घुमाइए और धो लीजिए। दबाव नहीं डालना है। चीनी और नमक जैसे बड़े दानों वाली चीज़ें चेहरे पर बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए, वे बारीक खरोंचें छोड़ती हैं।

रसोई से बनने वाले तीन आसान पैक

पहला, दही और बेसन। दो चम्मच बेसन में एक चम्मच दही और चुटकी भर हल्दी मिलाइए। पंद्रह मिनट लगाकर धो लीजिए। यह हल्की सफाई और नमी दोनों देता है और तैलीय त्वचा पर अच्छा बैठता है।

दूसरा, आलू या टमाटर का रस। कच्चे आलू या टमाटर के रस को रुई से चेहरे पर लगाकर दस मिनट बाद धो लीजिए। यह टैनिंग वाले हिस्सों पर हल्का असर दिखाता है और सस्ता है। असर धीमा है, इसे रोज़ करना पड़ता है।

तीसरा, शहद और दूध। एक चम्मच शहद में एक चम्मच कच्चा दूध मिलाकर पंद्रह मिनट लगाइए। सूखी त्वचा के लिए यह सबसे आरामदायक विकल्प है।

इनसे उम्मीद क्या रखनी है, यह साफ रहना चाहिए। ये पैक त्वचा को साफ, नरम और थोड़ा ताज़ा दिखाते हैं। गहरी झाइयों, पुराने निशानों या हार्मोन से जुड़ी पिगमेंटेशन पर इनका कोई बड़ा असर नहीं होता। घरेलू पैक और उनकी असली सीमाओं पर हमने ग्लोइंग स्किन के घरेलू उपाय में विस्तार से लिखा है।

मॉइस्चराइज़र

तैलीय त्वचा वालों को भी मॉइस्चराइज़र चाहिए, यह सबसे आम गलतफहमी है। बिना नमी के त्वचा और ज़्यादा तेल बनाती है। तैलीय त्वचा के लिए हल्का, पानी वाला मॉइस्चराइज़र और सूखी त्वचा के लिए थोड़ा गाढ़ा, यह चुनाव काफी है। चेहरा धोने के तुरंत बाद, जब त्वचा हल्की नम हो, तब लगाना सबसे असरदार है।

सनस्क्रीन, सबसे बड़ा कदम

अगर इस पूरे लेख से सिर्फ एक चीज़ अपनानी हो तो यह है। रोज़ सुबह, घर से निकलने से बीस मिनट पहले, चौड़े दायरे वाली एसपीएफ तीस या उससे ऊपर की सनस्क्रीन लगाइए। मात्रा कम मत रखिए, चेहरे और गर्दन के लिए लगभग आधा चम्मच चाहिए। बाहर ज़्यादा समय रहना हो तो हर तीन घंटे में दोबारा लगाइए। बादल वाले दिन और खिड़की के पास बैठकर काम करने पर भी लगाना है।

यह अकेला कदम नई टैनिंग रोकता है, जिससे बाकी सारे उपायों को असर दिखाने का मौका मिलता है। इसके बिना बाकी सब कुछ करना एक बाल्टी में पानी भरने जैसा है जिसमें नीचे छेद हो।

बदलाव जानकारी से नहीं, रोज़ निभाने से आता है। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी त्वचा, आपके खाने और आपकी दिनचर्या के हिसाब से छोटे छोटे कदम तय करते हैं, नींद और पानी जैसी बुनियादी चीज़ों को ट्रैक करना आसान रखते हैं, और उन दिनों साथ रहते हैं जब रूटीन टूटने लगता है। SuperLiving डाउनलोड करें

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डाइट का रोल, जिसे सबसे कम गंभीरता से लिया जाता है

त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है और वह उसी कच्चे माल से बनती है जो आप खाते हैं। यहां असर धीमा है लेकिन टिकाऊ है।

प्रोटीन। त्वचा की मरम्मत और कोलेजन दोनों के लिए प्रोटीन बुनियादी ज़रूरत है। ज़्यादातर भारतीय डाइट में यह कम रहता है, खासकर शाकाहारी घरों में। दाल, राजमा, छोले, पनीर, दही, सोयाबीन, मूंगफली, अंडा और चिकन, इनमें से जो आपके खाने में फिट हो, उसे हर मील में थोड़ा शामिल कीजिए। शाकाहारी विकल्पों की पूरी सूची प्रोटीन के शाकाहारी स्रोत में मिल जाएगी।

विटामिन सी। कोलेजन बनने के लिए यह ज़रूरी है और यह एक एंटीऑक्सीडेंट भी है। आंवला, अमरूद, संतरा, नींबू, शिमला मिर्च और टमाटर सबसे आसान स्रोत हैं। खास बात यह है कि विटामिन सी को खाने में लेना चेहरे पर नींबू रगड़ने से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और असरदार है।

हेल्दी फैट। त्वचा की नमी की परत फैट से बनती है। मुट्ठी भर भीगे बादाम या अखरोट, अलसी के बीज, और खाने में सही मात्रा में तेल या घी, यह त्वचा के सूखेपन में साफ फर्क डालते हैं। बहुत कम फैट वाली डाइट लंबे समय तक चलाने पर त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है।

पानी। दिन में लगभग दो से ढाई लीटर ज़्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त है। इससे बहुत ज़्यादा पीने का कोई अतिरिक्त फायदा त्वचा को नहीं होता। सुबह उठते ही एक गिलास और हर मील से पहले एक गिलास, यह आदत बनाना सबसे आसान तरीका है।

क्या घटाना है। बहुत ज़्यादा चीनी, मीठे पेय और मैदे वाली चीज़ें कुछ लोगों में मुहांसे और सुस्त रंगत दोनों बढ़ाती हैं। तली चीज़ों की मात्रा भी देखिए। इन्हें पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं है, बस रोज़ की जगह कभी कभी की चीज़ बना दीजिए। मीठे की तलब से जूझ रहे हों तो मीठे की क्रेविंग कैसे रोकें पढ़िए।

चार हफ्ते का आसान प्लान

पहला हफ्ता, सिर्फ बुनियाद। रोज़ रात चेहरा धोना, सुबह सनस्क्रीन, और दोनों बार मॉइस्चराइज़र। कोई पैक नहीं, कोई नया प्रोडक्ट नहीं। इस हफ्ते का काम सिर्फ यह देखना है कि त्वचा किसी चीज़ पर प्रतिक्रिया तो नहीं दे रही।

दूसरा हफ्ता, सफाई जोड़िए। पहले हफ्ते वाली तीनों आदतें जारी रखिए और हफ्ते में एक बार हल्की स्क्रबिंग जोड़िए। साथ में हर मील में थोड़ा प्रोटीन जोड़ने की कोशिश शुरू कीजिए।

तीसरा हफ्ता, नींद और पानी। सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा कीजिए और सात घंटे का लक्ष्य रखिए। पानी की बोतल सामने रखिए। इस हफ्ते हफ्ते में दो बार कोई एक घरेलू पैक जोड़ सकते हैं।

चौथा हफ्ता, आकलन। पहले दिन ली गई तस्वीर से तुलना कीजिए, वही रोशनी और वही समय रखते हुए। आईने में रोज़ देखने पर बदलाव नज़र नहीं आता, तस्वीर में आता है। अगर फर्क दिख रहा है तो यही रूटीन अगले दो महीने चलाइए। अगर बिल्कुल नहीं दिख रहा, तो अगला कदम घरेलू उपाय बढ़ाना नहीं, बल्कि त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलना है।

जो काम नहीं करता

पहला, रंग गोरा करने का दावा करने वाली क्रीम। त्वचा का बुनियादी रंग बदला नहीं जा सकता। ऐसे कई उत्पादों में ऐसे तत्व मिले होते हैं जो त्वचा को पतला और संवेदनशील बना देते हैं, और उनका असर बंद करते ही हालत पहले से खराब हो जाती है।

दूसरा, रोज़ ब्लीच या बहुत तेज़ फेशियल। ये कुछ घंटों के लिए चेहरा चमकदार दिखाते हैं और लंबे समय में त्वचा की सुरक्षा परत कमज़ोर करते हैं।

तीसरा, हर दो हफ्ते में प्रोडक्ट बदलना। त्वचा को किसी भी चीज़ पर स्थिर होने में चार से छह हफ्ते लगते हैं। लगातार बदलाव जलन की सबसे आम वजह है।

चौथा, टूथपेस्ट, बिना मिलाया नींबू, बेकिंग सोडा जैसी चीज़ें चेहरे पर। ये त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ती हैं और अक्सर जलन और नए दाग छोड़ जाती हैं।

पांचवां, सिर्फ चेहरे की देखभाल और बाकी सब वैसा ही। पांच घंटे की नींद, दिन भर चाय बिस्किट और शून्य धूप से बचाव के साथ कोई भी पैक काम नहीं करेगा।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए

अगर आठ से बारह हफ्तों की नियमित देखभाल के बाद कोई फर्क नहीं दिख रहा, अगर झाइयां या दाग तेज़ी से बढ़ रहे हैं, अगर चेहरे पर लगातार जलन, खुजली या लालपन बना हुआ है, अगर मुहांसे गहरे और दर्द वाले हैं, या अगर रंगत में बदलाव के साथ थकान, वजन में बदलाव या बालों का झड़ना भी हो रहा है, तो यह घरेलू उपायों का दायरा नहीं है। इन सबके पीछे थायराइड, पोषण की कमी, हार्मोन से जुड़ी स्थितियां या त्वचा की कोई ऐसी समस्या हो सकती है जिसका सही इलाज मौजूद है। दाग धब्बों के अलग अलग प्रकार और उनके सही तरीके समझने के लिए चेहरे के दाग धब्बे कैसे हटाएं भी पढ़िए।

मिलाकर बात यह है

चेहरे की रंगत निखारना किसी एक चमत्कारी नुस्खे का नतीजा नहीं होता। यह चार साधारण चीज़ों को लंबे समय तक निभाने का नतीजा होता है: रोज़ धूप से बचाव, हल्की और नियमित सफाई, नींद और पानी, और खाने में प्रोटीन और फल सब्ज़ियों की जगह। घरेलू पैक इनके ऊपर एक सहायक परत हैं, आधार नहीं।

और एक बात जो सबसे ज़रूरी है। लक्ष्य त्वचा को स्वस्थ, साफ और समान बनाना है, अपना प्राकृतिक रंग बदलना नहीं। जो भी चीज़ रंग बदलने का वादा करती है, वह या तो काम नहीं करती या नुकसान पहुंचाती है।

रोज़ की आदतों को निभाने वाला हिस्सा ही सबसे मुश्किल है। SuperLiving पर 20+ कोच हिंदी और हिंग्लिश में आपकी दिनचर्या, आपकी नींद और आपके खाने के हिसाब से छोटे कदम तय करते हैं, ताकि यह एक और लंबी सूची नहीं बल्कि रोज़ निभाने लायक तरीका बने।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चेहरे की रंगत निखरने में कितना समय लगता है? त्वचा की ऊपरी परत को खुद को बदलने में लगभग चार हफ्ते लगते हैं, इसलिए किसी भी आदत को कम से कम इतना समय देना पड़ता है। धूप से हुई हल्की टैनिंग तीन से छह हफ्तों में काफी हद तक उतर जाती है, बशर्ते आप रोज़ धूप से बचाव करें। लेकिन रंगत निखरने का मतलब त्वचा का साफ और स्वस्थ दिखना है, आपका प्राकृतिक रंग बदल जाना नहीं।

क्या नींबू सीधे चेहरे पर लगाना सही है? नहीं। बिना पानी मिलाए नींबू का रस बहुत अम्लीय होता है और त्वचा की सुरक्षा परत को कमज़ोर करता है, जिससे जलन और सूखापन आता है। नींबू लगाकर धूप में जाने से कुछ लोगों में उलटा कालापन भी आ सकता है। विटामिन सी का फायदा खाने से लीजिए, यानी आंवला, संतरा, अमरूद और नींबू पानी।

क्या सनस्क्रीन सच में रंगत पर फर्क डालती है? हां, और यह सबसे ज़्यादा असर वाला कदम है। रंगत का दबा हुआ और असमान दिखना ज़्यादातर धूप से हुई टैनिंग की वजह से होता है। रोज़ एसपीएफ तीस या उससे ऊपर की सनस्क्रीन नई टैनिंग रोक देती है और त्वचा को पुरानी ठीक करने का मौका देती है। बादल वाले दिन और खिड़की के पास बैठकर काम करने पर भी लगाइए।

स्क्रब कितनी बार करना चाहिए? हफ्ते में एक या ज़्यादा से ज़्यादा दो बार, बहुत हल्के हाथ से। रोज़ रगड़ने से त्वचा की सुरक्षा परत टूटती है और लालपन, सूखापन या ज़्यादा तेल निकलना शुरू हो जाता है। बड़े दानों वाले स्क्रब चेहरे पर इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। बेसन, ओट्स या चावल का बारीक आटा दही में मिलाकर एक मिनट काफी है।

डाइट का त्वचा पर कितना असर होता है? असर असली है लेकिन धीमा है। त्वचा की मरम्मत के लिए प्रोटीन, कोलेजन के लिए विटामिन सी, नमी के लिए हेल्दी फैट और सूजन कम रखने के लिए फल सब्ज़ियां चाहिए। जिनकी डाइट में लंबे समय से प्रोटीन कम है, उनकी त्वचा बेजान दिखती है। डाइट जादू नहीं है, यह वह आधार है जिस पर बाकी देखभाल टिकती है।

क्या घरेलू उपायों से झाइयां और गहरे दाग जा सकते हैं? हाल के मुहांसों के हल्के दाग समय, धूप से बचाव और नियमित देखभाल से काफी हल्के हो जाते हैं। लेकिन गहरी झाइयां, हार्मोन से जुड़ी पिगमेंटेशन और पुराने गहरे निशान घरेलू उपायों से पूरी तरह नहीं जाते। आठ से बारह हफ्तों में फर्क न दिखे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलना ही सही कदम है।

महंगे प्रोडक्ट से बेहतर नतीजे मिलते हैं क्या? ज़रूरी नहीं। हल्का क्लेंज़र, मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन, ये तीनों सस्ते दामों में भी अच्छी गुणवत्ता में मिलते हैं। महंगे प्रोडक्ट का बड़ा हिस्सा पैकेजिंग और प्रचार में जाता है। इससे कहीं ज़्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि आप एक साधारण रूटीन रोज़ निभाते हैं या नहीं।

SuperLiving जीवनशैली और वेलनेस सहायता देता है और यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। त्वचा की रंगत में अचानक बदलाव, बढ़ती झाइयां, लगातार जलन या ठीक न होने वाले दागों के लिए कृपया योग्य डॉक्टर या त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चेहरे की रंगत निखरने में कितना समय लगता है?+

त्वचा की ऊपरी परत को खुद को बदलने में लगभग चार हफ्ते लगते हैं, इसलिए किसी भी आदत का असर दिखने में कम से कम इतना समय देना पड़ता है। धूप से हुई हल्की टैनिंग तीन से छह हफ्तों में काफी हद तक अपने आप उतर जाती है, बशर्ते आप रोज़ धूप से बचाव करें। लेकिन यह समझ लेना ज़रूरी है कि रंगत निखरने का मतलब है त्वचा का साफ, समान और स्वस्थ दिखना, न कि आपकी प्राकृतिक त्वचा का रंग बदल जाना। त्वचा का बुनियादी रंग मेलानिन से तय होता है और वह जीन से आता है, उसे कोई घरेलू उपाय या क्रीम बदल नहीं सकती और ऐसा दावा करने वाली किसी भी चीज़ पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

क्या नींबू सीधे चेहरे पर लगाना सही है?+

नहीं, यह सबसे आम और सबसे नुकसानदेह घरेलू सलाह है। बिना पानी मिलाए नींबू का रस बहुत अम्लीय होता है और त्वचा की सुरक्षा परत को कमज़ोर कर देता है, जिससे जलन, लालपन और सूखापन आ सकता है। इससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि नींबू लगाने के बाद धूप में जाने से कुछ लोगों में उलटा काला पड़ना और चकत्ते हो सकते हैं। अगर विटामिन सी का फायदा चाहिए तो उसे खाने में लीजिए, यानी संतरा, आंवला, अमरूद और नींबू पानी। चेहरे पर लगाना ही हो तो नींबू को दही या शहद में अच्छी तरह मिलाकर, रात में, और सिर्फ दस मिनट के लिए, और पहली बार हाथ पर टेस्ट करके।

क्या सनस्क्रीन सच में रंगत पर फर्क डालती है?+

हां, और यह इस पूरी सूची में सबसे ज़्यादा असर वाली एक चीज़ है। रंगत का फीका, दबा हुआ और असमान दिखना ज़्यादातर मामलों में धूप से हुई टैनिंग और पिगमेंटेशन की वजह से होता है। रोज़ चौड़े दायरे वाली एसपीएफ तीस या उससे ऊपर की सनस्क्रीन लगाने से नई टैनिंग रुक जाती है और त्वचा को पुरानी को ठीक करने का मौका मिलता है। भारत में यह और भी मायने रखता है क्योंकि साल भर तेज़ धूप रहती है। बादल वाले दिन और खिड़की के पास बैठकर काम करने पर भी लगाना चाहिए, क्योंकि यूवी किरणें बादल और कांच दोनों से आंशिक रूप से निकल आती हैं।

डाइट का त्वचा पर सच में कितना असर होता है?+

असर असली है लेकिन धीमा है, इसलिए लोग इसे कम आंकते हैं। त्वचा की मरम्मत के लिए प्रोटीन चाहिए, कोलेजन बनने के लिए विटामिन सी चाहिए, नमी बनाए रखने के लिए हेल्दी फैट चाहिए और सूजन कम रखने के लिए फल और सब्ज़ियों वाले एंटीऑक्सीडेंट चाहिए। जिन लोगों की डाइट में लंबे समय से प्रोटीन कम है या जो दिन भर सिर्फ चाय, बिस्किट और मैदा वाली चीज़ें खाते हैं, उनकी त्वचा बेजान और थकी हुई दिखती है। दूसरी तरफ बहुत ज़्यादा चीनी और तली चीज़ें कुछ लोगों में मुहांसों को बढ़ाती हैं। लेकिन डाइट कोई जादू नहीं है, यह आधार है जिस पर बाकी देखभाल टिकती है।

स्क्रब कितनी बार करना चाहिए?+

हफ्ते में एक या ज़्यादा से ज़्यादा दो बार, और वह भी बहुत हल्के हाथ से। मरी हुई कोशिकाओं की परत हटने से चेहरा तुरंत साफ और चमकदार दिखता है, इसलिए लोग इसे रोज़ करने लगते हैं, और यही उल्टा पड़ता है। रोज़ रगड़ने से त्वचा की सुरक्षा परत टूट जाती है, जिससे लालपन, जलन, सूखापन और कुछ लोगों में ज़्यादा तेल निकलना शुरू हो जाता है। दरदरे कण वाले स्क्रब, खासकर बड़े दानों वाले, चेहरे पर बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। बेसन, चावल का बारीक आटा या ओट्स को दही में मिलाकर हल्के गोल हाथों से एक मिनट काफी है।

क्या सिर्फ घरेलू उपायों से दाग धब्बे और झाइयां जा सकती हैं?+

हल्के दाग जो हाल के मुहांसों के बाद बने हैं, वे समय, धूप से बचाव और नियमित देखभाल से काफी हल्के हो जाते हैं। लेकिन गहरी झाइयां, मेलाज़्मा जैसी स्थितियां, हार्मोन से जुड़ी पिगमेंटेशन और पुराने गहरे निशान घरेलू उपायों से पूरी तरह नहीं जाते। इन पर हफ्तों तक घरेलू नुस्खे आज़माते रहना समय और त्वचा दोनों का नुकसान है। अगर आठ से बारह हफ्तों की नियमित देखभाल के बाद भी कोई फर्क न दिखे, या दाग बढ़ रहे हों, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलना सही कदम है, क्योंकि सही कारण पता चलने पर इलाज कहीं तेज़ और सुरक्षित होता है।

महंगे प्रोडक्ट लेने से बेहतर नतीजे मिलते हैं क्या?+

ज़रूरी नहीं। रंगत के लिए जो तीन चीज़ें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं, वे हैं हल्का क्लेंज़र, मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन, और तीनों सस्ते दामों में भी अच्छी गुणवत्ता में मिलती हैं। महंगे प्रोडक्ट का बड़ा हिस्सा पैकेजिंग और प्रचार में जाता है, न कि असरदार तत्वों में। इससे कहीं ज़्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि आप एक साधारण रूटीन को रोज़ निभाते हैं या नहीं। हर दो हफ्ते में नया प्रोडक्ट बदलते रहना त्वचा को स्थिर होने का मौका ही नहीं देता और अक्सर जलन की वजह बन जाता है।

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